काशीपुर। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने ‘‘हिन्दी दैनीक सहर प्रजातंत्र’’ से संवाद के दौरान अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह मामला केवल एक हत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे सत्ता, संरक्षण और सबूत मिटाने की आशंका से जुड़ी कई परतें छिपी हुई हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा नेता के रिसॉर्ट वरंतरा में कार्यरत रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी पर रात के समय “सेवा” देने का दबाव बनाया गया था, और इस शब्द के मायने सामान्य नौकरी से बिल्कुल अलग थे। अलका पाल के अनुसार “सेवा” का अर्थ था किसी विशेष व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर करना, और यह व्यक्ति इतना प्रभावशाली बताया गया कि इंकार करने का विकल्प ही नहीं छोड़ा गया। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी ने इस दबाव के आगे झुकने से मना किया, और इसी के बाद घटनाक्रम ने खौफनाक मोड़ ले लिया। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि जब एक युवती ने गलत मांग के सामने सिर झुकाने से इनकार किया, तो क्या यही उसकी हत्या का कारण बना। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला सत्ता के दुरुपयोग और महिलाओं के शोषण का भयावह उदाहरण है, जिसे दबाने की कोशिश शुरू से की गई।
अपने वक्तव्य में अलका पाल ने यह भी कहा कि अंकिता भंडारी की हत्या के आरोपी के रूप में सामने आए पुलकित आर्य, भाजपा नेता रहे विनोद आर्य के बेटे हैं, और उस समय तक विनोद आर्य पार्टी से जुड़े हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के बाद जिस तरह की प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिली, उससे संदेह और गहराता है। अलका पाल ने कहा कि सामान्यतः किसी भी गंभीर अपराध के बाद क्राइम सीन को सील किया जाता है, उसे बैरिकेड किया जाता है ताकि बाद में सबूत सुरक्षित रूप से जुटाए जा सकें। यदि जांच किसी अन्य एजेंसी को सौंपी जाए, तो उस एजेंसी के पास भी घटनास्थल का निरीक्षण करने का पूरा अवसर होना चाहिए। लेकिन इस मामले में, उनके अनुसार, नियमों और परंपराओं को ताक पर रख दिया गया। कांग्रेस नेता ने याद दिलाया कि अंकिता भंडारी की हत्या 18 सितंबर 2022 की रात को हुई थी, जबकि पुलिस ने इस पूरे मामले का खुलासा 23 सितंबर 2022 को किया। उन्होंने कहा कि इसी खुलासे की रात, लगभग बारह बजे, वरंतरा रिसॉर्ट के एक हिस्से पर बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया गया, जो अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने बुलडोजर कार्रवाई को लेकर तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर किस आधार पर और किसके आदेश से उस रिसॉर्ट के हिस्से को तोड़ा गया, जबकि मामला अभी जांच के दायरे में था। उन्होंने पूछा कि क्या यह कार्रवाई किसी अवैध निर्माण के खिलाफ सामान्य प्रशासनिक कदम था, या फिर इसके पीछे कोई और मंशा छिपी थी। अलका पाल ने कहा कि जिस स्थान को तोड़ा गया, वही कथित रूप से अपराध से जुड़ा अहम स्थल माना जा रहा था, ऐसे में वहां बुलडोजर चलाना संदेह पैदा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भविष्य में मामला किसी दूसरी जांच एजेंसी, जैसे सीबीआई, को सौंपा जाता है, तो उस एजेंसी के पास क्राइम सीन देखने और वहां से साक्ष्य जुटाने का अवसर ही नहीं बचेगा। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह कार्रवाई जानबूझकर संभावित सबूतों को नष्ट करने के लिए की गई। कांग्रेस नेता ने इस बात पर भी जोर दिया कि आरोपी पुलकित आर्य की गिरफ्तारी के तुरंत बाद ही इतनी जल्दी बुलडोजर चलाया जाना, वह भी रात के अंधेरे में, सामान्य प्रक्रिया से अलग प्रतीत होता है और यह पूरे मामले को और भी संदिग्ध बनाता है।
