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राधेहरी कॉलेज में सीट घोटाले पर फूटा छात्रों का गुस्सा प्रिंसिपल गुमशुदा घोषित

काशीपुर। राधेहरी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सोमवार को छात्र-छात्राओं का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने महाविद्यालय प्रबंधन के खिलाफ धरना प्रदर्शन करते हुए जमकर नारेबाजी की। महाविद्यालय पहले भी कई बार विवादों और चर्चाओं में रह चुका है और इस बार प्रवेश को लेकर उठे विरोध ने मामले को और गरमा दिया है। छात्रों का कहना है कि दर्जनों ऐसे विद्यार्थी हैं जिन्हें आवेदन के बाद भी प्रवेश से वंचित कर दिया गया है और अब प्रबंधन कोई ठोस जवाब देने को तैयार नहीं है। विरोध कर रहे छात्रों ने बताया कि अगर समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो सैकड़ों बच्चे उच्च शिक्षा से वंचित रह जाएंगे और उनका भविष्य अंधकार में धकेल दिया जाएगा। धरने पर बैठे छात्र-छात्राओं ने कड़ा रुख अपनाते हुए महाविद्यालय प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि सीटें नहीं बढ़ाई गईं तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षा का अधिकार सबका है और इसे सीमित सीटों की आड़ में छीनना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। छात्राओं ने ज्ञापन सौंपकर मांग की कि कॉलेज में तालाबंदी कर सीटें तुरंत बढ़ाई जाएं और समर्थ पोर्टल को अविलंब कॉलेज से जोड़ा जाए ताकि प्रवेश की प्रक्रिया आसान हो सके। आक्रोशित छात्रों ने यह भी कहा कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो मजबूरन सड़क पर उतरकर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी महाविद्यालय प्रबंधन की होगी।

छात्र नेता सेवन अमन चौधरी ने मिडिया से बात करते हुये महाविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि तालाबंदी शिक्षा से वंचित किए जा रहे विद्यार्थियों की पीड़ा का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि करीब डेढ़ महीने से प्रवेश प्रक्रिया चल रही है और शुरुआत में तो सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन पिछले एक सप्ताह से सीटें भरने के बाद हालात बिगड़ने लगे। राधेहरी स्नातकोत्तर महाविद्यालय पांच विधानसभाओं का इकलौता पीजी कॉलेज है, जहां हजारों विद्यार्थी शिक्षा की उम्मीद लेकर आते हैं। ऐसे में शासन को पहले से ही सीटें बढ़ाने का प्रावधान करना चाहिए था, लेकिन जानबूझकर इस मुद्दे की अनदेखी की गई। अमन चौधरी ने कहा कि शिक्षा सबका मौलिक अधिकार है और यदि छात्रों को इससे वंचित किया गया तो यह संविधान और लोकतंत्र दोनों के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 22 अगस्त को जिन बच्चों का प्रवेश हुआ था, उनका एडमिशन 24 अगस्त को केवल इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि फीस समय पर जमा नहीं हुई। जबकि बीच में रविवार होने के कारण न तो फॉर्म वेरीफाई हो सका और न ही फीस सबमिट करने का मौका मिला। अमन चौधरी का सवाल है कि बिना किसी आधिकारिक नोटिस या चेतावनी के प्रवेश निरस्त करना किस कानून के तहत वैध है। उन्होंने मांग रखी कि फीस पोर्टल दोबारा खोला जाए और किसी भी विद्यार्थी का प्रवेश निरस्त न किया जाए, अन्यथा छात्रों को मजबूर होकर उग्र आंदोलन और अनिश्चितकालीन तालाबंदी करनी पड़ेगी। सबसे चौंकाने वाला खुलासा उन्होंने यह किया कि जब आंदोलन की आहट प्रबल हुई तो प्राचार्य अचानक कॉलेज से गायब हो गईं। छात्रों का कहना है कि जब सीटें खत्म होने पर आंदोलन की संभावना बनी, तो प्राचार्य को चाहिए था कि वे सामने आकर समाधान करतीं, लेकिन वे गायब हो गईं। इतना ही नहीं, आक्रोशित छात्रों ने व्यंग्य करते हुए लापता प्राचार्य का पोस्टर भी चिपका दिया और पचास हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया। अमन चौधरी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जिनके पास अधिकार है, वही शासन से बात कर सकते हैं, लेकिन जब प्राचार्य ही सामने नहीं होंगी तो सीटें कैसे बढ़ेंगी और समाधान कैसे निकलेगा।

