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पर्वतीय समाज में उबाल रवि पपनै पर गंभीर आरोप काशीपुर में माहौल तनावपूर्ण

पर्वतीय समाज के वरिष्ठजनों ने रवि पपनै की गतिविधियों पर जताया आक्रोश, तहरीर देकर पुलिस से कठोर कार्रवाई और सोशल मीडिया अकाउंट बंद करने की उठाई मांग

काशीपुर। एक ताज़ा मामला उस समय सुर्खियों में आ गया जब पर्वतीय समाज ने सैनिक कॉलोनी निवासी रवि पपनै पुत्र पुरन चंद्र पपनै के खिलाफ पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई। समाज के लोगों का कहना है कि वह लंबे वक्त से सोशल मीडिया मंचों का दुरुपयोग कर भड़काऊ और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे समुदाय की गरिमा आहत हो रही है। यह भी आरोप है कि वह आए दिन गाली-गलौज और अपशब्दों से भरे वीडियो जारी कर समाज को नीचा दिखाने की कोशिश करता है, जिससे बुजुर्गों की भावनाएं आहत हो रही हैं और युवाओं में ग़लत संदेश पहुंच रहा है। सबसे गंभीर घटना तब सामने आई जब 18 अगस्त की रात उसने एक वीडियो साझा कर चेतावनी दी कि यदि इस बार पर्वतीय समाज रामलीला का आयोजन करेगा तो वह एसडीएम काशीपुर कार्यालय पहुंचकर आत्महत्या कर लेगा और इसकी जिम्मेदारी पूरे समाज पर डालेगा। इस तरह की धमकीपूर्ण और उकसाने वाली बातें न केवल अनुचित मानी जा रही हैं बल्कि शहर के सौहार्द्र और शांति के लिए खतरनाक भी समझी जा रही हैं।

इस पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए पर्वतीय समाज के प्रतिनिधि सीधे कोतवाली पहुंचे और मांग की कि आरोपी के खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई अन्य व्यक्ति इस तरह के कदम उठाने का दुस्साहस न करे। उनका कहना है कि लगातार वायरल हो रहे ऐसे वीडियो समाज की साख को धूमिल कर रहे हैं और सरकारी अधिकारियों को खुली चुनौती देने का प्रयास भी कर रहे हैं। इस मामले ने समुदाय में गहरी नाराज़गी पैदा कर दी है और हर कोई चाहता है कि दोषी के खिलाफ सख्ती से पेश आकर कानून का भय कायम किया जाए। वहीं कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अमर चंद शर्मा ने बताया कि उन्हें समाज की शिकायत प्राप्त हो चुकी है और मामले की गहन जांच की जा रही है। उनका कहना है कि जांच पूरी होते ही आरोपी पर वैधानिक कार्रवाई होगी ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे और क्षेत्र में माहौल सामान्य बना रहे।

इधर विवाद बढ़ने पर पर्वतीय समाज ने एक और ठोस मांग रखी है कि आरोपी के सभी सोशल मीडिया अकाउंट तुरंत बंद किए जाएं। उनका मानना है कि ऐसी सामग्री समाज में नफरत फैलाने और लोगों को भड़काने का काम कर रही है। यदि यह प्लेटफॉर्म सक्रिय रहते हैं तो समुदाय में लगातार तनाव बना रहेगा और नई पीढ़ी पर इसका हानिकारक असर पड़ता रहेगा। समाज ने साफ कहा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल किसी को बदनाम करने या समुदाय की छवि धूमिल करने के लिए नहीं होना चाहिए। इसीलिए प्रशासन और सरकार से आग्रह है कि ऐसे लोगों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। पर्वतीय समाज ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह अपने सम्मान और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव प्रयास करेगा और समाज में भाईचारे और विश्वास को बचाए रखने के लिए किसी भी तरह की कड़ाई से पीछे नहीं हटेगा।

