काशीपुर। शहर को झकझोर देने वाली उस दर्दनाक घटना ने हर संवेदनशील व्यक्ति की आंखें नम कर दीं, जिसमें एक खाली पड़े प्लॉट में बारिश का पानी भर जाने से बने गहरे गड्ढे में डूबकर दो मासूम बच्चों की असमय मौत हो गई। इस हृदयविदारक हादसे की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और हर किसी की जुबान पर यही सवाल था कि आखिर इन मासूम जिंदगियों की जिम्मेदारी कौन लेगा। इसी बीच महापौर दीपक बाली पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे, जहां उन्होंने शोकाकुल परिवारों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। परिजनों के विलाप और बच्चों को खोने का असहनीय दर्द देखकर महापौर स्वयं भी भावुक हो उठे। उन्होंने पीड़ित परिवारों के साथ कुछ समय बिताया और बच्चों की दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। पूरे घटनाक्रम के दौरान माहौल बेहद गमगीन रहा और वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। मासूमों की असमय मौत ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि शहर में खाली पड़े और असुरक्षित प्लॉट किस प्रकार गंभीर हादसों का कारण बनते जा रहे हैं तथा समय रहते इनकी सुरक्षा को लेकर प्रभावी कदम उठाना कितना आवश्यक हो गया है।
दुख की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचे महापौर दीपक बाली ने घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि दो मासूम बच्चों का इस तरह दुनिया से चले जाना केवल उनके परिवारों की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की ऐसी अपूरणीय क्षति है जिसकी भरपाई कभी संभव नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि किसी भी माता-पिता के लिए अपने बच्चों को इस तरह खो देना जीवन का सबसे बड़ा और असहनीय दुख होता है। उन्होंने परिवारों को भरोसा दिलाया कि नगर निगम और प्रशासन इस कठिन समय में उनके साथ पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ा रहेगा। महापौर ने बच्चों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए कहा कि ईश्वर शोक संतप्त परिवारों को इस असहनीय पीड़ा को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। उन्होंने स्वीकार किया कि घटनास्थल की परिस्थितियां और परिजनों का दर्द देखकर उनका मन भी व्यथित हो गया। उनके अनुसार इस तरह की घटनाएं केवल आंकड़े नहीं होतीं, बल्कि पूरे समाज को झकझोर देने वाली ऐसी त्रासदियां होती हैं, जिनसे सबक लेकर भविष्य के लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक हो जाता है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए महापौर दीपक बाली ने कहा कि वह पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंचाएंगे, ताकि शासन स्तर पर पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक और मानवीय दोनों स्तरों पर जो भी सहयोग संभव होगा, उसे सुनिश्चित कराने का प्रयास किया जाएगा। महापौर ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में केवल संवेदना व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों को राहत और सहयोग उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि बच्चों की असमय मृत्यु ने सभी को गहरा आघात पहुंचाया है और इस दुख की घड़ी में शासन तथा स्थानीय प्रशासन को पूरी जिम्मेदारी के साथ आगे आना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस हादसे को एक चेतावनी के रूप में देखते हुए भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी रणनीति बनाई जाएगी, ताकि किसी अन्य परिवार को इस तरह का असहनीय दुख न झेलना पड़े।
महापौर ने इस दुखद हादसे के पीछे छिपे बड़े खतरे की ओर भी ध्यान आकर्षित किया और शहर में खाली पड़े प्लॉटों की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में ऐसे भूखंडों में पानी भर जाने से वे गहरे और खतरनाक जलभराव वाले गड्ढों में बदल जाते हैं, जो विशेष रूप से बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। उन्होंने सभी खाली प्लॉटों के मालिकों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि वे अपने भूखंडों का समुचित भरान कराएं तथा उनकी चारदीवारी अवश्य बनवाएं। उनके अनुसार इससे न केवल वर्षा का पानी जमा होने से रोका जा सकेगा, बल्कि असामाजिक गतिविधियों और गंदगी फैलाने जैसी समस्याओं पर भी नियंत्रण मिलेगा। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि संपत्ति मालिकों को भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभानी होगी। यदि समय रहते आवश्यक सावधानियां बरती जाएं तो इस प्रकार की दर्दनाक घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
इस दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को गहरे आत्ममंथन के लिए मजबूर कर दिया है। दो मासूम बच्चों की असमय मौत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शहरी क्षेत्रों में उपेक्षित और असुरक्षित खाली प्लॉट केवल सौंदर्य बिगाड़ने का कारण नहीं, बल्कि लोगों के जीवन के लिए गंभीर खतरा भी बन सकते हैं। महापौर दीपक बाली ने नागरिकों से भी अपील की कि यदि उनके आसपास ऐसे स्थान हैं जहां बारिश का पानी भरता है या सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, तो उसकी सूचना तत्काल संबंधित विभाग को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि किसी भी मासूम की जान से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता और समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में अपनी भूमिका निभाए। शोक में डूबे परिवारों से मिलकर लौटते समय महापौर की आंखों में भी पीड़ा साफ दिखाई दे रही थी। उन्होंने दोहराया कि बच्चों की स्मृति में सबसे बड़ी श्रद्धांजलि यही होगी कि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी असहनीय त्रासदी का सामना न करना पड़े और इसके लिए प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, भूखंड मालिकों तथा आम नागरिकों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।





