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हरिद्वार में अस्थि विसर्जन पर कथावाचक का बेहद शर्मनाक बयान सोशल मीडिया पर भड़का महाआक्रोश

कथावाचक के मनगढ़ंत दावों पर भड़की देवभूमि उत्तराखंड और भड़के तीर्थ पुरोहित, श्री गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने सनातन परंपराओं के अपमान पर कानूनी मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की दी बेहद सख्त खुली चेतावनी।

हरिद्वार। धर्मनगरी की सदियों पुरानी सनातन परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं और देश-विदेश के करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की गहरी आस्था पर प्रहार करने वाला एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे तीर्थ क्षेत्र में वैचारिक भूचाल ला दिया है। सोशल मीडिया के अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो ने देवभूमि उत्तराखंड के संतों, तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय निवासियों में जबरदस्त आक्रोश भर दिया है। इस विवादित वीडियो में एक तथाकथित धार्मिक उपदेशक यानी कथावाचक हरिद्वार के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक गौरव को सरेआम ठेस पहुंचाते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिसके बाद से ही उनके खिलाफ चौतरफा विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। वायरल क्लिप के भीतर छिपे दावों ने न केवल गंगा भक्तों के दिलों को बुरी तरह छिन्न-भिन्न किया है, बल्कि पवित्र गंगा के तटों पर होने वाले कर्मकांडों की पवित्रता को भी कटघरे में खड़ा करने का बेहद घिनौना प्रयास किया है। तीर्थनगरी की फिजाओं में इस समय केवल इसी बात को लेकर भारी गुस्सा और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जिसने अब एक बहुत बड़े कानूनी और सामाजिक विवाद का रूप अख्तियार कर लिया है।

चर्चा के केंद्र में आए इस बेहद आपत्तिजनक और विवादित वीडियो क्लिप के भीतर जो बातें कही गई हैं, वे वास्तव में किसी भी सनातनी को भीतर तक झकझोरने के लिए काफी हैं। वीडियो में दिखाई दे रहे कथावाचक ने बेहद गैर-जिम्मेदाराना तरीके से यह अजीबोगरीब दावा ठोक दिया कि हरिद्वार मुख्य रूप से अस्थियों के विसर्जन के लिए बना ही नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक महत्व केवल चारधाम यात्रा के शुरुआती प्रवेश द्वार के तौर पर ही सीमित है। इतना ही नहीं, अपनी कमतर समझ को जगजाहिर करते हुए उन्होंने आगे यह भी कह डाला कि हरिद्वार के भीतर महज एक ही विशिष्ट घाट ऐसा बना हुआ है जहां पर इंसानी अस्थियों को प्रवाहित करने का काम किया जाता है। अपनी इस मनगढ़ंत कहानी को और आगे बढ़ाते हुए उन्होंने दावा किया कि उस घाट के नीचे बहती गंगा नदी की धारा में एक मजबूत लोहे का जाल लगाया गया है, जहां श्रद्धालुओं द्वारा बहाई गई सभी अस्थियां जाकर जमा हो जाती हैं। इसके बाद उन्होंने जो सबसे ज्यादा भड़काऊ और अपमानजनक बात कही, वह यह थी कि कुछ निश्चित समय बीत जाने के बाद उन एकत्रित अस्थियों को वहां से चुपके से निकाल लिया जाता है और देहरादून में स्थित किसी कप-प्लेट बनाने वाली औद्योगिक फैक्ट्री में कच्चे माल के रूप में बेच दिया जाता है।

जैसे ही इस अनर्गल और भ्रामक दावों से भरी वीडियो क्लिप ने इंटरनेट की दुनिया में कदम रखा, वैसे ही समूची तीर्थनगरी और उससे जुड़े धार्मिक संगठनों के भीतर जबरदस्त उबाल आ गया। गंगा की मर्यादा और हरिद्वार की व्यवस्थाओं को संभालने वाली सर्वमान्य संस्था श्री गंगा सभा के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इस पूरे प्रकरण का कड़ा संज्ञान लेते हुए अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। गंगा सभा के कर्मठ महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने इस पूरे बयान की बेहद सख्त लहजे में मजम्मत करते हुए इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ किया गया एक भद्दा मजाक और सीधा आक्रमण करार दिया है। तन्मय वशिष्ठ ने एक आधिकारिक और बेहद कड़ा प्रेस बयान जारी करते हुए मीडिया के सामने साफ कहा कि पिछले कुछ समय से यह देखा जा रहा है कि इस पावन धार्मिक नगरी और यहां युगों-युगों से चली आ रही पवित्र धार्मिक गतिविधियों को किसी न किसी बहाने से बदनाम करने का एक बेहद खतरनाक और योजनाबद्ध चलन समाज में चल पड़ा है। उन्होंने गुस्से में कहा कि कोई भी राह चलता व्यक्ति आज बिना सोचे-समझे मुंह उठाकर हरिद्वार की साख के बारे में कुछ भी अनाप-शनाप बोल देता है, जिसे अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने अपनी बात को और प्रखरता से रखते हुए इस बात की ओर भी विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया कि यह सब कुछ अप्रत्याशित रूप से अचानक नहीं हो रहा है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी साजिश की बू आती है। ऐसा प्रतीत होता है कि बहुत ही नीतिगत और सोचे-समझे तरीके से इस तरह के भ्रामक एजेंडे को हवा दी जा रही है ताकि राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर हरिद्वार के अद्वितीय धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को धीरे-धीरे कम किया जा सके। तन्मय वशिष्ठ ने वीडियो में दिख रहे उस तथाकथित उपदेशक की ज्ञान संपदा पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि उनके सामने जब यह वीडियो आया तो वे दंग रह गए कि कैसे एक व्यक्ति व्यास पीठ जैसी परम पवित्र जगह पर बैठकर इस तरह के अनर्गल विचार समाज में परोस सकता है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि जिस तरह की बनावटी और झूठी तकनीकी का जिक्र उस कथावाचक ने अपनी इस पूरी कथा के दौरान किया है, उससे यह पूरी तरह साबित हो जाता है कि उस व्यक्ति को हरिद्वार की वैदिक संस्कृति, इतिहास, आध्यात्मिक महत्व और शास्त्रों का कतई कोई बुनियादी ज्ञान या जानकारी नहीं है।

