काशीपुर। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों की तरह काशीपुर भी बीते दो दिनों से आसमान से बरसती आफत की मार झेल रहा है। शहर की सड़कों, गलियों और बाजारों में पानी का जो सैलाब फैला, उसने यह साफ कर दिया कि नगर व्यवस्था की तैयारी महज कागजों तक सीमित रही। ढेला नदी के जलस्तर में तेजी से आया उछाल और शहर के प्रमुख इलाकों में जलभराव ने जनजीवन को ठहराव में डाल दिया। रेलवे स्टेशन रोड, गुरुद्वारा रोड, जसपुर बस अड्डा, आर्यनगर, किला मोहल्ला, मुरादाबाद रोड, डिजाइन सेंटर रोड, महेशपुरा, मुंशीराम चौराहा और लोकनिर्माण विभाग कॉलोनी जैसे क्षेत्र तालाब बन गए। मुख्य बाजारों की हालत यह रही कि रात से लेकर सुबह तक दुकानदार बंद शटर खोल-खोलकर अपने व्यापारिक प्रतिष्ठानों में भरे पानी और नुकसान का जायजा लेते नजर आए। हालात इतने भयावह हो गए कि वाहन चालकों को सड़कों पर बने गड्ढों का अंदाजा ही नहीं हो पा रहा था, जिससे कई ई-रिक्शा पलटने की घटनाएं भी सामने आईं।
सप्ताहिक अवकाश होने के बावजूद बुधवार को कई व्यापारी अपनी दुकानों में झांकते नजर आए कि कहीं पानी से कीमती माल खराब तो नहीं हो गया। राधेश्याम बिल्डिंग क्षेत्र की हालत ऐसी थी कि वहां पैदल चलने वाले भी सहमे नजर आए, वहीं किला मोहल्ला में नालियों का गंदा पानी घरों तक जा पहुंचा। इस दौरान सड़कों पर बढ़ते जलस्तर और बंद हो चुके यातायात को सामान्य बनाने की जिम्मेदारी पुलिस और सिटी पेट्रोलिंग यूनिट ने बखूबी निभाई। सीपीयू और स्थानीय पुलिसकर्मी राधेश्याम बिल्डिंग के पास मौजूद रहकर लगातार ट्रैफिक को नियंत्रित करते रहे ताकि अफरातफरी की स्थिति न बनने पाए। बंद हो चुकी गाड़ियों को पानी से बाहर निकालना हो या गली-मोहल्लों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, हर मोर्चे पर सीपीयू ने अपना दायित्व निभाया और राहत पहुंचाई।
वर्षों से जलनिकासी की समस्या को झेल रहे शहरवासियों का गुस्सा इस बार खुलकर सामने आया। स्टेशन रोड के कई दुकानदारों और निवासियों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय रहते नालों की ठीक से सफाई करवा दी जाती, तो बाजारों और मोहल्लों में पानी घुसने की नौबत ही नहीं आती। एक नाराज़ दुकानदार ने कहा, “अब चाहे प्रशासन कुछ भी कर ले, व्यवस्था की सच्चाई सामने आ ही जाती है, और हर बार जनता को ही भुगतना पड़ता है।” कुछ नागरिकों ने यह भी कहा कि हर साल यह समस्या बार-बार उठती है लेकिन समाधान के नाम पर आश्वासन और निरीक्षण ही मिलता है। जनाक्रोश इस हद तक था कि कई इलाकों में लोग खुद ही बाल्टी और पंप के सहारे पानी बाहर निकालते नजर आए।
इसी बीच नगर निगम ने हालात पर काबू पाने के लिए तेजी से कदम उठाए। सफाई निरीक्षक मनोज बिष्ट मौके पर पहुंचे और अपनी टीम के साथ युद्धस्तर पर जलनिकासी का काम शुरू किया। जहां-जहां नालों में रुकावट पाई गई, वहां जेसीबी मशीन की मदद से अवरोध हटवाए गए। यह प्रयास रंग भी लाया और दोपहर तक कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति में सुधार नजर आया, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली। खासकर जिन मोहल्लों में पिछले वर्षों में घंटों या दिनों तक पानी ठहर जाया करता था, वहां इस बार कुछ घंटों में निकासी संभव हो सकी। यह नगर निगम की सक्रियता और तैयारी का संकेत जरूर देता है, लेकिन समस्या की गंभीरता को देखते हुए यह स्पष्ट हो चुका है कि केवल अस्थायी समाधान अब पर्याप्त नहीं हैं।
महापौर दीपक बाली ने स्वयं स्थिति की निगरानी करते हुए जनता को भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा, “समस्याएं वर्षों की हैं, उनका समाधान भी वक्त लेता है। लेकिन हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि वर्ष 2026 की बारिश से पहले काशीपुर को जलभराव की परेशानी से मुक्त किया जा सके।” उनका यह बयान उम्मीद तो जगाता है लेकिन फिलहाल जनता की परेशानी कम करने के लिए तेज़ और सटीक कार्यवाही की ज़रूरत है। यह भी देखा गया कि कई स्थानों पर जल निकासी की गति पिछली बरसातों की तुलना में तेज रही, जो नगर निगम की हालिया नालों की सफाई और व्यवस्थाओं का परिणाम मानी जा सकती है।
बारिश ने न केवल शहर की खोखली व्यवस्थाओं की पोल खोल दी, बल्कि यह भी दिखा दिया कि अब जनता केवल वादों से संतुष्ट नहीं होने वाली। राधेश्याम बिल्डिंग, रेलवे स्टेशन रोड और किला मोहल्ला जैसे स्थानों की तस्वीरें यह स्पष्ट करती हैं कि मानसून आते ही यहां जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। अब जब नगर निगम का दावा है कि समाधान की दिशा में लगातार प्रयास जारी हैं, तो ज़रूरी है कि इन प्रयासों में निरंतरता और गंभीरता बनी रहे। फिलहाल बारिश का दौर जारी है, लेकिन इसके बीच जनता को जागरूक और प्रशासन को सजग बने रहना होगा, तभी काशीपुर जैसे शहरों को जलभराव की इस स्थायी समस्या से राहत मिल सकेगी।



