- राहुल गांधी ने चुनावी धोखाधड़ी उजागर करते हुए चुनाव आयोग पर लगाया सत्ता पक्ष प्रभाव का आरोप
नई दिल्ली। भाषण खत्म करते-करते राहुल गांधी ने फर्राटेदार अंग्रेज़ी में बोलते हुए पूरे सदन में हलचल मचा दी, जबकि एनडीए के सांसद हैरान होकर उनकी बात सुनते रह गए। राहुल गांधी ने हाल ही में अपने जोरदार भाषण में चुनावी भ्रष्टाचार और निर्वाचन प्रणाली में सुधार की सख्त आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाण और अन्य राज्यों में चुनाव प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी हुई है, जिसका प्रमाण उन्होंने सार्वजनिक रूप से पेश किया है। राहुल गांधी ने हाना बूथ का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां एक महिला का नाम वोटर लिस्ट में 200 से अधिक बार दर्ज हुआ, जो चुनावों में धोखाधड़ी और अनियमितताओं का सीधा संकेत है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस महिला का नाम वोटर लिस्ट में क्यों है, डुप्लीकेट वोटर क्यों मौजूद हैं और उत्तर प्रदेश से बीजेपी के नेता हरियाण में कैसे वोट डालने आए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इन सभी गंभीर सवालों का चुनाव आयोग ने कोई उत्तर नहीं दिया, जिससे स्पष्ट होता है कि आयोग पूरी तरह सत्ता पक्ष के प्रभाव में है। उनके शब्दों में यह सिर्फ़ तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जड़ को कमजोर करने वाली गंभीर समस्या है।
भाषण में राहुल गांधी ने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 1.2 लाख डुप्लीकेट फोटो वोटर लिस्ट में मौजूद हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वोटर लिस्ट साफ़ की जा रही है तो इतनी बड़ी संख्या में डुप्लीकेट वोटर क्यों मौजूद हैं। राहुल गांधी ने हाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के उदाहरण देकर बताया कि यही तरीका बीजेपी और उनके सहयोगियों द्वारा चुनाव जीतने के लिए अपनाया जा रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग के कार्यप्रणाली और ईवीएम के साथ हुए व्यवहार पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि चुनाव आयोग न केवल निष्पक्ष नहीं है बल्कि पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने इसे संस्थागत कब्ज़े का उदाहरण बताया और कहा कि यह केवल तकनीकी मुद्दा नहीं बल्कि लोकतंत्र की बुनियाद को प्रभावित करने वाला गंभीर मामला है।
राहुल गांधी ने चुनाव सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यह समस्या सुलझाने के लिए बेहद सरल कदम उठाए जा सकते हैं, लेकिन सरकार इसे लागू करने से बच रही है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टियों को चुनाव से एक महीने पहले मशीन-पठनीय वोटर लिस्ट उपलब्ध कराना चाहिए। इसके साथ ही, कानून में बदलाव किया जाना चाहिए जो सीसीटीवी फुटेज को नष्ट करने की अनुमति देता है। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को ईवीएम का पूरा आर्किटेक्चर दिखाने और विशेषज्ञों को इसकी जांच की अनुमति देने की मांग की। उन्होंने कहा कि अब तक उन्हें ईवीएम तक पहुँचने की अनुमति नहीं मिली और इसे देखने की इजाजत भी नहीं है। यह बदलाव केवल चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवश्यक है।
भाषण में उन्होंने चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए कहा कि कानून उन्हें जो भी बचाव देता है, वह उन्हें अब काम नहीं आएगा। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी कानून में बदलाव करके इसे रेट्रोएक्टिव तरीके से लागू करेगी और किसी भी प्रकार के दुरुपयोग का खात्मा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को कमजोर करने वाली यह कार्रवाइयाँ देश के भविष्य के लिए खतरनाक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत केवल सबसे बड़ा लोकतंत्र नहीं बल्कि सबसे महान लोकतंत्र है। उन्होंने अमेरिका के उदाहरण का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका खुद को सबसे पुराना लोकतंत्र कहता है, लेकिन भारत में इतने लोगों, भाषाओं और राज्यों के बीच लोकतंत्र की जटिलता और विविधता को बनाए रखना इसे महान बनाता है।
राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र को कमजोर करना और मताधिकार को प्रभावित करना सबसे बड़ा देशद्रोह है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार और सत्ता पक्ष लोकतंत्र की इस मूलभूत संरचना को नष्ट करने में लगे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वोट की चोरी करना, मतदाता सूची में हेराफेरी करना और ईवीएम की पारदर्शिता को बाधित करना सीधे तौर पर भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करता है। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि जनता को सचेत रहना होगा और अपने मताधिकार का सही उपयोग करना होगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करने के लिए मतदान करना केवल अधिकार नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने आगे कहा कि देश में चुनाव सुधार की आवश्यकता न केवल प्रशासनिक दृष्टि से बल्कि नैतिक और सामाजिक दृष्टि से भी अनिवार्य है। राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र का महत्व केवल प्रक्रियाओं में नहीं बल्कि जनता की भागीदारी और विश्वास में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग और सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वोटिंग प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो। इसके लिए ईवीएम की जांच, वोटर लिस्ट का सत्यापन और डुप्लीकेट वोटरों का सफाया आवश्यक है। राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि इसे अनदेखा करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक साबित होगा।
भाषण में उन्होंने बिहार, हरियाण और अन्य राज्यों के उदाहरण देते हुए कहा कि चुनाव आयोग और सत्ता पक्ष ने लोकतंत्र की मूल संरचना पर कब्ज़ा कर लिया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियाँ केवल फाइलों और प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे समाज और नागरिकों के विश्वास को प्रभावित करती हैं। राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव सुधार से न केवल राजनीतिक पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि सामाजिक न्याय और नागरिक अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए समय रहते कदम उठाना आवश्यक है।
राहुल गांधी ने विशेष रूप से मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मशीन-पठनीय वोटर लिस्ट, ईवीएम की पूरी जांच और सीसीटीवी फुटेज की सुरक्षा जैसी व्यवस्थाएं लागू करनी होंगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन बदलावों को लागू नहीं किया गया तो लोकतंत्र की बुनियाद कमजोर होगी। राहुल गांधी ने जनता को जागरूक करते हुए कहा कि वोट की चोरी और मतदान प्रक्रिया में हेराफेरी करना देश के लिए सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर नागरिक को सक्रिय भूमिका निभानी होगी और अपने अधिकारों की रक्षा करनी होगी।
भाषण के अंत में राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का वोट है। उन्होंने कहा कि जब वोट की अवहेलना होती है और मतदान प्रक्रिया में धांधली होती है, तो यह सीधे देश के संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुँचाता है। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग और सत्ता पक्ष की गलत गतिविधियाँ देशद्रोह के समान हैं और इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। उन्होंने जनता से अपील की कि वे अपने अधिकारों की रक्षा करें और लोकतंत्र को मजबूत बनाएँ।
इस प्रकार, राहुल गांधी का यह भाषण चुनावी सुधार, ईवीएम की पारदर्शिता, डुप्लीकेट वोटर समस्या और लोकतंत्र की सुरक्षा पर केंद्रित रहा। उन्होंने न केवल आरोप लगाए बल्कि समाधान के लिए ठोस सुझाव भी दिए। उनका कहना था कि भारत केवल सबसे बड़ा नहीं बल्कि सबसे महान लोकतंत्र है और इसे बचाने के लिए हर नागरिक को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र की बुनियाद कमजोर करने वाले किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने दिया जाएगा और चुनाव सुधार अब अविलंब आवश्यक है।



