- पुछड़ी में अवैध कब्जों पर तड़के चला बड़ा बुलडोज़र अभियान गर्मा गया माहौल
- संरक्षित वन भूमि पर प्रशासन की कड़ी कार्रवाई पुछड़ी में 52 निर्माण ढहे
- रामनगर में भोर होते ही अतिक्रमण हटाने की भारी कार्रवाई से मचा हड़कंप
- पुछड़ी क्षेत्र में अवैध ढांचे तोड़ने पर लोगों के आंसू और प्रशासन की सख्ती
- सरकारी भूमि बचाने उतरा प्रशासन रामनगर पुछड़ी में बुलडोज़र की गूंज तेज
- वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में 52 घर टूटे और हलचल बढ़ी
- रामनगर के पुछड़ी क्षेत्र में प्रशासनिक सख्ती अवैध कब्जे हटते ही हंगामा
- ड्रोन निगरानी के बीच पुछड़ी में चला बुलडोज़र अभियान लोगों में अफरा-तफरी
- सुबह-सुबह पुछड़ी में ध्वस्तीकरण कार्रवाई से परिवार बेघर प्रशासन कड़ा
- अतिक्रमण पर जीरो टॉलरेंस रामनगर पुछड़ी में बुलडोज़र का बड़ा ऑपरेशन
रामनगर। पुछड़ी क्षेत्र में शनिवार की भोर जैसे-ही सिर उठाने लगी, पूरा इलाका प्रशासनिक हलचल के बीच अचानक सक्रिय होता दिखाई दिया। संरक्षित वन भूमि पर फैले अवैध कब्जों को हटाने के लिए वन विभाग और प्रशासन की सम्मिलित टीम ने इस दिन को निर्णायक कार्रवाई के रूप में चुना। पिछले कई महीनों से कानूनी प्रक्रिया और नोटिसों की लंबी श्रृंखला के बाद यह दिन तय किया गया था, जिससे क्षेत्र में फैले अवैध ढांचों को हटाया जा सके। सुबह-सवेरे भारी पुलिस बल, मजिस्ट्रेटों की तैनाती और मशीनरी के साथ पहुंची टीम ने सबसे पहले इलाके को सुरक्षा दृष्टि से पूरी तरह नियंत्रित क्षेत्र घोषित किया, ताकि किसी भी प्रकार का तनाव या विरोध की स्थिति उत्पन्न न हो।
इस बीच कई परिवार अपने घर ढहते देख भावुक हो उठे, कुछ महिलाएं अपने बच्चों को सीने से लगाए रोती-बिलखती नजर आईं। प्रशासन की ओर से मौजूद एडीएम विवेक राय ने लोगों से शांत रहने की अपील की और उन्हें यह भी समझाया कि यह पूरी प्रक्रिया अदालत व विभागीय आदेशों पर आधारित है। कई लोग पहले ही अपना सामान हटा चुके थे, जबकि कुछ परिवारों को यह भय घेरे हुए था कि अब आगे उनका ठिकाना कहाँ होगा। ग्रामीणों के चेहरों पर असमंजस, दर्द और प्रशासनिक सख्ती का मिश्रित प्रभाव साफ देखा गया, जबकि टीम क्षेत्र को कानूनी रूप से मुक्त कराने में लगातार जुटी रही।

दूसरी ओर, प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि कार्रवाई कहीं भी अव्यवस्थित न हो और कानूनी तौर पर पहले से किए गए सभी नोटिसों का पालन स्पष्ट रूप से दिखाई दे। एडीएम विवेक राय के अनुसार, हर प्रभावित व्यक्ति को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया था और उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों व दावों की विधिवत सुनवाई भी की गई थी। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को नौ अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर सेक्टर मजिस्ट्रेटों की तैनाती की थी, वहीं बाहरी हिस्से के लिए एक सुपर जोन भी तैयार किया गया था, जहाँ से सुरक्षा और व्यवस्था की निगरानी की जा रही थी। पुलिस बल की मौजूदगी पूरे अभियान की रीढ़ साबित हुई, क्योंकि शांति व्यवस्था बनाए रखने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी।
