काशीपुर। बहुचर्चित भूमि कब्जा विवाद को लेकर चल रही तीखी बयानबाज़ी के बीच प्रॉपर्टी क्लिनिक के संचालक शक्ति अग्रवाल ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए विस्तृत पक्ष सामने रखा है। बीते दिनों गगन कांबोज द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शक्ति अग्रवाल पर जमीन कब्जाने, जबरन कार्रवाई कराने और प्रशासनिक दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद शहर में यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया। इन्हीं आरोपों के जवाब में शक्ति अग्रवाल की ओर से एक लंबी ऑडियो क्लिप जारी की गई, जिसमें उन्होंने तथ्यों, दस्तावेज़ों और न्यायालयीन आदेशों के आधार पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ जानबूझकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है और कुछ लोग बिना पूरे तथ्यों को समझे उन्हें बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। शक्ति अग्रवाल के अनुसार, इस पूरे विवाद के पीछे एक संगठित सिंडिकेट काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य लोगों को भ्रमित करना और कानून व्यवस्था को प्रभावित करना है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों और दस्तावेज़ों की निष्पक्ष जांच करें।
अपने बयान में शक्ति अग्रवाल ने सबसे पहले जमीन कब्जाने के आरोपों पर विस्तार से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके ऊपर यह आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने प्लॉट संख्या 180 और 181 पर अवैध कब्जा किया है, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। शक्ति अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि जिन दोनों प्लॉटों की बात की जा रही है, उनका दाखिल-खारिज उसी समय विधिवत हो गया था, जब संबंधित खरीदारों ने उनसे यह जमीन खरीदी थी। उन्होंने यह भी समझाया कि कानून के अनुसार दाखिल-खारिज कराना विक्रेता की नहीं, बल्कि क्रेता की जिम्मेदारी होती है और इस मामले में खरीदारों ने स्वयं यह प्रक्रिया पूरी कराई थी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि दोनों ही प्लॉटों पर धारा 143 की कार्यवाही भी संबंधित खरीदारों द्वारा कराई जा चुकी है, जो इस बात का प्रमाण है कि जमीन का उपयोग और स्वामित्व नियमों के अनुसार तय हुआ था। शक्ति अग्रवाल ने कहा कि बिना इन कानूनी प्रक्रियाओं को समझे उन पर आरोप लगाना न केवल गलत है, बल्कि यह जनता को गुमराह करने का प्रयास भी है।
भूमि के फ्रंट को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी शक्ति अग्रवाल ने विस्तृत सफाई दी। उन्होंने कहा कि यह कहा जा रहा है कि उन्होंने “पूरा फ्रंट लिख लिया”, जबकि वास्तविकता यह है कि जमीन का कुल फ्रंट सड़क की ओर 56 मीटर है। इस 56 मीटर में से 35 फीट सड़क निर्माण के लिए छोड़ा गया है और शेष फ्रंट वैध रूप से उनके पक्ष में है। उन्होंने बताया कि यह पूरी व्यवस्था एग्रीमेंट के समय ही सभी संबंधित पक्षों की मौजूदगी में तय की गई थी। शक्ति अग्रवाल के अनुसार, उस समय अफतार सिंह, सतनाम सिंह और अन्य संबंधित लोग मौके पर मौजूद थे और सभी शर्तों पर सहमति बनी थी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उनके पास सभी आवश्यक दस्तावेज़ और समझौते उपलब्ध हैं, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर किसी भी जांच एजेंसी या न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है। उनके मुताबिक, जानबूझकर अधूरी जानकारी के आधार पर इस मुद्दे को उछाला जा रहा है।

न्यायालयीन आदेशों का हवाला देते हुए शक्ति अग्रवाल ने कहा कि उनके पक्ष में माननीय न्यायालय द्वारा 8 दिसंबर 2025 को निषेधाज्ञा आदेश पारित किया गया है, जो वर्तमान समय में भी प्रभावी है। उन्होंने बताया कि यह आदेश वर्ष 2024 से लगातार लागू है और इसके तहत दोनों पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। शक्ति अग्रवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है और आदेश प्रभावी हैं, तब इस प्रकार का मीडिया ट्रायल करना सीधे तौर पर न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कानून का सम्मान सर्वाेपरि है और किसी भी व्यक्ति को न्यायालय के आदेशों से ऊपर खुद को नहीं समझना चाहिए। उनके अनुसार, यदि किसी को आपत्ति या शिकायत है, तो उसे कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए, न कि सार्वजनिक मंचों के माध्यम से दबाव बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
