spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडउत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल 18 आईएएस और 11 पीसीएस अधिकारियों के...

उत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल 18 आईएएस और 11 पीसीएस अधिकारियों के तबादले जारी सूची

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नए साल की शुरुआत में प्रशासनिक मशीनरी को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए व्यापक निर्णय लेते हुए शासन, जिलों और अहम विभागों में जिम्मेदारियों का संतुलन बदल दिया है।

देहरादून। उत्तराखंड की सत्ता और प्रशासन के बीच लंबे समय से जो हलचल महसूस की जा रही थी, वह आखिरकार ठोस फैसलों के रूप में सामने आ चुकी है। नए साल की शुरुआत से ही यह संकेत मिलने लगे थे कि शासन स्तर पर बड़े और असरदार निर्णय लिए जाएंगे, लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किसी भी प्रकार की जल्दबाजी दिखाने के बजाय परिस्थितियों का गहराई से अध्ययन किया। शासन की कार्यप्रणाली, विभागों की वास्तविक स्थिति और अधिकारियों की कार्यक्षमता को परखने के बाद ही यह व्यापक प्रशासनिक बदलाव किया गया। आम नागरिकों से लेकर प्रशासनिक सेवा में कार्यरत अधिकारियों तक, सभी की नजरें मुख्यमंत्री पर टिकी हुई थीं कि आखिर किस दिशा में सरकार कदम बढ़ाएगी। यह भी स्पष्ट था कि यह फेरबदल केवल नामों की अदला-बदली नहीं होगा, बल्कि इसके पीछे आने वाले वर्षों की रणनीति छिपी होगी, जिसमें शासन को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने का प्रयास दिखाई देगा।

सरकार की ओर से जारी सूची ने यह साफ कर दिया है कि यह बदलाव केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं हैं। कुल उन्नीस आईएएस और ग्यारह पीसीएस अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में संशोधन किया गया है, जो अपने आप में यह दर्शाता है कि शासन ने प्रशासनिक ढांचे को नए सिरे से संतुलित करने की कोशिश की है। सचिवालय से लेकर जिलों तक, कई महत्वपूर्ण पदों पर नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। डिप्टी कलेक्टर, मुख्य विकास अधिकारी, सिटी मजिस्ट्रेट जैसे पदों पर बदलाव कर यह संदेश दिया गया है कि सरकार अब परिणामों के आधार पर कामकाज को परखना चाहती है। जिन विभागों का सीधा सरोकार जनता से है, वहां विशेष ध्यान दिया गया है ताकि शासन की योजनाओं का लाभ जमीन तक पहुंच सके और प्रशासनिक सुस्ती की शिकायतों पर अंकुश लगाया जा सके।

प्रमुख सचिव आवास के पद से जुड़े निर्णय ने सबसे अधिक चर्चा को जन्म दिया है। अब तक इस जिम्मेदारी को निभा रहे डॉ मीनाक्षी सुंदरम, जिन्हें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का करीबी अधिकारी माना जाता है, उनसे आवास विभाग का प्रभार वापस लिया गया है। हालांकि इस निर्णय को किसी भी रूप में उनके कद में कमी के तौर पर नहीं देखा जा रहा। डॉ मीनाक्षी सुंदरम के पास पहले से ही ऊर्जा जैसे अहम विभाग हैं, साथ ही निवेश से जुड़े कई बड़े और प्रभावशाली दायित्व भी उन्हीं के पास हैं। ऐसे में आवास विभाग का स्थानांतरण यह दर्शाता है कि शासन विभिन्न विभागों में संतुलन बनाकर काम करना चाहता है, ताकि हर विभाग पर समान रूप से ध्यान दिया जा सके और किसी एक अधिकारी पर अत्यधिक बोझ न पड़े।

आवास विभाग की जिम्मेदारी अब डॉ आर राजेश कुमार को सौंपी गई है, जो अब तक स्वास्थ्य विभाग का नेतृत्व कर रहे थे। लगभग तीन से चार वर्षों तक उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की कमान संभाली और इस दौरान कई चुनौतियों से दो-चार होना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग हमेशा से संवेदनशील रहा है, जहां संसाधनों की कमी, दूरस्थ क्षेत्रों तक सेवाओं की पहुंच और व्यवस्थागत खामियों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर विवाद सामने आते रहे, विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में। इसी पृष्ठभूमि में डॉ आर राजेश कुमार को स्वास्थ्य विभाग से मुक्त कर आवास जैसे विभाग की जिम्मेदारी सौंपना शासन की नई प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

