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स्वच्छता चौपाल में दीपक बाली ने खोला काशीपुर के विकास का खजाना, सफाई से पानी तक बड़ा रोडमैप

वरिष्ठ नागरिकों ने लॉन्च किया स्वच्छता गीत, डस्टबिन वितरण से लेकर पेयजल योजना तक हुई चर्चा, 15 अगस्त पर 135 फीट तिरंगे के लोकार्पण का भी ऐलान।

काशीपुर। शहर की सफाई व्यवस्था को मजबूत करने, नागरिकों की समस्याओं को सीधे सुनने और काशीपुर के भविष्य से जुड़ी बुनियादी जरूरतों पर खुला संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से नगर निगम काशीपुर की ओर से वार्ड संख्या 17 आवास विकास मध्य स्थित अग्रसेन पार्क में स्वच्छता चौपाल का आयोजन किया गया। चौपाल में नगर आयुक्त रविंद्र सिंह बिष्ट, महापौर दीपक बाली, क्षेत्रीय पार्षद, नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी, पर्यावरण मित्र और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिकों की विशेष सहभागिता रही और इसी दौरान उनके हाथों स्वच्छता गीत की लॉन्चिंग भी की गई, जिसने पूरे आयोजन को एक अलग संदेश दिया। स्वच्छता को केवल सरकारी अभियान न मानकर जनभागीदारी का विषय बनाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया। चौपाल में शहर की सफाई, नालियों की स्थिति, बरसाती पानी की निकासी, कचरा प्रबंधन, पॉलीथिन की समस्या, पेयजल व्यवस्था और भविष्य की बड़ी विकास योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। महापौर दीपक बाली ने कहा कि काशीपुर को बेहतर शहर बनाने के लिए सबसे पहले जनता और नगर निगम के बीच सीधा संवाद जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिस विश्वास के साथ शहर की जनता उन्हें और पार्षदों को अपना प्रतिनिधि मानकर समस्याएं सौंप रही है, वह जिम्मेदारी को और बढ़ाता है। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों की मौजूदगी का स्वागत करते हुए कहा कि शहर के अनुभवी लोगों के सुझाव और अनुभव काशीपुर की व्यवस्था को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। स्वच्छता गीत की लॉन्चिंग को उन्होंने नागरिक चेतना से जोड़ते हुए कहा कि गीत, संवाद और जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता का संदेश हर घर तक पहुंचाने की जरूरत है।

चौपाल के दौरान महापौर दीपक बाली ने साफ शब्दों में कहा कि नगर निगम के अधिकारी, पार्षद और पर्यावरण मित्र अपनी जिम्मेदारियों को निभा रहे हैं, लेकिन शहर की स्वच्छता को स्थायी रूप से बेहतर बनाना केवल सरकारी तंत्र के भरोसे संभव नहीं है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि घरों से निकलने वाला कचरा नालियों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर न फेंका जाए। उन्होंने विशेष रूप से पॉलीथिन और प्लास्टिक को जलभराव की बड़ी वजहों में शामिल करते हुए कहा कि नालियों में फंसा कचरा पानी के बहाव को रोक देता है और बारिश के समय स्थिति गंभीर हो जाती है। हाल में हुई बारिश का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जलभराव को लेकर नगर निगम की जिम्मेदारी से इनकार नहीं किया जा सकता और जहां कमी है, उसे दूर करना निगम का दायित्व है, लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी जनता के सामने आना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले बारिश रुकने के बाद कई क्षेत्रों में पानी घंटों तक जमा रहता था, जबकि अब अनेक स्थानों पर पानी अपेक्षाकृत कम समय में निकल गया। इसके पीछे नगर निगम की सफाई टीम और पर्यावरण मित्रों की लगातार मेहनत भी रही है। बारिश के दौरान कर्मचारी नालियों और नालों में फंसी पॉलीथिन, प्लास्टिक और दूसरे कचरे को निकालते रहे, ताकि पानी का प्रवाह बाधित न हो। उन्होंने कहा कि यदि एक तरफ निगम सफाई करता रहे और दूसरी तरफ लोग उसी नाली में कचरा डालते रहें, तो समस्या कभी खत्म नहीं होगी। इसलिए स्वच्छता चौपाल का उद्देश्य लोगों को दोष देना नहीं, बल्कि उन्हें समाधान का सक्रिय भागीदार बनाना है।

जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान को लेकर महापौर ने काशीपुर की बहुचर्चित लगभग 602 करोड़ रुपये की ड्रेनेज योजना को शहर के भविष्य के लिए निर्णायक कदम बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान जलनिकासी व्यवस्था उस समय की आबादी को ध्यान में रखकर विकसित हुई थी, जब काशीपुर की जनसंख्या लगभग 50 से 60 हजार के आसपास थी। आज शहर की आबादी करीब डेढ़ लाख से अधिक हो चुकी है और शहरी क्षेत्र का विस्तार भी तेजी से हुआ है। ऐसे में पुराने नालों और नालियों से वर्तमान बारिश का पानी निकालना कठिन होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि जब तक जलनिकासी के पूरे ढांचे को आधुनिक और बड़ी क्षमता वाला नहीं बनाया जाएगा, तब तक हर भारी बारिश में जलभराव की समस्या पूरी तरह खत्म करना मुश्किल रहेगा। इसी चुनौती को ध्यान में रखकर व्यापक ड्रेनेज योजना तैयार की गई है। महापौर के अनुसार इस परियोजना में छोटे-बड़े नालों की क्षमता बढ़ाने, आवश्यक स्थानों पर नालियों को चौड़ा करने, बड़े नालों को पक्का करने और कई हिस्सों को व्यवस्थित रूप से कवर करने जैसे कार्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल वर्तमान समस्या का उपचार नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। शहर की आबादी बढ़ रही है, नए आवासीय क्षेत्र विकसित हो रहे हैं और बारिश का स्वरूप भी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में काशीपुर को ऐसी जलनिकासी व्यवस्था की जरूरत है जो भविष्य का दबाव भी संभाल सके। उन्होंने कहा कि बड़ी योजनाओं को जमीन पर उतारने में तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ती हैं, इसलिए जनता को धैर्य के साथ इसकी प्रगति को समझना होगा।

महापौर ने बताया कि प्रस्तावित ड्रेनेज परियोजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है और इसके प्रथम चरण की लगभग 220 करोड़ रुपये की परियोजना को लेकर प्रक्रिया महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि संबंधित टेंडर चार तारीख को अपलोड किया जा चुका है और 10 सितंबर को टेंडर खोले जाने की प्रक्रिया प्रस्तावित है। इसके बाद जिस एजेंसी को कार्य आवंटित होगा, उसके साथ आगे की औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी प्रक्रियाएं निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ीं तो अक्टूबर महीने के भीतर धरातल पर काम दिखाई देने लगेगा। महापौर ने कहा कि जनता अक्सर पूछती है कि घोषणा के बाद काम कब शुरू होगा, लेकिन एक बड़ी योजना के पीछे कई स्तरों की प्रक्रिया होती है। पहले समस्या का अध्ययन होता है, फिर तकनीकी रिपोर्ट और डीपीआर तैयार होती है, उसके बाद स्वीकृति, वित्तीय प्रक्रिया और निविदा की कार्रवाई होती है। उन्होंने कहा कि योजना पहले दिमाग में आती है, फिर कागज पर आकार लेती है और अंततः जमीन पर उतरती है। इन चरणों के बीच लगने वाला समय कई बार जनता को लंबा दिखाई देता है, लेकिन यही प्रक्रिया परियोजना को व्यवस्थित और टिकाऊ बनाने के लिए जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि नगर निगम अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय कर रहा है और संबंधित विभागों से भी बातचीत जारी है। उनका कहना था कि जलभराव जैसी समस्या का समाधान किसी एक विभाग के बूते संभव नहीं है। नगर निगम, सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच तालमेल से ही शहर की जलनिकासी व्यवस्था को स्थायी मजबूती दी जा सकती है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह योजना पूरी होने के बाद काशीपुर को बरसाती जलभराव से बड़ी राहत मिलेगी।

