काशीपुर। नगर निगम द्वारा लागू की गई यूज़र चार्ज व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों पर महापौर दीपक बाली ने स्पष्ट, तार्किक और तथ्यात्मक ढंग से अपनी बात रखते हुए कहा कि काशीपुर की जनता, दुकानदार और व्यापारी वर्ग हमेशा से सम्मानित रहा है और नगर निगम ने उनकी सुविधाओं और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही हर निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि शहर के अधिकांश नागरिक और छोटे दुकानदार ऐसे हैं, जिन पर पहले से जो यूज़र चार्ज लागू था, उसमें किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की गई है। आवासीय घरों पर जो पचास रुपये का यूज़र चार्ज पहले था, वही आज भी लागू है और उसी प्रकार छोटे दुकानदारों, चाहे वे जनरल मर्चेंट हों या छोटी चार्ड इवेंट से जुड़ी दुकानें, उन सभी पर भी पचास रुपये का ही शुल्क रखा गया है। महापौर ने साफ कहा कि नगर निगम ने आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों पर किसी भी तरह का अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का प्रयास नहीं किया है, बल्कि उनकी सुविधाओं को प्राथमिकता में रखा गया है।
अपने वक्तव्य में महापौर दीपक बाली ने यह भी स्पष्ट किया कि यूज़र चार्ज में जो बदलाव किया गया है, वह केवल सीमित संख्या में बड़े प्रतिष्ठानों के लिए है, जहां से प्रतिदिन अत्यधिक मात्रा में कचरा निकलता है। उन्होंने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में लगभग ग्यारह सौ ऐसे प्रतिष्ठान हैं, जिनमें होटल, बेकरी, रेस्टोरेंट और बड़े खाद्य व्यवसाय शामिल हैं। इन प्रतिष्ठानों से निकलने वाला कचरा सामान्य दुकानों की तुलना में कहीं अधिक होता है, जिसके कारण नगर निगम की कचरा उठाने वाली गाड़ियों को कई बार एक ही स्थान पर दिन में दो-दो बार जाना पड़ता है। महापौर ने कहा कि यह केवल सुविधा का मामला नहीं था, बल्कि शहर की स्वच्छता और पर्यावरण संतुलन से भी जुड़ा एक गंभीर विषय था, जिसे लंबे समय से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था। उन्होंने बताया कि नगर निगम ने इस वास्तविकता को समझते हुए ही इस वर्ग के लिए अलग व्यवस्था तैयार की है।
महापौर दीपक बाली ने इस पूरे मुद्दे की गंभीरता को समझाते हुए कहा कि समस्या केवल अधिक कचरे की नहीं थी, बल्कि उससे जुड़ी अवैध गतिविधियों की भी थी। उन्होंने बताया कि कई बड़े प्रतिष्ठान नगर निगम की व्यवस्था के अलावा निजी ट्रैक्टर-ट्रॉली या निजी गाड़ियों को कचरा उठाने के लिए रखे हुए थे। यह व्यवस्था न केवल नियमों के खिलाफ थी, बल्कि इससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था को भी नुकसान पहुंच रहा था। महापौर के अनुसार, ये निजी लोग कचरा उठाने के बाद उसे निर्धारित कूड़ा निस्तारण केंद्र तक नहीं ले जाते थे, क्योंकि वहां उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं थी। इसके बजाय वे कचरे को सड़कों के किनारे, खाली प्लॉटों या आबादी से दूर इलाकों में फेंक देते थे, जिससे गंदगी फैलती थी और नगर निगम की छवि भी खराब होती थी। उन्होंने कहा कि इस अवैध प्रणाली पर रोक लगाना नगर निगम की मजबूरी बन गई थी।
इस पृष्ठभूमि को सामने रखते हुए महापौर दीपक बाली ने बताया कि नगर निगम ने एक नई और व्यावहारिक व्यवस्था तैयार की, जिससे न केवल शहर की स्वच्छता बनी रहे बल्कि बड़े प्रतिष्ठानों को भी राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि पहले स्थिति यह थी कि ऐसे प्रतिष्ठान नगर निगम को एक हजार से पंद्रह सौ रुपये तक यूज़र चार्ज देते थे और इसके अलावा पांच से सात हजार रुपये निजी लोगों को कचरा उठाने के लिए खर्च करते थे। कुल मिलाकर यह खर्च आठ से नौ हजार रुपये तक पहुंच जाता था, फिर भी उन्हें संतोषजनक सेवा नहीं मिल रही थी और शहर में अवैध रूप से कचरा फेंका जा रहा था। महापौर ने कहा कि इस दोहरी और अव्यवस्थित प्रणाली को खत्म करने के लिए नगर निगम ने जिम्मेदारी अपने हाथ में ली और इन प्रतिष्ठानों को बेहतर, नियमित और कानूनी सुविधा देने का निर्णय लिया।
महापौर दीपक बाली ने स्पष्ट किया कि जिन लगभग ग्यारह सौ प्रतिष्ठानों के यूज़र चार्ज में वृद्धि की गई है, वह किसी मनमाने निर्णय का परिणाम नहीं है, बल्कि उनकी वास्तविक जरूरतों और खर्चों को ध्यान में रखते हुए तय की गई है। उन्होंने कहा कि यूज़र चार्ज में की गई बढ़ोतरी इस उद्देश्य से की गई है कि अब उन प्रतिष्ठानों को निजी लोगों को कचरा उठाने के लिए रखने की आवश्यकता न पड़े और वे किसी भी गैरकानूनी गतिविधि का हिस्सा न बनें। नगर निगम अब स्वयं उनके यहां से पूरा कचरा उठाने, उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने और शहर को स्वच्छ बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाएगा। महापौर ने यह भी कहा कि इस व्यवस्था से न केवल शहर को लाभ होगा, बल्कि प्रतिष्ठानों को भी एक पारदर्शी और भरोसेमंद सेवा मिलेगी, जो पहले संभव नहीं थी।