अलका पाल ने अपने बयान में इस तथ्य की ओर भी ध्यान दिलाया कि पुलकित आर्य के पिता विनोद आर्य को भाजपा से निष्कासित करने की कार्रवाई हत्या के लगभग चार दिन बाद की गई, जबकि उससे पहले तक वे पार्टी से जुड़े हुए थे। उन्होंने कहा कि यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब आरोपी के परिवार का सीधा संबंध सत्तारूढ़ दल से था, तब क्या उसी कारण से शुरूआती दिनों में मामले को अलग दिशा में मोड़ने की कोशिश की गई। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष ने कहा कि यदि भाजपा अपने ही नेता के रिसॉर्ट पर बुलडोजर चलवा रही थी, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि यह निर्णय किस स्तर पर लिया गया और इसके पीछे क्या वजह थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई ने न्याय की प्रक्रिया को कमजोर किया है और इससे यह संदेश गया कि प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए जल्दबाजी में फैसले लिए गए। अलका पाल ने कहा कि लोकतंत्र में कानून सभी के लिए समान होना चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा होता नहीं दिखा। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर सब कुछ पारदर्शी था, तो जांच पूरी होने से पहले ही घटनास्थल को क्यों मिटा दिया गया।
कांग्रेस महानगर अध्यक्ष ने यह भी कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सत्ता के चरित्र से जुड़ा प्रश्न बन चुका है। उन्होंने कहा कि “सेवा” जैसे शब्द का इस्तेमाल यह दर्शाता है कि किस तरह महिलाओं को वस्तु की तरह देखा जा रहा है और उन्हें प्रभावशाली लोगों की इच्छाओं के आगे झुकने के लिए मजबूर किया जा रहा है। अलका पाल ने कहा कि यह केवल उस व्यक्ति का अपराध नहीं है जिसने हत्या की, बल्कि उस पूरे तंत्र की जिम्मेदारी बनती है जिसने ऐसी मानसिकता को पनपने दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि उस समय सही तरीके से जांच होती, क्राइम सीन को सुरक्षित रखा जाता और किसी भी तरह की जल्दबाजी वाली कार्रवाई से बचा जाता, तो आज सच्चाई और स्पष्ट रूप से सामने होती। कांग्रेस नेता ने कहा कि इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि “सेवा” लेने वाले व्यक्ति कौन थे और उन्हें किसका संरक्षण प्राप्त था। उन्होंने दावा किया कि जैसे-जैसे परतें खुलेंगी, केवल अपराध करने वाला ही नहीं, बल्कि उसे संरक्षण देने वाले चेहरे भी सामने आएंगे।
अलका पाल ने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को केवल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं उठा रही है, बल्कि इसलिए उठा रही है क्योंकि यह न्याय और इंसानियत से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए हर संभव मंच पर आवाज उठाई जाएगी और जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक सवाल पूछे जाते रहेंगे। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष ने यह भी कहा कि यदि सच में किसी अन्य एजेंसी को जांच सौंपी जाती है, तो बुलडोजर कार्रवाई की भूमिका और जिम्मेदार लोगों की पहचान अपने आप सामने आ जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरू से ही “वीआईपी” को बचाने की साजिश रची गई और उसी के तहत सबूतों को कमजोर करने की कोशिश की गई। अलका पाल ने कहा कि यह समझ से परे है कि एक गंभीर अपराध के चार दिन के भीतर ही इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों की गई, जबकि सामान्य मामलों में वर्षों तक निर्माण यथावत रहते हैं। उन्होंने कहा कि यही असमानता जनता के मन में अविश्वास पैदा करती है।
अपने वक्तव्य के अंतिम हिस्से में कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने कहा कि यह मामला उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासन पर एक बड़ा सवालिया निशान है। उन्होंने कहा कि अगर वास्तव में कानून का राज है, तो फिर यह स्पष्ट होना चाहिए कि बुलडोजर किसके कहने पर चला, किसने आदेश दिया और किस उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई। अलका पाल ने कहा कि अंकिता भंडारी की हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था और आज भी लोग जवाब चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केवल आरोपी को सजा दिलाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस पूरे नेटवर्क को उजागर करना जरूरी है जिसने गलत को सही ठहराने की कोशिश की। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि समय आने पर सच्चाई सामने आएगी और तब यह साफ होगा कि केवल “सेवा” का दबाव बनाने वाला ही नहीं, बल्कि उसके पीछे खड़े संरक्षक भी कानून के कटघरे में होंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस लड़ाई को अंत तक ले जाएगी, ताकि अंकिता भंडारी जैसी किसी और बेटी को इस तरह की यातना और अन्याय का सामना न करना पड़े।