धार्मिक मर्यादाओं का पाठ पढ़ाते हुए गंगा सभा के इस कद्दावर पदाधिकारी ने आगे कहा कि जिस व्यक्ति के पास भारत के महान तीर्थों और पावन धार्मिक क्षेत्रों के बारे में रत्ती भर भी प्रामाणिक ज्ञान नहीं है, उसे सनातन धर्म की सर्वाेच्च और पूजनीय व्यास पीठ पर बैठने का भी कोई नैतिक या धार्मिक अधिकार नहीं रह जाता है। तन्मय वशिष्ठ ने उस कथावाचक को आड़े हाथों लेते हुए नसीहत दी कि अगर उन्हें सच में समाज का मार्गदर्शन करना है तो उन्हें सबसे पहले खुद किसी योग्य आचार्य के पास जाकर अपने तीर्थों, परंपराओं और पवित्र क्षेत्रों के बारे में गहन अध्ययन करना चाहिए और सच्चा ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। उसके बाद ही उन्हें व्यास पीठ पर बैठकर हरिद्वार की गौरवशाली धार्मिक महत्ता के बारे में दुनिया के सामने अपना मुंह खोलना चाहिए। उन्होंने आक्रोशित होकर कहा कि जिस तरह के निकृष्ट और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग हरिद्वार जैसी मोक्षदायिनी नगरी के लिए किया गया है, वे पूरी तरह से निंदनीय हैं और इसे केवल हरिद्वार का ही नहीं, बल्कि समूची देवभूमि उत्तराखंड की महान संस्कृति का एक अक्षम्य अपमान माना जाएगा।

इस पूरे महाविवाद के गर्माने के बाद अब तीर्थ पुरोहितों और गंगा सभा ने उस कथावाचक को किसी भी स्तर पर माफी न देने का पूरा मन बना लिया है और उनके खिलाफ चौतरफा शिकंजा कसने की पुरजोर तैयारी शुरू कर दी गई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तन्मय वशिष्ठ ने स्पष्ट कर दिया है कि इस अमर्यादित कृत्य के लिए संबंधित कथावाचक को बिल्कुल भी बख्शा नहीं जाएगा और संगठन उनके इन झूठे दावों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कदम उठाते हुए संबंधित पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज कराने की पूरी वैधानिक कार्रवाई अमल में ला रहा है। हरिद्वार के प्रमुख घाटों पर पुरोहिती करने वाले अन्य विद्वानों ने भी एक सुर में कहा है कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी को भी हिंदुओं के इस सर्वाेच्च तीर्थ स्थल की छवि को धूमिल करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी बदनामी कराने की इजाजत नहीं दी जा सकती। इस विवाद की आग अब सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों जैसे फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर भी पूरी तरह फैल चुकी है, जहां आम जनता से लेकर बड़े-बड़े आध्यात्मिक गुरुओं के बीच इस विषय पर एक बेहद गंभीर और तीखी बहस छिड़ गई है।

अनेक प्रतिष्ठित धार्मिक संगठनों, अखाड़ों के संतों और स्थानीय तीर्थ पुरोहितों ने भी एकजुट होकर इस घिनौने बयान की चौतरफा और बेहद कड़ी भर्त्सना की है। श्री गंगा सभा के तमाम पदाधिकारियों और कर्मचारियों का इस मामले पर बिल्कुल दो टूक रुख है कि हरिद्वार की पुरातन धार्मिक गरिमा, यहां की अटूट मर्यादा और वैदिक परंपराओं को लेकर किसी भी प्रकार की भ्रामक, मनगढ़ंत या झूठी जानकारी फैलाने वाले तत्वों को अब देवभूमि की धरती पर रत्ती भर भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तीर्थ पुरोहितों ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसे भ्रामक प्रचार करने वाले लोगों पर समय रहते नकेल नहीं कसी गई, तो यह सनातन धर्म की जड़ों को कमजोर करने का काम करेगा। यही वजह है कि इस मामले को एक कड़ा नजीर बनाने के उद्देश्य से अब श्री गंगा सभा न्यायालय और प्रशासन दोनों के दरवाजे खटखटाने जा रही है, ताकि भविष्य में कोई भी तथाकथित ज्ञानी इस तरह से धार्मिक आस्थाओं का सरेआम कत्ल करने का दुस्साहस न कर सके। संपूर्ण उत्तराखंड में इस समय इस खबर को लेकर भारी सुगबुगाहट है और हर कोई आरोपी कथावाचक के खिलाफ कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई की मांग कर रहा है।

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