- स्मार्ट मीटर शिकायतों पर सख्त हुई उपाकालि, इंस्टॉलेशन रोककर मेगा कैम्पों से समाधान शुरू
- बढ़ती उपभोक्ता समस्याओं पर बड़ा फैसला, स्मार्ट मीटर बदलने पर रोक और विशेष कैम्प घोषित
- उपाकालि की कड़ी कार्यवाही, स्मार्ट मीटर त्रुटियों के निस्तारण तक बदली प्रक्रिया ठप
- मीटर विवादों से नाराज़ उपभोक्ताओं को राहत, विभाग ने रोक लगाकर मेगा कैम्प अनिवार्य किए
- शिकायतों की बाढ़ के बाद विभाग सक्रिय, केवल एनएससी-आईडीएफ मीटर बदले जाएंगे कैम्पों में समाधान
देहरादून। स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर लगातार बढ़ रही असंतोषजनक प्रतिक्रियाओं और उपभोक्ताओं व जनप्रतिनिधियों की बढ़ती शिकायतों ने विभाग के शीर्ष अधिकारियों को गम्भीरता से सोचने पर मजबूर कर दिया है। इसी पृष्ठभूमि में मंगलवार को प्रबन्ध निदेशक उपाकालि की अध्यक्षता में आयोजित महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक एक निर्णायक मोड़ साबित हुई, जहाँ स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली, इंस्टॉलेशन प्रक्रिया और उपभोक्ता समस्याओं की गहन पड़ताल की गई। बैठक के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि कई क्षेत्रों से उपभोक्ताओं को अधिक बिल, अचानक बढ़े रीडिंग, तकनीकी त्रुटियों और कनेक्टिविटी बाधाओं से जुड़ी शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही हैं। प्रबन्ध निदेशक ने बैठक में उपस्थित अधिकारियों को यह निर्देश दिया कि जब तक सभी पेंडिंग शिकायतों का समाधान संतोषजनक रूप से नहीं किया जाता, तब तक किसी भी उपभोक्ता के सामान्य स्मार्ट मीटर को बदलने की प्रक्रिया तुरंत रोक दी जाए। उन्होंने साफ कहा कि उपभोक्ताओं को अनावश्यक असुविधा या भ्रम की स्थिति में नहीं डाला जा सकता और विभाग की जिम्मेदारी है कि समाधान पहले हो, बदलाव बाद में।
इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए यह भी तय किया गया कि इस अवधि में केवल उन कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनमें एन०एस०सी० तथा आई०डी०एफ० श्रेणी के मीटरों को बदला जाना आवश्यक है। यह निर्णय इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि कई क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया बिना उपभोक्ता जागरूकता के शुरू की गई थी, जिसके चलते लोगों में आशंकाएँ और भ्रम भी बढ़ने लगा था। प्रबन्ध निदेशक ने बैठक में यह भी कहा कि विद्युत उपभोक्ता केवल उपभोगकर्ता नहीं, बल्कि विभाग के सहयोगी हैं, और उनके भरोसे को बनाए रखना सबसे पहली जिम्मेदारी है। इसीलिए ऐसे सभी मामलों में पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए, पहले शिकायतें सुनी जाएँ, फिर तकनीकी टीम मौके पर जाकर वास्तविक कारणों की पुष्टि करे और उसके बाद ही किसी प्रकार की इंस्टॉलेशन या बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। इससे विभाग पर बढ़ रहे दबाव में कमी आएगी और उपभोक्ताओं का भरोसा भी तेजी से बहाल होगा।

बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि कई शिकायतें ए०एम०आई० प्रणाली की गड़बड़ियों के कारण बढ़ी हैं, जिनमें मीटर का नेटवर्क से न जुड़ना, डेटा ट्रांसफर में त्रुटियाँ और रीडिंग में अनियमितताएँ प्रमुख थीं। उपभोक्ता लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि बिना स्पष्ट कारण के बिलों में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज हो रही है। इन हालातों को गंभीरता से लेते हुए प्रबन्ध निदेशक ने विभागीय अधिकारियों को कठोर निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर उपभोक्ता शिकायतों को हल्के में न लिया जाए और हर शिकायत का समयबद्ध और तकनीकी रूप से सटीक समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी उपभोगकर्ता को भ्रमित करने या बिना अनुमति मीटर बदलने जैसी घटनाएँ बर्दाश्त नहीं की जाएँगी। यह स्पष्ट संदेश पूरे विभाग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि अब जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
इन निर्देशों के बाद विभाग ने एक नया निर्णय लेते हुए यह आदेश जारी किया है कि उपखण्ड स्तर पर स्मार्ट मीटरों से सम्बंधित समस्याओं के निस्तारण हेतु विशेष मेगा कैम्पों का आयोजन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। इन कैम्पों में ए०एम०आई०एस०पी० के सभी सम्बद्ध कार्मिकों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी ताकि उपभोक्ताओं की शिकायतें सीधे तकनीकी विशेषज्ञों के सामने रखी जा सकें और मौके पर ही उनका समाधान संभव हो सके। यह कदम इसलिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक अधिकांश उपभोक्ताओं को अपनी शिकायतें दर्ज कराने के लिए कई स्तरों से गुजरना पड़ता था, और जवाब आने में भी लंबा समय लग जाता था। मेगा कैम्पों से इस प्रक्रिया में तेजी आएगी और उपभोक्ताओं को संतोषजनक समाधान एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा सकेगा।

विभाग का मानना है कि यह निर्णय उपभोक्ता सुविधा बढ़ाने के साथ-साथ पारदर्शी विद्युत प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करेगा। साथ ही, प्रबन्ध निदेशक उपाकालि के इस निर्णायक रुख से स्पष्ट हो गया है कि अब स्मार्ट मीटर व्यवस्था में सुधार के लिए केवल कागजी निर्देश नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई लागू की जाएगी। विभाग इस प्रयास में जुटा है कि आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं से मिलने वाली शिकायतों में उल्लेखनीय कमी आए और स्मार्ट मीटर व्यवस्था तकनीकी रूप से अधिक विश्वसनीय तथा उपभोक्ता-हितैषी बने। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन निर्देशों का क्रियान्वयन कितनी तेजी और गंभीरता से होता है, क्योंकि यही आने वाले समय में विभाग की छवि और उपभोक्ता विश्वास को निर्धारित करेगा।



