नई दिल्ली। स्वतंत्रता के 79वें वर्षगाँठ के अवसर पर सम्पूर्ण भारतवर्ष ने उत्साह और गर्व के साथ आज़ादी का पर्व मनाया, वहीं संत निरंकारी मिशन ने इसे आत्मिक स्वतंत्रता के प्रतीक रूप में ‘मुक्ति पर्व’ के रूप में श्रद्धा और भक्ति के साथ बड़े भव्य अंदाज में मनाया। इस अवसर पर उपस्थित सभी भक्तों और श्रद्धालुओं ने अपने हृदय में उस दिव्य ऊर्जा का अनुभव किया, जो मानव जीवन को आत्मिक चेतना और सच्ची मुक्ति की ओर ले जाती है। मुक्ति पर्व केवल किसी स्मृति का आयोजन नहीं है, बल्कि यह जीवन में सेवा, समर्पण और भक्ति के मार्ग को दर्शाने वाला दिव्य अवसर है। मिशन की इस भव्य सभा में उपस्थित लोगों ने संतों के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को भी परमात्मा की भक्ति और सेवा के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया।
दिल्ली स्थित निरंकारी ग्राउंड नं. 8, बुराड़ी रोड पर आयोजित इस भव्य मुक्ति पर्व समागम की अध्यक्षता निरंकारी राजपिता रमित जी ने पवित्र भाव से की। दिल्ली एवं एन.सी.आर. के विभिन्न क्षेत्रों से आए हज़ारों श्रद्धालुओं ने इस पावन अवसर में भाग लेकर सतगुरु के आदेशानुसार उन महान संतों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने मानवता की सेवा में अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। भक्तों ने इस अवसर पर संतों के आदर्शों और शिक्षाओं को आत्मसात करते हुए यह संकल्प लिया कि उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए जीवन को सेवा, भक्ति और त्याग के रंगों से सजाया जाएगा। इस प्रकार यह पर्व एकात्मिक चेतना और आत्मिक उन्नति का प्रतीक बन गया।

विश्वभर में मिशन की सभी शाखाओं ने भी मुक्ति पर्व के अवसर पर विशेष सत्संग का आयोजन किया, जिसमें भक्तों ने संतों को नमन कर उनके जीवन से प्रेरणा प्राप्त की। काशीपुर शाखा में सेवा दल की रैली के साथ ही इस मुक्ति पर्व की शुरुआत हुई, जो श्रद्धालुओं के जोश और भक्ति से परिपूर्ण रही। तत्पश्चात निरंकारी भवन पर विशाल सत्संग का आयोजन मुखी राजेंद्र अरोड़ा जी की हजूरी में संपन्न हुआ, जिसमें सैकड़ों भक्तों ने भाग लिया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने शहनशाह बाबा अवतार सिंह जी, जगत माता बुद्धवंती जी, राजमाता कुलवंत कौर जी, माता सविंदर हरदेव जी, भाई साहब प्रधान लाभ सिंह जी सहित अन्य स्थानीय समर्पित भक्तों को याद कर उनके जीवन से सीख ली।

निरंकारी राजपिता रमित जी ने इस पावन अवसर पर उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि 15 अगस्त केवल देश की स्वतंत्रता का प्रतीक नहीं, बल्कि संतजन इसे मुक्ति पर्व के रूप में आत्मिक चेतना और भक्ति के संदेश के साथ मनाते हैं। जैसे झंडा और देशभक्ति गीत स्वतंत्रता का प्रतीक हैं, वैसे ही एक भक्त का जीवन सेवा, समर्पण और भक्ति की खुशबू से भरा होता है। राजपिता जी ने आगे कहा कि सद्गुरु द्वारा दिया गया ब्रह्मज्ञान असली स्वतंत्रता है, जो मनुष्य को अहंकार और ‘मैं’ की बेड़ियों से मुक्त कर देता है। इस संदेश ने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय में एक नई चेतना और भक्ति की भावना को जागृत किया।

भक्ति और सेवा के इस वातावरण में उन्होंने जगत माता बुद्धवंती जी, शहनशाह बाबा अवतार सिंह जी, राजमाता कुलवंत कौर जी और माता सविंदर हरदेव जी के जीवन को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। राजपिता जी ने कहा कि सच्ची भक्ति केवल शब्दों या वर्षों की गिनती से नहीं, बल्कि समर्पण और आचरण की गहराई से मापी जाती है। मुक्ति पर्व इस बात की बार-बार याद दिलाता है कि नाम का उच्चारण मात्र नहीं, बल्कि नाम में रमकर जीवन बिताना ही वास्तविक सफलता है। उनके विचारों ने श्रद्धालुओं के जीवन में आत्मनिरीक्षण और भक्ति की प्रेरणा का संचार किया।
मुक्ति पर्व का इतिहास भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस पर्व की शुरुआत 15 अगस्त 1964 को जगत माता बुद्धवंती जी की स्मृति में ‘जगत माता दिवस’ के रूप में हुई थी। 17 सितंबर 1969 को बाबा अवतार सिंह जी के ब्रह्मलीन होने के पश्चात इसे 1970 से ‘जगत माता-शहनशाह दिवस’ के रूप में मनाया जाने लगा। 1979 में प्रथम प्रधान भाई साहब लाभ सिंह जी के ब्रह्मलीन होने के बाद बाबा गुरबचन सिंह जी ने इसे ‘मुक्ति पर्व’ के नाम से आयोजित करने का निर्णय लिया। 2018 से माता सविंदर हरदेव जी को भी श्रद्धा सुमन अर्पित किए जाने की परंपरा शुरू हुई। इस प्रकार मुक्ति पर्व निरंकारी मिशन के भक्तों के लिए आत्मिक चेतना और भक्ति की गहन अनुभूति का दिन बन गया।

मुक्ति पर्व की सार्थकता इस बात में निहित है कि जैसे भौतिक स्वतंत्रता राष्ट्र की उन्नति के लिए आवश्यक है, वैसे ही आत्मिक स्वतंत्रता यानी जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मानव जीवन की परम उपलब्धि है। यह मुक्ति केवल ब्रह्मज्ञान की दिव्य ज्योति से ही संभव है, जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ती है और जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध कराती है। इस पावन आयोजन के माध्यम से लाखों भक्तों और श्रद्धालुओं ने जीवन को उच्चतम आध्यात्मिक लक्ष्य की ओर अग्रसर करने का संकल्प लिया। स्थानीय निरंकारी मीडिया प्रभारी प्रकाश खेड़ा ने इस आयोजन और मुक्ति पर्व की गहन जानकारी साझा की।
इस प्रकार संत निरंकारी मिशन का मुक्ति पर्व न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानव जीवन को सेवा, भक्ति और समर्पण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है। देशभक्ति और आत्मिक चेतना के इस अद्भुत संगम ने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को जीवन की सच्ची स्वतंत्रता का अनुभव कराते हुए उनके हृदय में भक्ति और त्याग की दिव्य ज्योति प्रज्वलित की।



