काशीपुर। रात के सन्नाटे में जेल रोड पर अचानक मची अफरातफरी ने पूरे इलाके को दहला दिया जब आईएस कलेक्शन नामक रेडीमेड कपड़ों की दुकान अचानक आग के लपटों में घिर गई। कुछ ही पलों में धुआं और आग का गुबार आसमान छूने लगा, लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और देखते ही देखते लाखों का सामान जलकर राख में तब्दील हो गया। बताया जा रहा है कि दुकान के मालिक शेखर दुआ ने रोजाना की तरह रात करीब सवा नौ बजे दुकान बंद की थी और घर चले गए थे। लेकिन कुछ ही देर बाद उन्हें पड़ोसी दुकानदार अयान और एक सरदार जी का फोन आया कि उनकी दुकान से धुआं उठ रहा है और अंदर आग की लपटें दिख रही हैं। खबर सुनते ही शेखर दुआ ने तत्काल अपने कर्मचारी को मौके पर भेजा और खुद भी दौड़ पड़े, परंतु जब तक वे पहुंचे, आग विकराल रूप ले चुकी थी।
घटनास्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार सबसे पहले बिजली के मीटर से चिंगारी निकली, जिसने देखते ही देखते पूरी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया। बगल की मोमो दुकान के संचालक ने बताया कि पहले तेज आवाज के साथ मीटर से धुआं निकला और फिर कुछ ही क्षणों में आईएस कलेक्शन की दुकान से लपटें उठने लगीं। आग इतनी भीषण थी कि दुकान में रखे करीब 15 से 16 लाख रुपए मूल्य के रेडीमेड कपड़े, पैकिंग सामग्री और फर्नीचर सबकुछ जलकर खाक हो गया। चारों ओर फैले धुएं और तेज तापमान के कारण आस-पास की दुकानों में भी नुकसान की आशंका से हड़कंप मच गया। लोग अपने स्तर पर बाल्टियों और पाइप से पानी डालने की कोशिश करते रहे, लेकिन आग पर काबू पाना संभव नहीं था।

दुकान के मालिक शेखर दुआ ने बताया कि रात करीब 9:15 बजे वह रोज़ की तरह कपड़ों की दुकान बंद कर घर लौट गए थे। लगभग आधे घंटे बाद उन्हें बगल की दुकानों के संचालक अयान और सरदार जी का फोन आया, जिन्होंने बताया कि उनकी दुकान के अंदर से धुआं और लपटें निकल रही हैं। सूचना मिलते ही उन्होंने तुरंत दुकान पर काम करने वाले कर्मचारी को मौके पर भेजा और स्वयं भी तुरंत वहां पहुंच गए। शेखर दुआ ने बताया कि पास की मोमो दुकान के संचालक ने उन्हें बताया कि सबसे पहले बिजली के मीटर से चिंगारी निकली, जिसके बाद शॉर्ट सर्किट होते-होते आग ने पूरी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया। उन्होंने बताया कि दुकान में रखे लगभग 15 से 16 लाख रुपये मूल्य के रेडीमेड कपड़े और अन्य सामग्री कुछ ही मिनटों में जलकर खाक हो गई।
आग की लपटों ने बगल की दुकान विनायक बुटीक को भी नहीं बख्शा, जिसे गरिमा शर्मा चलाती हैं। लपटों की गर्मी से बुटीक की फॉल सीलिंग गिर गई और भीतर रखे कपड़ों व अन्य सामग्री को भी भारी क्षति पहुंची। गरिमा शर्मा ने बताया कि उन्हें लगभग दो से तीन लाख रुपए का नुकसान हुआ है और आग की लपटों ने उनकी मेहनत से सजे बुटीक का सारा स्वरूप ही बदल दिया। पूरी घटना ने उन्हें मानसिक रूप से झकझोर दिया। उन्होंने कहा कि वह रोजाना अपनी दुकान समय पर बंद करती थीं, पर कभी नहीं सोचा था कि कुछ ही पलों में सब राख हो जाएगा। आग की भीषणता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बुटीक की दीवारें भी तपकर दरकने लगीं और आस-पास के मकानों की खिड़कियां झुलस गईं।
फायर ब्रिगेड को जब घटना की सूचना मिली, तो दो दमकल गाड़ियां तुरंत काशीपुर से रवाना की गईं। हालांकि, दमकल विभाग के अधिकारी चंदन सिंह बिष्ट के मुताबिक एक यूनिट को गलत सूचना के कारण रास्ता भटकना पड़ा और वह दूसरी दिशा में निकल गई, जिससे मौके पर पहुंचने में थोड़ा विलंब हो गया। इस देरी के चलते आग तेजी से फैलती चली गई और पूरी दुकान जलकर राख में तब्दील हो गई। अधिकारी ने बताया कि जब तक टीम पहुंची, तब तक आग अपने चरम पर थी। उन्होंने कहा कि आग पर काबू पाने के लिए टीम को लगातार कई घंटे मशक्कत करनी पड़ी, तब जाकर लपटों को नियंत्रित किया जा सका। मौके पर बिजली विभाग को भी बुलाया गया, ताकि आसपास के क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति को तत्काल रोका जा सके और कोई बड़ी दुर्घटना न घटे।
प्रत्यक्षदर्शी तुषार पाल ने बताया कि रात करीब दस बजे वे माता मंदिर रोड से पंजाबी सभा की ओर जा रहे थे, तभी उन्होंने आईएस कलेक्शन से उठता धुआं देखा। जब उन्होंने पास जाकर देखा तो आग इतनी भीषण थी कि लपटें सड़क तक आ रही थीं। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों ने मिलकर फायर ब्रिगेड को फोन किया और दुकान के बाहर खड़े होकर पानी डालने की कोशिश की, लेकिन आग की तीव्रता इतनी थी कि किसी की भी कोशिश काम नहीं आई। धीरे-धीरे भीड़ बढ़ती चली गई, पर सबकी आंखों के सामने दुकानदार की मेहनत का वर्षों का निवेश राख में बदलता चला गया। तुषार पाल ने कहा कि यह घटना बिजली व्यवस्था की लापरवाही का नतीजा लगती है, क्योंकि उन्होंने खुद देखा कि आग सबसे पहले मीटर बोर्ड से निकली थी।
काशीपुर नगर में इस घटना के बाद व्यापारियों में चिंता का माहौल बन गया है। दुकानदारों ने प्रशासन से अपील की है कि बाजारों में लगे पुराने बिजली कनेक्शन और मीटरों की तुरंत जांच करवाई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदी दोबारा न हो। वहीं, शेखर दुआ ने बताया कि उनके पास अब कुछ भी नहीं बचा, केवल जली हुई राख और टूटी अलमारियां ही बाकी हैं। उन्होंने कहा कि वे वर्षों से इस दुकान को चला रहे थे और यह उनकी रोजी-रोटी का एकमात्र साधन था। अब उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन से उचित मदद और जांच के बाद उन्हें न्याय मिलेगा। इस भीषण हादसे ने काशीपुर के व्यस्त बाजार को गहरे सदमे में डाल दिया है और लोगों के दिलों में सुरक्षा को लेकर कई सवाल छोड़ गया है।



