काशीपुर। हरियाणा राज्य के अंबाला क्षेत्र से चयनित गन्ना उत्पादक किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल टेक्नोलॉजी मिशन ऑन सुगरकेन प्रोग्राम के अंतर्गत इंटर स्टेट एक्सपोजर विजिट ऑफ फार्मर योजना के तहत उत्तराखंड के काशीपुर स्थित गन्ना किसान संस्थान एवं प्रशिक्षण केंद्र के भ्रमण पर पहुंचा। यह 10 दिवसीय शैक्षणिक एवं व्यवहारिक भ्रमण कार्यक्रम किसानों को आधुनिक गन्ना उत्पादन तकनीकों, अनुसंधान आधारित खेती और विभागीय योजनाओं से परिचित कराने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। इस दल का नेतृत्व अंबाला की सहायक गन्ना विकास अधिकारी मिस अपूर्वा द्वारा किया गया, जिनके साथ कुल 10 प्रगतिशील किसान शामिल रहे। काशीपुर पहुंचने पर गन्ना किसान संस्थान के सहायक निदेशक निलेश कुमार ने किसानों का औपचारिक स्वागत किया और उन्हें संस्थान की गतिविधियों, प्रशिक्षण व्यवस्था तथा अनुसंधान कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर किसानों में विशेष उत्साह देखा गया, क्योंकि यह भ्रमण उन्हें अपने क्षेत्र से बाहर निकलकर अन्य राज्यों में हो रहे गन्ना विकास के नवाचारों को समझने का अवसर प्रदान कर रहा था।
इस भ्रमण कार्यक्रम के दौरान हरियाणा से आए किसानों को गन्ना शोध केंद्र और प्रशिक्षण केंद्र के विभिन्न प्रभागों का विस्तार से अवलोकन कराया गया। किसानों ने आधुनिक नर्सरी प्रबंधन, उन्नत किस्मों की खेती, बीज उपचार, जल प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा यंत्रीकरण से जुड़ी तकनीकों को नजदीक से देखा। संस्थान के विशेषज्ञों ने उन्हें बताया कि किस प्रकार वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। गन्ना किसान संस्थान में आयोजित संवाद सत्र के दौरान किसानों को गन्ना विकास विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, अनुदान सुविधाओं और तकनीकी सहायता के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और हरियाणा क्षेत्र में गन्ना खेती से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा की। विशेषज्ञों ने उनके प्रश्नों के उत्तर देते हुए व्यावहारिक समाधान सुझाए, जिससे किसानों को नई सोच और दिशा मिली।
गन्ना किसान संस्थान में आयोजित विशेष वार्ता के दौरान सहायक निदेशक नितेश कुमार ने गन्ना उत्पादन से जुड़े कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं पर किसानों का ध्यान केंद्रित कराया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में बताया कि गन्ना की बुवाई के समय कतारों की उचित दूरी और बीज की सही गहराई का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। यदि किसान इन वैज्ञानिक मानकों का ध्यान रखते हैं तो पौधों की जड़ों का विकास बेहतर होता है, पोषक तत्वों का अवशोषण सही ढंग से होता है और अंततः उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि परंपरागत तरीकों से हटकर वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करने से न केवल उपज बढ़ती है, बल्कि फसल की गुणवत्ता भी सुधरती है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकता है। इस सत्र के दौरान किसानों ने बड़े ध्यान से जानकारी सुनी और इसे अपने खेतों में अपनाने का संकल्प व्यक्त किया।
इंटर स्टेट एक्सपोजर विजिट ऑफ फार्मर कार्यक्रम का मूल उद्देश्य किसानों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें विभिन्न राज्यों में अपनाई जा रही सफल कृषि पद्धतियों से रूबरू कराना है। इसी सोच के तहत इस मिशन को डिजाइन किया गया है, ताकि किसान प्रत्यक्ष रूप से देख सकें कि आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और विभागीय सहयोग से किस प्रकार गन्ना उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है। काशीपुर स्थित गन्ना किसान संस्थान में किसानों को यह समझाया गया कि बदलते मौसम, जलवायु परिवर्तन और संसाधनों की सीमित उपलब्धता के बीच टिकाऊ खेती कैसे की जा सकती है। विशेषज्ञों ने बताया कि फसल चक्र, मिट्टी परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और समय पर सिंचाई जैसी तकनीकों को अपनाकर गन्ना खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। इस तरह के कार्यक्रम किसानों में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें नवाचार के लिए प्रेरित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

