देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में बुधवार का दिन लंबे समय तक याद किया जाएगा, क्योंकि इसी दिन राज्य सरकार ने एक साथ ऐसे ग्यारह बड़े फैसलों पर मुहर लगाई, जिनका सीधा असर आम जनता, किसानों, कर्मचारियों, उद्योगों और स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ने वाला है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक केवल औपचारिकता निभाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने यह साफ संकेत दे दिया कि सरकार अब केवल नीतियों की बात नहीं कर रही, बल्कि नियत और निर्णायक कार्रवाई के रास्ते पर आगे बढ़ चुकी है। कुल 11 प्रस्तावों को मंजूरी देकर धामी कैबिनेट ने यह जता दिया कि आने वाले समय में राज्य का रोड मैप क्या होगा। स्वास्थ्य से लेकर हरित ऊर्जा, किसानों से लेकर कर्मचारियों और उद्योगों तक, इस बैठक के फैसलों ने शासन के अगले चरण की झलक दिखा दी है।
सरकार के सबसे चर्चित और संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल स्वास्थ्य योजनाओं को नए सिरे से मजबूत करने का फैसला इस बैठक का प्रमुख आकर्षण रहा। अटल आयुष्मान योजना और गोल्डन कार्ड योजना को अब नए स्वरूप में लागू किया जाएगा। अटल आयुष्मान योजना को पूरी तरह इंश्योरेंस मोड में ले जाने का निर्णय लिया गया है, जिससे इलाज की प्रक्रिया और भुगतान प्रणाली अधिक सुव्यवस्थित हो सके। वहीं गोल्डन कार्ड योजना को हाइब्रिड मोड में संचालित करने का फैसला किया गया है। इस हाइब्रिड व्यवस्था के तहत पांच लाख रुपये तक के दावे इंश्योरेंस मोड में निपटाए जाएंगे, जबकि इससे अधिक राशि के दावे ट्रस्ट मोड के अंतर्गत आएंगे। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से बड़े इलाजों में अस्पतालों को भुगतान में देरी नहीं होगी, व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी और सरकारी खजाने पर अनावश्यक दबाव भी नहीं पड़ेगा।
हालांकि इस नई व्यवस्था के साथ कर्मचारियों के लिए एक बदलाव भी सामने आया है, जिस पर चर्चा होना स्वाभाविक है। ट्रस्ट मोड के तहत कर्मचारियों के अंशदान में बढ़ोतरी की जाएगी, जो करीब ढाई सौ रुपये से चार सौ रुपये तक अधिक होगी। सरकार का तर्क है कि बेहतर इलाज, मजबूत प्रणाली और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए यह कदम जरूरी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि स्वास्थ्य तंत्र को दीर्घकालिक रूप से सुदृढ़ बनाना है, तो सभी हितधारकों को अपनी भूमिका निभानी होगी। यह फैसला भले ही कुछ लोगों को तत्काल बोझ जैसा लगे, लेकिन सरकार इसे भविष्य की स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़कर देख रही है।
ऊर्जा क्षेत्र में भी धामी कैबिनेट ने बड़ा और दूरगामी फैसला लेते हुए हरित ऊर्जा को प्रोत्साहन देने का स्पष्ट संदेश दिया है। प्राकृतिक गैस पर वैट को 20 प्रतिशत से घटाकर केवल पांच प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है। इस कदम को पर्यावरण के अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि उद्योगों और आम उपभोक्ताओं को भी सस्ता और स्वच्छ विकल्प मिलेगा। यह फैसला दर्शाता है कि उत्तराखंड अब ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन को केवल नारे के रूप में नहीं, बल्कि ठोस नीतिगत कदमों के साथ आगे बढ़ा रहा है।
किसानों के हितों को लेकर भी इस कैबिनेट बैठक में अहम निर्णय लिए गए हैं, खासकर आपदा से प्रभावित क्षेत्रों के बागवानों के लिए। सरकार ने सेब उत्पादक किसानों को सीधी आर्थिक राहत देने का फैसला किया है। दलाली आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में सेब की खरीद उद्यान विभाग के माध्यम से की जाएगी। इसके तहत ए ग्रेड सेब के लिए 51 रुपये प्रति किलो और रेड डिलीशियस सेब के लिए 45 रुपये प्रति किलो की दर तय की गई है। यह निर्णय केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के आत्मसम्मान और उनकी मेहनत के उचित मूल्य की रक्षा का प्रयास है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को बाजार में मजबूरी में कम दामों पर अपनी उपज बेचने से राहत मिलेगी।
