काशीपुर। नववर्ष 2026 के पावन अवसर को काशीपुर में आध्यात्मिक ऊर्जा, सनातन संस्कार और सामाजिक एकता के महायज्ञ के रूप में मनाने की भव्य तैयारी की जा रही है। महिला पतंजलि योग समिति, काशीपुर की ओर से आयोजित होने जा रहे 108 अखंड सुंदरकांड पाठ और चतुर्वेद शतक महायज्ञ को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का वातावरण है। समिति की प्रमुख कमला रिखाडी ने प्रेस वार्ता के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को संस्कार, स्वास्थ्य, समरसता और एकता के सूत्र में पिरोने का संकल्प है। पूज्य योग ऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज के आशीर्वाद से 01 जनवरी 2026, गुरुवार को शिवालिक होली माउंट एकेडमी, शिवालिक नगर, निझडा, काशीपुर में यह विराट कार्यक्रम संपन्न होगा। आयोजन का उद्देश्य नववर्ष की शुरुआत आध्यात्मिक चेतना, पंचतत्वों की शुद्धि और जनकल्याण की भावना के साथ करना है, ताकि पूरा नगर सकारात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत हो सके।
समिति की ओर से बताया गया कि इस आयोजन में 108 कुटुंबीयों के लिए महायज्ञ के समान पुण्य लाभ की भावना निहित है। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 09 बजे 108 अखंड सुंदरकांड पाठ से होगा, जिसमें श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। इसके उपरांत प्रातः 10 बजे चतुर्वेद शतक महायज्ञ आयोजित किया जाएगा, जिसमें चारों वेदों का सामूहिक पाठ और यज्ञीय अनुष्ठान संपन्न कराया जाएगा। दोपहर 01 बजे सभी श्रद्धालुओं के लिए विशाल भोजन प्रसाद की व्यवस्था रखी गई है। आयोजन स्थल को भव्य पंडाल, यज्ञ कुंडों और वैदिक वातावरण से सजाया जा रहा है। समिति का कहना है कि इस आध्यात्मिक अनुष्ठान से न केवल व्यक्तिगत जीवन में शांति और सकारात्मकता आएगी, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी समरसता और सहयोग की भावना को बल मिलेगा।
प्रेस वार्ता में कमला रिखाडी ने महिला पतंजलि योग समिति की वर्षों पुरानी निष्काम सेवा यात्रा का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बीते कई वर्षों से समिति की योगिनी बहनें घर-घर जाकर लोगों को योग के माध्यम से स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर रही हैं। गांव-गांव में योग शिविर लगाकर बिना किसी शुल्क के सेवा दी जा रही है। इसी सेवा भावना को आगे बढ़ाते हुए समिति ने समाज में व्याप्त भेदभाव, वर्ग और क्षेत्रीय विभाजन को समाप्त करने के उद्देश्य से घर-घर सुंदरकांड पाठ की शुरुआत की। इस अभियान में घरेलू कामगारों से लेकर उद्योगपतियों तक सभी वर्गों के घरों में निशुल्क सुंदरकांड पाठ कराया गया। समिति का उद्देश्य केवल धार्मिक पाठ करना नहीं था, बल्कि यह संदेश देना था कि आर्थिक, भाषाई या सामाजिक भिन्नताओं के बावजूद हम सभी एक हैं और सनातन संस्कृति हम सबको जोड़ती है।
इस अखंड सुंदरकांड अभियान की शुरुआत नवरात्र से की गई थी, जिसे काशीपुर शहर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों तक विस्तार दिया गया। समिति की महिलाएं जसपुर जाकर ठाकुरद्वारा तक सुंदरकांड पाठ संपन्न कर चुकी हैं। शहर के भीतर ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों में जाकर भी इस आध्यात्मिक अभियान को आगे बढ़ाया गया। अब इसी श्रृंखला की पराकाष्ठा के रूप में 01 जनवरी 2026 को 108 कुंडीय महायज्ञ के माध्यम से इस पाठ का पुनः आयोजन किया जा रहा है। कमला रिखाडी ने बताया कि यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि संगठन और सामूहिक चेतना का प्रतीक है। यज्ञ के माध्यम से पंचतत्वों की शुद्धि होती है और जब समाज संगठित होकर एक साथ आहुतियां देता है, तो उसका प्रभाव व्यापक और दीर्घकालिक होता है।
