- महाराणा प्रताप चौक पर खुला नाला बना दुर्घटना की लगातार बढ़ती चुनौती सभी के लिए
- व्यस्त सड़क पर अनदेखा नाला खड़ा कर रहा लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा
- खुला नाला बढ़ा रहा वाहनों और पैदल यात्रियों के लिए जोखिम और हादसों की आशंका
- सड़क किनारे अनसुरक्षित नाला आम नागरिकों और व्यापारियों के लिए लगातार चिंता का कारण
- बढ़ती भीड़ और खुला नाला आने वाले समय में भारी दुर्घटना की चेतावनी देता
काशीपुर। शहर की भीड़भाड़ भरी गलियों में आवागमन पहले ही चुनौती बना हुआ है, लेकिन महाराणा प्रताप चौक से नमन स्वीट्स की ओर बढ़ते ही सड़क किनारे खुला पड़ा नाला लोगों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह इलाका शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में गिना जाता है, जहां सुबह से देर रात तक वाहनों का लगातार दबाव बना रहता है। इसी बीच बिना ढक्कन का नाला किसी छिपे खतरे की तरह हर गुजरने वाले के लिए जोखिम बढ़ा रहा है। थोड़ी सी चूक होने पर वाहन या राहगीर सीधे इस गहरे नाले में गिर सकते हैं। निगरानी की कमी और असावधानी के कारण कई बार दोपहिया वाहन इसमें फिसलने से बालदृबाल बचे हैं। लोगों का कहना है कि यह स्थिति किसी भी वक्त गंभीर हादसे का रूप ले सकती है, फिर भी प्रशासन और नगर निकाय की नजर अनदेखी अब तक बनी हुई है।
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि रोजाना यहां से गुजरने वाले लोग खुली जलधाराओं को लेकर डर के साए में रहते हैं। महाराणा प्रताप चौक क्षेत्र में रोज हजारों की संख्या में लोग आवाजाही करते हैं, ऐसे में इस तरह का खतरनाक नाला सार्वजनिक सुरक्षा से खिलवाड़ जैसा प्रतीत होता है। व्यस्त मार्ग पर यह खुला ढांचा रात के समय और भी खतरनाक हो जाता है, जब सड़क किनारे रोशनी पर्याप्त नहीं होती। हल्की बारिश होने पर तो यह नाला बिल्कुल दिखाई भी नहीं देता, जिससे दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। क्षेत्रवासियों ने बताया कि लगातार शिकायतों के बावजूद ढक्कन लगाने या सुरक्षा बैरिकेड लगाने जैसा कोई ठोस कदम अभी तक नहीं उठाया गया है। इस अनदेखी ने लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है, और उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में बड़ी जनहानि से इंकार नहीं किया जा सकता।
कई दोपहिया चालक बताते हैं कि नमन स्वीट्स के पास मोड़ पर पहले ही वाहन संतुलन बनाए रखना मुश्किल होता है, ऊपर से इस नाले का खतरा स्थिति को और अधिक खराब कर देता है। स्कूलदृकॉलेज जाने वाले छात्र, कामकाजी लोग और बुजुर्ग रोज इन हालातों से गुजरते हैं। ट्रैफिक के चरम समय में जब वाहन धीरेदृधीरे आगे बढ़ते हैं, तब इस खुले नाले के किनारे से गुजरना बेहद जोखिम भरा हो जाता है। किसी भी क्षण पैदल चलने वाला व्यक्ति फिसल सकता है या फिर कोई बच्चा अचानक सड़क के किनारे पहुंच जाए तो दुर्घटना का खतरा कई गुणा बढ़ जाता है। क्षेत्र के लोगों ने नगर निगम से बारदृबार अनुरोध किया है कि इसे तत्काल ढकवाया जाए, पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। लोगों का कहना है कि जब तक कोई बड़े हादसे की खबर सुर्खियां नहीं बनती, तब तक जिम्मेदार विभाग शायद जागने वाले नहीं हैं।

सड़क के इस हिस्से पर शाम के समय बाजार की चहलदृपहल बढ़ जाती है और यहां खड़ी गाड़ियों के कारण पहले से संकरी सड़क और भी जाम की स्थिति पैदा कर देती है। इस बीच खुले नाले के कारण सड़क का किनारा सुरक्षित उपयोग में नहीं आ पाता, जिससे वाहन चालकों और पैदल यात्रियों दोनों के लिए परेशानी दोगुनी हो जाती है। कई परिवार बताते हैं कि वे अपने बच्चों को इस रास्ते से अकेले नहीं जाने देते क्योंकि उन्हें डर है कि अचानक भीड़ में बच्चा नाले के मुहाने की तरफ बढ़ जाए। दुकानदारों का कहना है कि नाले के खुले रहने से गंदगी भी आसपास फैलती है, जिससे बदबू और बीमारी का खतरा भी बढ़ता है। लेकिन सफाई व्यवस्था और ढक्कन लगाने की दिशा में प्रशासनिक कदमों की प्रतीक्षा अब भी जारी है, जो नागरिकों में नाराजगी का कारण बन चुका है।
लोगों का कहना है कि काशीपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में इस तरह की लापरवाही अस्वीकार्य है। जिस मार्ग को शहर की सबसे व्यस्त सड़क कहा जाता है, वहां इतने बड़े खतरे को खुला छोड़ देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। क्षेत्रवासियों और व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता तो वे सामूहिक रूप से आवाज उठाने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि भविष्य में यहां कोई बड़ा हादसा हुआ तो उसकी जिम्मेदारी सीधे उन विभागों पर आएगी जो अब तक समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। शहर की सुरक्षा और सुगमता के लिए यह आवश्यक है कि इस खुले नाले को शीघ्र ढककर सुरक्षित बनाया जाए, वरना यह लापरवाही कभी भी भारी त्रासदी का रूप ले सकती है और इसका खामियाजा पूरे शहर को भुगतना पड़ेगा।