ठेला व्यापारियों को लेकर उठ रही भ्रांतियों पर प्रतिक्रिया देते हुए महापौर दीपक बाली ने कहा कि इस वर्ग को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम नहीं है और नगर निगम ने पूरी स्पष्टता के साथ यूज़र चार्ज की दरें तय की हैं। उन्होंने बताया कि गैजेट और लिखित माध्यमों के जरिए सभी श्रेणियों के यूज़र चार्ज की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई गई है, जिसमें साफ तौर पर दर्ज है कि किस श्रेणी पर कितना शुल्क लागू है। महापौर ने कहा कि ठेला व्यापारियों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला गया है और उनके लिए व्यवस्था पहले जैसी ही है। उन्होंने यह भी बताया कि नगर निगम क्षेत्र में कुल मिलाकर लगभग पैंतालीस हजार आवासीय और व्यावसायिक इकाइयां हैं, जिनमें से लगभग चवालीस हजार इकाइयों पर यूज़र चार्ज में किसी भी प्रकार की वृद्धि नहीं की गई है। केवल वही प्रतिष्ठान इस दायरे में आए हैं, जहां से अत्यधिक कचरा निकलता था और जो पहले अवैध तरीकों का सहारा ले रहे थे।
महापौर दीपक बाली ने दो टूक शब्दों में कहा कि नगर निगम का संकल्प है कि बिना किसी प्रकार का नया टैक्स लगाए अपनी आय को बढ़ाया जाए और उसी दिशा में यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि नगर निगम अपनी इस नीति पर पूरी तरह कायम है और भविष्य में भी आम जनता पर टैक्स का बोझ डालने की कोई मंशा नहीं है। महापौर ने यह भी कहा कि यदि नगर निगम यह स्वीकार कर ले कि लोग एक ओर निगम को शुल्क दें और दूसरी ओर निजी लोगों को हजारों रुपये देकर कचरा उठवाएं, तो यह नगर निगम की विफलता मानी जाएगी। इसी विफलता को दूर करने के लिए यह व्यवस्था लाई गई है, ताकि एक ही माध्यम से, कम लागत में और कानूनी तरीके से लोगों को पूरी सुविधा मिल सके।
अपने बयान के अंतिम हिस्से में महापौर दीपक बाली ने कहा कि नगर निगम ने सभी खर्चों को जोड़कर देखा और यह निष्कर्ष निकाला कि जो नई व्यवस्था लागू की गई है, वह पहले की तुलना में प्रतिष्ठानों के लिए भी सस्ती और सुविधाजनक है। उन्होंने कहा कि अब नगर निगम खुद जिम्मेदारी ले रहा है, जिससे न केवल स्वच्छता व्यवस्था सुधरेगी बल्कि शहर की सड़कों पर अवैध रूप से फेंका जाने वाला कचरा भी पूरी तरह खत्म होगा। महापौर ने भरोसा दिलाया कि काशीपुर को स्वच्छ, व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए नगर निगम हर जरूरी कदम उठाएगा और इस पूरी प्रक्रिया में जनता के हित सर्वाेपरि रहेंगे।
यूज़र चार्ज में हुई बढ़ोतरी को लेकर दबे स्वर में दुकानदारों ने अपनी बात रखते हुए संतुलित और सम्मानजनक ढंग से चिंता जताई। एक दुकानदार ने कहा कि नगर निगम द्वारा कूड़ा उठान की व्यवस्था में सुधार एक सराहनीय कदम है। आज तक जो काम पहले नहीं हो पाया, वह अब किया जा रहा है और इसमें कोई दो राय नहीं कि सफाई व्यवस्था पहले से कहीं बेहतर हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि काम की गुणवत्ता को लेकर कोई शिकायत नहीं है, बल्कि परेशानी केवल शुल्क की अचानक बढ़ी हुई राशि को लेकर है। पहले मासिक यूज़र चार्ज बहुत कम था, जिसकी शुरुआत पचास रुपए से हुई, फिर यह धीरे-धीरे बढ़कर डेढ़ सौ, दो सौ और तीन सौ रुपए तक पहुंचा, जिसे व्यापारियों ने स्वीकार भी किया।
दुकानदार ने आगे कहा कि तीन सौ रुपए मासिक शुल्क तक तो किसी को विशेष आपत्ति नहीं थी, लेकिन सीधे तीन सौ से पंद्रह सौ रुपए कर दिया जाना छोटे व्यापारियों की जेब पर भारी पड़ रहा है। एक अन्य दुकानदार ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि डेढ़ हजार रुपए प्रतिमाह देना छोटे दुकानदारों के लिए आसान नहीं है, खासकर तब जब वे खुद ही कूड़ा लेकर निगम की गाड़ियों तक पहुंचाते हैं। उनका कहना था कि वे सहयोग करना चाहते हैं, व्यवस्था सुधार में भागीदार बनना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
दोनों दुकानदारों ने विनम्र अनुरोध करते हुए कहा कि नगर निगम का काम प्रशंसनीय है और नीयत पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन दरें तय करते समय छोटे और गरीब दुकानदारों की सीमित आय को भी ध्यान में रखा जाए। महंगाई के इस दौर में रोज़मर्रा की जरूरतें पूरी करना पहले ही कठिन है, ऐसे में यूज़र चार्ज में थोड़ी रियायत दी जाए तो राहत मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि महापौर दीपक बाली व्यापारियों की व्यावहारिक कठिनाइयों को समझते हुए इस विषय पर सहानुभूतिपूर्वक पुनर्विचार करेंगे।



