काशीपुर। औद्योगिक क्षेत्र में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब आईटीआई थाना क्षेत्र के अंतर्गत महुआखेड़ागंज स्थित एक पेंटिंग टूल्स फैक्ट्री में अचानक भीषण आग भड़क उठी। नंद नगर इंडस्ट्रियल एस्टेट फेज-1 में स्थित इस फैक्ट्री से उठते धुएं के काले गुबार ने कुछ ही देर में पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। दूर-दूर तक दिखाई दे रहे धुएं और आग की ऊंची लपटों ने आसपास मौजूद फैक्ट्रियों, दुकानदारों और स्थानीय लोगों में भय का माहौल पैदा कर दिया। अचानक लगी इस आग से अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारी जान बचाने के लिए बाहर की ओर दौड़ते नजर आए। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फैक्ट्री के भीतर मौजूद ज्वलनशील सामग्री के कारण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। पूरे क्षेत्र में कुछ समय के लिए यातायात और औद्योगिक गतिविधियां लगभग ठप सी हो गईं और हर किसी की नजरें इस भयावह मंजर पर टिकी रहीं।
बताया जा रहा है कि यह घटना आईटीआई थाना क्षेत्र की पैगा पुलिस चौकी के अंतर्गत आने वाले महुआखेड़ागंज इलाके में हुई, जहां नंद नगर इंडस्ट्रियल एस्टेट फेज-1 के प्लॉट नंबर 11 पर डेकोर पेंटिंग टूल्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की फैक्ट्री संचालित हो रही है। दोपहर के समय अचानक फैक्ट्री परिसर से धुआं निकलता देख कर्मचारियों ने शोर मचाया और तुरंत इसकी सूचना प्रशासन को दी गई। आग इतनी तेज थी कि कुछ ही मिनटों में फैक्ट्री का बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ गया। वहां मौजूद कर्मचारी किसी तरह अपनी जान बचाकर बाहर निकलने में सफल रहे, जिससे एक बड़े हादसे की आशंका टल गई। हालांकि, आग की तीव्रता को देखते हुए यह साफ नजर आ रहा था कि फैक्ट्री के अंदर रखे कच्चे माल, तैयार माल और मशीनरी को भारी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि उन्हें कई किलोमीटर दूर से देखा जा सकता था।

सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीमें हरकत में आ गईं और काशीपुर के फायर स्टेशन से तुरंत दमकल की गाड़ियां घटनास्थल की ओर रवाना की गईं। आग की भयावहता को देखते हुए अतिरिक्त सहायता की जरूरत महसूस की गई, जिसके चलते आसपास की फैक्ट्रियों और अन्य फायर स्टेशनों से भी दमकल वाहनों को मौके पर बुलाया गया। दमकल कर्मियों ने पहुंचते ही आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू कर दिया, लेकिन फैक्ट्री में मौजूद ज्वलनशील पदार्थों और तेज हवा के कारण आग बार-बार भड़क उठ रही थी। घंटों की कड़ी मशक्कत के बावजूद आग पर पूरी तरह से नियंत्रण पाना चुनौती बना रहा। दमकल कर्मियों को आग बुझाने के दौरान अत्यधिक गर्मी और घने धुएं का सामना करना पड़ा, जिससे राहत कार्य और भी मुश्किल हो गया। इसके बावजूद टीमों ने हार नहीं मानी और लगातार प्रयास जारी रखे।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोपहर से लगी आग देर शाम तक लगातार सुलगती रही और कई बार ऐसा लगा कि आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन कुछ ही देर में लपटें फिर से उठने लगती थीं। इस दौरान फैक्ट्री के आसपास सुरक्षा के लिहाज से पुलिस बल तैनात कर दिया गया और लोगों को घटनास्थल से दूर रखा गया। स्थानीय प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे और राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करते रहे। फैक्ट्री के भीतर मौजूद सभी कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि, कंपनी को हुए आर्थिक नुकसान का आंकलन करना अभी बाकी है, लेकिन प्रारंभिक अनुमान के अनुसार नुकसान काफी बड़ा बताया जा रहा है। आग लगने के कारणों को लेकर फिलहाल कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आ सकी है।
