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हरियाली तीज पर महिलाओं ने खेल, गीत और सौंदर्य से रचा उल्लासमय सांस्कृतिक उत्सव

शांतिकुंज कल्याण समिति की महिलाओं ने उत्सव को बनाया यादगार, तीज क्वीन से लेकर तंबोला तक हर पल में छलका उत्साह और उल्लास।

रामनगर। हरियाली तीज के अवसर पर शांतिकुंज कल्याण समिति, लखनपुर की महिला सदस्यों ने एक निजी रिसोर्ट में ऐसा रंगारंग और आनंदमय आयोजन किया, जिसने परंपरा, सौंदर्य और उत्सव की भावना को एक मंच पर समेट दिया। कार्यक्रम की शुरुआत जब उत्साह और उल्लास से भरी महिलाओं की मौजूदगी के साथ हुई, तब समूचा वातावरण तीज के गीतों, नृत्य और खुशबुओं से सराबोर हो गया। आयोजन के दौरान न केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित सभी को भावविभोर किया, बल्कि पारंपरिक खेलों और प्रतिस्पर्धाओं ने भी महिलाओं की सक्रियता को नया उत्साह प्रदान किया। हरियाली तीज की आस्था और उमंग जब परंपरागत अंदाज में आधुनिक स्पर्श के साथ सामने आई, तो वहां मौजूद सभी महिलाएं इस कार्यक्रम को यादगार बनाने में जुट गईं। यह आयोजन महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक समर्पण की मिसाल बनकर उभरा।

इस भव्य आयोजन की विस्तृत जानकारी देते हुए समिति के मीडिया प्रभारी हेम चन्द्र पाण्डे ने बताया कि कार्यक्रम में विविध प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपनी कला, चपलता और रचनात्मकता का अद्भुत प्रदर्शन किया। तीज क्वीन, मेहंदी, कुर्सी दौड़ और तंबोला जैसी प्रतिस्पर्धाएं न केवल मनोरंजन का माध्यम बनीं, बल्कि उनमें भाग लेने वाली महिलाओं ने आत्मविश्वास से भरपूर उपस्थिति दर्ज कराई। मेहंदी प्रतियोगिता में जहाँ बीना पाण्डे ने अपनी कलात्मकता से सबको मंत्रमुग्ध किया, वहीं तंबोला की रोमांचक राउंड में अल्पना पंत ने विजेता बनकर अपनी सूझबूझ का परिचय दिया। इसी प्रकार, कुर्सी दौड़ की हर्षाेल्लास भरी प्रतिस्पर्धा में विनीता बिष्ट ने अपनी फुर्ती और गति से सभी को पछाड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया।

इस आयोजन की सबसे विशेष और प्रतीक्षित घोषणा तब हुई जब समिति की सक्रिय सदस्य पुष्पा डंगवाल (डॉली) को तीज क्वीन के ताज से नवाजा गया। जैसे ही उन्हें यह सम्मान दिया गया, पूरा सभागार तालियों की गूंज से भर उठा। यह पल न केवल उनके लिए गौरव का था, बल्कि समिति की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का कारण बना। इस सम्मान ने यह संदेश भी दिया कि महिला संगठन न केवल सांस्कृतिक आयोजनों में प्रतिभागिता को महत्व देते हैं, बल्कि उत्कृष्टता और समर्पण की भावना को पहचान कर उन्हें सम्मानित करना भी जानते हैं। हरियाली तीज के इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि जब महिलाएं एकजुट होकर किसी पर्व को हर्षाेल्लास से मनाती हैं, तो न केवल परंपरा जीवित रहती है, बल्कि समाज में प्रेरक संदेश भी जाता है।

कार्यक्रम के दौरान प्रियंका तिवारी ने हरियाली तीज के महत्व और सनातन धर्म की सांस्कृतिक परंपराओं पर गहन प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हरियाली तीज केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय नारी की श्रद्धा, समर्पण और सौंदर्य का प्रतीक है। यह पर्व विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और पारिवारिक कल्याण के लिए मनाया जाता है, लेकिन इसका आध्यात्मिक पक्ष कहीं अधिक गहरा है। उन्होंने बताया कि यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का स्मरण कराता है, जो सनातन धर्म में आदर्श विवाह और प्रेम का प्रतीक माने जाते हैं। प्रियंका तिवारी ने यह भी कहा कि सनातन संस्कृति में तीज जैसे पर्व नारी को सामाजिक, धार्मिक और पारिवारिक रूप से शक्ति देने का कार्य करते हैं। हरियाली तीज जहां प्रकृति से जुड़ने और नवजीवन की कामना का पर्व है, वहीं यह अध्यात्म, साधना और आत्मसंयम की भावना भी जाग्रत करता है। इस पर्व के माध्यम से हम न केवल ऋतुओं के परिवर्तन को स्वीकारते हैं, बल्कि अपने भीतर छिपी श्रद्धा, भक्ति और आस्था को भी अभिव्यक्ति देने का अवसर पाते हैं।

वहीं रमा पाण्डे ने भारत में तीज पर्व के महत्व पर विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि यह पर्व नारी शक्ति की भावना, आस्था और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने बताया कि भारत के विभिन्न राज्यों में तीज को अलग-अलग नामों और रीति-रिवाजों से मनाया जाता है, लेकिन इसका मूल भाव एक ही हैकृनारी द्वारा अपने परिवार की सुख-शांति और पति की लंबी उम्र के लिए किया जाने वाला व्रत और पूजा। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और उत्तराखंड जैसे राज्यों में यह पर्व बड़े ही श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। रमा पाण्डे ने यह भी कहा कि तीज पर्व भारतीय समाज में महिलाओं की धार्मिक भागीदारी को सशक्त करता है। यह पर्व एक तरफ जहां नारी की भक्ति और तप का उदाहरण है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के पर्व हमारी प्राचीन परंपराओं को आधुनिक पीढ़ी से जोड़ने का माध्यम भी हैं।

कार्यक्रम में भाग लेने वाली महिलाओं की सूची भी कम प्रभावशाली नहीं रही। इनमें मेहा मनराल, मीनाक्षी बिष्ट, रजनी जोशी, दीपा सती, मंजू कश्मीरा और उमा पांडे जैसी महिलाएं शामिल थीं, जिनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और भी बढ़ा दिया। ये सभी सदस्य न केवल आयोजन की तैयारी में सक्रिय रहीं, बल्कि उन्होंने अपनी उपस्थिति और भागीदारी से यह भी साबित किया कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में महिलाओं की सहभागिता किस प्रकार आयोजन की आत्मा बन जाती है। उनके सहयोग से ही आयोजन की हर गतिविधि सुचारु रूप से संपन्न हुई और हर प्रतिभागी को यह अवसर मिला कि वह अपनी कला और क्षमताओं को प्रदर्शित कर सके।

हरियाली तीज जैसे पावन पर्व को इस भव्य स्वरूप में मनाना इस बात का परिचायक है कि आज भी समाज में सांस्कृतिक चेतना जीवित है और महिलाएं उसकी वाहक के रूप में आगे बढ़ रही हैं। शांतिकुंज कल्याण समिति द्वारा किया गया यह आयोजन केवल एक उत्सव भर नहीं था, बल्कि यह सामाजिक समरसता, पारंपरिक विरासत और महिला सशक्तिकरण का एक सुंदर समन्वय भी रहा। जब महिलाएं सामाजिक मंचों पर अपने विचार, कला और सक्रियता के साथ सामने आती हैं, तब समाज को नई दिशा मिलती है। यह आयोजन उस दिशा में एक प्रेरणादायक कदम के रूप में स्मरणीय रहेगा।

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