spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडबुजुर्गों की सेहत संवारने को काशीपुर में बोन एंड जॉइंट सप्ताह बना...

बुजुर्गों की सेहत संवारने को काशीपुर में बोन एंड जॉइंट सप्ताह बना मिसाल

काशीपुर। वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य जागरूकता और सेवा की दिशा में एक अनुकरणीय पहल करते हुए ‘बोन एंड जॉइंट सप्ताह’ के अंतर्गत एक विशेष चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया, जिसने शहर के बुजुर्गों को राहत पहुंचाने का काम किया। इस शिविर का संचालन इंडियन आर्थोपेडिक एसोसिएशन के दिशा-निर्देश में केवीआर हॉस्पिटल, काशीपुर और वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति काशीपुर के संयुक्त प्रयासों से हुआ। आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि यहां उम्रदराज नागरिकों के स्वास्थ्य की बहुआयामी जांच की गई, जिनमें हड्डियों में कैल्शियम की मात्रा मापना, ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच प्रमुख रही। इसके साथ-साथ बड़ी संख्या में बुजुर्गों को निःशुल्क चिकित्सकीय परामर्श, दवाइयाँ तथा चलने के लिए स्टिक जैसे सहायक उपकरण भी वितरित किए गए, जिससे उन्हें न केवल तात्कालिक राहत मिली बल्कि भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए जागरूक भी किया गया।

इस आयोजन में भाग लेने वाले डॉक्टरों और सामाजिक प्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका ने इसे और प्रभावशाली बना दिया। शहर के प्रतिष्ठित हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण सोलंकी, डॉ. ए. के. सिरोही और त्रिभुवन अग्रवालने मौके पर मौजूद रहकर मरीजों की बारीकी से जांच की और उनके स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर गहन सलाह दी। इन अनुभवी चिकित्सकों ने वरिष्ठ नागरिकों को गिरने से रोकने के उपाय, हड्डियों की कमजोरी को कैसे टाला जाए, और नियमित व्यायाम के महत्व जैसे विषयों पर विस्तार से बात की। उनका यह मानना रहा कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, हड्डियों की संरचना और मांसपेशियों की शक्ति में गिरावट आना स्वाभाविक है, लेकिन जागरूकता, नियमित स्कैनिंग और उचित खान-पान से इन समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हड्डियों की देखरेख आज की नहीं बल्कि उम्रभर की आवश्यकता है, जो जीवन की गुणवत्ता को बनाये रखने में अहम भूमिका निभाती है।

