काशीपुर। तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा की दुनिया में अपनी एक विशिष्ट और अमिट पहचान बना चुके विख्यात शिक्षण संस्थान श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (SIMT) के प्रांगण से एक ऐसे असाधारण व्यक्तित्व की कामयाबी की गूंज सुनाई दे रही है, जिसने वाणिज्य और प्रबंधन की पढ़ाई को एक बिल्कुल नया और अनूठा आयाम दे दिया है। हम बात कर रहे हैं आधुनिक शिक्षा, गहन शोध और प्रखर नेतृत्व के युवा चेहरे के रूप में तेजी से उभरकर सामने आए महान शिक्षाविद डॉ. शोभित त्रिपाठी की, जिन्होंने ज्ञान की इस नगरी में आकर युवा पीढ़ी की सोच और उनके करियर को पूरी तरह से बदलने का एक बहुत बड़ा बीड़ा उठाया है। वर्तमान समय में इस नामचीन संस्थान के भीतर वाणिज्य एवं प्रबंधन अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष (HOD – Management Studies) जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण, जिम्मेदारी से भरी और गरिमामयी भूमिका को संभाल रहे डॉ. शोभित त्रिपाठी ने अपनी अद्भुत कार्यशैली, कड़ी मेहनत और दूरदर्शी सोच के बल पर शिक्षा के पारंपरिक और रूढ़िवादी ढर्रे को पूरी तरह से ध्वस्त करते हुए छात्रों के भीतर एक नया जोश और वैश्विक कॉरपोरेट जगत की चुनौतियों से सीधे टकराने का जज्बा पैदा कर दिया है।
इस महान शिक्षाविद और युवाओं के चहेते मार्गदर्शक के जीवन का मूल मंत्र पूरी तरह से अटूट श्रद्धा, कड़े अनुशासन, निरंतर चलने वाले गहन शोध और आधुनिक शिक्षा दृष्टि के एक बेहद ही अनूठे और जादुई समन्वय पर टिका हुआ है, जिसके कारण आज का प्रबुद्ध समाज उन्हें एक साधारण शिक्षक की श्रेणी में न रखकर एक सच्चे राष्ट्र-निर्माता और दिशा-निर्देशक के रूप में देखता है। शैक्षणिक उत्कृष्टता, लीक से हटकर सोचने की क्षमता और गहरे शोधपरक दृष्टिकोण के लिए पूरे उत्तर भारत के शैक्षणिक और कॉरपोरेट हलकों में पहचाने जाने वाले डॉ. त्रिपाठी का चमत्कारी व्यक्तित्व केवल ब्लैकबोर्ड और कक्षाओं की चारदीवारी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वे एक अत्यंत कुशल शोधकर्ता, युवाओं की रगों में ऊर्जा फूंकने वाले प्रेरक वक्ता, दूरगामी शैक्षणिक योजनाकार और हजारों छात्र-छात्राओं के सच्चे मार्गदर्शक के रूप में अपनी एक विशेष और चमकदार पहचान स्थापित कर चुके हैं। उनके इसी कुशल और दूरदर्शी नेतृत्व का ही नतीजा है कि आज श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (SIMT) का वाणिज्य और प्रबंधन विभाग पूरे क्षेत्र में नवाचार आधारित शिक्षण प्रणाली, जीवंत शोध संस्कृति और एक बेहद मजबूत व्यावसायिक दृष्टिकोण को अपनाने में सबसे आगे खड़ा दिखाई दे रहा है। वे अपनी कक्षाओं में छात्रों को केवल किताबी ज्ञान की रटंत विद्या नहीं सिखाते, बल्कि उन्हें वास्तविक दुनिया के व्यापारिक उतार-चढ़ाव और कॉरपोरेट रणनीतियों को समझने के लिए पूरी तरह से तैयार करते हैं।