स्वास्थ्य विभाग की बागडोर अब सचिन कुर्बे को सौंपी गई है, जिन्हें प्रशासनिक हलकों में एक अनुभवी और सक्रिय अधिकारी के रूप में जाना जाता है। सचिन कुर्बे इससे पहले पर्यटन विभाग संभाल चुके हैं और उस दौरान उन्होंने अपनी कार्यशैली से पहचान बनाई थी। पर्यटन के बाद कुछ समय तक वे अपेक्षाकृत हल्के दायित्वों में रहे, लेकिन अब उन्हें फिर से एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग सौंपा गया है। स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील और जनसरोकार से जुड़े विभाग की जिम्मेदारी मिलना इस बात का संकेत है कि सरकार उनसे ठोस परिणामों की अपेक्षा कर रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए किस तरह के कदम उठाते हैं और लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान कैसे करते हैं।

पेयजल विभाग को लेकर राज्य में हालात काफी समय से चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। विभिन्न संगठनों के विरोध प्रदर्शन, ठेकेदारों की लंबित भुगतान संबंधी शिकायतें और विभागीय कार्यालयों के बाहर लगने वाली भीड़ इस बात की ओर इशारा करती रही है कि यह विभाग सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हुआ है। अब तक इस विभाग की जिम्मेदारी शैलेश बगोली निभा रहे थे। बीच में यह चर्चाएं भी चली थीं कि वे दिल्ली प्रतिनियुक्ति पर जा सकते हैं, लेकिन वह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब शासन ने उन्हें पेयजल विभाग से मुक्त कर दिया है और इस विभाग की कमान डॉ रणबीर सिंह चौहान को सौंप दी गई है।

डॉ रणबीर सिंह चौहान पहले से ही पेयजल विभाग में अपर सचिव और प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत थे। विभाग की आंतरिक संरचना और कार्यप्रणाली से उनकी गहरी परिचितता को देखते हुए उन्हें सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसे प्रशासनिक दृष्टि से एक पदोन्नति के रूप में भी देखा जा रहा है। उनसे यह अपेक्षा की जा रही है कि वे लंबित योजनाओं, भुगतान संबंधी विवादों और क्षेत्रीय असंतोष को दूर करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा यदि सुचारु रूप से संचालित होती है, तो इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा और शासन की साख भी मजबूत होगी।

सहकारिता विभाग में भी अहम बदलाव किया गया है। अब तक इस विभाग की जिम्मेदारी डॉ वीवीआरसी पुरुषोत्तम के पास थी, लेकिन अब यह दायित्व डॉ अहमद इकबाल को सौंपा गया है। सहकारिता विभाग ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के जीवन से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। सहकारी समितियों की भूमिका कृषि, दुग्ध उत्पादन और स्थानीय रोजगार के क्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में नए सचिव के सामने पारदर्शिता बढ़ाने, संस्थाओं को मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वास बहाल करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

आयुष विभाग को लेकर भी शासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह इस क्षेत्र में उत्तराखंड की संभावनाओं को पूरी तरह से उपयोग में लाना चाहता है। हाल ही में सचिव पद पर पदोन्नत हुईं रंजना राजगुरु को इस विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के क्षेत्र में उत्तराखंड को एक अग्रणी राज्य के रूप में देखा जाता है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों की नजर इस विभाग पर रहती है, क्योंकि इससे न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र बल्कि उद्योग और पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है। रंजना राजगुरु के सामने इन संभावनाओं को ठोस उपलब्धियों में बदलने की चुनौती होगी।

वित्त विभाग से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण निर्णय भी सामने आया है। वित्त में अपर सचिव के रूप में कार्यरत मनमोहन मणि को अब ऑडिट विभाग का निदेशक बनाया गया है। यह बदलाव प्रशासनिक संतुलन और विशेषज्ञता को ध्यान में रखकर किया गया माना जा रहा है। वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता शासन की प्राथमिकताओं में शामिल हैं, ऐसे में ऑडिट विभाग की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इस बदलाव का असर आने वाले समय में वित्तीय निगरानी और जवाबदेही के रूप में दिखाई दे सकता है।

