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द्रोणसागर किले पर तेंदुए का खौफ खत्म कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने ली राहत की सांस

ऐतिहासिक द्रोणसागर किले में देर रात चले रेस्क्यू अभियान में वन विभाग की सतर्क रणनीति रंग लाई, पिंजरे में कैद हुआ गुलदार, लंबे समय से दहशत झेल रहे क्षेत्रवासियों को मिली बड़ी राहत।

काशीपुर। नगर के हृदय में स्थित ऐतिहासिक धरोहर द्रोणसागर किला एक बार फिर उस समय सुर्खियों में आ गया, जब लंबे समय से दहशत का कारण बने तेंदुए को आखिरकार पकड़ लिया गया। बीते कई दिनों से किले परिसर और आसपास के क्षेत्रों में तेंदुए की मौजूदगी ने कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों और स्थानीय निवासियों के मन में भय का वातावरण बना रखा था। हर रात जंगल से सटे इस ऐतिहासिक स्थल पर तेंदुए की चहलकदमी की आशंका लोगों की नींद उड़ा रही थी। लेकिन प्रशासनिक सतर्कता, योजनाबद्ध रणनीति और समन्वित प्रयासों के चलते बुधवार देर रात इस आतंक के प्रतीक बने तेंदुए को पिंजरे में कैद कर लिया गया। तेंदुए के पकड़े जाने की सूचना मिलते ही किले में कार्यरत कर्मचारियों ने राहत की सांस ली और क्षेत्र में फैली बेचौनी कुछ हद तक कम हुई। यह सफलता न केवल वन विभाग के लिए बल्कि पुरातत्व विभाग और स्थानीय प्रशासन के लिए भी बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि किसी भी प्रकार की जनहानि से पहले ही खतरे को टाल दिया गया।

घटनाक्रम के अनुसार द्रोणसागर किले पर तेंदुओं की आवाजाही कोई नई बात नहीं रही है। बीते लंबे समय से यहां तेंदुओं के दिखने, उनकी आवाजें सुनाई देने और उनके पैरों के निशान मिलने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इससे किले में काम करने वाले कर्मचारियों में लगातार असुरक्षा की भावना बनी हुई थी। कई बार सुबह ड्यूटी पर आने वाले कर्मचारी भय के साए में काम करने को मजबूर थे। शाम ढलते ही परिसर में सन्नाटा पसर जाता था और हर हलचल को तेंदुए की आहट समझा जाता था। आसपास के रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोग भी अपने घरों से बाहर निकलने से कतराने लगे थे। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही थी। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन और वन विभाग ने मिलकर एक ठोस योजना बनाई, ताकि तेंदुए को सुरक्षित तरीके से पकड़ा जा सके और क्षेत्र को भयमुक्त बनाया जा सके।

इस पूरे रेस्क्यू अभियान में पुरातत्व विभाग और वन विभाग के बीच बेहतरीन तालमेल देखने को मिला। अभियान की निगरानी पुरातत्व विभाग के सुपरिटेंडेंट डॉ. मोहन चंद्र जोशी द्वारा की जा रही थी, जिन्होंने किले की ऐतिहासिक संरचना और कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हर कदम बेहद सावधानी से उठाया। वहीं संरक्षण सहायक प्रभारी काशीपुर दिनेश शर्मा ने मौके पर रहकर पूरी स्थिति पर नजर बनाए रखी और वन विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया। उनकी भूमिका इस अभियान में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। घंटों चली मशक्कत के बाद आखिरकार वह क्षण आया, जब देर रात लगाए गए पिंजरे में तेंदुआ फंस गया। जैसे ही इसकी पुष्टि हुई, मौके पर मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों ने राहत की सांस ली। पूरी कार्रवाई के दौरान यह विशेष ध्यान रखा गया कि तेंदुए को कोई नुकसान न पहुंचे और उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ा जाए।

रेस्क्यू के बाद संरक्षण सहायक प्रभारी काशीपुर दिनेश शर्मा ने बताया कि वन विभाग द्वारा द्रोणसागर किले के भीतर रणनीतिक रूप से पिंजरा लगाया गया था। तेंदुए की गतिविधियों, उसके मार्ग और संभावित ठिकानों का पहले अध्ययन किया गया। इसके बाद रात के समय पिंजरे में तेंदुआ, जिसे स्थानीय भाषा में गुलदार कहा जाता है, फंस गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पूरी तरह योजनाबद्ध थी और इसमें किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं की गई। वन विभाग के प्रशिक्षित कर्मियों की मौजूदगी में पूरे अभियान को अंजाम दिया गया। पिंजरे में कैद होने के बाद तेंदुए की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि उसे किसी प्रकार की चोट न लगे। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की सावधानी इसलिए आवश्यक है क्योंकि तेंदुआ न केवल एक वन्यजीव है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत संरक्षित भी है।

स्थानीय लोगों के अनुसार द्रोणसागर किले पर तेंदुओं की मौजूदगी ने लंबे समय से सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर रखा था। कई बार सुबह-सुबह तेंदुए के दिखाई देने की खबरें फैल जाती थीं, जिससे अफरा-तफरी मच जाती थी। किले के आसपास रहने वाले परिवार अपने बच्चों को अकेले बाहर भेजने से डरने लगे थे। रात के समय लोग दरवाजे बंद कर सतर्कता बरतने को मजबूर थे। इससे पहले भी तेंदुओं के दिखने की शिकायतें प्रशासन तक पहुंचाई गई थीं, लेकिन इस बार खतरा अधिक गंभीर माना जा रहा था। यही कारण है कि वन विभाग और प्रशासन ने मामले को प्राथमिकता से लिया। तेंदुए के पकड़े जाने के बाद न केवल किले में कार्यरत कर्मचारी बल्कि आसपास के नागरिकों ने भी राहत महसूस की है। लोगों का कहना है कि अब वे कुछ हद तक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

वन विभाग की ओर से अब आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार पकड़े गए तेंदुए को सुरक्षित स्थान पर ले जाया जाएगा, जहां उसे प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा जाएगा। इसके लिए सभी आवश्यक कानूनी और तकनीकी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि भविष्य में द्रोणसागर किले और आसपास के क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे क्षेत्र में सतर्कता बनाए रखें और यदि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या वन्यजीव की मौजूदगी नजर आए, तो तुरंत संबंधित विभाग को सूचना दें। अधिकारियों का कहना है कि जनसहयोग से ही इस तरह की चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटा जा सकता है। द्रोणसागर किले पर तेंदुए के पकड़े जाने की यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि सतर्कता, समन्वय और सही रणनीति से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान संभव है।

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