शैक्षणिक जगत की गहराइयों में अपनी योग्यता का परचम लहराने वाले इस महान शिक्षाविद के पास डिग्रियों और उच्च शैक्षणिक उपलब्धियों का एक ऐसा विशाल और समृद्ध खजाना मौजूद है, जिसे देखकर कोई भी प्रबुद्ध व्यक्ति दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर हो जाए और उनकी योग्यता को नमन करने लगे। डॉ. शोभित त्रिपाठी ने अपनी शुरुआती उच्च शिक्षा के तहत विख्यात कुमाऊँ विश्वविद्यालय से संबद्ध आर.एच.पी.जी. कॉलेज, काशीपुर से वाणिज्य स्नातक यानी बी.कॉम (B.Com.) की पढ़ाई पूरी की और उसके ठीक बाद इसी विषय में परास्नातक यानी एम.कॉम (M.Com.) की उच्च शिक्षा भी बेहद शानदार और रिकॉर्ड तोड़ अंकों के साथ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करके अपनी कुशाग्र बुद्धि का लोहा मनवाया था। लेकिन ज्ञान के समंदर की गहराइयों को नापने की उनकी भूख यहीं पर शांत नहीं हुई, बल्कि उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का एक और शानदार परिचय देते हुए डी.एस.बी. कैंपस, नैनीताल से अर्थशास्त्र जैसे बेहद जटिल, तकनीकी और महत्वपूर्ण विषय में एम.ए. (M.A. Economics) की उच्च उपाधि द्वितीय श्रेणी में हासिल की। इसके बाद शिक्षा जगत के व्यावहारिक और सैद्धांतिक ढांचे को जमीनी स्तर पर समझने के लिए उन्होंने द्रोण बी.एड. कॉलेज, रुद्रपुर से बी.एड. (B.Ed.) की डिग्री भी प्रथम श्रेणी में हासिल की और ज्ञान के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए आर.एच.पी.जी. कॉलेज, काशीपुर से ही शिक्षा शास्त्र विषय में एम.ए. (M.A. Education) की उपाधि भी प्रथम श्रेणी के साथ अपने नाम की।
वाणिज्यिक विषयों के साथ-साथ वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में देश और दुनिया की बदलती आर्थिक नीतियों और वैश्विक कॉरपोरेट ढांचे को बेहद करीब से समझने के लिए डॉ. शोभित त्रिपाठी ने अपने जीवन में एक और बहुत बड़ा कदम उठाया और उन्होंने स्वामी विवेकानंद सुभारती यूनिवर्सिटी, मेरठ से एमबीए फाइनेंस (MBA Finance) की व्यावसायिक डिग्री भी प्रथम श्रेणी के साथ हासिल करके अपनी योग्यता और विशेषज्ञता को एक बिल्कुल नए और अकल्पनीय शिखर पर पहुंचा दिया। उनकी इस अद्भुत, विशाल और बहुआयामी शैक्षणिक पृष्ठभूमि से यह साफ तौर पर जाहिर होता है कि वे शिक्षा के हर एक पहलू और उसकी गहराई को कितनी बारीकी से आत्मसात कर चुके हैं और यही कारण है कि जब वे मंच पर खड़े होकर अर्थशास्त्र या प्रबंधन के सिद्धांतों की व्याख्या करते हैं, तो पूरा सभागार मंत्रमुग्ध हो जाता है। उनके इस अद्वितीय सफर में सबसे बड़ा मील का पत्थर तब साबित हुआ जब उन्होंने वर्ष 2011 में वाणिज्य विषय में अपनी पी.एच.डी. (Ph.D. in Commerce) की उच्च शोध उपाधि को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया, जिसका मुख्य शोध विषय “ऊधमसिंहनगर के औद्योगिक विकास में अग्रणी बैंक (बैंक ऑफ बड़ौदा) का योगदान” था। इस शोध के जरिए उन्होंने स्थानीय उद्योगों और बैंकिंग प्रणाली के अंतर्संबंधों को जिस बारीकी से समाज के सामने रखा, उसकी गूंज राष्ट्रीय स्तर के आर्थिक मंचों पर भी सुनाई दी और इसी कड़ी में उन्होंने वर्ष 2017 में उत्तराखंड राज्य पात्रता परीक्षा यानी सिलेक्ट (SLET in Commerce) को भी सफलतापूर्वक पास करके अपनी योग्यता का लोहा पूरे सूबे में मनवाया।