छात्र सेवन रिंकू बिष्ट ने तीखे शब्दों में महाविद्यालय प्रशासन पर हमला बोलते हुए कहा कि सबसे पहले तो मैं सभी का स्वागत भ्रष्टाचारियों के अड्डे पर करूंगा, क्योंकि आज हमारा महाविद्यालय पढ़ाई का मंदिर कम और भ्रष्टाचारियों का गढ़ ज्यादा बनता जा रहा है। यहां चोरी ही नहीं बल्कि सीधी डकैती तक हो रही है और हर काम में भ्रष्टाचार की बू साफ-साफ महसूस होती है। उन्होंने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि इतने बड़े क्षेत्र से छात्र-छात्राएं पढ़ाई करने आते हैं, लेकिन सीटों की संख्या जानबूझकर सीमित रखी गई है। रिंकू बिष्ट ने बताया कि जब एक हफ्ता पहले उन्होंने और अन्य छात्रों ने प्राचार्य से सीटें बढ़ाने की मांग की थी तो मैडम ने साफ कह दिया कि लेटर उपकुल सचिव को भेजो, मैं निजी तौर पर कुछ फॉरवर्ड नहीं करूंगी। उन्होंने कहा कि बहुत समझाने के बाद किसी तरह लेटर फॉरवर्ड तो हुआ, लेकिन उसका कोई जवाब तक नहीं आया। इसके बाद प्रवेश लेने वाले छात्रों को अचानक यह कहकर एडमिशन कैंसिल करने की धमकी दी गई कि फीस जमा नहीं हुई है। जबकि हकीकत यह रही कि सैकड़ों छात्रों को जीमेल पर कोई संदेश ही नहीं मिला, पोर्टल लॉगिन नहीं हुआ, और जब तक मैसेज ही नहीं गया तो वे फीस कैसे भरते? जो छात्र तकनीकी रूप से जागरूक थे उन्होंने फीस भर दी, लेकिन बाकी के बच्चों का एडमिशन बिना गलती के कैंसिल कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 24 और 25 तारीख को फीस जमा करने की अंतिम तारीख रखी गई, लेकिन बीच में रविवार पड़ने के कारण कॉलेज बंद रहा और फॉर्म वेरीफाई नहीं हो सके। फिर भी प्रशासन ने बच्चों के एडमिशन निरस्त कर दिए और अब ये बच्चे पढ़ाई से वंचित रह गए हैं। रिंकू बिष्ट ने कहा कि लगातार परेशान छात्र उनसे संपर्क कर रहे हैं और रो-रोकर कह रहे हैं कि अब वे क्या करें, कहां जाएं। उन्होंने आक्रोश जताते हुए कहा कि प्रिंसिपल मैम कई दिनों से कॉलेज से गायब हैं, न तो छात्रों से मिल रही हैं और न ही कोई जवाब दे रही हैं। शनिवार को कहा गया कि सोमवार को आएंगी, लेकिन आज भी वह कॉलेज में मौजूद नहीं हैं। प्रभारी अधिकारी छात्रों की एप्लीकेशन लेने से साफ इंकार कर रहे हैं और हर बार यही कहा जाता है कि मैम आएंगी तो बात होगी। रिंकू बिष्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब कॉलेज प्रशासन जवाब देने तक को तैयार नहीं है तो छात्रों का आक्रोश और उग्र होना तय है।