भ्रमण दल में शामिल किसानों में शमशेर सिंह, सुरेश नाथ, हंसराज सैनी, कुलदीप, बलजोरी सहित अन्य किसान भी मौजूद रहे, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई। इन किसानों ने न केवल प्रशिक्षण सत्रों में रुचि दिखाई, बल्कि गन्ना शोध केंद्र में चल रहे प्रयोगों और प्रायोगिक खेतों का बारीकी से निरीक्षण भी किया। किसानों का कहना था कि इस तरह के भ्रमण से उन्हें यह समझने में मदद मिलती है कि गन्ना उत्पादन को केवल पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने माना कि अपने क्षेत्र में लौटकर वे यहां से सीखी गई तकनीकों को अपनाने का प्रयास करेंगे और अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे। इस सहभागिता ने यह साबित किया कि जब किसानों को सही मंच और मार्गदर्शन मिलता है, तो वे नई तकनीकों को अपनाने के लिए तैयार रहते हैं।
मिस अपूर्वा, सहायक गन्ना विकास अधिकारी अंबाला ने इस अवसर पर कहा कि टेक्नोलॉजी मिशन ऑन सुगरकेन प्रोग्राम के तहत आयोजित यह भ्रमण किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि इस तरह के इंटर स्टेट कार्यक्रमों से किसानों को अपने क्षेत्र की सीमाओं से बाहर निकलकर अन्य राज्यों में हो रहे विकास कार्यों को समझने का अवसर मिलता है। इससे न केवल तकनीकी ज्ञान में वृद्धि होती है, बल्कि किसानों के बीच आपसी संवाद और अनुभवों का आदान-प्रदान भी होता है। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग का प्रयास है कि किसानों को समय-समय पर ऐसे प्रशिक्षण और भ्रमण कार्यक्रमों से जोड़ा जाए, ताकि वे आधुनिक कृषि की मुख्यधारा से जुड़े रहें और अपनी आय में वृद्धि कर सकें। उनके अनुसार, जागरूक किसान ही कृषि क्षेत्र की रीढ़ होते हैं और इस मिशन का यही लक्ष्य है।
गन्ना किसान संस्थान एवं प्रशिक्षण केंद्र काशीपुर की भूमिका इस पूरे कार्यक्रम में अत्यंत महत्वपूर्ण रही। संस्थान के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने किसानों को न केवल तकनीकी जानकारी दी, बल्कि उन्हें खेती से जुड़े व्यावहारिक अनुभव भी साझा किए। सहायक निदेशक श्री निलेश कुमार ने बताया कि संस्थान का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती की ओर अग्रसर करना है, ताकि वे कम संसाधनों में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि गन्ना विकास विभाग लगातार किसानों के हित में नई योजनाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहा है, जिनका लाभ उठाकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं। संस्थान में किसानों को यह भी बताया गया कि किस प्रकार समय पर सलाह और वैज्ञानिक मार्गदर्शन से गन्ना उत्पादन को स्थिर और लाभकारी बनाया जा सकता है।
अंततः यह 10 दिवसीय भ्रमण कार्यक्रम किसानों के लिए सीख, अनुभव और प्रेरणा का माध्यम बनकर उभरा। इस मिशन के माध्यम से किसानों को यह संदेश दिया गया कि आधुनिक कृषि केवल मशीनों और तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सही जानकारी, समय पर निर्णय और वैज्ञानिक सोच का परिणाम है। हरियाणा के अंबाला क्षेत्र से आए किसानों ने काशीपुर में प्राप्त ज्ञान को अपने खेतों में लागू करने का संकल्प लिया और यह उम्मीद जताई कि इससे उनके क्षेत्र में गन्ना उत्पादन में सकारात्मक बदलाव आएगा। टेक्नोलॉजी मिशन ऑन सुगरकेन प्रोग्राम के तहत इस प्रकार के प्रयास भविष्य में भी जारी रहेंगे, ताकि देश के विभिन्न हिस्सों में गन्ना किसानों को सशक्त, जागरूक और आत्मनिर्भर बनाया जा सके।