डॉ. तरुण सोलंकी पे इस दोरान मिडिया से बात करते हुये बताया कि वरिष्ठ नागरिकों की सेहत के प्रति समर्पित इस वर्ष के बोन एंड जॉइंट सप्ताह की थीम “Old is Gold – 360° Care for the Elderly” रखी गई थी। इस थीम के तहत बुजुर्गों की देखभाल को केवल इलाज तक सीमित न रखकर, उन्हें जागरूक करने, सहायता देने और संपूर्ण सहयोग देने का प्रयास किया गया। डॉ. तरुण सोलंकी ने बताया कि 3 से 10 अगस्त के बीच कई प्रमुख अस्पतालों में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की ओपीडी फीस को आधा कर दिया गया, जिससे उन्हें अधिक से अधिक सुविधा मिल सके। उन्होंने बताया कि शहर के प्रमुख इलाकों में जागरूकता रैली भी निकाली गई और मुख्य आयोजन “बोन एंड जॉइंट डे” पर वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति के सहयोग से एक विशेष टॉक रखी गई, जिसमें गिरने से बचाव और जोड़ों की देखभाल पर विस्तार से चर्चा की गई। ज़रूरतमंद बुजुर्गों को पीएमडी कैंप, सप्लिमेंट्स वितरण, और नि:शुल्क जांच की सुविधाएं भी दी गईं। डॉ. सोलंकी ने स्पष्ट कहा कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर की क्षमता घटती है और हड्डियों तथा जोड़ों में दर्द होना सामान्य बात हो जाती है। यह खत्म तो नहीं किया जा सकता, लेकिन नियंत्रित अवश्य किया जा सकता है। इसके लिए वजन नियंत्रित रखना, नियमित व्यायाम, और समय पर डॉक्टर की सलाह लेना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस को लेकर विशेष चिंता जताई और कहा कि समय-समय पर BMD स्कैन कराना, वैल्यू के अनुसार दवाइयों व इंजेक्शन से इलाज कराना ज़रूरी है। जब हालात गंभीर हो जाएं, तो आजकल रोबोटिक तकनीक से जॉइंट रिप्लेसमेंट भी सुरक्षित व सफल विकल्प बन चुका है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयोजित आज के इस विशेष शिविर में मिडिया से बात करते हुये डॉ. ए. के. सिरोही ने स्पष्ट किया कि यह कैंप मरीजों के उपचार के लिए नहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों को जागरूक करने के उद्देश्य से था। उन्होंने कहा कि इस शिविर में दी गई सबसे महत्वपूर्ण सलाह यही थी कि गिरने से कैसे बचा जाए और जीवन की गुणवत्ता को कैसे बनाए रखा जाए। डॉ. सिरोही ने कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर सबसे ज़रूरी बात यह है कि हर वरिष्ठ नागरिक को अपनी सेहत की ज़िम्मेदारी खुद लेनी चाहिए। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या को न छुपाएं, बल्कि समय रहते अपने परिवार और दोस्तों से चर्चा करें। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं का ज़िक्र करते हुए बताया कि 50 की उम्र के बाद उनके शरीर में हार्माेनल बदलाव आते हैं, जिससे कैल्शियम की कमी होने लगती है। ऐसे में महिलाओं को कैल्शियम की पूर्ति और हड्डियों की मजबूती के लिए सजग रहना चाहिए। पुरुषों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि उनकी सक्रियता कम होती जाती है, जो हड्डियों की मजबूती को प्रभावित करती है। डॉ. सिरोही ने मुस्कुराते हुए कहा कि आपको जॉनी वॉकर की तरह चलते रहना चाहिए। जब आप चलते हैं, आपकी मांसपेशियाँ काम करती हैं, और वही आपकी हड्डियों को मजबूत बनाए रखती हैं। उन्होंने अंत में दो टूक कहा कि ‘मोबिलिटी इज़ द मोस्ट इंपॉर्टेंट।’ आपकी सेहत आपकी जिम्मेदारी है। हम डॉक्टर केवल मार्गदर्शन कर सकते हैं, लेकिन जिम्मेदारी आपकी अपनी है। यदि वरिष्ठ नागरिक अपना ध्यान स्वयं नहीं रखेंगे, तो वह अनजाने में अपने परिवार पर बोझ बन सकते हैं।

वही वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति काशीपुर के अध्यक्ष हरीश कुमार सिंह ने कार्यक्रम को लेकर जानकारी देते हुये कहा कि समय-समय पर हम विभिन्न गतिविधियाँ करते रहते हैं, क्योंकि समाज में लोगों की ज़रूरतें और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं लगातार बदलती रहती हैं। इस बार हमने विशेष रूप से ऐसा कार्यक्रम रखा है क्योंकि इस क्षेत्र में आकर देखा गया कि यहां हड्डी संबंधी बीमारियाँ काफी ज्यादा हो रही हैं। ऐसे में हड्डी की जांच और देखभाल अत्यंत आवश्यक हो जाती है। हरीश कुमार सिंह ने बताया कि इस कार्य में हमें डॉ. तरुण सोलंकी का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ है, जिनकी मदद से हड्डी रोग जांच की सुविधा इस शिविर में उपलब्ध कराई गई। इसके अतिरिक्त एक विशेष टीम भी आई है, जो अन्य कई स्वास्थ्य सेवाएं भी दे रही है। उन्होंने यह भी बताया कि दवाइयाँ भी विशेष छूट या निशुल्क रूप से इस कार्यक्रम के अंतर्गत दी जा रही हैं। उन्होंने बताया कि यह कोई एकदिवसीय प्रयास नहीं है, बल्कि हम लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी जो मरीज आगे जांच कराना चाहें या किसी और समस्या से जूझ रहे हों, उनके लिए नियमित रूप से केर सेंटर में व्यवस्था है, जहां जाकर वह चिकित्सकीय सलाह ले सकते हैं। हरीश कुमार सिंह ने कहा कि हमारी टीम हर महीने एक मीटिंग करती है, जिसमें स्थानीय समस्याओं और स्वास्थ्य आवश्यकताओं पर चर्चा होती है। इसमें हर बार कोई ना कोई नई पहल या समाधान निकलकर आता है। हम भविष्य में भी इसी तरह समाज के लिए कार्य करते रहेंगे, ताकि हर व्यक्ति को समय पर सही स्वास्थ्य सेवा मिल सके।

