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द्रोणासागर के कायाकल्प की तैयारी तेज, महापौर दीपक बाली ने अधिकारियों के साथ किया व्यापक निरीक्षण, विकास की नई रूपरेखा पर शुरू हुई बड़ी कवायद

ऐतिहासिक धरोहर को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने की दिशा में तेज हुई पहल, अधिकारियों को समयबद्ध कार्ययोजना बनाने के निर्देश, स्वच्छता, सौंदर्यीकरण, पर्यटन सुविधाओं और नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए विकास कार्यों को मिलेगा नया आयाम।

काशीपुर। शहर की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान माने जाने वाले द्रोणासागर क्षेत्र को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित, स्वच्छ और आकर्षक स्वरूप देने की दिशा में नगर निगम ने एक बार फिर अपनी सक्रियता दिखाई है। इसी क्रम में महापौर दीपक बाली ने गुरुवार को नगर निगम और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ द्रोणासागर क्षेत्र का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण कर प्रस्तावित विकास कार्यों की रूपरेखा पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया। निरीक्षण केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र की मौजूदा स्थिति, नागरिक सुविधाओं, सौंदर्यीकरण, स्वच्छता व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण तथा भविष्य में किए जाने वाले विकास कार्यों को लेकर बिंदुवार समीक्षा की गई। निरीक्षण के दौरान महापौर ने विभिन्न स्थानों पर रुककर अधिकारियों से मौजूदा व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की और उन स्थानों को भी चिन्हित किया जहां तत्काल सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि द्रोणासागर केवल एक जलाशय या पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि काशीपुर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर है, इसलिए इसका विकास पूरी संवेदनशीलता और दूरदृष्टि के साथ किया जाना चाहिए। महापौर ने कहा कि नगर निगम की प्राथमिकता केवल निर्माण कार्य कराना नहीं, बल्कि ऐसा विकास सुनिश्चित करना है जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को बेहतर वातावरण, सुरक्षित परिसर और आधुनिक सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास कार्यों की योजना बनाते समय भविष्य की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा जाए ताकि आने वाले वर्षों में भी द्रोणासागर शहर की शान और आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहे।

स्थलीय निरीक्षण के दौरान दीपक बाली ने द्रोणासागर परिसर के विभिन्न हिस्सों का बारीकी से अवलोकन करते हुए अधिकारियों के साथ लंबी चर्चा की। उन्होंने क्षेत्र की साफ-सफाई व्यवस्था, जलाशय के आसपास की स्थिति, आवागमन की सुविधाएं, नागरिकों के बैठने के स्थान, प्रकाश व्यवस्था, सौंदर्यीकरण की संभावनाएं तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर अलग-अलग बिंदुओं पर अधिकारियों से सुझाव भी लिए। उन्होंने कहा कि किसी भी ऐतिहासिक स्थल का महत्व केवल उसकी प्राचीनता से नहीं बढ़ता, बल्कि वहां उपलब्ध सुविधाएं और उसका सुव्यवस्थित रखरखाव भी लोगों को आकर्षित करता है। यदि किसी स्थान को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाए तो वह स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ बाहरी पर्यटकों के लिए भी प्रमुख आकर्षण बन सकता है। इसी सोच के साथ नगर निगम द्रोणासागर के समग्र विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रस्तावित विकास कार्यों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करते समय प्रत्येक छोटे-बड़े पहलू का गंभीरता से अध्ययन किया जाए, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश न रहे। महापौर ने यह भी कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता के साथ किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और जो भी योजनाएं तैयार हों, उनका उद्देश्य केवल निर्माण कार्य पूरा करना नहीं बल्कि नागरिकों को स्थायी और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि द्रोणासागर का विकास ऐसा होना चाहिए जिससे यहां आने वाला प्रत्येक व्यक्ति काशीपुर की सकारात्मक और आधुनिक छवि लेकर वापस जाए।

निरीक्षण के दौरान महापौर ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं का प्रभाव तभी दिखाई देता है जब उन्हें समयबद्ध तरीके से क्रियान्वित किया जाए और प्रत्येक विभाग आपसी समन्वय के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाए। उन्होंने इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि द्रोणासागर क्षेत्र में होने वाले प्रत्येक कार्य में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनसुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। महापौर ने कहा कि नगर निगम का उद्देश्य केवल निर्माण कराना नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां परिवार, बच्चे, बुजुर्ग, श्रद्धालु और पर्यटक सहज रूप से समय व्यतीत कर सकें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार करते समय स्थल की प्राकृतिक सुंदरता को किसी भी प्रकार की क्षति न पहुंचे और ऐतिहासिक महत्व को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाओं का समावेश किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि शहर का समग्र विकास तभी संभव है जब उसके प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का संरक्षण और संवर्धन समान रूप से किया जाए। द्रोणासागर काशीपुर की पहचान है और इसकी गरिमा बनाए रखना नगर निगम की जिम्मेदारी भी है तथा प्राथमिकता भी। इसी उद्देश्य के साथ अधिकारियों को प्रत्येक प्रस्तावित कार्य का तकनीकी परीक्षण कर व्यवहारिक और प्रभावी योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए, जिससे विकास कार्य शुरू होने के बाद किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

महापौर दीपक बाली ने निरीक्षण के दौरान यह भी दोहराया कि नगर निगम शहर के विकास को केवल सड़कों और भवनों तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि ऐसे सार्वजनिक स्थलों को भी नई पहचान देने का प्रयास कर रहा है जो काशीपुर की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि द्रोणासागर के विकास से न केवल स्थानीय नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि पर्यटन गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे स्थानीय व्यापार और शहर की आर्थिक गतिविधियों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रस्तावित योजनाओं को तैयार करते समय विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो। निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारियों ने भी महापौर को विभिन्न प्रस्तावों, तकनीकी पहलुओं और संभावित विकास कार्यों की जानकारी उपलब्ध कराई। इस अवसर पर नगर आयुक्त रविन्द्र बिष्ट, कुमाऊं मंडल विकास निगम के सहायक अभियंता मनोज मासीवाल, जिला पर्यटन विकास अधिकारी लता बिष्ट, सहायक नगर आयुक्त विनोद लाल, सफाई निरीक्षक गणेश ध्यानी, जेई अभिषेक, पटवारी दिलशाद सहित अन्य अधिकारी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने महापौर द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुरूप प्रस्तावित विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने का भरोसा दिलाया। निरीक्षण के समापन पर यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि नगर निगम द्रोणासागर को स्वच्छ, सुंदर, सुव्यवस्थित और आधुनिक सुविधाओं से युक्त विकसित करने की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रहा है तथा आने वाले समय में यह ऐतिहासिक स्थल काशीपुर के गौरव और आकर्षण का और भी बड़ा केंद्र बनकर उभर सकता है।

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