लक्ष्मीपुर माइनर के निर्माण कार्य को लेकर भी महापौर ने चौपाल में स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि इस परियोजना पर कई हिस्सों में अभी निर्माण कार्य चल रहा है और निर्माण के दौरान पानी के प्राकृतिक प्रवाह को कई जगह नियंत्रित करना पड़ता है। इसके कारण आसपास के कुछ इलाकों में अस्थायी परेशानी उत्पन्न होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि जब किसी बड़ी समस्या का स्थायी समाधान तैयार किया जाता है तो निर्माण अवधि में कुछ असुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन इसका उद्देश्य भविष्य की व्यवस्था को बेहतर बनाना है। उन्होंने बताया कि लक्ष्मीपुर माइनर का निर्माण पूरा होने के बाद जलप्रवाह को बेहतर दिशा मिलने की उम्मीद है। हाल की बारिश में जिन क्षेत्रों में जलभराव हुआ, वहां निर्माण कार्य और पानी के प्राकृतिक प्रवाह से जुड़ी परिस्थितियों को भी समझना जरूरी है। महापौर ने कहा कि नगर निगम की टीम बारिश के दौरान लगातार सक्रिय रही और जहां भी नालियों में कचरा अथवा प्लास्टिक फंसा मिला, उसे हटाकर पानी की निकासी को सुचारु करने का प्रयास किया गया। उन्होंने पर्यावरण मित्रों की सराहना करते हुए कहा कि लगातार बारिश के बीच भी उन्होंने मैदान नहीं छोड़ा। कई कर्मचारी स्वयं पानी में उतरकर सफाई करते रहे। उन्होंने कहा कि ऐसे कर्मचारियों का योगदान अक्सर नजरअंदाज हो जाता है, जबकि शहर की व्यवस्था बनाए रखने में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। महापौर ने नागरिकों से अपील की कि वे नालियों में पॉलीथिन और प्लास्टिक डालने से पूरी तरह बचें, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही बारिश के समय बड़ी समस्या का रूप ले सकती है।

स्वच्छता चौपाल में कचरा प्रबंधन को लेकर नगर निगम की नई पहल पर भी विस्तार से चर्चा हुई। महापौर ने बताया कि शहर के घरों तक दो डस्टबिन पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसमें एक गीले और दूसरा सूखे कचरे के लिए होगा। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था की शुरुआत वार्ड संख्या एक से की गई है और इसे क्रमशः अन्य वार्डों में भी लागू किया जा रहा है। खास बात यह होगी कि डस्टबिन केवल मकान मालिकों को नहीं दिए जाएंगे, बल्कि किराएदारों को भी इस व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा। महापौर ने कहा कि कचरे को घर से ही अलग करने की आदत विकसित करना स्वच्छता अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि गीला और सूखा कचरा अलग-अलग रहेगा तो उसके संग्रहण, प्रसंस्करण और निस्तारण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकेगी। उन्होंने पार्षदों से कहा कि डस्टबिन को किसी एक स्थान पर रखकर वितरण पूरा करने के बजाय घर-घर जाकर लोगों को सौंपा जाए और साथ ही उन्हें इसके सही इस्तेमाल की जानकारी भी दी जाए। उन्होंने कहा कि जब जनप्रतिनिधि स्वयं नागरिकों के दरवाजे तक पहुंचेंगे और स्वच्छता की बात करेंगे, तो उसका असर ज्यादा गहरा होगा। उनका कहना था कि शहर की सफाई के लिए नगर निगम लगातार संसाधन लगा रहा है, लेकिन नागरिकों की भागीदारी के बिना कोई भी अभियान लंबे समय तक सफल नहीं हो सकता। डेढ़ लाख से अधिक आबादी वाले शहर में यदि हर परिवार अपने कचरे को सही तरीके से संभाले तो नालियों और सड़कों पर कचरा पहुंचने की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।

पेयजल व्यवस्था को लेकर भी चौपाल में महापौर ने एक बड़ी योजना की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि काशीपुर के लिए लगभग 262 करोड़ रुपये की पेयजल योजना अंतिम चरण में है। इस योजना के तहत अलग-अलग क्षेत्रों में ओवरहेड वाटर टैंक और ट्यूबवेल सहित पेयजल ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कार्य प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में शहर की आबादी और बढ़ेगी, इसलिए पानी की उपलब्धता को लेकर अभी से मजबूत आधार तैयार करना जरूरी है। मौजूदा व्यवस्था पर बढ़ते दबाव को देखते हुए नई परियोजना भविष्य की जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। महापौर ने कहा कि योजना में कई स्थानों पर नए जल भंडारण ढांचे विकसित करने और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने का प्रावधान है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि काशीपुर के लिए इतनी बड़ी धनराशि की योजनाओं को आगे बढ़ाने में राज्य सरकार का सहयोग महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि नगर निगम स्तर पर अधिकारी और जनप्रतिनिधि लगातार संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर रहे हैं। उनका कहना था कि काशीपुर के विकास को केवल छोटी-छोटी परियोजनाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। शहर को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए जलनिकासी, पेयजल, सड़क, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर एक साथ काम करना होगा। उन्होंने नागरिकों को भरोसा दिलाया कि जिन योजनाओं की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है, उनके क्रियान्वयन पर नगर निगम लगातार निगरानी रखेगा और जनता को समय-समय पर इसकी जानकारी भी दी जाएगी।