इस आयोजन के माध्यम से यह भी संदेश गया कि बुजुर्गों की देखभाल सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि व्यावहारिक स्तर पर भी ज़रूरी है। आज की तेज़ रफ्तार जीवनशैली में अक्सर वरिष्ठ नागरिकों की स्वास्थ्य ज़रूरतें नजरअंदाज हो जाती हैं, लेकिन ऐसे शिविर यह भरोसा देते हैं कि समाज अभी भी अपने मूल्यों को भूला नहीं है। निःशुल्क चिकित्सा जांच, जरूरी दवाओं की सुविधा और सहायक उपकरणों का वितरण यह दर्शाता है कि यदि चिकित्सा क्षेत्र और सामाजिक संस्थाएं एकजुट होकर कार्य करें, तो बुजुर्गों को एक सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वास्थ्यपूर्ण जीवन प्रदान किया जा सकता है। बोन एंड जॉइंट सप्ताह का यह प्रयास न केवल चिकित्सा सेवा की दृष्टि से बल्कि एक सामाजिक चेतना के रूप में भी शहर की स्मृतियों में लंबे समय तक जीवित रहेगा।

शिविर को सफल बनाने में वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति काशीपुर का योगदान विशेष सराहनीय रहा। समिति के अध्यक्ष हरीश कुमार सिंह, सचिव चंद्र भूषण डोभाल और संरक्षक के एस कपूर स्वयं मौके पर मौजूद रहे और पूरी व्यवस्था का गहन निरीक्षण किया। इन सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं ने न केवल आयोजन को व्यवस्थित रूप से संचालित किया, बल्कि शिविर में आने वाले हर एक बुजुर्ग की व्यक्तिगत समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और उनकी सहायता में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनकी उपस्थिति और सेवा भावना ने यह साबित कर दिया कि जब समाज के अनुभवी नागरिकों के लिए संगठित रूप से प्रयास किया जाता है, तो बदलाव की नींव मजबूती से रखी जा सकती है। समिति के सदस्यों ने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में इस तरह के और भी शिविर समय-समय पर लगाए जाएंगे, ताकि जरूरतमंदों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचती रहें।

इस आयोजन के माध्यम से यह भी संदेश गया कि बुजुर्गों की देखभाल सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि व्यावहारिक स्तर पर भी ज़रूरी है। आज की तेज़ रफ्तार जीवनशैली में अक्सर वरिष्ठ नागरिकों की स्वास्थ्य ज़रूरतें नजरअंदाज हो जाती हैं, लेकिन ऐसे शिविर यह भरोसा देते हैं कि समाज अभी भी अपने मूल्यों को भूला नहीं है। निःशुल्क चिकित्सा जांच, जरूरी दवाओं की सुविधा और सहायक उपकरणों का वितरण यह दर्शाता है कि यदि चिकित्सा क्षेत्र और सामाजिक संस्थाएं एकजुट होकर कार्य करें, तो बुजुर्गों को एक सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वास्थ्यपूर्ण जीवन प्रदान किया जा सकता है। बोन एंड जॉइंट सप्ताह का यह प्रयास न केवल चिकित्सा सेवा की दृष्टि से बल्कि एक सामाजिक चेतना के रूप में भी शहर की स्मृतियों में लंबे समय तक जीवित रहेगा।

संबंधित ख़बरें
शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!