जिलों के स्तर पर किए गए फेरबदल भी कम अहम नहीं हैं। नैनीताल जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण जिले में मुख्य विकास अधिकारी की जिम्मेदारी अब अरविंद पांडे को सौंपी गई है। नैनीताल आधा पहाड़ी और आधा मैदानी जिला होने के कारण प्रशासनिक दृष्टि से विशेष ध्यान मांगता है। अरविंद पांडे इससे पहले खाद्य विभाग में उपयुक्त के रूप में कार्यरत थे। उनके अनुभव को देखते हुए यह उम्मीद की जा रही है कि जिले में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और प्रशासनिक समन्वय बेहतर होगा।

पीसीएस अधिकारी डीपी सिंह से डोईवाला शुगर मिल के अधिशासी निदेशक का दायित्व वापस ले लिया गया है। हालांकि उनके पास पहले से ही आवास विभाग की जिम्मेदारी बनी हुई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह निर्णय किसी प्रकार की असंतुष्टि का परिणाम नहीं है। इसे प्रशासनिक जरूरतों और कार्यक्षमता के आधार पर किया गया बदलाव माना जा रहा है, ताकि संबंधित विभागों में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।

डिप्टी कलेक्टर स्तर पर भी व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। अरविन्द कुमार पाण्डेय, PCS को संभागीय खाद्य नियंत्रक, गढ़वाल परिक्षेत्र, देहरादून से हटाकर मुख्य विकास अधिकारी, नैनीताल बनाया गया है। दिनेश प्रताप सिंह, PCS को अधिशासी निदेशक, चीनी मिल डोईवाला के पद से मुक्त किया गया है। अनिल कुमार शुक्ला, PCS को रुद्रप्रयाग से हरिद्वार भेजा गया है। दयानन्द, PCS को डिप्टी कलेक्टर, हरिद्वार के पद से हटाया गया है। नूपुर, PCS को पौड़ी से अधिशासी निदेशक, चीनी मिल डोईवाला की जिम्मेदारी दी गई है।

इसी क्रम में प्रदीप सिंह, PCS को सामान्य प्रबंधक, गढ़वाल मंडल विकास निगम, देहरादून से हटाकर संयुक्त सचिव, एमडी डीडीओ बनाया गया है। आकाश जोशी, PCS को चम्पावत से हरिद्वार भेजते हुए उप मेलाधिकारी, कुंभ मेला हरिद्वार की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राहुल शाह, PCS को नैनीताल से ऊधमसिंहनगर स्थानांतरित किया गया है। संदीप कुमार, PCS को टिहरी से पौड़ी भेजा गया है। मनजीत सिंह गिल, PCS को पिथौरागढ़ से हटाकर उप मेलाधिकारी, कुंभ मेला हरिद्वार बनाया गया है। ललित मोहन तिवारी, PCS को बागेश्वर से पिथौरागढ़ भेजा गया है।

हरिद्वार में इन बदलावों को विशेष महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि अगले वर्ष वहां कुंभ का आयोजन होना है। भले ही यह अर्धकुंभ हो, लेकिन राज्य और केंद्र सरकार की योजना इसे भव्य और दिव्य स्वरूप देने की है। इसी वजह से कुंभ क्षेत्र में अनुभवी और सक्षम अधिकारियों की तैनाती की जा रही है। उधम सिंह नगर में हालिया विवादों के चलते वहां भी प्रशासनिक स्तर पर बदलाव किए गए हैं। कुल मिलाकर यह पूरा फेरबदल इस बात का संकेत देता है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आने वाले समय को लेकर गंभीर और दूरगामी रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं। 2026 को ध्यान में रखकर बनाई गई यह नई टीम अगले विधानसभा चुनाव तक क्या प्रभाव छोड़ती है, इसका आकलन आने वाले एक वर्ष में साफ तौर पर सामने आएगा, जब स्वास्थ्य, पेयजल और विकास जैसे विभागों की वास्तविक प्रगति जनता के सामने होगी।

संबंधित ख़बरें
स्वच्छ, सुंदर और विकसित काशीपुर के संकल्प संग गणतंत्र दिवस

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!