- बोर्ड बैठक में विकास केंद्रित निर्णय, राजस्व वृद्धि और पारदर्शी सिस्टम को बढ़ावा दिया गया
- 19 प्रस्तावों को सर्वसम्मति, विकास, सफाई सुधार और आधुनिक लाइट व्यवस्था तय
- निगम ने 500 दुकान निर्माण योजना, सफाई मास्टर प्लान और रजिस्ट्रेशन सुधार को अपनाया
- ट्रेड लाइसेंस शुल्क घटा, रजिस्ट्रेशन बढ़ा, निगम की आय बढ़ने के नए रास्ते खुले
- निगम ने दुकानों के पुराने अनुबंध सुधारे, आय बढ़ोतरी और नई योजनाओं को बल मिला
काशीपुर। शहर के विकास को लेकर नगर निगम की दूसरी बोर्ड बैठक बुधवार को निगम सभागार में ऐसे माहौल के बीच सम्पन्न हुई, जहाँ माहौल पूरी तरह कामकाज और भविष्य की संभावनाओं को मजबूत करने पर केंद्रित दिखा। बैठक की अध्यक्षता महापौर दीपक बाली ने की, जबकि संचालन की जिम्मेदारी नगर आयुक्त रवीन्द्र सिंह बिष्ट ने निभाई। कुल 19 प्रस्ताव सदन के सामने रखे गए और सभी को पार्षदों ने ध्वनि मत से मंजूरी दी। महापौर ने बताया कि निगम अनुमानित आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की तैयारी में है। उनका कहना था कि नगरपालिका की वार्षिक आय करीब सवा दो करोड़ रुपये बढ़ने की कगार पर है, जिससे हर वर्ष करीब दो करोड़ पच्चीस लाख रुपये का अतिरिक्त राजस्व सुनिश्चित होगा। उन्होंने बताया कि केवल रजिस्ट्रेशन शुल्क से ही निगम को लगभग सवा सात लाख रुपये मिल चुके हैं और यह प्रक्रिया लगातार प्रगति कर रही है, जो संकेत देती है कि जनता की भरोसेमंदी निगम की नीतियों की ओर बढ़ी है और नागरिक अब व्यवस्था से जुड़ने में अधिक सहज महसूस कर रहे हैं।
इसी क्रम में महापौर दीपक बाली ने दुकानों के पुराने अनुबंधों में वर्षों से चल रही विसंगतियों को सुधारने की पहल को बैठक के दौरान अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने बताया कि नगर निगम की लगभग 500 दुकानें वर्षों से किराए पर हैं, परंतु उनमें से कई दुकानों के किराया-वृद्धि समझौते लम्बे समय से अटके हुए थे। अब जब निगम ने इन सभी लंबित मामलों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया है, तो इस वित्तीय वर्ष में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की आय की उम्मीद है। महापौर ने स्पष्ट किया कि कई दुकानों का किराया समय रहते बढ़ जाना चाहिए था, लेकिन विभिन्न कारणों से वह प्रक्रिया रुकी रही। अब जब सभी किरायेदार निर्धारित नियमों का पालन करते हुए किराया जमा कर रहे हैं, तो निगम को डेढ़ से ढाई करोड़ रुपये के बीच का अतिरिक्त राजस्व मिलने जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि दाखिलदृखारिज पर पूर्व में लगाए जाने वाले दो प्रतिशत शुल्क को समाप्त करने के बाद भी निगम राजस्व के मामले में किसी तरह की कमी नहीं महसूस कर रहा है। पहले जहाँ इस प्रक्रिया से लगभग एक करोड़ पच्चीस लाख रुपये प्राप्त होते थे, वहाँ अब सिर्फ एक हजार रुपये आवेदन शुल्क से ही 35 लाख रुपये आ चुके हैं।

बैठक के दौरान शहर की आय में बड़े स्तर पर वृद्धि करने वाली एक और योजना को भी प्रमुखता से रखा गया, जिसमें नगर निगम की जमीनों पर 500 नई दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव शामिल है। महापौर दीपक बाली ने पार्षदों से कहा कि वे अपने वार्डों में उन स्थानों की पहचान करें जहाँ निगम की जमीन पर अवैध कब्जे हैं या किसी व्यक्ति ने लंबे समय से भूमि रोक रखी है। इन स्थानों पर नए सिरे से व्यवस्थित दुकानों का निर्माण कर नगर निगम को बड़े पैमाने पर आय प्राप्त हो सकेगी। महापौर ने बताया कि इन दुकानों के निर्माण के बाद निगम की आय में एक करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि कुल आय जोड़ने पर निगम के पास लगभग इक्यासी करोड़ बीस लाख रुपये का संभावित राजस्व आएगा, जबकि निर्माण पर महज पच्चीस करोड़ की लागत अनुमानित है। इस प्रकार कुल मिलाकर लगभग छप्पन करोड़ रुपये की शुद्ध आमदनी निगम को प्राप्त हो सकती है, जो काशीपुर में विकास कार्यों को तेजी देने का मजबूत आधार बनेगी। उन्होंने पार्षदों से आग्रह किया कि जब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया शुरू हो, तो वे अधिक से अधिक लोगों को आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित करें ताकि निगम को अधिकतम राजस्व प्राप्त हो।
