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महापौर दीपक बाली के नेतृत्व में काशीपुर को स्वच्छ सुंदर और जागरूक बनाने की ऐतिहासिक पहल

नगर निगम सभागार में वर्षभर की व्यापक स्वच्छता कार्ययोजना का प्रदर्शन, कैलेंडर विमोचन, जनभागीदारी अभियान की शुरुआत, कूड़ा प्रबंधन व जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए काशीपुर को इंदौर मॉडल पर आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया गया।

काशीपुर। नगर निगम के सभागार में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान शहर की तस्वीर बदलने की दिशा में एक दूरगामी और व्यापक सोच सामने आई, जहां महापौर दीपक बाली की अध्यक्षता में पूरे वर्ष की स्वच्छता, सौंदर्यीकरण और जनभागीदारी आधारित कार्ययोजना को सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर नगर निगम द्वारा प्रकाशित विशेष कैलेंडर का भी विधिवत विमोचन किया गया, जिसे नगर निगम क्षेत्र के प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया गया। कार्यक्रम का माहौल केवल औपचारिक नहीं बल्कि उद्देश्यपूर्ण और भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ था, क्योंकि यह स्पष्ट किया गया कि स्वच्छता को केवल सरकारी योजना नहीं बल्कि जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। महापौर ने अपने संबोधन में यह संदेश दिया कि नगर निगम अब केवल कागजी योजनाओं या प्रतीकात्मक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जमीन पर दिखने वाले परिणामों के साथ शहर की सूरत बदलने का काम करेगा। इस पूरी योजना में पार्षदों की सक्रिय भूमिका को केंद्रीय आधार मानते हुए, उन्हें अपने-अपने वार्ड में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने का आह्वान किया गया, ताकि काशीपुर को एक स्वच्छ, सुंदर और जागरूक नगर के रूप में स्थापित किया जा सके।

अपने विचार रखते हुए महापौर दीपक बाली ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वच्छता अभियान के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से जो धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है, उसका एक-एक रुपया काशीपुर की भलाई और चमक-दमक के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस अभियान की सफलता केवल प्रशासनिक प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें आम नागरिकों की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने इंदौर और भोपाल जैसे शहरों का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां की नगर निगमों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान इसलिए मिला, क्योंकि वहां की जनता ने स्वच्छता को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए नगर निकाय के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। इसी भावना को काशीपुर में भी विकसित करने की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने कहा कि जब हर नागरिक यह ठान लेगा कि वह अपने आसपास कूड़ा नहीं फैलने देगा, तब वह दिन दूर नहीं जब शहर की सड़कों पर गंदगी का नामोनिशान नहीं रहेगा। उन्होंने इसे एक सतत प्रक्रिया बताते हुए निरंतर संवाद, जागरूकता और सहभागिता पर जोर दिया।

कार्यक्रम के दौरान महापौर ने पार्षद अरशी के प्रयासों की विशेष सराहना करते हुए उन्हें सार्वजनिक रूप से बधाई दी, जिन्होंने अपने वार्ड से सभी कूड़ा पॉइंट समाप्त कर स्वच्छता का एक उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यदि इसी प्रकार हर पार्षद अपने-अपने क्षेत्र में जिम्मेदारी निभाए, तो पूरा नगर निगम क्षेत्र स्वच्छ हो सकता है। इसी क्रम में उन्होंने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि जिन वार्डों में स्वच्छता की स्थिति सबसे बेहतर होगी, वहां नगर निगम की ओर से एक करोड़ रुपये तक के अतिरिक्त विकास कार्य कराए जाएंगे। यह घोषणा केवल प्रोत्साहन नहीं बल्कि प्रतिस्पर्धात्मक सकारात्मक माहौल बनाने की दिशा में एक ठोस कदम बताया गया। महापौर ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वच्छता के नाम पर केवल तस्वीरें खिंचवाना या सोशल मीडिया पर पोस्ट डालना उद्देश्य नहीं है, बल्कि जनता को यह दिखना चाहिए कि जनप्रतिनिधि वास्तव में गलियों और सड़कों पर उतरकर काम कर रहे हैं। यही वास्तविक जनसेवा की पहचान होगी।