इस दोरान पर्वतीय समाज के अध्यक्ष विजेंद्र दत्त कंडवाल ने मिडिया से बात करते हुये कहा कि हमारे समाज के प्रति जिस प्रकार की अपमानजनक टिप्पणियाँ और झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं, वे अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण हैं। किसी भी मंच या माध्यम से जब भी कोई बात कही जाती है, तो उसके पीछे प्रमाण होना चाहिए। बिना साक्ष्य किसी पर आरोप लगाना न केवल गलत है, बल्कि समाज की गरिमा और एकता के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय समाज के बारे में फैलाई जा रही अफवाहें और व्यक्तिगत स्तर पर की जा रही टिप्पणियाँ हमारे पूरे समुदाय की भावनाओं को आहत कर रही हैं।

विजेंद्र दत्त कंडवाल ने आगे कहा कि हमने कई बार समझाने की कोशिश की कि इस प्रकार का व्यवहार उचित नहीं है और किसी भी मंच से अगर कोई शिकायत या सवाल है तो उसे सभ्य और मर्यादित ढंग से रखा जाना चाहिए। लेकिन बार-बार अपमानजनक वीडियो और पोस्ट करके समाज में मतभेद फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा समाज हमेशा सभी जातियों और समुदायों के साथ भाईचारे और सौहार्द्र के साथ रहने में विश्वास रखता है और हमें इस एकता को हर हाल में बनाए रखना है।

उन्होंने यह भी कहा कि पर्वतीय समाज महासभा का उद्देश्य समाज को आगे बढ़ाना और लोगों को जोड़ना है, न कि आपसी कलह और विवाद फैलाना। इसलिए इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाना बेहद आवश्यक है। विजेंद्र दत्त कंडवाल ने प्रशासन से मांग की कि रवि पपनै के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार से समाज के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने का साहस न कर सके। उन्होंने कहा कि ईश्वर ऐसे लोगों को सद्बुद्धि दे और वे समझें कि अफवाहें फैलाने या समाज को बांटने से किसी का भला नहीं होता।

अंत में विजेंद्र दत्त कंडवाल ने स्पष्ट कहा कि पर्वतीय समाज एकजुट है और किसी भी सूरत में अपने सम्मान और एकता से समझौता नहीं करेगा। हम सभी चाहते हैं कि काशीपुर की पवित्रता और शांति बनी रहे और कोई भी व्यक्ति समाजों के बीच नफरत या मतभेद न पैदा कर सके।

वार्ड 20 के पार्षद पुष्कर सिंह बिष्ट ने काशीपुर की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारा काशीपुर हमेशा से शांति प्रिय शहर रहा है, जहां सभी समाज और धर्म के लोग मिलजुलकर रहते आए हैं। लेकिन एक व्यक्ति, रवि पपनै, लगातार न केवल पर्वतीय समाज बल्कि अन्य समुदायों पर भी अभद्र टिप्पणियाँ कर शहर का वातावरण खराब कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस व्यक्ति ने यहां तक कह दिया कि यदि इस बार पर्वतीय समाज रामलीला का आयोजन करेगा तो वह आत्मदाह कर लेगा। ऐसे बयान न केवल समाज की भावनाओं को आहत करते हैं बल्कि काशीपुर की सामूहिक एकता और सौहार्द्र को भी ठेस पहुंचाते हैं।

वहीं इस दौरान पुष्कर सिंह बिष्ट ने मिडिया को बताया कि यह कोई पहली बार नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से रवि पपनै पर्वतीय समाज के वरिष्ठजनों, पदाधिकारियों और समाज के अन्य सदस्यों पर व्यक्तिगत टिप्पणियाँ करता आ रहा है। मंच हो या सोशल मीडिया, हर जगह उसने अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हमारा समाज हमेशा सबको साथ लेकर चलने वाला समाज है, लेकिन इस व्यक्ति की गतिविधियों ने न केवल पर्वतीय समाज बल्कि पूरे शहर में तनाव पैदा कर दिया है।