अधिकारी बताते हैं कि अवैध निर्माणों को हटाने का निर्णय अचानक नहीं लिया गया, बल्कि यह काफी लंबे समय से चल रही प्रक्रिया का परिणाम था। लोगों को पूर्व सूचना भी दी गई थी, जिसके कारण कई परिवारों ने अपने सामान को पहले ही सुरक्षित स्थलों पर ले जाने में समझदारी दिखाई। जेसीबी की आवाज के साथ गिरते ढांचे, लोगों की सिसकियाँ और सुरक्षा बलों की गंभीरताकृइन सबके बीच कार्रवाई क्रमिक तरीके से चलती रही। ग्रामीणों की बेचौनी और अधिकारियों की दृढ़ता आपस में एक तीखे विरोधाभास की तरह पूरे माहौल को प्रभावित करती दिखी।
इसी कार्रवाई के दौरान कई पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाए कि उन्हें ऐसी जमीन कुछ स्थानीय लोगों द्वारा तीन लाख रुपये तक में बेची गई थी। कुछ लोगों ने डॉक्टर ताहिर नामक व्यक्ति तथा एक पत्रकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने उन्हें यह भरोसा दिलाकर भूमि बेची कि यह जगह वैध है और कोई समस्या नहीं आएगी। एक महिला सीमा ने टूटते मन से कहा कि वह अपने बीमार पति और बच्चों के साथ अब कहाँ जाएगी, क्योंकि वह अकेली कमाने वाली है और अब घर भी नहीं रहा। एक अन्य पीड़ित ने भावनाओं के टूटते स्वर में आरोप लगाया कि जब वे घर बना रहे थे तब सबकुछ प्रशासन और विभाग के सामने हो रहा था, लेकिन तब किसी ने उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की।
उनका कहना था कि यदि उस समय सख्ती बरती जाती, तो आज परिवार उजड़े हुए सड़कों पर न होते। इन गंभीर आरोपों पर एडीएम विवेक राय ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने अवैध तरीके से जमीन की बिक्री में भूमिका निभाई है, उनकी जांच अवश्य की जाएगी और यदि वे दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी होगी। उनका कहना था कि किसी भी निर्दाेष व्यक्ति को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा, लेकिन सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस बीच कई लोगों के चेहरे पर भय था कि यदि जमीन बेचने वालों पर कार्रवाई होती है तो उनके साथ जुड़े लोगों की भी पोल खुलेगी।
वन विभाग की ओर से तराई पश्चिम रामनगर के डीएफओ प्रकाश आर्य ने बताया कि अपर कोसी ब्लॉक क्षेत्र में कुल 170 परिवारों को पहले ही बेदखली के आदेश दिए जा चुके थे। इनमें से बड़ी संख्या में लोग निर्णय आने से पहले ही अपना कब्जा छोड़ चुके थे, जबकि कुछ के मामले अब भी न्यायालय में लंबित हैं और उन पर कार्रवाई रोक दी गई है। शनिवार को सिर्फ 52 परिवारों के कच्चे-पक्के संरचनाओं को हटाने की कार्रवाई की गई, जबकि ड्रोन कैमरों और वीडियोग्राफी की मदद से पूरे अभियान पर पल-पल नजर रखी जा रही थी। कैमरों की यह निगरानी न केवल सुरक्षा के लिए बल्कि भविष्य में किसी कानूनी विवाद या आरोपों की सत्यता सुनिश्चित करने के लिए भी अहम रही।
पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजुनाथ टीसी पूरे अभियान के दौरान प्रत्यक्ष निगरानी में जुटे रहे और उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार का भ्रामक संदेश फैलाने, माहौल बिगाड़ने या सरकारी कार्रवाई में बाधा डालने की कोशिश करने वाले लोगों पर तुरंत कार्रवाई होगी। ‘अतिक्रमण मुक्त उत्तराखंड’ और ‘डेमोग्राफी परिवर्तन पर प्रभावी नियंत्रण’ को लेकर सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए यह कार्रवाई प्रशासन की ओर से एक बड़े संदेश का रूप लेती दिखाई दी। क्षेत्र में सुरक्षा अब भी कड़ी रखी गई है और अधिकारियों का कहना है कि सरकारी भूमि को किसी भी हाल में संरक्षित रखना ही शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।