शहर में कूड़ा प्रबंधन को लेकर भविष्य की तैयारियों पर प्रकाश डालते हुए महापौर दीपक बाली ने बताया कि कूड़ा प्रबंधन केंद्र का निर्माण तेजी से अंतिम चरण में है और आगामी चार से पांच महीनों के भीतर काशीपुर की कूड़े से जुड़ी समस्या का स्थायी समाधान कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस केंद्र को केवल तकनीकी दृष्टि से ही नहीं बल्कि सौंदर्य की दृष्टि से भी इस तरह विकसित किया जा रहा है कि वहां स्कूलों के छात्र-छात्राएं शैक्षणिक भ्रमण के लिए आ सकें और कूड़ा प्रबंधन की आधुनिक प्रक्रिया को समझ सकें। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी दी कि कुत्ता आश्रय केंद्र के लिए उपयुक्त भूमि का चयन कर लिया गया है, जिससे आवारा पशुओं की समस्या का मानवीय और व्यवस्थित समाधान संभव हो सकेगा। महापौर ने यह बात दोहराई कि नगर निगम का प्रयास केवल समस्या हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को समाधान का हिस्सा बनाना है, ताकि हर हाथ कूड़ा फैलने से रोकने में सहयोगी बने।

स्वच्छता अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए नगर निगम द्वारा अपनाई जा रही रणनीतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। महापौर ने कहा कि जो स्वच्छता मित्र और साथी पूरे मनोयोग से इस अभियान में योगदान देंगे, उन्हें समय-समय पर सम्मानित किया जाएगा, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए और अन्य लोग भी प्रेरित हों। उन्होंने बताया कि नगर निगम की टीम हर गली और हर मोहल्ले में जाकर लोगों को जागरूक करेगी और उन्हें स्वच्छता साथी के रूप में जोड़ने का काम करेगी। यह अभियान केवल नारे लिखवाने या पोस्टर लगाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यवहार में बदलाव लाने पर केंद्रित होगा। उन्होंने कहा कि दीवारों पर लिखे गए संदेश तभी सार्थक होंगे, जब लोग अपने आचरण में स्वच्छता को अपनाएंगे। इसी सोच के साथ नगर निगम ने एक ऐसा तंत्र विकसित करने का निर्णय लिया है, जिसमें सेवानिवृत्त नागरिक, युवा, महिलाएं, छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता सभी अपनी भूमिका निभा सकें।

इस कार्यक्रम में IEC (Information, Education & Communication) टीम की ओर से भाव्या पांडे द्वारा एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी दिया गया, जिसने नगर निगम की संचार रणनीति को स्पष्ट रूप से सामने रखा। इस प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया गया कि किस प्रकार आधुनिक और रचनात्मक माध्यमों का उपयोग कर स्वच्छता संदेश को प्रभावी ढंग से नागरिकों तक पहुंचाया जाएगा। लघु एनिमेटेड फिल्मों और कॉमिक्स के जरिए बच्चों और युवाओं को जोड़ने की योजना प्रस्तुत की गई, ताकि संदेश सरल, रोचक और यादगार बने। इसके अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक कियोस्क, नुक्कड़ नाटक और कैलेंडर आधारित जागरूकता अभियानों की रूपरेखा भी साझा की गई, जिनका उद्देश्य शहर के हर कोने तक स्वच्छता का संदेश पहुंचाना है। भाव्या पांडे ने यह भी बताया कि ये सभी गतिविधियां केवल सूचना देने के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों को सक्रिय भागीदार बनाने के लिए तैयार की गई हैं।

