काशीपुर।औद्योगिक नगरी में होली के उल्लास को भव्य स्वरूप देने के लिए नगर निगम परिसर को विशेष रूप से सजाया-संवारा जा रहा है। रंग-बिरंगी झालरों, पुष्प-सज्जा और पारंपरिक प्रतीकों के माध्यम से पूरे परिसर को उत्सवी माहौल में ढालने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि आमजन को प्रवेश करते ही पर्व की गरिमा और उमंग का अहसास हो सके। इसी क्रम में शनिवार दोपहर महापौर दीपक बाली ने कार्यक्रम स्थल का गहन निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने मंच, बैठने की व्यवस्था, प्रवेश-निकास मार्ग, कलाकारों के लिए तय स्थान, मीडिया गैलरी और सुरक्षा प्रबंधों की बारीकी से जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान महापौर ने अधिकारियों और आयोजन से जुड़े कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए और कार्यक्रम को समयबद्ध व अनुशासित ढंग से संपन्न कराया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आयोजन प्रातः 11 बजे से प्रारंभ होगा और इसमें शहर व आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है, इसलिए सभी व्यवस्थाएं उसी अनुरूप रखी जाएं।
इस अवसर पर महापौर दीपक बाली ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि यह काशीपुर के इतिहास में एक विशेष और यादगार दिन होगा, क्योंकि पहली बार ऐसा अवसर आ रहा है जब प्रदेश का कोई मुख्यमंत्री आम जनता के बीच लंबे समय तक रहकर होली मिलन समारोह में सहभागिता करेगा। उन्होंने बताया कि यह आयोजन किसी औपचारिक सरकारी कार्यक्रम की तरह सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे जनसरोकारों से जुड़ा एक खुला उत्सव बनाया गया है, जिसमें आम नागरिक बिना किसी भेदभाव के शामिल हो सकेंगे। महापौर ने कहा कि उनका उद्देश्य है कि होली के रंग केवल मंच तक सीमित न रहें, बल्कि जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच आपसी संवाद, सौहार्द और अपनत्व को भी मजबूत करें। उन्होंने नगरवासियों से अपील की कि वे अपने परिवार और मित्रों के साथ अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाएं और काशीपुर की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।
महापौर द्वारा निजी स्तर पर आयोजित किए जा रहे इस होली मिलन समारोह की तैयारियां बीते कई दिनों से लगातार चल रही हैं। आयोजन समिति ने नगर निगम परिसर को इस तरह से तैयार किया है कि यहां आने वाला हर व्यक्ति उत्सव का हिस्सा महसूस करे। दीपक बाली ने बताया कि कार्यक्रम का स्वरूप पूरी तरह से जनहित और जनसहभागिता पर आधारित है, जिसमें किसी भी वर्ग या समुदाय को अलग-थलग नहीं रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन काशीपुर की गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक समरसता का प्रतीक बनेगा। महापौर ने यह भी जोड़ा कि इस मंच के माध्यम से प्रदेश और शहर के बीच भावनात्मक सेतु मजबूत होगा, क्योंकि मुख्यमंत्री स्वयं जनता के बीच आकर उनके साथ होली की खुशियां साझा करेंगे। उन्होंने इसे काशीपुर के लिए गौरव का विषय बताया और कहा कि ऐसे आयोजन शहर की पहचान को राज्य स्तर पर और अधिक सशक्त करते हैं।
रंगोत्सव को और अधिक जीवंत बनाने के लिए उत्तराखंड की लोक-संस्कृति को विशेष स्थान दिया गया है। मंच पर लोकगायक इंद्र आर्या, गोविंद दिगारी, खुशी जोशी तथा पूर्वांचल के चर्चित गायक आलोक कुमार अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधेंगे। इनके गीतों के माध्यम से पहाड़ और मैदान की लोकधुनें एक ही मंच पर सुनाई देंगी। इसके साथ ही ब्रज क्षेत्र के प्रसिद्ध रास कलाकारों द्वारा फूलों की होली की मनोहारी प्रस्तुति भी दी जाएगी, जो दर्शकों को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभूति से जोड़ देगी। आयोजन समिति का कहना है कि इस सांस्कृतिक समागम का उद्देश्य नई पीढ़ी को लोककलाओं से परिचित कराना और पारंपरिक विरासत को जीवंत बनाए रखना है।
