नई दिल्ली। लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के संकल्प के साथ आयोजित “वोट चोर गद्दी छोड़” रैली में उत्तराखंड के काशीपुर विधानसभा क्षेत्र की भागीदारी ने अलग पहचान बनाई। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के आह्वान पर देशभर से आए कार्यकर्ताओं के बीच काशीपुर से पहुंचे कांग्रेसजनों की संगठित मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि उत्तराखंड का यह क्षेत्र लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्ष में मजबूती से खड़ा है। रामलीला मैदान के आसपास जब कांग्रेस के झंडे लहराए और नारे गूंजे, तब काशीपुर से आए कार्यकर्ताओं का जोश और अनुशासन देखते ही बन रहा था। यह भागीदारी केवल संख्या तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें स्पष्ट वैचारिक प्रतिबद्धता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प झलक रहा था, जिसने रैली को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।
इस विशाल रैली में काशीपुर के वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं एआईसीसी सदस्य अनुपम शर्मा तथा महानगर अध्यक्ष अलका पाल के नेतृत्व में काशीपुर कांग्रेस कमेटी और नगर कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। पूरे दल ने एकजुट होकर यह दिखाया कि संगठनात्मक मजबूती किस तरह जनआंदोलन में तब्दील हो सकती है। यात्रा से लेकर रैली स्थल तक कार्यकर्ताओं में उत्साह बना रहा और सभी ने अनुशासित ढंग से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। काशीपुर से आए नेताओं और कार्यकर्ताओं ने न केवल रैली में भाग लिया, बल्कि अन्य राज्यों से आए कांग्रेसजनों के साथ संवाद कर साझा संघर्ष की भावना को भी मजबूत किया, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की एकता और उद्देश्य स्पष्ट रूप से सामने आया।

रैली से लौटने के बाद ‘‘हिन्दी दैनीक सहर प्रजातंत्र’’ से फोन पर बात करते हुए अनुपम शर्मा ने देश के स्वतंत्रता संग्राम और कांग्रेस पार्टी के ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अंग्रेजों से देश को आज़ाद कराने के लिए गोलियां खाईं, जेलों में यातनाएं सहीं और असंख्य बलिदान दिए। उसी संघर्ष की परिणति के रूप में देश को संविधान मिला, जिसने हर नागरिक को समानता का अधिकार और अपनी पसंद की सरकार चुनने का मताधिकार दिया। अनुपम शर्मा ने जोर देकर कहा कि आज यही मताधिकार खतरे में है और इसे बचाने के लिए सड़क से संसद तक आवाज उठाना जरूरी हो गया है। उनके शब्दों में इतिहास, वर्तमान और भविष्य की चिंता एक साथ झलक रही थी, जिसने कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर दी।
अनुपम शर्मा ने हाल के चुनावी परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराष्ट्र, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों में भाजपा के खिलाफ स्पष्ट जनविरोध देखने को मिला था, इसके बावजूद जो चुनावी नतीजे सामने आए, वे जनभावनाओं के विपरीत प्रतीत होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के साथ खिलवाड़ कर जनता के वोट की ताकत को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। इसी कारण कांग्रेस पार्टी ने यह आंदोलन छेड़ा था, ताकि मतदाता के अधिकार और संविधान की गरिमा की रक्षा की जा सके। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के आह्वान पर देशभर से कांग्रेसी दिल्ली पहुंचे हैं और “वोट चोर गद्दी छोड़” का नारा केवल नारा नहीं, बल्कि लोकतंत्र बचाने का संकल्प है।

महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने भी रैली के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आंदोलन किसी एक दल या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की सुरक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा जनता की आवाज़ को सड़कों से उठाकर संसद तक पहुंचाने का काम करती रही है और आगे भी करती रहेगी। अलका पाल ने काशीपुर के कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सक्रिय भागीदारी यह दिखाती है कि जमीनी स्तर पर कांग्रेस मजबूत है और जनता के सवालों को लेकर गंभीर है। उन्होंने विश्वास जताया कि जब तक संविधान और मताधिकार सुरक्षित नहीं हो जाते, तब तक कांग्रेस का संघर्ष थमेगा नहीं।
रैली के दौरान काशीपुर से आए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी। हाथों में तख्तियां, पार्टी के झंडे और नारों के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध का अधिकार भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना मतदान का अधिकार। पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन बनाए रखते हुए कार्यकर्ताओं ने यह साबित किया कि उनका आंदोलन संवैधानिक दायरे में रहकर जनहित के लिए है। इस दौरान कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे केवल राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि जागरूक नागरिक के रूप में इस रैली में शामिल हुए हैं, क्योंकि लोकतंत्र कमजोर हुआ तो सबसे पहले आम जनता ही प्रभावित होगी।

महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने कहा कि दिल्ली की इस रैली में काशीपुर की सहभागिता ने स्थानीय राजनीति से आगे बढ़कर राष्ट्रीय विमर्श में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उन्होने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य से आए कार्यकर्ताओं की एकजुटता ने यह भी दिखाया कि लोकतंत्र और संविधान का मुद्दा किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश का साझा सरोकार है। अनका पाल ने कहा कि काशीपुर कांग्रेस कमेटी और नगर कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों ने इस अवसर को संगठन विस्तार और विचारधारा के प्रचार का मंच भी बनाया, जहां उन्होंने अन्य राज्यों के नेताओं के साथ भविष्य की रणनीति पर चर्चा की। यह रैली उनके लिए केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि लंबे संघर्ष की शुरुआत के रूप में देखी गई।
इसी रैली को लेकर महानगर के पूर्व अध्यक्ष मुशर्रफ हुसैन ने ‘‘हिन्दी दैनीक सहर प्रजातंत्र’’ से फोन पर बात करते हुये तीखा और प्रभावशाली बयान देते हुए कहा कि आज देश के लोकतंत्र के सामने सबसे बड़ा संकट मताधिकार की पवित्रता पर मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान केवल एक किताब नहींए बल्कि करोड़ों भारतीयों के अधिकारों की ढाल है और यदि वोट की ताकत कमजोर की गई तो आम नागरिक की आवाज़ हमेशा के लिए दबा दी जाएगी। मुशर्रफ हुसैन ने कहा कि ‘वोट चोर गद्दी छोड़’् केवल एक नारा नहींए बल्कि उस पीड़ा की अभिव्यक्ति है जो जनता अपने साथ हुए अन्याय को लेकर महसूस कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर जनादेश को मोड़ने की कोशिशें लोकतंत्र की आत्मा पर सीधा हमला हैं। पूर्व महानगर अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस पार्टी किसी भी कीमत पर संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों से समझौता नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह आंदोलन सड़क से शुरू होकर संसद तक जाएगा और तब तक जारी रहेगाए जब तक जनता के वोट के सम्मान और लोकतंत्र की गरिमा को पूरी तरह सुरक्षित नहीं कर लिया जाता।
कार्यक्रम के अंत में काशीपुर से आए कांग्रेसजनों ने यह संकल्प दोहराया कि वे जनादेश के सम्मान और लोकतंत्र की मजबूती के लिए निरंतर संघर्ष करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि मताधिकार की रक्षा केवल राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। दिल्ली में गूंजे “वोट चोर गद्दी छोड़” के नारे काशीपुर लौटने वाले कार्यकर्ताओं के साथ उत्तराखंड तक जाएंगे और वहां भी लोकतांत्रिक चेतना को मजबूत करेंगे। इस रैली ने यह स्पष्ट कर दिया कि काशीपुर की कांग्रेस न केवल स्थानीय मुद्दों पर सक्रिय है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी लोकतंत्र और संविधान के सवाल पर पूरी मजबूती से खड़ी है।