इसके अलावा बैठक में ट्रेड लाइसेंस की पुरानी व्यवस्था में किए गए व्यापक सुधारों को भी विस्तार से रखा गया। महापौर दीपक बाली ने बताया कि पहले निगम में 179 श्रेणियाँ थीं, जिन्हें घटाकर 116 श्रेणियों में समाहित कर दिया गया है, जिससे व्यापारियों को काफी राहत मिली है। कई कैटेगरी अनावश्यक रूप से छोटी-छोटी थीं, जिन्हें सरल रूप में पुनर्गठित किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव शुल्क संरचना में किया गया है, जहाँ अनेक श्रेणियों में शुल्क 33 प्रतिशत से लेकर 90 प्रतिशत तक घटाया गया है। उदाहरण के रूप में महापौर ने कहा कि किसी लाइसेंस का शुल्क यदि पाँच हजार रुपये था, तो अब उसे मात्र एक हजार रुपये कर दिया गया है। इस निर्णय का सीधा असर यह हुआ कि जहाँ पहले सालाना मुश्किल से 350 लाइसेंस बन पाते थे, वहीं अब पंजीकरण तेजी से बढ़ रहा है। गत वर्षों में जहाँ निगम को ट्रेड लाइसेंस से केवल दस लाख रुपये मिलते थे, वहीं अब लगभग बीस लाख रुपये प्राप्त हो चुके हैं। इस वर्ष निगम ने एक करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है, जिसे महापौर ने पूर्ण विश्वास के साथ हासिल करने की बात कही।
बैठक में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को लेकर लिया गया निर्णय भी व्यापक चर्चा का विषय बना रहा। नगर निगम ने भारत सरकार के उपक्रम ESSL के साथ एक समझौता करने का निर्णय लिया है, जिसके बाद शहर में किसी भी स्थान पर स्ट्रीट लाइट खराब होने पर उसे 48 घंटे के भीतर दुरुस्त करना अनिवार्य होगा। कंपनी अपने कर्मचारी, तकनीकी दल, स्टोर और कंट्रोल रूम के साथ पूरी व्यवस्था संभालेगी। इस प्रणाली के माध्यम से यह भी स्वतः पता चल सकेगा कि किस वार्ड में कौन सी लाइट बंद हुई है। महापौर दीपक बाली ने कहा कि शहर को अब अंधेरे में रहने की मजबूरी से मुक्ति मिलेगी। इसी के साथ सफाई व्यवस्था को भी मजबूत करने के लिए मास्टर प्लान लागू किया जा रहा है और विभिन्न मशीनों की खरीद प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके अतिरिक्त एक विशेष “सतर्क दल” गठित करने का निर्णय भी लिया गया है, जो सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फैलाने वालों पर तुरंत जुर्माना लगाने की कार्रवाई करेगा।

बैठक में ई–रिक्शा संचालन को लेकर किए गए सुधारों पर भी सहमति बनी। निगम द्वारा 7 से 10 फीट क्षेत्रफल वाले स्थानों पर ईदृरिक्शा स्टैंड बनाए जाएंगे और अब तक लगभग सवा सात सौ ईदृरिक्शा रजिस्टर हो चुके हैं। एक निश्चित तिथि से रजिस्ट्रेशन शुल्क लागू होगा और बिना पंजीकरण के पाए जाने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई की जाएगी। महापौर ने कहा कि बिना कर बढ़ाए हुए केवल व्यवस्थागत सुधार और पारदर्शिता के माध्यम से निगम अपनी आय में वृद्धि कर रहा है। अंत में महापौर दीपक बाली ने कहा कि सभी 19 प्रस्ताव पूरी पारदर्शिता और सर्वसम्मति से पारित हुए हैं। उन्होंने यह दोहराया कि बोर्ड में केवल वे प्रस्ताव ही लाए जाते हैं, जो सीधे जनता के हित और शहर के विकास से जुड़े हों। महापौर ने कहा कि नगर निगम काशीपुर का हर कदम शहर को उज्ज्वल, व्यवस्थित और आधुनिक बनाने की दिशा में बढ़ाया जा रहा है, और यह सामूहिक प्रयास आने वाले समय में काशीपुर को नई पहचान दिलाएगा।