स्वच्छता चौपाल की सबसे अलग तस्वीर वरिष्ठ नागरिकों की सक्रिय मौजूदगी और उनके हाथों स्वच्छता गीत की लॉन्चिंग रही। कार्यक्रम में मौजूद वरिष्ठ नागरिकों ने स्वच्छता के संदेश को केवल सुनने के बजाय उसे समाज तक पहुंचाने की जिम्मेदारी अपने हाथों में लेने का संदेश दिया। स्वच्छता गीत के माध्यम से लोगों को साफ-सफाई, कचरा पृथक्करण, सार्वजनिक स्थानों की देखभाल और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने की पहल की गई। महापौर दीपक बाली ने कहा कि शहर की पुरानी पीढ़ी ने काशीपुर को बदलते हुए देखा है और उनके अनुभव आज की पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों का किसी अभियान से जुड़ना अपने आप में समाज के लिए सकारात्मक संदेश है। स्वच्छता गीत की लॉन्चिंग को उन्होंने जनचेतना की दिशा में एक रचनात्मक कदम बताया। उनका कहना था कि संदेश केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे ऐसे माध्यमों से लोगों तक पहुंचाया जाना चाहिए जिन्हें बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी आसानी से समझ सकें। इस अवसर पर वरिष्ठ नागरिकों ने भी स्वच्छता को लेकर अपनी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और नागरिकों से अपील की कि वे अपने घर से अभियान शुरू करें। चौपाल में यह भावना स्पष्ट दिखाई दी कि स्वच्छता केवल नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि शहर के हर नागरिक का कर्तव्य है। स्वच्छता गीत की लॉन्चिंग ने कार्यक्रम को भावनात्मक और जनसरोकार से जुड़ा स्वरूप दिया तथा यह संदेश दिया कि काशीपुर को स्वच्छ बनाने की मुहिम में हर उम्र के नागरिक की भागीदारी जरूरी है।

चौपाल में महापौर ने आगामी 15 अगस्त के कार्यक्रम को लेकर भी नागरिकों को आमंत्रित किया। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता दिवस पर नगर निगम परिसर में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा और इसके बाद तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी। इस यात्रा में जनप्रतिनिधि, नगर निगम अधिकारी-कर्मचारी और नागरिक हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर पुराने बाजार की ओर बढ़ेंगे तथा अलीखा चौक पहुंचेंगे। वहां लगभग 135 फीट ऊंचे राष्ट्रध्वज का लोकार्पण किया जाएगा। महापौर ने कहा कि इतना ऊंचा तिरंगा काशीपुर की पहचान और गौरव का नया प्रतीक बनेगा। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे बड़ी संख्या में इस कार्यक्रम में शामिल हों और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान तथा राष्ट्रप्रेम का संदेश मजबूत करें। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के साथ शहर की सामाजिक चेतना को मजबूत करना भी नगर निगम की जिम्मेदारी है। स्वच्छता चौपाल से लेकर तिरंगा यात्रा तक दोनों कार्यक्रमों का उद्देश्य जनता को सक्रिय भागीदारी से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि काशीपुर की समस्याओं का समाधान केवल सरकारी कार्यालयों में बैठकर नहीं हो सकता। इसके लिए मैदान में उतरना, नागरिकों से मिलना और उनकी बात सुनना जरूरी है। चौपाल में मौजूद लोगों ने भी शहर की समस्याओं पर अपनी बात रखी और अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद किया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि आने वाले समय में काशीपुर में स्वच्छता, जलनिकासी, पेयजल और नागरिक सहभागिता को लेकर बड़े स्तर पर काम करने की कोशिश की जा रही है। अब चुनौती योजनाओं को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारने और जनता को उनकी वास्तविक उपयोगिता महसूस कराने की है।

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