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मेयर दीपक बाली ने नगर निकायों की आर्थिक मजबूती के लिए रखी तीन अहम मांगें

काशीपुर में शहरी विकास सम्मेलन में सीएम धामी ने निकायों को बताया विकास की धुरी, मेयर दीपक बाली के सुझावों पर सकारात्मक कार्ययोजना का भरोसा दिया

मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य के नगर निकायों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने की दिशा में सरकार ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि साफ-सफाई, सड़क निर्माण, जल निकासी और यातायात सुधार जैसे विषय सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नगर निकायों को राज्य सरकार की ओर से सभी आवश्यक संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन है कि हर शहर आत्मनिर्भर और स्वच्छ बने, और इस लक्ष्य की प्राप्ति में नगर निकायों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के शहरों को इस दिशा में अग्रणी राज्य बनाने के लिए सरकार पूरी निष्ठा से कार्य कर रही है।

कार्यक्रम में उपस्थित महापौर दीपक बाली ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शहरी विकास विभाग द्वारा आयोजित यह सम्मेलन वास्तव में नगर निकायों की वास्तविक चुनौतियों और आवश्यकताओं को सामने लाने का अवसर प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में राज्य ने विकास की एक नई परिभाषा गढ़ी है, परंतु नगर निकायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी अब समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि निकायों को वित्तीय स्वावलंबन प्राप्त हो जाए, तो वे अपने स्तर पर जनता को बेहतर और त्वरित सुविधाएं देने में सक्षम होंगे। महापौर बाली ने कहा कि “सशक्त निकाय ही सशक्त शहर की नींव होते हैं, और सशक्त शहर ही राज्य को समृद्धि की ओर ले जा सकते हैं।”

महापौर दीपक बाली ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री के समक्ष तीन महत्वपूर्ण सुझाव रखे, जिनमें नगर निकायों की वित्तीय स्थिति को सुधारने और विकास कार्यों में तेजी लाने के ठोस उपाय शामिल थे। उन्होंने कहा कि नगर निकाय अपनी सड़कों पर स्ट्रीट लाइट सेवा निःशुल्क प्रदान करते हैं, लेकिन हर महीने इसका पूरा बिजली बिल स्वयं वहन करते हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि विद्युत विभाग नगर निकाय की भूमि पर अपने ट्रांसफार्मर और सब स्टेशन स्थापित करता है, परंतु इसके बदले में कोई किराया नहीं दिया जाता। इसलिए विद्युत विभाग द्वारा उपभोक्ताओं से वसूले जाने वाले बिजली बिल में से कम से कम दो प्रतिशत राशि नगर निकायों को दी जानी चाहिए, ताकि नगरों के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा सके।

अपने दूसरे प्रस्ताव में महापौर बाली ने कहा कि नगर निकाय क्षेत्र में जमीन, मकान और दुकानों की रजिस्ट्री से उपनिबंधक कार्यालय द्वारा वसूले जाने वाले विकास शुल्क का दो प्रतिशत हिस्सा संबंधित नगर निकायों को वापस मिलना चाहिए। उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 2009-10 तक यह व्यवस्था राज्य में लागू थी, जिसे बाद में बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि इस व्यवस्था को फिर से शुरू किया जाए, तो स्थानीय विकास कार्यों को गति मिलेगी और जनता को सीधे लाभ प्राप्त होगा। अपने तीसरे सुझाव में उन्होंने कहा कि जिला विकास प्राधिकरण जब किसी व्यावसायिक भवन के नक्शे को मंजूरी देता है, तो उससे विकास शुल्क वसूला जाता है। इस राशि का पचास प्रतिशत अंश नगर निकायों को दिया जाना चाहिए ताकि वे अपने क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं को क्रियान्वित कर सकें।

महापौर बाली ने यह भी कहा कि राज्य सरकार जिस प्रकार विभिन्न विभागों में किसी आवेदन या सेवा के लिए पैन कार्ड, आधार कार्ड जैसे दस्तावेज अनिवार्य करती है, उसी प्रकार नगर निकाय का एनओसी (No Objection Certificate) भी अनिवार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे निकायों को संपत्ति कर और यूजर चार्ज वसूली में मदद मिलेगी और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता को भी बढ़ाएगा और राजस्व संग्रहण में सुधार लाएगा। महापौर ने इस दौरान कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार ने जो निर्णायक फैसले लिए हैं, उन्होंने उत्तराखंड को एक नई पहचान दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि मुख्यमंत्री उनके सुझावों पर गंभीरता से विचार करेंगे और नगर निकायों को सशक्त बनाने की दिशा में ठोस निर्णय लेंगे।

महापौर दीपक बाली के सुझावों को सुनने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें जनभावनाओं से जुड़ा और व्यावहारिक बताया। उन्होंने कहा कि महापौर बाली द्वारा प्रस्तुत बिंदु न केवल नगर निकायों की मजबूती के लिए जरूरी हैं, बल्कि यह राज्य के शहरी ढांचे को भी अधिक सशक्त बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करेगी और आवश्यकतानुसार एक कार्य योजना तैयार की जाएगी, ताकि नगर निकायों को अधिक स्वायत्तता और संसाधन मिल सकें। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा स्पष्ट है — प्रत्येक शहर को विकास की नई ऊँचाइयों तक पहुंचाना।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उत्तराखंड में आने वाले वर्षों में डिजिटल सिटी मिशन, स्वच्छ शहर अभियान और स्मार्ट रोड प्रोजेक्ट जैसे कार्यक्रमों को नए स्वरूप में लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से नगर निगमों को विशेष अनुदान दिया जाएगा, जिससे शहरी जीवन को अधिक सुलभ, स्वच्छ और आधुनिक बनाया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राज्य के लिए गर्व का विषय है कि उत्तराखंड अब विकासशील नहीं, बल्कि विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल होने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि जनता की सक्रिय भागीदारी और जनप्रतिनिधियों के समर्पण से यह लक्ष्य शीघ्र ही पूरा होगा।

सभा में उपस्थित विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, जिला अध्यक्ष मनोज पाल, राम मल्होत्रा, राहुल पैगिया, लवीश अरोड़ा, अर्जुन सिंह, प्रकाश नेगी सहित भाजपा के कई वरिष्ठ पदाधिकारी, कार्यकर्ता, मेयर, अध्यक्ष, पार्षद और निकाय अधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया गया और “जय उत्तराखंड, जय धामी” के नारों से पूरा सभागार गूंज उठा।

इस सम्मेलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि उत्तराखंड सरकार अब नगर निकायों को विकास की मुख्य धारा में लाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। कार्यक्रम ने काशीपुर को न केवल एक नया सम्मान दिलाया बल्कि यह भी साबित किया कि यह शहर अब राज्य की विकास यात्रा में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री धामी और महापौर दीपक बाली के संवाद ने इस बात की नई उम्मीद जगाई है कि जब प्रशासनिक दृष्टि, जनभावना और नेतृत्व एक दिशा में हों, तो विकास की राह को कोई नहीं रोक सकता। काशीपुर में हुआ यह सम्मेलन आने वाले वर्षों में राज्य के नगर निकायों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

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कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

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