spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडनर्सिंग भर्ती को लेकर भड़का आक्रोश, पुलिस–छात्रा भिड़ंत से राजधानी में तनाव

नर्सिंग भर्ती को लेकर भड़का आक्रोश, पुलिस–छात्रा भिड़ंत से राजधानी में तनाव

देहरादून। नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया में वर्षवार व्यवस्था बहाल किए जाने सहित कई प्रमुख मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे नर्सिंग बेरोजगार अभ्यर्थी एक बार फिर बड़े पैमाने पर सड़क पर उतरे। सुबह से ही देहरादून के विभिन्न हिस्सों से पहुँचे युवा दिलाराम चौक पर जुटे और वहाँ से मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने लगे। जैसे ही भीड़ बढ़ी, पुलिस बल ने न्यू कैंट रोड के पास साला वाला क्षेत्र में भारी बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। अभ्यर्थियों का कहना था कि उनके शांतिपूर्ण मार्च को अचानक जबरन रोकने की कोशिश हुई, जिससे माहौल तनातनी में बदल गया। आगे बढ़ने पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई, जिसमें कई लोग एक-दूसरे से धक्का-मुक्की करते देखे गए। युवक-युवतियों के चेहरे पर भविष्य को लेकर बेचैनी और शासन द्वारा लगातार हो रही अनदेखी की पीड़ा साफ झलकती दिखी। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि सरकार उनसे संवाद करने के बजाय पुलिस बल के सहारे उनकी आवाज दबाना चाहती है, जबकि वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि भर्ती प्रक्रिया पहले की तरह नियमित और पारदर्शी रूप से संचालित हो।

उधर, बैरिकेडिंग के बीच जैसे-जैसे स्थिति गर्म होती गई, अचानक एक घटनाक्रम ने पूरे माहौल को और विस्फोटक बना दिया। प्रदर्शन के बीच मौजूद एक महिला पुलिसकर्मी द्वारा प्रदर्शन में शामिल एक नर्सिंग बेरोजगार छात्रा को थप्पड़ जड़ने की घटना ने अभ्यर्थियों में तीखी नाराज़गी भड़का दी। चश्मदीदों के अनुसार, गिरफ्तारी की कार्यवाही आगे बढ़ाए जाने के दौरान यह विवाद भड़का और कुछ ही पलों में दोनों के बीच हाथापाई की नौबत आ गई। वहां मौजूद अन्य छात्रों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने अनावश्यक बल प्रयोग करते हुए कई जगह अभद्रता की, जिसके कारण तनाव बढ़ा। इस झड़प का वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे राज्यभर में पुलिस की भूमिका को लेकर बहस छिड़ गई। प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना था कि उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने का अधिकार है, लेकिन पुलिस ने उन्हें अपराधियों जैसा व्यवहार करते हुए रोकने और डराने की कोशिश की। कई अभ्यर्थी रोते हुए दिखाई दिए और उनका कहना था कि वर्षों की पढ़ाई, मेहनत और सपनों के बाद भी सरकार उन्हें लगातार उपेक्षित कर रही है।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे नर्सिंग एकता मंच उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष नवल पुंडीर ने बताया कि संगठन लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया को पुराने स्वरूप में बहाल करने, वर्षभर भर्ती खोलने और अभ्यर्थियों को उनके परिश्रम के अनुरूप अवसर देने की मांग कर रहा है। पुंडीर ने कहा कि बार-बार ज्ञापन सौंपने, धरना देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं दिया जा रहा। उनका कहना था कि भाजपा सरकार ने कई बार युवाओं को रोजगार देने के बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन नर्सिंग क्षेत्र में लगातार अनियमित और देरी से होने वाली भर्तियां युवाओं का भविष्य खा रही हैं। उन्होंने कहा कि गैर-जिम्मेदार नीतियों और ठहर चुकी प्रक्रिया के कारण हजारों योग्य नर्सिंग प्रशिक्षित युवा मानसिक तनाव में हैं और उन्हें अपने आगे के करियर को लेकर गंभीर चिंता है। नवल पुंडीर ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार नर्सिंग क्षेत्र में बढ़ती रिक्तियों और स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता को नज़रअंदाज़ कर रही है, जबकि अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में स्टाफ की भारी कमी है।

प्रदर्शन करने पहुंचे बेरोजगार युवाओं ने न सिर्फ भर्ती प्रक्रिया की धीमी रफ्तार पर सवाल उठाए, बल्कि मौजूदा भर्ती विज्ञप्ति और भर्ती पोर्टल को पूरी तरह अव्यवस्थित बताते हुए तुरंत निरस्त करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि आईपीएचएस मानकों के तहत स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग में लगभग ढाई हजार से अधिक पद रिक्त हैं, लेकिन सरकार नई विज्ञप्ति जारी करने में टालमटोल कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि उत्तराखंड मूल निवासियों को भर्ती में प्राथमिकता दी जाए और अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों को अलग प्रक्रिया के तहत शामिल किया जाए, ताकि राज्य के युवाओं के अवसर सुरक्षित रहें। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद सभी अभ्यर्थियों को एकता विहार स्थित धरना स्थल भेजा गया, लेकिन यहां भी युवाओं का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उनका कहना था कि सरकार यदि चाहती तो समस्या का समाधान वार्तालाप से निकाल सकती थी, लेकिन बार-बार की चुप्पी से यह स्पष्ट है कि युवाओं की बात सुनने का कोई इरादा नहीं है।

इसी विवाद को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। नर्सिंग छात्रा को थप्पड़ मारने की घटना पर महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने पुलिस के व्यवहार पर कड़ा सवाल उठाया। ज्योति रौतेला ने कहा कि यह छात्रदृछात्राएं अपने अधिकारों और न्यायपूर्ण मांगों को लेकर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने जिस प्रकार महिला अभ्यर्थी के साथ हाथ उठाया, वह न केवल अनुचित है बल्कि कानून व्यवस्था की गरिमा को भी ठेस पहुँचाता है। उन्होंने इस घटना को शर्मनाक करार देते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। रौतेला ने कहा कि सरकार युवाओं को अवसर देने के बजाय उनकी आवाज दबाने के रास्ते पर चल रही है, जो किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के लिए उचित नहीं। नर्सिंग बेरोजगारों ने भी कहा कि वे महीनों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी ओर नजर उठाकर देखने को भी तैयार नहीं। कई युवाओं ने कहा कि रोजगार न मिलने से उनका भविष्य अंधकार में जा रहा है और उन्हें लग रहा है कि पढ़ाई-लिखाई के बावजूद उन्हें अपने ही राज्य में उपेक्षित किया जा रहा है। अभ्यर्थियों का कहना था कि सरकार को तुरंत ठोस कदम उठाकर भर्ती प्रक्रिया को सही रूप में बहाल करना चाहिए, वरना आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।

संबंधित ख़बरें
शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!