रामनगर। उत्तराखंड में बहुचर्चित अंकिता हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सामाजिक और राजनीतिक माहौल में उबाल देखने को मिल रहा है। इस मामले में उर्मिला सनावर द्वारा जारी की गई ऑडियो क्लिप ने नई बहस और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऑडियो क्लिप की निष्पक्ष जांच, कथित वीआईपी भाजपा नेता दुष्यंत गौतम उर्फ गट्टू की कथित संलिप्तता की सीबीआई जांच तथा बुल्डोजर चलाकर हत्या से जुड़े साक्ष्यों को नष्ट करने वाले भाजपा नेताओं और अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर महिला एकता मंच ने 30 दिसंबर को जुलूस प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इस निर्णय के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। महिला एकता मंच का कहना है कि जब तक पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आती और दोषियों को सजा नहीं मिलती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। संगठन ने साफ शब्दों में कहा है कि यह लड़ाई केवल एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि न्याय और महिला सुरक्षा के सवाल से जुड़ी है।
महिला एकता मंच द्वारा बासीटीला में आयोजित बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की संयोजक ललिता रावत ने कहा कि कोटद्वार न्यायालय द्वारा अंकिता हत्याकांड में दिया गया फैसला अभी भी अधूरा न्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि अंकिता को कथित वीआईपी भाजपा नेता को विशेष सेवा देने के लिए दबाव में रखा गया और जब उसने इसका विरोध किया, तो उसकी हत्या कर दी गई। ललिता रावत ने कहा कि उर्मिला सनावर द्वारा जारी की गई ऑडियो क्लिप से अब भाजपा नेता दुष्यंत गौतम उर्फ गट्टू का नाम सार्वजनिक रूप से सामने आ चुका है, जिससे पूरे मामले में नए सिरे से जांच की जरूरत और भी बढ़ गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार में नैतिकता बची है तो वह इस प्रकरण की सीबीआई जांच कराए और सच्चाई को जनता के सामने लाए।
बैठक के दौरान महिला एकता मंच की सक्रिय सदस्य कौशल्या चुनियाल ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने क्षेत्र की जनता से अपील की कि वे जाति, धर्म और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर न्याय की इस लड़ाई में शामिल हों। कौशल्या चुनियाल ने कहा कि 30 दिसंबर को लखनपुर रामनगर में सुबह 11 बजे से आयोजित होने वाले जुलूस प्रदर्शन में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ’ का नारा देने वाली भाजपा सरकार आज अंकिता हत्याकांड में लिप्त अपराधी नेताओं को बचाने में लगी हुई है। उनके अनुसार यह स्थिति किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हो सकती। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दोषियों को संरक्षण देने की कोशिश की गई तो महिला एकता मंच सड़कों पर उतरकर और व्यापक आंदोलन करेगा।
इसी क्रम में संगठन ने 28 दिसंबर को होने वाले कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान भी चलाया। महिला एकता मंच की टीम ने सांवल्दे, बक्कल और बासीटीला सहित आसपास के कई गांवों में जाकर लोगों से संवाद किया और उन्हें आंदोलन के उद्देश्य से अवगत कराया। जनसंपर्क के दौरान महिलाओं और स्थानीय नागरिकों में गहरी नाराजगी देखने को मिली। लोगों ने कहा कि अंकिता हत्याकांड केवल एक अपराध नहीं, बल्कि पूरे समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाला मामला है। जनसंपर्क के माध्यम से मंच ने यह संदेश दिया कि न्याय की यह लड़ाई केवल अदालतों तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि समाज को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। ग्रामीणों ने आंदोलन में भागीदारी का भरोसा जताया और कहा कि वे न्याय के लिए एकजुट होकर खड़े रहेंगे।
बैठक और जनसंपर्क कार्यक्रम में धनवंतरी, रश्मि, प्रियंका, गीता, कमला, रजनी माया, रेखा, दीपा सहित कई महिलाएं और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इन सभी ने एक स्वर में कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा। वक्ताओं ने कहा कि यदि आज इस मामले में चुप्पी साध ली गई, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना और भी कठिन हो जाएगा। महिला एकता मंच ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा, लेकिन न्याय मिलने तक वे पीछे नहीं हटेंगे। कार्यक्रम के अंत में यह संकल्प लिया गया कि 30 दिसंबर का जुलूस प्रदर्शन एक मजबूत जनआंदोलन का रूप लेगा, जिससे सरकार और जांच एजेंसियों पर निष्पक्ष कार्रवाई का दबाव बने और अंकिता को वास्तविक न्याय मिल सके।



