काशीपुर। शुक्रवाार कि नगर निगम सभागार के बाहर लगी भीड़ का शोर इस बात का साफ संकेत दे रहा था कि शहर में आज कोई साधारण दिन नहीं, बल्कि वह दिन है जब वे लोग सुर्खियों में आते हैं जो हर दिन शहर को चमकाने के लिए खुद को धूल, धुएँ और मौसम की मार में झोंक देते हैं। ऐसे ही माहौल में जब महापौर दीपक बाली मंच पर पहुँचे, तो पूरे सभागार में तालियों की गूंज इस बात की गवाही दे रही थी कि शहर के पर्यावरण मित्र और पर्यावरण पर्यवेक्षक इस सम्मान का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। मौसम चाहे गर्म हो, सर्द हो या बरसात का कहर हो, शहर के ये जांबाज कभी अपने काम से पीछे नहीं हटते, और आज उनके हाथों में सुरक्षा किट और नई वर्दी ने उनके चेहरे पर एक नए आत्मविश्वास की चमक भर दी। दीपक बाली ने मंच से ही कहा कि सफाई सिर्फ सफाई कर्मियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि शहर के हर नागरिक की समान जिम्मेदारी है, और यह बात उनके शब्दों से कहीं ज्यादा उनके अंदाज़ से दिखाई दे रही थी।
कार्यक्रम की शुरुआत होते ही माहौल में एक अजीब उत्साह भर गया था। करीब 352 पर्यावरण मित्रों के लिए तैयार की गई नई यूनिफॉर्म और स्वास्थ्य सुरक्षा किट का वितरण सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि शहर की सफाई व्यवस्था में लगे हर कर्मचारी के प्रति सम्मान का संदेश था। महापौर दीपक बाली ने जब मंच से घोषणा की कि कर्मचारियों की पहचान और सुरक्षा के लिए विशेष रूप से तैयार की गई यह वर्दी अब शहर की सड़कों पर उनकी पहचान बनेगी, तो सभागार में बैठे कर्मियों ने गर्व से एक-दूसरे की तरफ देखा। नई यूनिफॉर्म का रंग और डिजाइन ऐसा रखा गया है कि बारिश, धूप और सर्दी के बदलते मौसम में भी कर्मचारियों को सुरक्षा मिले और वे शहर में कहीं भी हों, उनकी पहचान स्पष्ट रहे। यह कदम केवल दिखावा नहीं बल्कि एक सोच है जो सफाई व्यवस्था को आधुनिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन है।

नगर निगम ने सिर्फ वर्दी तक ही खुद को सीमित नहीं किया, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया। कर्मचारियों के लिए फर्स्ट-एड बॉक्स, सैनिटाइजर, दर्द निवारक स्प्रे, विटामिन ट्यूब, ग्लूकोज, बैंडेज और कई आवश्यक सामानों से भरी यह किट इस बात का संकेत है कि निगम अब सफाई कर्मियों को केवल कार्यबल नहीं बल्कि परिवार की तरह देख रहा है। महापौर दीपक बाली ने साफ कहा कि यह कार्यक्रम किसी प्रोटोकॉल की पूर्ति नहीं, बल्कि उन कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास है जो शहर को स्वच्छ रखने के लिए अपना दिन-रात दांव पर लगा देते हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम सफाई व्यवस्था में एक मजबूत मॉडल तैयार कर चुका है, जो आने वाले दिनों में शहर को बिल्कुल नए स्तर की पहचान दिलाएगा।
सभा में मौजूद पर्यावरण मित्रों में आज एक नई ऊर्जा थी, क्योंकि लंबे समय से लंबित उनकी मांगें आज पूरी हो रही थीं। 347 पर्यावरण मित्रों में से पहले चरण में 190 कर्मचारियों को वर्दी और किट प्रदान की गई। बाकी कर्मचारियों को वर्दी सिलाई प्रक्रिया पूर्ण होते ही वितरित की जाएगी। इस कार्यक्रम में मुख्य नगर आयुक्त रविंद्र बिष्ट, ब्लाक प्रमुख चंद्रप्रभा, स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमरजीत साहनी, पार्षदगण, जनप्रतिनिधि और भारी संख्या में मौजूद भाजपा पदाधिकारियों ने इस आयोजन को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। मंच पर लगातार गूंजती तालियों और कर्मचारियों के चेहरे पर उभरते आत्मविश्वास ने स्पष्ट कर दिया कि आज का दिन उनके जीवन के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है।
कार्यक्रम के दौरान जब पार्षद गुरविंदर सिंह चंडोक मंच पर आए, तो उनके शब्दों ने पूरे सभागार में जोश भर दिया। उन्होंने कहा कि वर्दी का असली महत्व वही समझ सकता है जो अपने कर्तव्य को सम्मान के साथ निभाता है। उन्होंने सैनिक, पुलिसकर्मी, डॉक्टर और वकीलों की वर्दियों का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्दी सिर्फ कपड़ा नहीं बल्कि सम्मान और गर्व का प्रतीक है। यह वर्दी आज पर्यावरण मित्रों को मिली है और अब यह उनके लिए सिर्फ काम का हिस्सा नहीं बल्कि उनके स्वाभिमान की पहचान बनेगी। उन्होंने साफ कहा कि सफाई कर्मियों को अपने स्वास्थ्य के प्रति और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि शहर की सुबह की पहली किरण उन्हीं लोगों की मेहनत से चमकती है। उन्होंने मास्क, दस्ताने और सुरक्षा नियमों के पालन पर जोर देते हुए कहा कि यह किट उनकी सुरक्षा को और मजबूत करेगी। चंडोक के भाषण में जो ऊर्जा और सम्मान झलक रहा था, उससे साफ था कि वह पर्यावरण मित्रों को सिर्फ कर्मचारी नहीं बल्कि शहर के सबसे महत्वपूर्ण योद्धा मानते हैं।
