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काशीपुर में चार आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की ऐतिहासिक शुरुआत का श्रेय दीपक बाली को

काशीपुर। जनता की उम्मीदों को मजबूत दिशा देते हुए काशीपुर में आज वह दृश्य देखने को मिला जिसने शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था के भविष्य को नई रोशनी दी है। शहर के विकास को लेकर लगातार सक्रिय रहने वाले महापौर दीपक बाली ने एक ही दिन में चार शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का शुभारंभ कर काशीपुर की स्वास्थ्य सुविधाओं में एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम बढ़ा दिया। शुरुआत से ही माहौल बेहद उत्साहपूर्ण दिखा और स्थानीय निवासियों ने फूल मालाओं के साथ महापौर का स्वागत कर इस पहल के प्रति अपना भरोसा और खुशी व्यक्त की। पूरे कार्यक्रम के दौरान लोगों के चेहरे पर वह उम्मीद साफ झलकती रही, जो वर्षों से बेहतर, आसान और नज़दीकी स्वास्थ्य सुविधाओं की प्रतीक्षा कर रहे थे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित यह पहल काशीपुर के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण बन गई है क्योंकि अब लोगों को छोटी स्वास्थ्य परेशानियों के लिए शहर के दूर-दराज हिस्सों तक नहीं जाना पड़ेगा। इस उद्घाटन ने न केवल सुविधाओं को लोगों के घरों के करीब ला दिया है बल्कि यह भी साबित किया है कि प्रशासन और नगर निगम शहर की जरूरतों को जमीनी स्तर पर पूरा करने के लिए गंभीरता से काम कर रहे हैं।

इसके बाद कार्यक्रम की गति और तेज हुई जब दीपक बाली ने पहले कुमाऊं कॉलोनी में रिबन काटकर इस श्रृंखला की शुरुआत की और फिर जसपुर खड़, वैशाली कॉलोनी, खड़कपुर देवीपुरा और ढकिया गुलाबों में स्थापित किए गए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को जनता को समर्पित किया। इन सभी केंद्रों को पहले से की गई व्यापक तैयारियों के साथ संचालित किया गया है ताकि शुरुआत से ही सेवाएं सुचारू रूप से मिल सकें। उद्घाटनों के दौरान लोगों का उत्साह देखते बन रहा था और हर जगह भीड़ जुटती चली गई। निवासियों का कहना था कि यह कदम शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था में वह परिवर्तन लेकर आएगा जिसकी उन्हें लंबे समय से प्रतीक्षा थी। इन नए आरोग्य केंद्रों से अब उन लोगों को भी राहत मिलेगी जो कामकाजी वजहों या दूरी के कारण नियमित उपचार नहीं ले पाते थे। महापौर ने बातचीत में बताया कि इन केंद्रों का निर्माण और संचालन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जन-हितैषी नीतियों के अनुरूप है, जो लगातार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को आम जनता की पहुंच तक लाने पर केंद्रित हैं। प्रशासनिक टीम ने भी इस परियोजना को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आवश्यक सभी तैयारियों को समय रहते पूरा कर लिया।

कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए दीपक बाली ने बताया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का उद्देश्य घर-घर के नज़दीक मुफ्त उपचार उपलब्ध कराना है ताकि किसी भी सामान्य बीमारी के लिए नागरिकों को सरकारी अस्पतालों की लंबी कतारों में न लगना पड़े। यह योजना उन हजारों परिवारों के लिए वरदान साबित होगी, जिन्हें कामकाज या दूरी के कारण रोजमर्रा की छोटी स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज नहीं मिल पाता था। उन्होंने कहा कि काशीपुर को पांच आरोग्य मंदिर आवंटित हुए थे, जिनमें से एक पहले से मधुबनी नगर में संचालित था और अब शेष चार भी जनता को समर्पित कर दिए गए हैं। इन केंद्रों में निशुल्क दवाइयों से लेकर प्राथमिक उपचार, परामर्श, बुखार, संक्रमण, ब्लड प्रेशर, शुगर जैसी सामान्य बीमारियों का इलाज उपलब्ध रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इन केंद्रों के सक्रिय होने से बड़े अस्पतालों पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ कम होगा और आवश्यक सेवाएं बिना भीड़भाड़ के अधिक व्यवस्थित तरीके से लोगों तक पहुंच सकेंगी। इन सुविधाओं के माध्यम से शहर में स्वास्थ्य जागरूकता भी बढ़ेगी और लोगों का भरोसा स्थानीय चिकित्सा सेवाओं पर मजबूत होगा।

