काशीपुर। शहीदी नगर कीर्तन की ऐतिहासिक यात्रा आज काशीपुर से दिल्ली के लिए रवाना हुई तो पूरा माहौल श्रद्धा और आस्था से ओतप्रोत दिखाई दिया। सिख समाज के नौवें गुरु श्री तेगबहादुर जी तथा उनके साथ शहीद हुए भाई मती दास जी, भाई सती दास जी और भाई दयाला जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित इस नगर कीर्तन का आयोजन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, अमृतसर द्वारा किया गया है। असम से आरंभ होकर लगभग ढाई हजार किलोमीटर का सफर तय करने के बाद नगर कीर्तन बीती रात काशीपुर पहुंचा और बड़े गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब में रात्रि विश्राम करने के पश्चात सुबह दिल्ली के लिए प्रस्थान कर गया। इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी श्रद्धा भाव से शामिल हुए और उन्होंने गुरु तेगबहादुर जी के अमर बलिदान को प्रणाम करते हुए अपने विचार साझा किए।
काशीपुर में गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब के प्रांगण में जब यह नगर कीर्तन पहुंचा तो श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने पुष्पवर्षा कर नगर कीर्तन का स्वागत किया और गुरु घर के शब्दों की गूंज से वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंग गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी बीती शाम काशीपुर पहुंचे थे और उन्होंने यहीं पर रात्रि विश्राम किया। अगले दिन प्रातः वे स्वयं गुरुद्वारा ननकाना साहिब पहुंचे और नगर कीर्तन की विदाई में सम्मिलित हुए। उन्होंने कहा कि गुरु तेगबहादुर जी का बलिदान केवल सिख समाज ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने अत्याचार के सामने सिर झुकाना स्वीकार नहीं किया और सत्य तथा धर्म की राह पर चलते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि गुरु तेगबहादुर जी का जीवन संदेश अन्याय और अधर्म के खिलाफ लड़ने की शक्ति देता है। उन्होंने कहा कि धर्मगुरुओं ने अपने जीवन के द्वारा हमें यह सिखाया कि सत्य के मार्ग पर अडिग रहना ही वास्तविक साहस है। जब हम उनके जीवन प्रसंगों को पढ़ते हैं तो हमें ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का सपना मूर्त रूप में दिखाई देता है। धामी ने यह भी कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सभी धर्मों और समाजों को समान अवसर दिए जा रहे हैं और भाईचारे की भावना को मजबूत किया जा रहा है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की उन योजनाओं का भी उल्लेख किया जो सिख समाज और धार्मिक स्थलों के लिए ऐतिहासिक कदम साबित हुई हैं। उन्होंने कहा कि करतारपुर साहिब कॉरिडोर का निर्माण इस दिशा में सबसे बड़ा प्रयास है, जिसने सिख श्रद्धालुओं को पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा तक सीधा पहुंचने का अवसर दिया। इसके साथ ही अफगानिस्तान के काबुल से गुरु ग्रंथ साहिब को सुरक्षित भारत लाना एक बड़ा कार्य रहा। उन्होंने हेमकुंड साहिब की कठिन यात्रा को सरल बनाने के लिए प्रारंभ हुए 12.5 किलोमीटर लंबे रोपवे प्रोजेक्ट का जिक्र भी किया, जिसने लाखों श्रद्धालुओं के लिए यात्रा मार्ग को सुविधाजनक बना दिया है।
इस दौरान वातावरण में जो भावनात्मक लहर उठी उसने हर किसी को प्रभावित किया। श्रद्धालुओं ने अपने गुरुओं की शिक्षाओं और उनके बलिदानों को याद करते हुए संकल्प लिया कि वे भी सदैव धर्म, सत्य और न्याय की राह पर चलेंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे सिख समाज की शक्ति और प्रेरणा करार दिया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार धर्मगुरुओं द्वारा दिखाई गई राह पर ही आगे बढ़ रही है। धामी ने कहा कि यह सरकार न केवल धार्मिक स्थलों के संरक्षण में जुटी है बल्कि वहां तक पहुंचने के लिए सुविधाओं को भी सुदृढ़ कर रही है, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु सहजता से दर्शन कर सकें।

काशीपुर से दिल्ली की ओर बढ़ते इस नगर कीर्तन ने यह साबित कर दिया कि आस्था और बलिदान की परंपरा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी सदियों पहले थी। गुरु तेगबहादुर जी के शहीदी दिवस पर निकली यह यात्रा देशभर में संदेश दे रही है कि धार्मिक विविधता ही भारत की असली ताकत है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी और उनके प्रेरणादायी शब्दों ने श्रद्धालुओं को यह भरोसा दिलाया कि उत्तराखंड सरकार सिख समाज और सभी धर्मों के सम्मान और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। श्रद्धा, समर्पण और राष्ट्रीय एकता का यह अद्भुत संगम काशीपुर से दिल्ली तक इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है।