छात्र सेवक मोहम्मद दानिश ने बेहद तीखे अंदाज़ में महाविद्यालय प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि मैं पिछले तीन साल से यहां छात्र सेवक के रूप में कार्य कर रहा हूं और इस दौरान मैंने पूरे माहौल को नजदीक से देखा है। जबसे प्रोफेसर डॉक्टर सुमिता शिवात्री इस कॉलेज की प्रिंसिपल बनी हैं, तबसे इस महाविद्यालय की व्यवस्था पूरी तरह से चरमराकर रह गई है। छात्रों को पढ़ाई के लिए आने के बजाय दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और समस्याओं का समाधान करने के बजाय प्रशासन आंख मूंदकर बैठा है। प्रिंसिपल मैडम का उपस्थिति रिकॉर्ड पहले ही 68 प्रतिशत के आसपास था और आज भी वह लगातार कॉलेज से गायब रहती हैं। यही वजह है कि मैंने कॉलेज गेट पर ष्गुमशुदाष् का नोटिस लगाया, और अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो मैं स्वयं तालाबंदी करूंगा और तब तक ताला नहीं खोलूंगा जब तक संदेहकालीन कक्षाएं और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू नहीं हो जाती। दानिश ने यह भी कहा कि कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य सिन्हा सर, जिन्हें सम्मानित पद पर बैठाया गया है, छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। आज जब छात्र अपने फॉर्म पर हस्ताक्षर करवाने पहुंचे तो वे ऑफिस में बैठकर मोबाइल फोन में व्यस्त थे। मैं उनके सामने खड़ा होकर फोन करता रहा लेकिन उन्होंने कॉल काट दिया और छात्रों की बात सुनना भी जरूरी नहीं समझा। यही इस कॉलेज की वास्तविक तस्वीर है। छात्र धूप में परेशान हो रहे हैं और अधिकारी एसी कमरों में बैठकर फोन पर मशगूल हैं। गुस्से से भरे मोहम्मद दानिश ने कसम खाकर कहा कि यदि उन सभी छात्रों के रजिस्ट्रेशन होने के बावजूद एडमिशन नहीं होते तो मैं खुद धरने पर बैठूंगा और भूख हड़ताल करूंगा। अगर इस दौरान मुझे कोई अनहोनी होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ प्रिंसिपल डॉक्टर सुमिता शिवात्री और महाविद्यालय प्रशासन की होगी, जिसका लिखित पत्र भी मैंने जमा कर दिया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि मनमानी अब और नहीं चलने दी जाएगी। छात्रों का हक किसी भी कीमत पर छीना नहीं जा सकता और यदि शासन-प्रशासन आंख मूंदकर बैठा रहा तो आंदोलन और भी उग्र होगा, क्योंकि छात्रों से बड़ा इस देश में कोई नहीं है।

