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दीपक बाली ने हरेला पर्व को बनाया पर्यावरण संरक्षण का जनआंदोलन

नीली गुलमोहर के पौधों के साथ पर्यावरण संरक्षण का दिया सशक्त संदेश, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से हर पौधे की देखभाल का लिया संकल्प, स्वच्छ, हरित और संतुलित भविष्य के निर्माण के लिए सामूहिक भागीदारी का आह्वान।

काशीपुर। उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के पावन अवसर पर काशीपुर नगर निगम ने पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य के संकल्प को जन-आंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल करते हुए मानपुर रोड स्थित पॉलीटेक्निक कॉलेज परिसर में भव्य पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया। मानसून की सौंधी खुशबू और हरियाली के संदेश के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में नगर निगम, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केवल पौधे रोपना नहीं, बल्कि लोगों के मन में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी, पर्यावरण संरक्षण की भावना और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने का संकल्प मजबूत करना था। इस अवसर पर महापौर दीपक बाली ने पार्षदों और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर नीली गुलमोहर के पौधे लगाए और लोगों से अधिक से अधिक पौधारोपण कर उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। पूरे आयोजन के दौरान हरियाली बचाने, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और हरेला पर्व की सांस्कृतिक परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश प्रमुखता से गूंजता रहा। बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने भी इस अभियान को सफल बनाने का भरोसा दिलाते हुए पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया।

उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान माने जाने वाले हरेला पर्व को केवल एक धार्मिक या पारंपरिक उत्सव तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि इसे प्रकृति और मानव जीवन के बीच अटूट संबंध का प्रतीक समझा जाता है। इसी भावना को साकार करते हुए नगर निगम की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत किया गया। महापौर दीपक बाली ने कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण संरक्षण और हरियाली के प्रति हमारी सांस्कृतिक आस्था का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण, घटते वन क्षेत्र और बदलते जलवायु परिवर्तनों के बीच पौधारोपण केवल औपचारिकता नहीं रह गया है, बल्कि यह समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने नगर और आसपास के क्षेत्र की जनता से अपील करते हुए कहा कि हर परिवार कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसे वृक्ष बनने तक संरक्षित रखने का संकल्प भी ले। उनके अनुसार पौधा लगाना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक आवश्यक उसकी नियमित देखभाल करना है। यदि प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझते हुए इस अभियान से जुड़ता है तो काशीपुर आने वाले वर्षों में हरियाली के नए आयाम स्थापित कर सकता है और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन सकता है।

कार्यक्रम के दौरान महापौर दीपक बाली ने कहा कि स्वच्छ और हरित शहर का सपना केवल सरकारी योजनाओं से पूरा नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए जनसहभागिता सबसे महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली सामाजिक प्रक्रिया है, जिसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि घर, विद्यालय, कार्यालय, सार्वजनिक स्थान और खाली भूमि पर अधिक से अधिक पौधे लगाए जाएं, ताकि प्रदूषण पर नियंत्रण के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को बेहतर जीवन मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि पौधारोपण का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा जब लगाए गए पौधों को वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखा जाए। उन्होंने बच्चों और युवाओं को इस अभियान से जोड़ने पर विशेष बल देते हुए कहा कि यदि नई पीढ़ी में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित होगी तो भविष्य में पर्यावरण संरक्षण की चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव हो सकेगा। उनके अनुसार हरेला जैसे पर्व हमें यह संदेश देते हैं कि प्रकृति की रक्षा करना ही मानव जीवन की सुरक्षा का सबसे मजबूत आधार है।

पॉलीटेक्निक कॉलेज परिसर में आयोजित इस पौधारोपण अभियान के दौरान पार्षदों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। कार्यक्रम में पार्षद अनिता काम्बोज, मनोज जग्गा, पुष्कर बिष्ट, शाह आलम, प्रिंस बाली, सुरेश सैनी और अशोक सैनी ने महापौर के साथ मिलकर नीली गुलमोहर के पौधे रोपे और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। सभी जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि केवल पौधारोपण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इन पौधों की नियमित देखभाल और सुरक्षा भी प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने लोगों से अपील की कि हरेला पर्व को केवल परंपरा के रूप में न मनाकर इसे हरियाली बढ़ाने के जन-अभियान में बदलें। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने पौधारोपण के बाद पौधों को नियमित रूप से पानी देने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें विकसित करने का सामूहिक संकल्प भी लिया। आयोजन के दौरान हरियाली, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संदेशों ने उपस्थित लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराया।

इस अवसर पर नगर निगम प्रशासन की ओर से भी पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई गई। सहायक नगर आयुक्त शालिनी नेगी ने कहा कि नगर निगम केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लगाए गए पौधों की देखरेख और संरक्षण की भी नियमित निगरानी की जाएगी। उन्होंने कहा कि नगर क्षेत्र में हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए विभिन्न स्थानों पर लगातार पौधारोपण अभियान चलाए जाएंगे। कार्यक्रम में मौजूद अन्य अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने भी लोगों से अपील की कि वे अपने आसपास खाली स्थानों पर पौधे लगाकर शहर को प्रदूषण मुक्त बनाने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ते प्रदूषण के बीच वृक्ष ही वह प्राकृतिक संपदा हैं जो मानव जीवन को सुरक्षित और स्वस्थ बनाए रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के दौरान यह संदेश भी दिया गया कि यदि प्रत्येक नागरिक प्रतिवर्ष कम से कम एक पौधा लगाकर उसका संरक्षण करे तो कुछ ही वर्षों में काशीपुर का पर्यावरणीय स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है।

हरेला पर्व के इस विशेष आयोजन में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संस्थाओं से जुड़े अनेक लोगों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख चंद्रप्रभा, ईश्वर गुप्ता, अमर सिंह रावत, भव्या पांडे, सुशांत, नवीन, अभिषेक गोयल, गुरुदेव सिंह, प्रियंका अग्रवाल, दिनेश नेगी, चौधरी समरपाल सिंह, अजय चाहल, सफाई निरीक्षक गणेश ध्यानी, सर्वेश बंसल, काशीपुर अर्बन बैंक के अध्यक्ष अजय टंडन, राजीव अरोरा, जरनैल सिंह, नवनीत चौधरी, पवन राजपूत, परवेज खान, निमिष कुमार, डॉ. विजय शर्मा, मनोज कौशिक सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया। उपस्थित लोगों ने कहा कि यदि समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी इसी प्रकार बनी रही तो काशीपुर न केवल हरियाली के क्षेत्र में नई पहचान बनाएगा, बल्कि उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण के सफल मॉडल के रूप में भी अपनी अलग पहचान स्थापित करेगा। हरेला पर्व पर आयोजित यह अभियान केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी, सामाजिक सहभागिता और हरित भविष्य के सामूहिक संकल्प का प्रेरक संदेश बनकर सामने आया।

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