प्रस्तुतीकरण में नागरिक जागरूकता कार्यक्रमों पर विशेष जोर दिया गया, जिनके तहत रैलियों, प्रशिक्षण सत्रों और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। स्वच्छता साथी कार्यक्रम के अंतर्गत नागरिकों को न केवल जिम्मेदारी दी जाएगी, बल्कि उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा। स्कूलों के छात्र-छात्राओं के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम तैयार किए गए हैं, ताकि बचपन से ही स्वच्छता की आदत विकसित हो सके। इसके अलावा महाविद्यालय स्तर और शहर स्तर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के आयोजन की योजना है, जिससे युवाओं में रचनात्मक सहभागिता बढ़े। ICCC (Integrated Command and Control Centre) से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से तकनीक का उपयोग कर स्वच्छता से संबंधित गतिविधियों की निगरानी और समन्वय किया जाएगा। इन सभी प्रयासों का मूल उद्देश्य नागरिकों को नगर निगम की पहल से जोड़कर एक साझा जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।

महापौर दीपक बाली ने अपने लंबे और भावनात्मक संबोधन में यह भी बताया कि IEC के अंतर्गत किए गए कार्य केवल दीवारों पर नारे लिखने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी और पेशेवर सोच काम कर रही है। उन्होंने कहा कि नगर निगम ने इस दिशा में एक प्रोफेशनल एजेंसी के साथ मिलकर काम करने का निर्णय लिया है, ताकि कार्यक्रमों की गुणवत्ता और प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने बताया कि इसी सोच के तहत टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई और लगातार बैठकों के माध्यम से एक ठोस कार्ययोजना तैयार की गई। उनका कहना था कि देश के जिन शहरों को स्वच्छता में सर्वोच्च स्थान मिला है, वहां हर नागरिक को इस अभियान से जोड़ा गया, और काशीपुर भी उसी मॉडल को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कैलेंडर के विमोचन के पीछे की सोच को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि जब हर घर में यह कैलेंडर लगेगा, तो तारीख देखते समय स्वच्छता का संदेश भी लोगों की नजर में आएगा।

अपने वक्तव्य में महापौर ने इस बात पर जोर दिया कि नगर निगम का उद्देश्य औपचारिकता निभाना नहीं है, बल्कि वास्तविक परिणाम हासिल करना है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम तभी सफल माना जाएगा जब उसकी पहुंच अंतिम व्यक्ति तक हो और लोग उसे अपनाएं। पार्षदों की भूमिका को निर्णायक बताते हुए उन्होंने कहा कि वार्ड स्तर पर उनकी सक्रियता के बिना यह अभियान आगे नहीं बढ़ सकता। नुक्कड़ नाटक हों या जागरूकता कार्यक्रम, हर गतिविधि में पार्षदों को अपने वार्ड के लोगों को जोड़ना होगा। उन्होंने बताया कि स्वच्छता साथी नाम से एक विशेष तंत्र विकसित किया गया है, जिसके तहत इच्छुक नागरिकों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। सेवानिवृत्त अधिकारी, युवा, महिलाएं, दुकानदार और यहां तक कि मीडिया से जुड़े लोग भी यदि चाहें तो स्वच्छता साथी बन सकते हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शहर की बड़ी आबादी को छोटे-छोटे समूहों में बांटकर जिम्मेदारी देना है।

महापौर ने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि किसी क्षेत्र में बीस ठेले लगते हैं, तो उनमें से दो लोगों को स्वच्छता साथी बनाकर पूरे क्षेत्र की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस तरह सम्मान और सहयोग के माध्यम से व्यवस्था में सुधार लाया जाएगा। उन्होंने यह भी साझा किया कि एक पार्षद ने अपने वार्ड में कूड़ा पॉइंट समाप्त करने के बाद बिना किसी निर्देश के वहां बोर्ड और बैनर लगवाए, जो अन्य पार्षदों के लिए प्रेरणा बन गया। इस तरह के सकारात्मक उदाहरणों से पूरे शहर में प्रतिस्पर्धा और सहयोग का वातावरण बनेगा। महापौर ने कहा कि आने वाले समय में खेल संगठनों, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक समूहों से भी संवाद किया जाएगा, ताकि बच्चों और युवाओं को इस अभियान से जोड़ा जा सके। उनका मानना है कि यदि बच्चे स्वच्छता का महत्व समझेंगे, तो वे अपने परिवार और समाज को भी प्रेरित करेंगे।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि स्वच्छता साथी बनने के लिए इच्छुक लोगों को एक प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिसमें उन्हें जिम्मेदारियों की जानकारी दी जाएगी। यह केवल फोटो खिंचवाने या नाम जोड़ने का कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि वास्तविक सहभागिता पर आधारित होगा। नगर निगम का लक्ष्य है कि शहर की लगभग डेढ़ से ढाई लाख की आबादी में से कम से कम दो हजार स्वच्छता साथी सक्रिय रूप से काम करें। इसके लिए एक ऐसा तंत्र विकसित किया जा रहा है, जिसमें हर वार्ड से दस-दस लोग जुड़ सकें और अपनी गलियों की निगरानी करें। महापौर ने यह भी बताया कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि स्वच्छता के साथ-साथ आजीविका के अवसर भी सृजित हों। इस सोच के पीछे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की योजनाओं को धरातल पर उतारने की भावना बताई गई।