छात्र सेवक जतिन शर्मा ने बेहद आक्रोशित स्वर में कॉलेज प्रशासन की पोल खोलते हुए कहा कि देखिए, यहां ताला भी मेरे पास है और उसकी चाबी भी मेरी जेब में है। ताला मैंने आज खुद लगाया है, क्योंकि अब हालात असहनीय हो गए हैं। जब बच्चों के एडमिशन हो चुके थे तो पहले से दाखिला लिए छात्रों को डेढ़-डेढ़ महीने तक फीस जमा करने की मोहलत दी गई, लेकिन अभी जिन बच्चों ने दो दिन पहले ही एडमिशन लिया है उनके दाखिले बिना वजह रद्द कर दिए गए। क्या यही इस कॉलेज की व्यवस्था है? क्या अब एडमिशन इसी तरह होंगे? यह सवाल हर छात्र के मन में गूंज रहा है। जतिन शर्मा ने साफ कहा कि कई ऐसे छात्र-छात्राएं हैं जिनके पास अपनी फीस तक भरने की क्षमता नहीं होती, तब हम सब मिलकर, चाहे छात्र सेवक हों या छात्र नेता, उनकी मदद करते हैं। यहां तक कि कई छात्र तो आने-जाने का किराया भी मुश्किल से जुटा पाते हैं। ऐसे हालात में क्या बच्चों का काम यही रह गया है कि वे रोज-रोज आठ-आठ दिन तक चक्कर काटते रहें और अपने एडमिशन के लिए धक्के खाते रहें? यहां पर मॉर्निंग और इवनिंग दोनों क्लासेस की पढ़ाई होती है, लेकिन छात्रों से पूछिए कि क्या उनकी कक्षाएं नियमित रूप से चल रही हैं? ज्ञापन पर ज्ञापन मांगे जा रहे हैं, पर सवाल ये है कि आखिर कब तक छात्र अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सिर्फ कागजों का पुलिंदा इकट्ठा करते रहेंगे? उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि यहां जमा की जा रही चिट्ठियां सिर्फ रद्दी बनकर रह गई हैं, उनका कोई उपयोग नहीं हो रहा। यदि शासन-प्रशासन को एक फोन कॉल किया जाए तो काम तुरंत हो सकता है, लेकिन कॉलेज प्रबंधन ऐसा क्यों नहीं करता? आखिर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ क्यों हो रहा है? जतिन शर्मा ने कहा कि यहां खड़े सभी छात्र-छात्राएं किसी गलत मांग के लिए नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि अपने हक के लिए आवाज उठा रहे हैं। यही कारण है कि यहां पर छात्रों ने ‘गुमशुदगी तलाश’ का बोर्ड लगाया है, क्योंकि प्रिंसिपल मैडम की गैरहाजिरी अब बर्दाश्त से बाहर हो चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हालात नहीं सुधरे तो यह आंदोलन और भी उग्र होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी सिर्फ प्रशासन की होगी।

छात्रा सेविका पायल थापा ने कड़े शब्दों में कॉलेज प्रशासन को घेरते हुए कहा कि आज मजबूरी में हमें महाविद्यालय में तालाबंदी करनी पड़ी है। आप सामने देख सकते हैं कि जिन बच्चों का रजिस्ट्रेशन पूरा हो चुका है, उन्हीं को एडमिशन नहीं मिल रहा है। हमने सीटें बढ़ाने को लेकर कॉलेज प्रशासन और मैडम को दर्जनों ज्ञापन सौंपे, लेकिन हकीकत यह है कि मैडम कॉलेज आती ही नहीं हैं। यही वजह है कि गुस्साए छात्रों ने कॉलेज गेट पर उनके गुमशुदा होने के पोस्टर तक चिपका दिए हैं। स्थिति इतनी बदतर है कि जिन बच्चों का एडमिशन हो चुका है, उन्हें कोई मैसेज नहीं मिल रहे और जो मैसेज आ भी रहे हैं, पोर्टल पर लॉगिन ही नहीं हो पा रहा है। अब सवाल यह है कि बच्चा आखिर करे तो क्या करे? उन्होंने कहा कि मेरे पास खुद बीस से ज्यादा बच्चे आए, जिनका 22 तारीख को एडमिशन हुआ, लेकिन अब तक उन्हें कोई कन्फर्मेशन मैसेज नहीं मिला। न तो जीमेल पर मेल आया, न मोबाइल पर मैसेज, और न ही पोर्टल पर अपडेट है। यह लापरवाही सीधे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है। हम मांग करते हैं कि तुरंत उन बच्चों का एडमिशन कन्फर्म किया जाए और उनके लिए पोर्टल दोबारा खोला जाए। पायल थापा ने कहा कि कॉलेज में समस्या केवल एडमिशन की नहीं है, बल्कि सुविधाओं का भी बुरा हाल है। यहां न तो वॉशरूम की व्यवस्था है और न ही पीने के पानी की। छात्र-छात्राएं खुद अपने खर्चे पर पानी की बोतलें खरीदकर ला रहे हैं और फिर भी प्यासे रह जाते हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कॉलेज प्रशासन को चाहिए कि इन तमाम समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई करे, वरना आंदोलन और तेज होगा।

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कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

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