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नगर निगम सफाई कर्मचारियों की उपेक्षा से भड़का आक्रोश जल्द समाधान नहीं तो आंदोलन तय

देवभूमि उत्तराखण्ड सफाई कर्मचारी संघ शाखा नगर निगम काशीपुर ने चेताया वर्दी धुलाई भत्ता वेतन और सुविधाएं न मिलने पर बड़ा आंदोलन होगा शुरू

काशीपुर। नगर निगम में सफाई कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर उठ रही आवाज़ ने अब तेज रूप ले लिया है। देवभूमि उत्तराखण्ड सफाई कर्मचारी संघ शाखा नगर निगम काशीपुर ने नगर निगम महापौर को भेजे पत्र के जरिए गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संघ ने स्पष्ट कहा है कि सफाई व्यवस्था को दुरुस्त बनाए रखने वाले कर्मचारी खुद बदहाली का शिकार हैं और उनकी मूलभूत मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कई वर्षों से लगातार मेहनत करने वाले इन कर्मचारियों को ना तो उचित सुविधाएं मिल रही हैं और ना ही उनकी बुनियादी आवश्यकताओं पर नगर निगम कोई कदम उठा रहा है। इस स्थिति ने कर्मचारियों को हताश कर दिया है और अब उन्होंने लिखित रूप से नगर निगम प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समस्याओं का हल जल्द नहीं किया गया तो उन्हें आंदोलन का सहारा लेना पड़ेगा।

काफी लंबे समय से लगातार कार्य कर रहे सफाई कर्मियों ने बताया कि पिछले दो से तीन साल से उन्हें वर्दी तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। यह स्थिति न केवल नियमों के विपरीत है बल्कि कर्मचारियों के मनोबल को भी प्रभावित कर रही है। सफाई कर्मचारी सुबह से देर शाम तक नगर की गलियों, बाजारों और मोहल्लों में स्वच्छता बनाए रखने का जिम्मा निभा रहे हैं, लेकिन जब उनके ही लिए आवश्यक संसाधन और वर्दी उपलब्ध नहीं कराई जाती तो यह उनकी मेहनत के साथ सीधा अन्याय है। कर्मचारियों का कहना है कि यह लापरवाही नगर निगम प्रशासन की गंभीर उदासीनता को दर्शाती है। ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि जिन कर्मचारियों से पूरे नगर की सफाई की उम्मीद की जाती है, उन्हें आखिर किस हालात में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

सिर्फ वर्दी ही नहीं बल्कि उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित ₹500 प्रतिमाह धुलाई भत्ता भी सफाई कर्मचारियों को अब तक नहीं दिया जा रहा है। यह भत्ता उनकी वर्दियों की देखभाल और स्वच्छता के लिए अनिवार्य माना गया है, लेकिन नगर निगम द्वारा इस आदेश की अनदेखी किए जाने से कर्मचारियों में गहरी नाराजगी है। संघ का कहना है कि जब सर्वाेच्च न्यायालय का निर्देश तक अमल में नहीं लाया जा रहा तो यह नगर निगम की गंभीर चूक है। सफाई कर्मियों की मेहनत और उनकी आवश्यकताओं को नजरअंदाज करना कहीं ना कहीं कर्मचारियों के साथ अन्याय है। ऐसी परिस्थितियों में यह स्वाभाविक है कि उनका असंतोष बढ़ेगा और उनका विश्वास प्रशासन से उठेगा।

समस्याओं की लंबी सूची में सबसे बड़ी परेशानी यह भी है कि कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है। कई बार महीनों तक वेतन में देरी होने से उन्हें घर चलाने और परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। संघ का कहना है कि वेतन समय पर न मिलने से बच्चों की पढ़ाई, परिवार की जरूरतें और चिकित्सा जैसी आवश्यक चीजें बुरी तरह प्रभावित होती हैं। सफाई कर्मचारी दिन-रात नगर को साफ रखने का काम करते हैं और बदले में उन्हें उनके मेहनताने तक में अनिश्चितता झेलनी पड़ रही है। इस वजह से उनका जीवन स्तर और अधिक दिक्कतों में घिरता जा रहा है।

इसके अलावा कर्मचारियों ने शिकायत की है कि छुट्टियों में भी उन्हें ड्यूटी करनी पड़ती है और इसके बदले में कोई प्रतिपूर्ति या एडजस्टमेंट नहीं किया जाता। यह रवैया कर्मचारियों के प्रति शोषण जैसा है। जब सामान्य दिनों में ही वेतन और सुविधाएं सही नहीं मिल रही हैं, ऐसे में छुट्टियों में मजबूरी में काम कराने के बाद भी किसी तरह का मुआवजा ना मिलना उनके लिए बेहद पीड़ादायक है। संघ ने इसे कर्मचारियों की हक की अनदेखी करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति लंबे समय तक जारी रही तो कर्मचारियों का धैर्य जवाब दे देगा।

महिला सफाई कर्मचारियों की समस्या भी उतनी ही गंभीर है। पत्र में उल्लेख किया गया कि उनके लिए शौचालय, पीने के पानी और बैठने की उचित व्यवस्था तक नहीं है। रोजाना घंटों नगर की गलियों में मेहनत करने वाली महिलाएं जब बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहती हैं, तो यह प्रशासन की लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। महिला कर्मचारियों के साथ यह उपेक्षा उनके सम्मान और सुरक्षा दोनों के खिलाफ है। संघ ने मांग की है कि तुरंत प्रभाव से उनके लिए यह सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं ताकि उन्हें कार्यस्थल पर सहज और सुरक्षित वातावरण मिल सके।

नियमित ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर भी संघ ने गंभीर सवाल उठाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से वे कार्य कर रहे हैं, लेकिन उनकी नियुक्ति को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। अनिश्चित भविष्य और अस्थायी व्यवस्था में कार्य करने की मजबूरी ने कर्मचारियों की चिंता और बढ़ा दी है। संघ ने यह भी कहा कि नगर निगम प्रशासन को इस मामले में तुरंत निर्णय लेकर कर्मचारियों को स्थायी नियुक्ति का आश्वासन देना चाहिए ताकि वे निश्चिंत होकर अपना कार्य कर सकें।

संघ ने अपने पत्र के माध्यम से नगर निगम महापौर को साफ चेतावनी दी है कि यदि इन तमाम मांगों और समस्याओं का समाधान शीघ्र नहीं किया गया तो सफाई कर्मचारी आंदोलन करने पर विवश होंगे। उन्होंने कहा कि नगर निगम क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त बनाए रखने के लिए कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान जरूरी है और जब तक उनकी उचित मांगों पर अमल नहीं होता, तब तक हालात सामान्य रहना मुश्किल है। साफ-सफाई जैसे महत्वपूर्ण काम को अंजाम देने वाले इन कर्मचारियों की अनदेखी अब किसी भी तरह बर्दाश्त नहीं की जाएगी और प्रशासन को गंभीरता से इस मामले पर तत्काल कदम उठाना होगा।

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कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

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