दमकल विभाग के अनुसार, आग की सूचना एक सौ बारह आपातकालीन सेवा के माध्यम से प्राप्त हुई थी। उधम सिंह नगर से मौके पर पहुंचे दमकल विभाग के चीफ फायर ऑफिसर ईशान कटारिया ने स्थिति की गंभीरता के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि दो बजे के आसपास काशीपुर फायर स्टेशन में सूचना मिली थी कि फेज-1 क्षेत्र में टेक और कूल पेंटिंग नाम की एक कंपनी में आग लगी है। सूचना मिलते ही बिना देरी किए काशीपुर फायर स्टेशन से दो दमकल गाड़ियों को तत्काल रवाना किया गया। जब दमकल कर्मी मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि आग अत्यंत विकराल रूप धारण कर चुकी थी और तेजी से फैल रही थी। इसी वजह से आसपास की अन्य कंपनियों और फायर स्टेशनों से भी अतिरिक्त दमकल वाहनों को बुलाने का निर्णय लिया गया।
आग की भयावहता को देखते हुए दमकल विभाग ने रणनीति बनाकर विभिन्न दिशाओं से आग पर काबू पाने की कोशिश की। फैक्ट्री परिसर में सीमित जगह और अंदर भरे धुएं के कारण दमकल कर्मियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई घंटे तक चले इस ऑपरेशन में लगातार पानी और फोम का इस्तेमाल किया गया, ताकि आग की तीव्रता को कम किया जा सके। दमकल विभाग की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना रही कि आग आसपास की अन्य फैक्ट्रियों तक न फैले, क्योंकि ऐसा होने पर स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी। टीमों ने अथक प्रयास करते हुए आग को एक निश्चित दायरे में सीमित रखने में सफलता पाई। इस दौरान कई दमकल कर्मी थकान और गर्मी से बेहाल नजर आए, लेकिन उन्होंने राहत कार्य जारी रखा।

चीफ फायर ऑफिसर ईशान कटारिया ने बताया कि इस बड़े ऑपरेशन में कुल सात फायर टेंडर लगाए गए, जिनमें से अधिकांश उत्तराखंड फायर सर्विस के थे। इसके अलावा एक निजी फैक्ट्री से भी दमकल वाहन की सहायता ली गई। उन्होंने कहा कि सभी टीमों ने आपसी समन्वय के साथ काम किया, जिसके चलते आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है। हालांकि, आग की प्रकृति को देखते हुए यह आशंका बनी हुई थी कि पूरी तरह से आग बुझाने में अभी और समय लग सकता है। उनका कहना था कि दमकल विभाग की कोशिश है कि एक से दो घंटे के भीतर स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में ले लिया जाए और किसी भी तरह की पुनः आग भड़कने की संभावना को खत्म किया जाए।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी ने मौके पर व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस ने क्षेत्र को घेराबंदी कर सुरक्षित कर दिया, ताकि कोई अनधिकृत व्यक्ति घटनास्थल के पास न पहुंच सके। प्रशासनिक अधिकारियों ने फैक्ट्री प्रबंधन से भी संपर्क किया और आग से हुए नुकसान का प्रारंभिक विवरण जुटाने का प्रयास किया। वहीं, आसपास के औद्योगिक प्रतिष्ठानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। फैक्ट्री के कर्मचारियों और प्रबंधन के चेहरे पर चिंता साफ नजर आ रही थी, क्योंकि आग से उत्पादन ठप हो गया और करोड़ों के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, किसी के हताहत न होने को सभी ने राहत की बात माना।
घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार दमकल विभाग ने आग पर काफी हद तक काबू पा लिया। देर शाम तक आग बुझाने का कार्य जारी रहा और सुलगते हुए हिस्सों पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि आग दोबारा न भड़क सके। दमकल कर्मियों ने फैक्ट्री के अंदर जाकर भी जांच की और यह सुनिश्चित किया कि कोई व्यक्ति अंदर फंसा न रह गया हो। प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया कि आग लगने के कारणों की जांच की जाएगी और यदि किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, पूरा इलाका राहत की सांस ले रहा है, लेकिन इस घटना ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब आने वाले दिनों में जांच के बाद सामने आ सकेगा।
इस भीषण अग्निकांड ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों के पालन की जरूरत को उजागर कर दिया है। काशीपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि सैकड़ों लोगों की जान को भी खतरे में डाल सकती हैं। गनीमत रही कि डेकोर पेंटिंग टूल्स प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री में समय रहते कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और कोई जनहानि नहीं हुई। प्रशासन, दमकल विभाग और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह बताएगी कि आखिर आग किस वजह से लगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।



