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श्रीराम इंस्टिट्यूट में प्रबंधन के गुर सिखाने डॉ0 विजय कुमार चौहान ने दी भविष्य की शानदार टिप्स

संस्थान में आयोजित विशेष गेस्ट लेक्चर के दौरान विशेषज्ञ डॉ0 विजय कुमार चौहान ने छात्र-छात्राओं को शिक्षा प्रणाली में संपूर्ण गुणवत्ता प्रबंधन के आधुनिक सिद्धांतों और संस्थागत प्रभावशीलता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले गुप्त मंत्र सिखाए।

काशीपुर। श्रीराम इंस्टिट्यूट के सेमीनार हॉल में आज प्रबंधन जगत की नई बारीकियों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मानकों को समझने के लिए एक भव्य बौद्धिक समागम का आयोजन किया गया। संस्थान के प्रबंधन विभाग द्वारा आयोजित इस विशेष सत्र का मुख्य विषय “शिक्षा प्रणाली में संपूर्ण गुणवत्ता प्रबंधन” (Total Quality Management in the Education System) रखा गया था, जिसने भविष्य के प्रबंधकों को सफलता के नए गुर सिखाए। कार्यक्रम की महत्ता को देखते हुए पूरे सभागार में छात्र-छात्राओं और प्रबुद्ध शिक्षकों की भारी उपस्थिति रही, जो शिक्षा के क्षेत्र में आने वाले बदलावों और गुणवत्ता के सिद्धांतों को गहराई से समझने के लिए उत्सुक नजर आए। इस गरिमामयी आयोजन का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि छात्रों को औद्योगिक जगत की व्यवहारिक चुनौतियों और शैक्षिक संस्थानों में संस्थागत प्रभावशीलता को बढ़ाने के आधुनिक ढांचों से रूबरू कराना था, ताकि वे कल के प्रतिस्पर्धी युग में खुद को एक कुशल लीडर के रूप में स्थापित कर सकें।

इस विशेष गेस्ट लेक्चर के मुख्य वक्ता के रूप में केवीए इंजीनियरिंग एंड कंसल्टेन्ट (KVA Engineering and Consultant) के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ0 विजय कुमार चौहान ने शिरकत की, जिन्होंने अपने वर्षों के अनुभव को छात्रों के बीच अत्यंत प्रभावशाली ढंग से साझा किया। डॉ0 विजय कुमार चौहान ने अपने व्याख्यान में इस बात पर विशेष बल दिया कि आज के दौर में शैक्षिक संस्थानों के लिए केवल शिक्षा देना ही काफी नहीं है, बल्कि निरंतर सुधार और बेहतर छात्र परिणामों को प्राप्त करने के लिए गुणवत्ता के कड़े सिद्धांतों को अपनाना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने समझाया कि किस तरह ‘टोटल क्वालिटी मैनेजमेंट’ जैसे ढांचे का उपयोग कर शिक्षा की गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव लाए जा सकते हैं और संस्थान अपनी कार्यक्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं। उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़ों और उदाहरणों ने छात्रों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि कैसे एक सुव्यवस्थित प्रबंधन ढांचा न केवल छात्रों के करियर को संवारता है, बल्कि पूरे संस्थान की साख को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करता है।

बौद्धिक चर्चा की इस कड़ी में संस्थान के निदेशक प्रो0 डॉ0 योगराज सिंह ने मुख्य अतिथि डॉ0 विजय कुमार चौहान का स्वागत एक खूबसूरत पुष्पगुच्छ भेंट कर किया और उनके आगमन को संस्थान के लिए गौरव का विषय बताया। प्रो0 डॉ0 योगराज सिंह ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि किताबी ज्ञान की अपनी सीमाएं होती हैं, लेकिन इस प्रकार के गेस्ट लेक्चर्स छात्र जीवन के लिए वास्तविक मील का पत्थर साबित होते हैं। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि सफलता की पहली सीढ़ी एक अच्छा श्रोता होना है; यदि आप एकाग्रचित होकर अनुभवी वक्ताओं को सुनते हैं, तभी आप उनके ज्ञान को आत्मसात कर भविष्य में उसे अपने कार्यक्षेत्र में लागू कर सकते हैं। निदेशक ने इस बात पर जोर दिया कि छात्रों को ऐसे सत्रों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए और प्रश्नोत्तर के माध्यम से अपनी हर छोटी-बड़ी शंका का समाधान करना चाहिए, क्योंकि जिज्ञासु मन ही भविष्य में नवाचार की नींव रखता है।