संस्कृति और कला के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी यह बैठक राहत भरी खबर लेकर आई। संस्कृति विभाग के अंतर्गत मिलने वाली मासिक पेंशन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। पहले यह पेंशन तीन हजार रुपये प्रतिमाह थी, जिसे अब बढ़ाकर चार हजार रुपये कर दिया गया है। यह फैसला उन बुजुर्ग कलाकारों और साहित्यकारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन कला और संस्कृति को समर्पित कर दिया, लेकिन बुढ़ापे में आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। सरकार ने इस निर्णय के माध्यम से यह संदेश दिया है कि संस्कृति केवल मंचों तक सीमित नहीं है, बल्कि नीति निर्माण में भी उसे सम्मान मिलना चाहिए।
व्यापार सुगमता और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए भवन पासिंग की प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब निम्न जोखिम वाले भवनों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। एम्पैनल आर्किटेक्ट द्वारा स्व-प्रमाणन के आधार पर भवन पास किए जा सकेंगे। इस फैसले से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी कम होंगी। बिल्डर्स और आम नागरिकों दोनों के लिए यह निर्णय बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे निर्माण कार्यों में अनावश्यक देरी से निजात मिलेगी।
एमएसएमई और उद्योगों के लिए भी नियमों में ढील देने का फैसला किया गया है। व्यापार सुगमता बढ़ाने के उद्देश्य से ग्राउंड कवरेज को बढ़ाया गया है और अनुपालन का बोझ कम किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे छोटे उद्योगों को विस्तार का अवसर मिलेगा, निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। औद्योगिक विकास को गति देने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य को आर्थिक मजबूती की दिशा में आगे बढ़ना है।
रेशा विकास परिषद में भी संरचनात्मक बदलाव को मंजूरी दी गई है। तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति अब आउटसोर्सिंग के जरिए की जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे कामकाज में लचीलापन आएगा, खर्च पर नियंत्रण रहेगा और दक्षता में सुधार होगा। प्रशासनिक सुधारों की दिशा में यह कदम यह दर्शाता है कि सरकार संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दे रही है।
कार्यचार्ज कर्मचारियों के लिए भी इस बैठक में बड़ी राहत का ऐलान किया गया है। सिंचाई और लोक निर्माण विभाग के कार्यचार्ज कर्मचारियों की सेवा अवधि को अब पेंशन गणना में शामिल किया जाएगा। यह फैसला हजारों कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की स्थिरता का भरोसा लेकर आया है। लंबे समय से चली आ रही इस मांग के पूरी होने से कर्मचारियों में संतोष और भरोसा दोनों देखने को मिल रहे हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र में लिए गए फैसलों को कई विशेषज्ञ गेम चेंजर मान रहे हैं। एसोसिएट प्रोफेसर की आयु सीमा को 50 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दिया गया है, जिससे अनुभवी शिक्षकों और डॉक्टरों की सेवाएं लंबे समय तक मिल सकेंगी। स्वामी राम कैंसर अस्पताल में चार नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई है। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में समान काम समान वेतन के मामले को उप समिति को भेजा गया है। इसके अलावा दुर्गम और अति दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत स्पेशलिस्ट क्लिनिकल डॉक्टरों को 50 प्रतिशत अतिरिक्त भत्ता देने का निर्णय लिया गया है। सरकार का साफ संदेश है कि यदि पहाड़ों में डॉक्टरों की जरूरत है, तो उन्हें सुविधाएं और प्रोत्साहन भी देना होगा।
इन ग्यारह फैसलों को समग्र रूप से देखा जाए तो यह साफ होता है कि धामी सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहती। यह बैठक राज्य के भविष्य की दिशा तय करने वाला रोड मैप साबित हो सकती है। स्वास्थ्य, ऊर्जा, कृषि, उद्योग, संस्कृति और कर्मचारियों से जुड़े ये निर्णय यह संकेत देते हैं कि सरकार ने विकास को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखने का मन बना लिया है। अब आने वाला समय बताएगा कि इन फैसलों का धरातल पर क्रियान्वयन किस गति और प्रभाव के साथ होता है, लेकिन इतना तय है कि बुधवार का दिन उत्तराखंड की राजनीति में फैसलों के दिन के रूप में दर्ज हो चुका है।