जनता को मिलने वाली सेवाओं की सूची भी विशेष ध्यान आकर्षित करती है। प्रसव पूर्व जांच, आवश्यक टीकाकरण, नवजात शिशु देखभाल, किशोर स्वास्थ्य सेवाएं, परिवार नियोजन सुविधाएं, योग अभ्यास और एलोपैथी चिकित्सा के अंतर्गत डॉक्टर की मुफ्त सलाह—सब कुछ एक ही स्थान पर उपलब्ध होगा। इन सभी सेवाओं का लाभ पूरी तरह निशुल्क होगा, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। स्थानीय महिलाओं ने भी इसे एक बड़ा कदम बताया और कहा कि अब उन्हें गर्भावस्था संबंधी टेस्ट और टीकाकरण के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। बच्चों के टीकाकरण से लेकर बढ़ती उम्र में होने वाली तकलीफों तक, ये केंद्र कई तरह से मददगार सिद्ध होंगे। मीडिया रिपोर्टर के सवाल पर डॉक्टरों द्वारा बताया गया कि सुबह नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक चिकित्सा दल मौजूद रहेगा और जरूरत के अनुसार भविष्य में इस समय को और बढ़ाने की योजना भी हो सकती है। इस व्यवस्था से उन परिवारों को बेहद राहत मिलेगी जिन्हें सही समय पर डॉक्टर तक पहुंच नहीं मिल पाती थी। योग अभ्यास से जुड़ी गतिविधियां भी लोगों में स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करेंगी।

कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रवासियों की प्रतिक्रियाओं ने इस पहल की उपयोगिता को और स्पष्ट कर दिया। कई लोगों ने कहा कि यह दिन काशीपुर के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होने वाला है। कुछ वरिष्ठ नागरिकों ने बड़ी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उम्र बढ़ने के साथ नियमित जांच की आवश्यकता होती है और अब ये केंद्र उनके लिए वरदान की तरह साबित होंगे। वहीं युवाओं ने इसे स्वास्थ्य जागरूकता और फिटनेस को बढ़ावा देने का उत्कृष्ट माध्यम बताया। एक महिला ने मीडिया से कहा कि उनके क्षेत्र में लंबे समय से एक ऐसी सुविधा की जरूरत थी जहाँ बच्चों और महिलाओं से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का हल तुरंत मिल सके। अब यह केंद्र खुलने से उनकी कई मुश्किलें खत्म हो जाएंगी और यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए भी लाभकारी साबित होगा। कई लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में इन केंद्रों के पास सड़क प्रकाश, बैठने की व्यवस्था और सूचना बोर्ड को भी बेहतर बनाया जाए ताकि सुविधा और बढ़ सके। हालांकि अधिकतर नागरिकों ने इस पहल को शहर के लिए बेहद सकारात्मक और उपयोगी बताया।

अंत में, कार्यक्रम के माहौल और जनता की प्रतिक्रियाओं को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि काशीपुर ने आज स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नई दिशा पकड़ ली है। यह कदम न केवल अस्पतालों पर दबाव कम करेगा बल्कि लोगों की रोजमर्रा की चिकित्सा जरूरतों को नज़दीक ही पूरा करेगा। इससे काशीपुर में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ेगा और लोग ज्यादा सजग होकर अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होंगे। नागरिकों ने जिस तरह इस पहल का स्वागत किया है, उससे यह स्पष्ट है कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर सिर्फ एक स्वास्थ्य केंद्र नहीं बल्कि लोगों की उम्मीदों और जरूरतों को समझकर बनाई गई महत्वपूर्ण पहल है। चिकित्सा सुविधाओं का जनता तक पहुंचना विकास का सबसे सशक्त संकेत होता है, और काशीपुर में शुरू हुए ये चारों केंद्र आने वाले समय में शहर को स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई पहचान देंगे। कार्यक्रम में शामिल हर व्यक्ति के चेहरे पर यही संतोष दिखा कि काशीपुर एक स्वस्थ और जागरूक भविष्य की ओर बढ़ चुका है।

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शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

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