कार्यक्रम की सफलता में संस्थान के प्राचार्य डॉ0 एस0 एस0 कुशवाहा की गरिमामयी उपस्थिति ने भी चार चांद लगा दिए, जिन्होंने शिक्षा में गुणवत्ता के समावेश को समय की मांग बताया। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां प्रबंधन विभाग के समस्त शिक्षकगण अपने शिष्यों का मार्गदर्शन करते नजर आए। सहायक प्राध्यापिका डॉ0 फरहा नईम ने अपनी सधी हुई और प्रभावशाली आवाज में मंच का बेहतरीन संचालन किया, जिससे पूरा कार्यक्रम एक व्यवस्थित प्रवाह में चलता रहा। उन्होंने प्रत्येक सत्र के बीच वक्ताओं के विचारों को संक्षेप में सारगर्भित करते हुए छात्रों की रुचि को अंत तक बनाए रखा। संस्थान के प्रबंधन विभाग के लिए यह आयोजन न केवल एक शैक्षणिक गतिविधि थी, बल्कि एक ऐसा अनुभव था जिसने छात्रों को उद्योग जगत की कार्यप्रणाली और शैक्षिक उत्कृष्टता के बीच के सेतु को समझने में अमूल्य सहायता प्रदान की।

जैसे-जैसे व्याख्यान अपने समापन की ओर बढ़ा, छात्र-छात्राओं ने डॉ0 विजय कुमार चौहान से कई तकनीकी और प्रबंधन से जुड़े तीखे सवाल पूछे, जिनका उन्होंने अत्यंत सरलता और तार्किक ढंग से उत्तर दिया। संस्थान के विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने इस बात को स्वीकार किया कि ‘संपूर्ण गुणवत्ता प्रबंधन’ के सिद्धांतों को जानकर उन्हें यह समझ आया कि कैसे छोटे-छोटे निरंतर सुधार एक बड़ी संस्थागत जीत का मार्ग प्रशस्त करते हैं। प्राचार्य डॉ0 एस0 एस0 कुशवाहा ने अंत में सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि श्रीराम इंस्टिट्यूट भविष्य में भी ऐसे ज्ञानवर्धक सत्रों का आयोजन करता रहेगा ताकि उनके छात्र न केवल डिग्री धारक बनें बल्कि कुशल प्रबंधन विशेषज्ञ बनकर देश की सेवा करें। इस अवसर पर प्रबंधन विभाग के शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे, जिन्होंने इस सत्र को अपनी शैक्षणिक यात्रा का एक यादगार हिस्सा बताया और अपनी डायरी में भविष्य के लिए महत्वपूर्ण नोट्स दर्ज किए।

काशीपुर के इस प्रमुख संस्थान में हुआ यह गेस्ट लेक्चर आने वाले समय में प्रबंधन के छात्रों के लिए दिशा-निर्देशक का कार्य करेगा, क्योंकि इसमें डॉ0 विजय कुमार चौहान द्वारा बताए गए सूत्र सीधे तौर पर करियर की ग्रोथ से जुड़े थे। प्रो0 डॉ0 योगराज सिंह की दूरदर्शिता और डॉ0 फरहा नईम के कुशल संचालन ने यह सिद्ध कर दिया कि श्रीराम इंस्टिट्यूट शिक्षा की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं करता है। कार्यक्रम के अंत में सभी छात्र ऊर्जा से लबरेज नजर आए और उन्होंने संकल्प लिया कि वे डॉ0 चौहान द्वारा बताए गए गुणवत्ता के इन सिद्धांतों को अपनी व्यावहारिक जीवनशैली का हिस्सा बनाएंगे। इस तरह एक सफल बौद्धिक विमर्श के बाद यह कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसने शिक्षा और उद्योग के बीच के सामंजस्य को एक नई परिभाषा दी। संस्थान की यह पहल निस्संदेह छात्रों के सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होगी और उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक व दक्ष प्रबंधक के रूप में तैयार करेगी।

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