spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडउत्तराखंड बोर्ड परीक्षा 2026 में दो लाख से अधिक परीक्षार्थी सख्त निगरानी...

उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा 2026 में दो लाख से अधिक परीक्षार्थी सख्त निगरानी में देंगे हाईस्कूल इंटर परीक्षा

1261 परीक्षा केंद्रों पर कड़े इंतजाम, नकल पर पूरी तरह रोक, संवेदनशील केंद्रों पर विशेष निगरानी, 21 फरवरी से शुरू होंगी मुख्य परीक्षाएं, पारदर्शी और शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर शिक्षा परिषद पूरी तरह तैयार।

रामनगर। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की ओर से आयोजित की जाने वाली हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं को लेकर इस वर्ष अभूतपूर्व तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में राज्यभर से कुल दो लाख 16 हजार 121 परीक्षार्थी शामिल होने जा रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि शिक्षा व्यवस्था के प्रति विद्यार्थियों और अभिभावकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। परिषद के सचिव विनोद प्रसाद सिमल्टी ने परीक्षा संबंधी आंकड़ों और व्यवस्थाओं की जानकारी साझा करते हुए बताया कि हाईस्कूल स्तर पर इस बार एक लाख 12 हजार 679 छात्र-छात्राएं परीक्षा में बैठेंगे, जबकि इंटरमीडिएट परीक्षा में एक लाख तीन हजार 442 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं। यह संख्या राज्य के शैक्षिक ढांचे की व्यापकता और बोर्ड परीक्षा के महत्व को स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है, क्योंकि हर वर्ष लाखों विद्यार्थियों का भविष्य इन परीक्षाओं से जुड़ा होता है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो हाईस्कूल परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों में अधिकांश संख्या संस्थागत छात्रों की है। परिषद द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार हाईस्कूल स्तर पर एक लाख 10 हजार 573 छात्र-छात्राएं नियमित विद्यालयों से परीक्षा देंगे, जबकि दो हजार 106 परीक्षार्थी व्यक्तिगत श्रेणी में पंजीकृत किए गए हैं। इसी प्रकार इंटरमीडिएट परीक्षा में 99 हजार 345 विद्यार्थी संस्थागत रूप से और चार हजार 97 विद्यार्थी व्यक्तिगत परीक्षार्थी के रूप में सम्मिलित होंगे। इस तरह इंटरमीडिएट परीक्षा में कुल एक लाख तीन हजार 442 छात्र-छात्राएं अपनी योग्यता और परिश्रम की परीक्षा देंगे। शिक्षा विभाग का मानना है कि व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की भागीदारी यह दर्शाती है कि औपचारिक शिक्षा से बाहर रह चुके विद्यार्थी भी अपने शैक्षिक सपनों को पूरा करने के लिए बोर्ड परीक्षा को माध्यम बना रहे हैं।

परीक्षाओं के सुव्यवस्थित संचालन को सुनिश्चित करने के लिए उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद ने पूरे प्रदेश में व्यापक स्तर पर परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था की है। इस वर्ष राज्यभर में कुल 1261 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें 24 नए केंद्र शामिल किए गए हैं। नए परीक्षा केंद्रों के जुड़ने से दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब उन्हें परीक्षा देने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। परिषद द्वारा केंद्रों के चयन में भौगोलिक परिस्थितियों, विद्यार्थियों की संख्या और प्रशासनिक सुविधा को ध्यान में रखा गया है। परीक्षा केंद्रों की यह संख्या यह भी दर्शाती है कि बोर्ड परीक्षाओं के आयोजन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कितनी गंभीरता और व्यापक योजना बनाई गई है।

परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए संवेदनशीलता के आधार पर भी परीक्षा केंद्रों को वर्गीकृत किया गया है। परिषद के सचिव विनोद प्रसाद सिमल्टी ने बताया कि कुल 156 परीक्षा केंद्रों को संवेदनशील और छह केंद्रों को अति संवेदनशील की श्रेणी में रखा गया है। अति संवेदनशील केंद्रों में हरिद्वार जनपद के चार केंद्र, पिथौरागढ़ का एक और अल्मोड़ा का एक परीक्षा केंद्र शामिल है। इन केंद्रों पर विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या नकल की संभावना को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। प्रशासन का मानना है कि संवेदनशील केंद्रों की पहचान पहले से कर लेने से परीक्षा के दौरान किसी भी चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकेगा।

नकलविहीन परीक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस बार पहले से कहीं अधिक सख्त इंतजाम किए गए हैं। परिषद ने स्पष्ट किया है कि सभी परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, ईयरफोन और किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक सामग्री पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। परीक्षार्थियों को परीक्षा कक्ष में केवल निर्धारित सामग्री ही ले जाने की अनुमति होगी। इसके साथ ही परीक्षा केंद्रों पर तैनात निरीक्षकों और पर्यवेक्षकों को भी विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए। दूरस्थ और संवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर जिला प्रशासन का सहयोग लिया जाएगा, जिससे सुरक्षा और अनुशासन दोनों सुनिश्चित किए जा सकें।

बोर्ड परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार इस वर्ष प्रयोगात्मक परीक्षाओं और आंतरिक मूल्यांकन की प्रक्रिया भी सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराई जाएगी। परिषद द्वारा जारी कार्यक्रम के तहत 16 जनवरी 2026 से 15 फरवरी 2026 तक इंटरमीडिएट की प्रयोगात्मक परीक्षाएं, हाईस्कूल की प्रयोगात्मक परीक्षाएं, आंतरिक मूल्यांकन और प्रोजेक्ट कार्य पूरे कराए जाएंगे। इस अवधि में विद्यालयों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि सभी मूल्यांकन कार्य समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरे हों। प्रयोगात्मक परीक्षाओं को छात्रों की वास्तविक क्षमता का आकलन करने का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है, इसलिए इस चरण पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी।

मुख्य लिखित परीक्षाओं की बात करें तो उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाएं 21 फरवरी 2026 से प्रारंभ होकर 20 मार्च 2026 तक आयोजित की जाएंगी। इस लगभग एक महीने की अवधि में राज्यभर के लाखों विद्यार्थी विभिन्न विषयों की परीक्षाओं में भाग लेंगे। परिषद का कहना है कि प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, परीक्षा केंद्रों पर अनुशासन और उत्तर पुस्तिकाओं के सुरक्षित मूल्यांकन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पहले ही पूरी कर ली गई हैं। परीक्षा प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के बीच समन्वय स्थापित किया गया है। परिषद को विश्वास है कि इस वर्ष की बोर्ड परीक्षाएं अनुशासन, निष्पक्षता और पारदर्शिता का उदाहरण प्रस्तुत करेंगी।

संबंधित ख़बरें
शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!