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नगर आयुक्त रविन्दर सिंह बिष्ट के नेतृत्व में काशीपुर बना समान नागरिक संहिता का आदर्श मॉडल

डिजिटल व्यवस्था, पारदर्शी प्रक्रिया और सामाजिक न्याय के साथ नगर निगम ने कानून को कागज़ से निकालकर जनजीवन से जोड़ा, जहाँ महिला अधिकार, समानता और प्रशासनिक दृढ़ता एक नई पहचान बनकर उभरी।

काशीपुर। नगर निगम काशीपुर के प्रशासनिक इतिहास में समान नागरिक संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर वर्ष 2025-26 एक निर्णायक अध्याय के रूप में दर्ज किया जा रहा है, जिसमें विवाह निबंधक रविन्दर सिंह बिष्ट की भूमिका केंद्रीय रूप से उभरकर सामने आई है। उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद नगर निगम स्तर पर इसके सुव्यवस्थित, पारदर्शी और संवेदनशील क्रियान्वयन की जिम्मेदारी जिस दृढ़ता के साथ निभाई गई, वह प्रशासनिक प्रतिबद्धता का उदाहरण बन गई। नगर आयुक्त रविन्दर सिंह बिष्ट के नेतृत्व में नगर निगम काशीपुर ने यह स्पष्ट किया कि कानून केवल अधिसूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम भी हो सकता है। नागरिकों को समान अधिकार, समान कानून और समान पहचान की अवधारणा से जोड़ते हुए प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और पारिवारिक विषयों से जुड़े मामलों में समानता केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि धरातल पर प्रभावी रूप से दिखाई दे।

प्रशासनिक दृष्टि से देखें तो 27 जनवरी 2025 को लागू हुई समान नागरिक संहिता को लेकर नगर निगम काशीपुर में प्रारंभ से ही सुनियोजित रणनीति अपनाई गई। विवाह निबंधक रविन्दर सिंह बिष्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी वर्ग, समुदाय या व्यक्ति को जानकारी के अभाव में असुविधा न हो। इसी उद्देश्य से नगर निगम स्तर पर जागरूकता अभियानों को प्राथमिकता दी गई। मुनादी, सार्वजनिक घोषणाओं और वार्ड स्तर पर आयोजित शिविरों के माध्यम से नागरिकों को कानून की प्रक्रिया, लाभ और दायित्वों की जानकारी दी गई। प्रशासन की यह सोच रही कि कानून का उद्देश्य दंड नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और महिला सशक्तिकरण को मजबूत करना है। रविन्दर सिंह बिष्ट के निर्देशन में कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया, ताकि आवेदन प्रक्रिया के दौरान नागरिकों को सम्मानजनक व्यवहार और समयबद्ध सेवा मिल सके।

समान नागरिक संहिता के अंतर्गत विवाह एवं तलाक पंजीकरण को सरल और समयबद्ध बनाने की दिशा में नगर निगम काशीपुर ने उल्लेखनीय पहल की। नगर आयुक्त रविन्दर सिंह बिष्ट के मार्गदर्शन में यह व्यवस्था की गई कि मानक आवेदन के लिए 250 रुपये शुल्क और 15 दिनों की समय-सीमा निर्धारित हो, जबकि तत्काल आवेदन के लिए 2500 रुपये शुल्क के साथ तीन दिन में प्रक्रिया पूर्ण की जाए। यह भी सुनिश्चित किया गया कि उप-पंजीयक स्तर से प्रतिवेदन एक दिन में उपलब्ध हो। अपील व्यवस्था को भी पारदर्शी रखा गया, ताकि आवेदन अस्वीकृत होने की स्थिति में नागरिकों को न्यायपूर्ण अवसर मिल सके। इस व्यवस्था ने प्रशासन और जनता के बीच विश्वास को मजबूत किया और कानून को लेकर व्याप्त आशंकाओं को काफी हद तक दूर किया।

इतिहास और संवैधानिक परिप्रेक्ष्य में समान नागरिक संहिता के महत्व को समझाते हुए विवाह निबंधक रविन्दर सिंह बिष्ट ने बार-बार यह दोहराया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में निहित भावना को साकार करना ही इसका उद्देश्य है। उत्तराखण्ड के पहले राज्य बनने पर गर्व व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह सामाजिक सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। नगर निगम स्तर पर इसके प्रभावी क्रियान्वयन से यह संदेश गया कि प्रशासन केवल आदेशों का पालन नहीं कर रहा, बल्कि समाज को न्यायसंगत दिशा देने का कार्य कर रहा है। अनुसूचित जनजाति को इस कानून से बाहर रखे जाने के संवैधानिक प्रावधानों का भी सम्मान किया गया, जिससे सामाजिक संतुलन और संवेदनशीलता बनी रही।