शहर में बन रहे कंट्रोल रूम और अन्य बुनियादी ढांचे की जानकारी साझा करते हुए महापौर ने बताया कि लगभग चार से सवा चार करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य चल रहा है, जो सीमित बजट के बावजूद एक प्रभावी व्यवस्था प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह केंद्र नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों के लिए एक मॉडल के रूप में काम करेगा। इसके माध्यम से स्वच्छता, सुरक्षा और अन्य नागरिक सेवाओं की निगरानी और समन्वय बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। उन्होंने यह भी बताया कि कूड़ा प्रबंधन संयंत्र का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और इसे इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह शैक्षणिक दृष्टि से भी उपयोगी हो। स्ट्रीट डॉग शेल्टर के लिए भूमि चयन और DPR तैयार करने की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह कुमाऊं क्षेत्र के लिए एक मिसाल बनेगा। इन सभी योजनाओं का उद्देश्य शहर को व्यवस्थित, स्वच्छ और मानवीय बनाना है।

अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में महापौर दीपक बाली ने दोहराया कि नगर निगम का लक्ष्य केवल पुरस्कार प्राप्त करना नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि यदि नगर निगम को स्वच्छता के क्षेत्र में कोई सम्मान मिलता है, तो वह उस वार्ड के पार्षद को मंच पर सम्मानित करेंगे, जिसने सबसे बेहतर काम किया होगा। यह निर्णय पहले ही पार्षदों की बैठक में लिया जा चुका है। उन्होंने सभी 40 वार्डों में समान प्रयास करने की बात कही और पार्षदों से अपने नागरिकों को इस अभियान से जोड़ने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के दौरान नगर आयुक्त रविंद्र सिंह बिष्ट, सहायक नगर आयुक्त विनोद लाल शाह, कार्यालय अधीक्षक विकास शर्मा, वरिष्ठ भाजपा नेता राम मल्होत्रा, ईश्वर चंद्र गुप्ता, श्रीमती मुक्ता सिंह, सांसद प्रतिनिधि एवं पार्षद विजय बोबी, अर्बन बैंक के अध्यक्ष बोकी टंडन, भाजपा जिला उपाध्यक्ष मोहन बिष्ट, राहुल पैगिया, पार्षद दीपा पाठक, अंजना आर्य, वैशाली गुप्ता, अनीता कंबोज, पुष्कर बिष्ट, संदीप मोनू, पूर्व पार्षद अनिल चौहान, अनूप कुमार, सुरेश सैनी, शरीफ अब्दुल कादिर, पार्षद फईम गुड्डू, मोहम्मद सादिक, संजय शर्मा, सरफराज, रजत सिद्धू, प्रकाश नेगी, शेष कुमार, सितारा, मनोज जग्गा, प्रिंस बाली, घनश्याम सैनी, मोहम्मद आरिफ, बीना नेगी, मुकेश पाहवा, राजीव ठुकराल, विवेक शुक्ला, अशोक चावला सहित अनेक गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और भी सार्थक बना दिया।

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कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

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