देहरादून। वरिष्ठ नेताओं के बीच अचानक बढ़ी हलचल के बीच उत्तराखंड कांग्रेस में पिछले कुछ दिनों से simmer हो रहा विवाद सोमवार को और तीव्र हो गया, जब सिख समाज को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी ने राजनीतिक वातावरण को गरम कर दिया। इस पूरे प्रकरण के चलते कांग्रेस हाईकमान ने उत्तराखंड के कई दिग्गज नेताओं को तत्काल प्रभाव से दिल्ली बुलाने का निर्णय लिया है। राजधानी में बैठकों का दौर तेज होने की खबरें हैं और माना जा रहा है कि पार्टी आलाकमान इस विवाद को यहीं शांत करने की कोशिश करेगा, क्योंकि चुनावी साल की तैयारियों के बीच ऐसा विवाद पार्टी को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि जिस प्रकार विरोध लगातार बढ़ रहा है, उससे स्पष्ट है कि मामला अब केवल एक टिप्पणी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी राजनीतिक प्रतिध्वनि व्यापक रूप से महसूस की जा रही है। हाईकमान इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए यह समझने की कोशिश करेगा कि यह विवाद कैसे भड़का और क्या इसे रोका जा सकता था।
दिल्ली में प्रस्तावित बैठक के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, हरीश रावत, प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत, यशपाल आर्य और करन महारा को बुलाए जाने की सूचना ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार ये सभी नेता 9 दिसंबर को दिल्ली पहुंचेंगे, जहाँ हरक सिंह रावत द्वारा सिखों से जुड़े कथित टिप्पणी को लेकर गंभीर चर्चा होने की संभावना है। हाल के दिनों में विभिन्न जिलों में जिस प्रकार सिख समुदाय ने खुलकर नाराज़गी जताई और कांग्रेस नेतृत्व के प्रति असंतोष प्रकट किया, उसे देखते हुए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस जिसमें वर्षों से सिख नागरिकों का एक बड़ा समर्थन रहा है, वहाँ इस तरह की टिप्पणी पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचा सकती है। इसीलिए यह बैठक केवल एक घटना के समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले समय में पार्टी की दिशा और जनसमर्थन पर भी इसका असर पड़ सकता है।
विवाद की शुरुआत उस समय हुई, जब चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत कुछ दिन पहले देहरादून में बार एसोसिएशन के धरने में समर्थन देने पहुंचे थे। वहां बोलते समय उन्होंने “सरदार जी 12 बज गए” जैसा व्यंग्यपूर्ण वाक्य कह दिया, जिसे सिख समाज ने बेहद आपत्तिजनक माना। यह टिप्पणी कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया पर फैल गई और धीरे-धीरे विरोध की चिंगारी राज्यभर में फैल गई। हरक सिंह रावत ने बाद में इसे केवल ‘मजाक’ बताया, परन्तु समुदाय यह तर्क स्वीकार करने को तैयार नहीं दिखा। लोगों का कहना था कि जिस समाज ने देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर किया, उस पर इस तरह का मजाक किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकता। इस वजह से यह बयान केवल असावधानी नहीं बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता की अनदेखी के रूप में देखा गया, जिससे मामला और गंभीर होता गया।
प्रतिक्रिया का दायरा जल्द ही बढ़ते हुए कई जिलों तक पहुंच गया। कई स्थानों पर सिख समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए और हरक सिंह रावत के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। कुछ स्थानों पर तो प्रदर्शनकारियों ने उनका पुतला भी फूंका, जिससे यह साफ हो गया कि यह मामला केवल राजनीतिक दायरे में सीमित नहीं है, बल्कि भावनात्मक रूप से समुदाय को आहत कर गया है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि किसी भी समाज की अस्मिता और इतिहास का उपहास सहन नहीं किया जा सकता और यह टिप्पणी स्पष्ट रूप से उस शौर्य और त्याग का मजाक है जिसके लिए सिख समुदाय दुनिया भर में जाना जाता है। कई संगठनों ने भी इस मामले पर अपनी आवाज उठाई और मांग की कि कांग्रेस नेतृत्व को जल्द से जल्द इस मुद्दे पर ठोस निर्णय लेना चाहिए, ताकि समुदाय को यह महसूस हो कि उसकी भावनाओं का सम्मान किया जा रहा है।
विरोध का स्वर इतना तीखा हो गया कि हरक सिंह रावत को सार्वजनिक रूप से सफाई देने के साथ-साथ धार्मिक स्थान पर जाकर माफी मांगने तक की नौबत आ गई। बढ़ते दबाव के बीच वे गुरुद्वारा पोंटा साहिब पहुंचे, जहाँ उन्होंने नतमस्तक होकर क्षमा याचना की और सामाजिक सद्भाव की अपील की। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे गुरु के दरबार में जाकर अपने मन की बात कह आए हैं और यदि किसी का दिल दुखा है तो वे क्षमा चाहते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने वहां जूता सेवा और लंगर सेवा कर मन की कचोट को देवालय के सामने स्वीकार किया। हालांकि उनकी इस पहल को कुछ लोगों ने सकारात्मक माना, परंतु समुदाय का एक बड़ा वर्ग अब भी चाहता है कि पार्टी इस मामले पर स्पष्ट कार्रवाई करे और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। यही वजह है कि हाईकमान ने वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली बुलाकर पूरे प्रकरण की गहन समीक्षा करने का फैसला किया है।



