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बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में सुप्रीम फैसले से पहले पुलिस पूरी तरह मुस्तैद

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले एसएसपी डॉ. मंजुनाथ टीसी ने बताया व्यापक सुरक्षा और पुलिस बल तैनाती, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, और संवेदनशील क्षेत्रों में कड़ी चौकसी से शांति बनाए रखने की रणनीति।

हल्द्वानी। बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 10 दिसंबर को प्रस्तावित अंतिम सुनवाई से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन और पुलिस ने पूरी तैयारी कर ली है। एसएसपी नैनीताल डॉ. मंजुनाथ टीसी ने बताया कि इस ऐतिहासिक और संवेदनशील मामले में शांति बनाए रखना प्राथमिकता है, इसलिए पुलिस, आरपीएफ, जीआरपी, फायर ब्रिगेड और ट्रैफिक सीपीयू सहित सभी सुरक्षा बलों को क्षेत्र में तैनात किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीएम और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में पूरी प्रक्रिया समन्वित तरीके से संचालित की जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर मैजिस्ट्रेट्स को विभिन्न सेक्टर और जोन में तैनात किया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति या उत्पात की संभावना को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। इसके अतिरिक्त सभी संबंधित विभाग नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य, बिजली और वन विभाग भी इस कार्य में सीधे सहयोग कर रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए पूरे बनभूलपुरा क्षेत्र को किलाबंदी में रखा गया है। इस दौरान तीन अतिरिक्त एसपी, चार सीओ, बारह थाने और इंस्पेक्टर्स, चौकी इंचार्ज और 40 अतिरिक्त एसआई सहित कुल 400 से अधिक कांस्टेबल तैनात किए गए हैं। फायर यूनिट्स, मल्टीपल टीमें, टियर गैस टीम, फायरिंग स्क्वाड्स और वीडियो ग्राफी टीमें भी सक्रिय की गई हैं। इसके अलावा, तीन कंपनी पीएससी और आरपीएफ का भारी बल भी क्षेत्र में तैनात किया गया है। 506 आरपीएफ कर्मियों के साथ-साथ जीआरपी के वरिष्ठ अधिकारी स्टेशन और प्लेटफॉर्म क्षेत्र की निगरानी करेंगे। रेलवे के एडीआरएम स्तर के वरिष्ठ अधिकारी भी कैंप में रहकर स्थिति पर नजर रखेंगे। अधिकारियों का कहना है कि यदि आवश्यक हुआ तो पैरामिलिट्री बल जैसे सीआरपीएफ और आईटीबीपी को तुरंत तैनात किया जाएगा।

डॉ. मंजुनाथ टीसी ने बताया कि पुलिस और सुरक्षा बलों की उपस्थिति केवल मैदान में दिखती है, लेकिन इस पूरे प्रबंधन की निगरानी आईजी कुमाऊं, कमिश्नर कुमाऊं, पीएचक्यू और शासन स्तर से लगातार की जा रही है। सभी आवश्यक संसाधन, आधुनिक हथियार और मनोवैज्ञानिक उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि मोर्चा और एमजी पोस्ट स्थापित किए गए हैं, ताकि शांति बनाए रखने और संवेदनशील गतिविधियों पर निगरानी सुनिश्चित की जा सके। पुलिस ने सभी संभावित जोखिमों का विश्लेषण कर लिया है और जरूरत पड़ने पर तत्काल प्रिवेंटिव कार्रवाई करने की रणनीति बनाई है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे संयम बनाए रखें और किसी भी अफवाह या सोशल मीडिया के भ्रामक संदेशों पर विश्वास न करें।

एसएसपी ने स्पष्ट किया कि सर्वाेच्च न्यायालय का निर्णय आने के बाद उसका 100 प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान और न्यायपालिका की सर्वाेच्चता अटल है, और किसी भी प्रकार का विरोध, कटाक्ष या हिंसक प्रतिक्रिया संविधान और सरकार के खिलाफ माना जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य केवल कानूनी आदेश का पालन कराना और शांति बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर भी निगरानी की जा रही है और किसी भी तरह की भ्रामक सूचना, अपुष्ट अफवाह या उकसावे वाली सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस और प्रशासन का यह संदेश है कि कानून व्यवस्था में किसी भी तरह का हस्तक्षेप या हिंसा स्वीकार्य नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले तैयारियों में यह भी शामिल है कि सभी संवेदनशील क्षेत्रों में व्यापक पुलिस गश्त की जा रही है। एसएसपी डॉ. मंजुनाथ टीसी ने बताया कि इंडिप्लॉयमेंट के तहत हर चौक और गली में पुलिस और सुरक्षा बलों की लगातार निगरानी है। यदि किसी भी व्यक्ति या समूह द्वारा कोर्ट के निर्णय को प्रभावित करने या अव्यवस्था फैलाने की कोशिश की जाती है, तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश पर अमल करना न केवल कानूनी दायित्व है बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारी भी है। इसके लिए प्रशासन ने सभी साधनों का उपयोग किया है और वरिष्ठ अधिकारी खुद मोर्चा संभाल रहे हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे आयोजन में पैरामिलिट्री बल और सुरक्षा टीमों का तैनात होना केवल सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से है। क्षेत्र में किसी भी तरह की अफवाह, हिंसा या अनियमित गतिविधि को रोकने के लिए विशेष निगरानी दल लगातार काम कर रहे हैं। एसएसपी ने कहा कि पुलिस का प्रमुख कार्य क्षेत्र में शांति बनाए रखना, संवेदनशील गतिविधियों पर नजर रखना और संभावित उत्पात की रोकथाम करना है। उन्होंने सभी नागरिकों और जनमानस से अपील की कि वे न्यायालय के आदेश का सम्मान करें और किसी भी तरह की अनर्गल प्रतिक्रिया या सोशल मीडिया में अफवाहें फैलाने से बचें।

अधिकारियों ने बताया कि कल सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद प्रशासन और पुलिस की रणनीति स्पष्ट और निर्णायक होगी। सभी सुरक्षा बलों को निर्देशित किया गया है कि किसी भी परिस्थिति में शांति और कानून व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि इस मामले में सभी प्रकार के संसाधन उपलब्ध हैं और कोई भी खतरा आने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी ने जोर देकर कहा कि किसी भी व्यक्ति द्वारा कानून या न्यायालय के आदेश को चुनौती देने की कोशिश करना न केवल अपराध होगा बल्कि इसे संविधान और सरकार पर हमला माना जाएगा। इसके लिए पूरी तैयारियां की जा चुकी हैं और पुलिस हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है।

एसएसपी डॉ. मंजुनाथ टीसी ने अंत में कहा कि नागरिकों को भयभीत होने की जरूरत नहीं है। प्रशासन का उद्देश्य केवल सुरक्षा और शांति बनाए रखना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि न्यायालय का आदेश आने के बाद उसका पालन कानूनी और संवैधानिक रूप से सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने सभी से अपील की कि वे किसी भी अफवाह, सोशल मीडिया की भ्रामक पोस्ट या उकसावे वाली सामग्री पर ध्यान न दें और प्रशासन के साथ सहयोग करें। उन्होंने कहा कि यह केवल कानून और संविधान के प्रति सम्मान का मामला है, और किसी भी तरह की अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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