सड़क से मलबा हटाने के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए शक्ति अग्रवाल ने कहा कि यह आरोप भी पूरी तरह भ्रामक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेश में साफ तौर पर उल्लेख है कि 35 फीट चौड़ी सड़क का निर्माण किया जाना है। सड़क निर्माण के दौरान यदि कहीं मलबा पड़ा हुआ था, तो उसे हटाना ठेकेदारों की जिम्मेदारी थी और वही कार्य किया गया। शक्ति अग्रवाल ने कहा कि सड़क निर्माण हमेशा समतल ज़ीरो लेवल पर किया जाता है, जिसके लिए पहले से मौजूद सामग्री को हटाना आवश्यक होता है। उन्होंने यह भी बताया कि पहली सड़क उनके निजी क्षेत्र से छोड़ी गई जमीन पर बनाई गई थी और उसका निर्माण नवाब अली ठाकुर द्वारा कराया गया था। इस पूरे कार्य से संबंधित फोटो और अन्य साक्ष्य उनके पास मौजूद हैं, जो यह साबित करते हैं कि किसी भी तरह की अवैध कार्रवाई नहीं की गई।
फोन कॉल और कथित “सेटिंग” के आरोपों पर भी शक्ति अग्रवाल ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यह कहना कि उन्होंने किसी अधिकारी या व्यक्ति से अवैध सेटिंग की, सरासर झूठ है। शक्ति अग्रवाल के अनुसार, उन्होंने केवल मध्यस्थता के उद्देश्य से संबंधित व्यक्ति का नंबर लिया था, ताकि विवाद का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर उन्होंने प्रशासन या पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश नहीं की। इसके उलट, वे हमेशा कानून के दायरे में रहकर समाधान निकालने के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर बातचीत और मध्यस्थता को गलत रंग देकर प्रस्तुत कर रहे हैं, ताकि उनके खिलाफ माहौल बनाया जा सके।
ऑडियो बयान में शक्ति अग्रवाल ने इस पूरे मामले को एक संगठित सिंडिकेट की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि यह सिंडिकेट पहले भी पुलिस अधिकारियों और कुछ पत्रकारों के खिलाफ इसी तरह के विवाद खड़े कर चुका है। उनका आरोप है कि यह गिरोह लोगों को मोहरा बनाकर पहले झगड़े कराता है, फिर दबाव बनाता है और बाद में ब्लैकमेलिंग जैसी गतिविधियों में लिप्त रहता है। शक्ति अग्रवाल ने कहा कि इस बार भी नमन गुप्ता और उनके परिवार को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है, ताकि वे कानून से हटकर कोई कदम उठाएं। उन्होंने नमन गुप्ता के परिवार से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं और कानूनी दायरे में रहकर ही निर्णय लें, क्योंकि गलत कदम उठाने से उनकी छवि और भविष्य दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
राज्य के शीर्ष नेतृत्व का उल्लेख करते हुए शक्ति अग्रवाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस कथित सिंडिकेट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में वर्तमान समय में सरकार अच्छा काम कर रही है और ऐसे तत्व प्रदेश की छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने मेयर दीपक बाली, विधायक तिलोक सिंह चीमा और पूर्व विधायक के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब प्रशासन और जनप्रतिनिधि अपने स्तर पर विकास कार्यों में जुटे हैं, तब इस तरह के संगठित गिरोह कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। शक्ति अग्रवाल ने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो।
अपने बयान के अंत में शक्ति अग्रवाल ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनके खिलाफ इस तरह के निराधार आरोप लगाए जाते रहे, तो वे मानहानि का मुकदमा दर्ज कराएंगे। उन्होंने कहा कि उनकी सामाजिक और व्यावसायिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे वे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर फैलाए जा रहे भ्रामक कंटेंट पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। शक्ति अग्रवाल के अनुसार, किसी भी विवाद में दोनों पक्षों की बात सुनना और तथ्यों की जांच करना जरूरी होता है। इस पूरे प्रकरण में अब दोनों पक्षों के दावे सामने आने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया है और शहर की नजरें प्रशासन व जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।