उत्तराधिकार अधिकारों में आए ऐतिहासिक बदलावों को लेकर नगर निगम काशीपुर की भूमिका विशेष रूप से सराही जा रही है। विवाह निबंधक रविन्दर सिंह बिष्ट के अनुसार बेटियों को अब संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार मिलना सामाजिक समानता की दिशा में बड़ा परिवर्तन है। बिना वसीयत मृत्यु की स्थिति में पत्नी, बच्चों और माता-पिता को समान अधिकार मिलने से पारिवारिक विवादों में कमी आने की उम्मीद है। पुश्तैनी और स्व-अर्जित संपत्ति के बीच का अंतर समाप्त होना कानून की समानता को और मजबूत करता है। लिव-इन संबंध से जन्मे बच्चों को वैध मानते हुए उन्हें पूर्ण उत्तराधिकार अधिकार देना सामाजिक न्याय की भावना को स्पष्ट रूप से दर्शाता है, जिसे नगर निगम ने संवेदनशीलता के साथ लागू किया।

डिजिटल युग की आवश्यकता को समझते हुए विवाह निबंधक रविन्दर सिंह बिष्ट ने ई-गवर्नेंस को समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन का आधार बनाया। ऑनलाइन आवेदन प्रणाली, सिंगल विंडो सिस्टम और पारदर्शी प्रक्रिया ने समय और संसाधनों की बचत सुनिश्चित की। नगर निगम काशीपुर में नागरिक अब बिना अनावश्यक कार्यालय चक्कर लगाए अपने आवेदन दर्ज कर पा रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आवेदन की स्थिति की जानकारी मिलने से विश्वास बढ़ा और भ्रष्टाचार की संभावनाओं में भी कमी आई। यह पहल प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

महिला सशक्तिकरण के संदर्भ में समान नागरिक संहिता के प्रभाव को विवाह निबंधक रविन्दर सिंह बिष्ट ने सामाजिक परिवर्तन की धुरी बताया। विवाह की आयु में समानता, पुत्रियों को संपत्ति में समान अधिकार, भरण-पोषण के सुदृढ़ प्रावधान और बाल विवाह तथा बहुविवाह पर नियंत्रण जैसे पहलुओं ने महिलाओं को कानूनी सुरक्षा प्रदान की है। नगर निगम द्वारा इन प्रावधानों की जानकारी विशेष रूप से महिलाओं तक पहुंचाने का प्रयास किया गया, ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकें। यह पहल सामाजिक संरचना में संतुलन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

चुनौतियों की बात करें तो प्रारंभिक स्तर पर जागरूकता की कमी एक बड़ी बाधा के रूप में सामने आई। इसे ध्यान में रखते हुए विवाह निबंधक रविन्दर सिंह बिष्ट ने विशेष रणनीति अपनाई। वार्ड स्तर पर शिविर, सार्वजनिक संवाद और प्रशासनिक संवाद के माध्यम से नागरिकों को कानून के उद्देश्य और लाभ समझाए गए। इस प्रयास का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि धीरे-धीरे लोगों का विश्वास बढ़ा और आवेदन की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई। प्रशासन ने यह स्पष्ट किया कि नागरिकों की सुविधा सर्वाेपरि है और किसी भी प्रकार की भ्रांति को संवाद के माध्यम से दूर किया जाएगा।

आंकड़ों पर नजर डालें तो नगर निगम काशीपुर में समान नागरिक संहिता के अंतर्गत कुल 5280 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 5081 आवेदन स्वीकृत किए गए। केवल 60 आवेदन अस्वीकृत हुए, जिससे 96 प्रतिशत से अधिक स्वीकृति दर सामने आई। यह आंकड़ा विवाह निबंधक रविन्दर सिंह बिष्ट के नेतृत्व में अपनाई गई प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता को दर्शाता है। उच्च स्वीकृति दर यह भी संकेत देती है कि नागरिकों को सही मार्गदर्शन और सहयोग मिला, जिससे आवेदन प्रक्रिया सुचारू रही।

भविष्य की योजनाओं को लेकर विवाह निबंधक रविन्दर सिंह बिष्ट ने स्पष्ट किया कि लक्ष्य 100 प्रतिशत डिजिटल पंजीकरण सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही सामाजिक जागरूकता को और व्यापक स्तर पर ले जाने, शैक्षणिक संस्थानों में जानकारी देने और सेवा गुणवत्ता में निरंतर सुधार पर जोर दिया जाएगा। विवाह निबंधक रविन्दर सिंह बिष्ट ने कहा कि नगर निगम काशीपुर समान नागरिक संहिता के सफल क्रियान्वयन हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है और आने वाले समय में यह मॉडल अन्य निकायों के लिए भी उदाहरण बनेगा। इस प्रकार, विवाह निबंधक/नगर आयुक्त रविन्दर सिंह बिष्ट के नेतृत्व में काशीपुर नगर निगम ने प्रशासनिक दृढ़ता, सामाजिक संवेदनशीलता और संवैधानिक मूल्यों का संतुलित उदाहरण प्रस्तुत किया है।

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