मुख्यमंत्री के प्रस्तावित आगमन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कार्यक्रम स्थल, मंच, पार्किंग क्षेत्र और आसपास की सड़कों का निरीक्षण कर सुरक्षा योजना को अंतिम रूप दिया है। चप्पे-चप्पे पर खाकी की तैनाती रहेगी और हर आने-जाने वाले पर नजर रखी जाएगी। महापौर दीपक बाली ने कहा कि सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा, ताकि आम जनता बिना किसी भय के कार्यक्रम का आनंद ले सके। उन्होंने बताया कि पुलिस, नगर निगम और स्वयंसेवी संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है, जिससे भीड़ प्रबंधन और आपात स्थितियों से निपटने में कोई दिक्कत न आए। इसके साथ ही यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि शहर के अन्य हिस्सों में आवागमन प्रभावित न हो।
मुख्यमंत्री के आगमन की खबर के साथ ही शहर में चर्चाओं का बाजार भी गर्म हो गया है। आमजन के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि क्या होली के इस मंच से काशीपुर को कोई बड़ी सौगात मिलेगी। चुनावी वर्ष होने के कारण लोगों की निगाहें संभावित घोषणाओं पर टिकी हुई हैं। विकास कार्यों, बुनियादी सुविधाओं और शहर के विस्तार से जुड़े मुद्दों पर लोगों में उम्मीद जगी है कि मुख्यमंत्री जनता के बीच आकर उनकी अपेक्षाओं को समझेंगे। महापौर दीपक बाली ने इस संबंध में कहा कि यह आयोजन राजनीति से ऊपर उठकर सामाजिक एकता और सांस्कृतिक उत्सव का प्रतीक है, लेकिन यदि जनता को विकास से जुड़ी कोई सकारात्मक घोषणा मिलती है, तो वह काशीपुर के लिए और भी शुभ संकेत होगा। उन्होंने कहा कि जनता की भावनाओं और अपेक्षाओं का सम्मान करना हर जनप्रतिनिधि का दायित्व है।
प्रेस वार्ता के दौरान महापौर दीपक बाली ने आम जनता से भावुक अपील करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम जनता का है और जनता के लिए ही आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं प्रदेश की जनता से संवाद बढ़ाने और काशीपुर व उसके आसपास के क्षेत्रों के लोगों के साथ होली की खुशियां साझा करने के उद्देश्य से यहां आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड की संस्कृति को आगे बढ़ाने वाले कलाकार इस मंच के माध्यम से अपनी कला प्रस्तुत करेंगे और मुख्यमंत्री भी इन प्रस्तुतियों का आनंद जनता के बीच बैठकर लेंगे। महापौर ने कहा कि यह अवसर बार-बार नहीं आता, इसलिए वे सभी नगरवासियों से आग्रह करते हैं कि अधिक से अधिक संख्या में नगर निगम परिसर पहुंचकर इस आयोजन को सफल बनाएं और काशीपुर की मेहमाननवाजी का परिचय दें।
समग्र रूप से देखा जाए तो यह होली मिलन समारोह केवल एक पर्व आयोजन नहीं, बल्कि काशीपुर की सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक चेतना का संगम बनने जा रहा है। नगर निगम परिसर में सजी रंगीन रोशनी, लोकसंगीत की गूंज, फूलों की होली की छटा और जनता के बीच मुख्यमंत्री की उपस्थिति—ये सभी मिलकर इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाने की क्षमता रखते हैं। अब यह काशीपुर की जनता पर निर्भर करता है कि वह किस तरह इस अवसर को अपनाती है और इसे शहर की स्मृतियों में एक सुनहरे अध्याय के रूप में दर्ज कराती है। रंगोत्सव केवल रंगों तक सीमित रहेगा या विकास और संवाद की नई इबारत भी लिखेगा, इसका जवाब आने वाला दिन देगा, जिसका इंतजार पूरा शहर बेसब्री से कर रहा है।