जैसे ही महापौर दीपक बाली दोबारा मंच पर आए, तो माहौल और भी गंभीर और जोशीला हो गया। उन्होंने कहा कि वह चाहे जितनी कोशिश कर लें, लेकिन शहर को साफ रखना अकेले नगर निगम का काम नहीं है। जब तक काशीपुर का हर नागरिक इस जिम्मेदारी को अपने हिस्से का कर्तव्य नहीं समझेगा, तब तक सफाई व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त करना एक असंभव प्रयास होगा। उन्होंने स्कूल में घटी एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि बच्चों ने पांच मिनट में मैदान में फैला पूरा कूड़ा उठा दिया। उन्होंने कहा कि जब बच्चे ऐसा कर सकते हैं, तो दो लाख की आबादी वाला यह शहर भी जाग सकता है—बस जरूरत है सोच बदलने की। उनका कहना था कि यदि नागरिक कूड़ा फेंकेंगे और उम्मीद करेंगे कि सिर्फ 350 कर्मचारी उसे साफ कर देंगे, तो यह संभव नहीं है। लेकिन अगर वही नागरिक कूड़ा न फेंकने का संकल्प ले लें, तो काशीपुर को इंदौर जैसी पहचान मिल सकती है।
दीपक बाली ने साफ शब्दों में कहा कि नगर निगम तीन चरणों वाला मास्टर प्लान बना चुका है, और इसका पहला चरण 1 दिसंबर से शुरू हो जाएगा। दूसरा और तीसरा चरण फरवरी तक पूरे शहर में लागू कर दिए जाएंगे। इस मास्टर प्लान के तहत सफाई वाहनों, नई मशीनों और हाल ही में मिली 35 नई गाड़ियों को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि गलियों में जहाँ बड़ी गाड़ियाँ नहीं पहुँच सकतीं, वहाँ सफाई कर्मियों के लिए ऐसी व्यवस्था तैयार की जा रही है जिससे कूड़ा सड़क पर न फेंकना पड़े, बल्कि उसे सीधा संग्रह बिंदुओं तक पहुँचाया जा सके। हर समस्या का समाधान करने की ठान चुके महापौर ने कर्मचारी वर्ग को आश्वस्त किया कि उनकी हर समस्या का समाधान किया जाएगा, लेकिन बदले में उनसे काम के प्रति सौ प्रतिशत ईमानदारी और जिम्मेदारी की उम्मीद है।

महापौर ने राज्य स्तरीय नगर निकाय सम्मेलन का भी उल्लेख किया, जहाँ उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने तीन महत्वपूर्ण मांगें रखीं—स्टांप शुल्क का 2% निकायों को मिले, यूपीसीएल बिजली बिल वसूली का 2% निकायों को मिले और प्राधिकरण द्वारा पास नक्शों के शुल्क का 50% निकायों को मिले। मुख्यमंत्री ने इन प्रस्तावों पर सहानुभूतिपूर्वक परीक्षण का आश्वासन देते हुए कहा कि निकायों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। इस घोषणा ने नगर निगम के मनोबल को और मजबूत किया और सभी उपस्थित लोगों ने तालियों के साथ इसका स्वागत किया।
जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, पर्यावरण मित्रों की आंखों में एक सुकून साफ दिख रहा था। वर्षों की अपेक्षाएँ आज पूरी होती दिखाई दीं। महापौर ने संबोधन में कहा कि सफाई कर्मचारियों की मेहनत के बिना काशीपुर की कोई भी योजना अधूरी है। उन्होंने साफ कहा—“कूड़ा उठाना आपका काम है, लेकिन कूड़ा न फेंकना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।” इस एक वाक्य ने पूरे सभागार में बैठे लोगों के दिलों पर सीधा असर किया। कार्यक्रम के अंत में जब सभी पर्यावरण मित्रों को चरणबद्ध तरीके से किट और वर्दियाँ दी गईं, तो उनके चेहरों की चमक देखने लायक थी। पार्षद गुरविंदर सिंह चंडोक, संजय शर्मा, दीपा पाठक, वैशाली गुप्ता, पुष्कर बिष्ट, राशिद फारूखी, बीना नेगी, सीमा सागर, अनीता कांबोज सहित नगर निगम के अधिकारी, भाजपा पदाधिकारी और पत्रकारों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और ऐतिहासिक बना दिया। वातावरण देशभक्ति के नारों से गूंज उठा और “भारत माता की जय” के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। यह सिर्फ वर्दी वितरण समारोह नहीं था, बल्कि काशीपुर को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़े संकल्प का दिन था—और इसका नेतृत्व कर रहे थे महापौर दीपक बाली।