इस विराट आयोजन में महिला शक्ति की ऐतिहासिक भूमिका भी विशेष आकर्षण का केंद्र है। कमला रिखाडी ने स्पष्ट किया कि इस महायज्ञ में वेद पाठ करने वाली आचार्य और ब्रह्मचारी बहनें होंगी। नजीबाबाद गुरुकुल से आचार्य प्रेमवता जी अपनी 11 ब्राह्मण वेदपाठी बहनों के साथ पधारेंगी, जो चारों वेदों का विधिवत पाठ करेंगी। करीब 500 मंत्रों के उच्चारण के साथ यह यज्ञ संपन्न होगा। उन्होंने कहा कि वैदिक काल में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन आधुनिक समय में कहीं न कहीं भेदभाव देखने को मिलता है। इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि महिलाएं भी वेदों की उद्घोषक हैं और संस्कृति की वाहक हैं। उत्तराखंड में यह पहला ऐसा आयोजन होगा, जिसमें यज्ञ और वेद पाठ की मुख्य भूमिका महिलाओं के हाथों में होगी, जो काशीपुर के लिए ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है।
आयोजन के व्यापक उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कमला रिखाडी ने बताया कि काशीपुर एक औद्योगिक नगर है, जहां प्रदूषण की समस्या भी बनी रहती है। इस यज्ञ में 108 किलो शुद्ध देसी घी और लगभग 200 किलो हवन सामग्री का उपयोग किया जाएगा, ताकि वातावरण की शुद्धि हो और नगर को प्रदूषण से मुक्ति की दिशा में सकारात्मक ऊर्जा मिले। उन्होंने कहा कि हम अग्नि के उपासक हैं और अग्नि को भगवान का मुख माना गया है। जब समाज मिलकर यज्ञ में आहुति देता है, तो उसका प्रभाव केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय स्तर पर भी पड़ता है। इस आयोजन के माध्यम से “सुंदर काशीपुर, स्वस्थ काशीपुर और संस्कारवान काशीपुर” की परिकल्पना को साकार करने का संकल्प लिया गया है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में कई गणमान्य महिलाओं का विशेष सहयोग प्राप्त हो रहा है, जिनमें श्रीमती रेखा जिंदल, श्रीमती साधना जिंदल, श्रीमती रेखालता अग्रवाल, श्रीमती आभा गोयल एवं श्रीमती नेहा अग्रवाल प्रमुख हैं। वहीं शिवालिक होली माउंट एकेडमी इस आयोजन की प्रायोजक भूमिका निभा रही है। समिति ने बताया कि आयोजन की तैयारियां बीते कई दिनों से चल रही हैं और भव्य पंडाल, यज्ञ कुंड और अन्य व्यवस्थाएं अंतिम चरण में हैं। अनुमान है कि इस कार्यक्रम में लगभग एक हजार से अधिक श्रद्धालु भाग लेंगे। अल्मोड़ा जिले, बिलासपुर सहित अन्य दूरस्थ क्षेत्रों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह आयोजन क्षेत्रीय नहीं बल्कि राज्यस्तरीय स्वरूप लेता नजर आ रहा है।
शिवालिक होली माउंट एकेडमी के प्रबंध निदेशक बसंत भट्ट ने प्रेस वार्ता में महिला पतंजलि योग समिति की सराहना करते हुए कहा कि कमला रिखाडी और उनकी सहयोगी बहनें पिछले सोलह वर्षों से योग और संस्कार के क्षेत्र में सक्रिय सेवा दे रही हैं। 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर स्टेडियम में होने वाला पतंजलि योग कार्यक्रम भी इनके प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने बताया कि पहले विद्यालय में सुंदरकांड पाठ का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। उसी दौरान 108 कुंडीय यज्ञ का विचार सामने आया और विद्यालय प्रबंधन ने इसे सहर्ष स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन शहर के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आएगा और मीडिया से भी अपील की कि इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए।
अंत में महिला पतंजलि योग समिति ने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे नववर्ष के इस पावन अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करें। समिति का कहना है कि भले ही सनातन पंचांग के अनुसार नववर्ष चौत्र से प्रारंभ होता हो, लेकिन जनवरी से हमारे जीवन के अधिकांश कार्य आरंभ होते हैं, इसलिए इस दिन को आध्यात्मिक संकल्प के साथ शुरू करना विशेष महत्व रखता है। उद्योगों के इस नगर में जब समाज एकजुट होकर यज्ञ में आहुति देगा, तो उसका प्रभाव दूरगामी होगा। समिति ने उद्योगपतियों और समाज के समर्थ वर्ग से भी आगे आकर ऐसे आयोजनों का नेतृत्व करने की अपील की, ताकि भविष्य में और भी बड़े स्तर पर यज्ञ और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकें। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनेगा, बल्कि सामाजिक एकता और महिला सशक्तिकरण का भी सशक्त संदेश देगा।