पार्षद बिष्ट ने कहा कि काशीपुर के हर नागरिक को इस बात की जानकारी है कि यह व्यक्ति किस प्रकार बार-बार समाजों को बांटने का काम करता है और जातिवाद व धर्म के नाम पर माहौल बिगाड़ने की कोशिश करता है। उन्होंने एसपी और कोतवाल से मुलाकात कर मांग की कि इस व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि हमारी पूरी पर्वतीय समाज की कमेटी कोतवाल से मिल चुकी है और अब हम आईटीआई थाने में जाकर औपचारिक तहरीर सौंपेंगे।

अंत में पुष्कर सिंह बिष्ट ने स्पष्ट किया कि काशीपुर का वातावरण किसी भी व्यक्ति की मनमानी से खराब नहीं होने दिया जाएगा। हमारा शहर शांति, सौहार्द्र और भाईचारे का प्रतीक है और इसे बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। समाज की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए और कोई भी व्यक्ति यदि उन्हें आहत करने की कोशिश करता है तो उस पर कड़ी कार्रवाई अनिवार्य है।

पूर्व पार्षद जगत बिष्ट ने कहा कि ऐसे लोगों को भगवान सद्बुद्धि दे ताकि वे समाज में अशांति और भ्रम फैलाने के बजाय अच्छे कार्यों में योगदान दें। यदि कोई व्यक्ति अपनी निजी इच्छाओं या परेशानियों से गुजर रहा है तो उसे अपने स्तर पर उसका समाधान करना चाहिए, लेकिन किसी और का नाम लेकर अफवाह फैलाना या समाज को गुमराह करना बिल्कुल गलत है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी को मुझसे व्यक्तिगत शिकायत है तो सामने आकर बात करे या फिर न्यायालय में जाए, लेकिन सोशल मीडिया पर बिना प्रमाण के गलत आरोप लगाना और किसी के प्रतिष्ठान या परिवार पर अनगिनत टिप्पणी करना अस्वीकार्य है।

जगत बिष्ट ने आगाह किया कि यदि इस तरह की गतिविधियां नहीं रुकीं तो वे मानहानि का मुकदमा दर्ज करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि पहले भी इस व्यक्ति की शिकायतें कोतवाली और अन्य प्रशासनिक स्तरों पर की गई हैं, यहां तक कि थाना प्रभारी और कोतवाल द्वारा भी कई बार समझाया गया है कि इस प्रकार की गलत पोस्ट या बयानबाजी बंद करें, मगर इसके बावजूद इसमें कोई सुधार नहीं दिखा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब यदि यह सिलसिला जारी रहा तो मानहानि की कार्यवाही निश्चित रूप से की जाएगी, क्योंकि बिना किसी ठोस साक्ष्य के किसी पर निराधार आरोप लगाना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि समाज की शांति और सम्मान के साथ खिलवाड़ भी है।

पूर्व पार्षद ने आगे कहा कि इस प्रकार का व्यवहार मानसिक असंतुलन की निशानी है और ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी ही चाहिए। उन्होंने यह भी दोहराया कि समाज में आपसी भाईचारा और सौहार्द्र बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है, और ऐसे लोगों की हरकतों से समाज की गरिमा को आहत नहीं होने दिया जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पर्वतीय समाज के कई वरिष्ठ सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे और उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अपनी नाराज़गी व्यक्त की। मौके पर पहुंचे समाज के सम्मानित लोग एकजुट होकर इस बात पर सहमत दिखे कि आरोपी की हरकतें न केवल असहनीय हैं बल्कि समुदाय की प्रतिष्ठा और अनुशासन को भी ठेस पहुँचा रही हैं। इसी कड़ी में समाज के प्रतिष्ठित प्रतिनिधि योगेश बिष्ट, गोविन्द सिंह बिष्ट, चंद्र भूषण डोभाल और सूरज पटवाल समेत कई अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे और उन्होंने प्रशासन से त्वरित और ठोस कार्रवाई की मांग की। सभी का कहना था कि इस तरह की हरकतें अगर समय रहते नहीं रोकी गईं तो समाज के भीतर असंतोष और तनाव और अधिक बढ़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरोपी पर तुरंत नियंत्रण नहीं किया गया तो समुदाय मजबूर होकर सामूहिक आंदोलन का रास्ता अपनाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

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