उच्च शिक्षा के इस बेहद ही आकर्षक, गतिशील और अत्यंत चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में डॉ. शोभित त्रिपाठी के पास 17 से अधिक वर्षों (17+ Years) का एक बेहद लंबा, समृद्ध और गहरा अनुभव मौजूद है, जिसके दौरान उन्होंने देश के विभिन्न प्रतिष्ठित और नामचीन शिक्षण संस्थानों में न केवल उच्च स्तरीय अध्यापन का कार्य किया है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्थाओं और जटिल शोध कार्यों को भी बड़े ही कुशल ढंग से संचालित किया है। उनके इस व्यापक और जमीनी अनुभव का ही नतीजा है कि वे आज एक ऐसे मुकाम पर खड़े हैं जहां वे शिक्षा के वास्तविक महत्व को केवल डिग्रियां बटोरने का जरिया नहीं मानते, बल्कि उनका यह दृढ़ विश्वास है कि शिक्षा असल में एक ऐसा माध्यम है जो संपूर्ण व्यक्तित्व का निर्माण करती है और पूरे समाज को एक बेहतर और सही दिशा देने की एक निरंतर चलने वाली पवित्र प्रक्रिया है। अपने इसी पावन और महान उद्देश्य को पूरा करने के लिए वे दिन-रात संस्थान के भीतर पाठ्यक्रम के विकास और उसमें नए-नए नवाचारों को शामिल करने के लिए प्रयासरत रहते हैं, ताकि उनके छात्र समय के साथ पीछे न छूट जाएं। उनके दैनिक कार्यों में विभागीय प्रबंधन को सुचारू रूप से चलाना, शैक्षणिक नेतृत्व प्रदान करना, उन्नत स्तर के शोध कार्य करना, विभिन्न शोध पत्रों का निरंतर प्रकाशन करना और उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पूरी प्रखरता के साथ प्रस्तुत करना शामिल है, जिसने संस्थान को एक नई पहचान दी है।
एक शिक्षक और विभागाध्यक्ष की भूमिका से आगे बढ़कर डॉ. शोभित त्रिपाठी कॉलेज के भीतर आने वाले हर एक विद्यार्थी के लिए एक सच्चे मार्गदर्शक और करियर काउंसलर की भूमिका भी निभाते हैं, जहां वे भटके हुए युवाओं की काउंसिलिंग करके उन्हें उनके जीवन के सही लक्ष्यों से रूबरू कराते हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इसके अलावा वे कॉलेज परिसर में नियमित रूप से छात्रों के मानसिक और व्यावहारिक विकास के लिए विशेष प्रोजेक्ट्स, राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार और अत्याधुनिक कार्यशालाओं यानी वर्कशॉप्स का आयोजन कराने में सबसे आगे रहते हैं, ताकि छात्रों को व्यावहारिक दुनिया का सीधा अनुभव मिल सके। शोध और प्रकाशन की दुनिया में भी उनका नाम बड़े ही सम्मान के साथ लिया जाता है क्योंकि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विख्यात शोध जर्नल्स में उनके अब तक 12 से अधिक शोध पत्र (12+ Research Papers) प्रकाशित हो चुके हैं, जो औद्योगीकरण, बैंकिंग, वित्तीय समावेशन, पर्यटन, डिजिटल बैंकिंग और एआई (AI) आधारित आर्थिक विकास जैसे बेहद आधुनिक और समकालीन विषयों पर आधारित हैं। इसके साथ ही उन्होंने 23 से अधिक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सेमिनार और कॉन्फ्रेंस (23+ Seminars/Conferences) में अपनी सक्रिय और दमदार सहभागिता दर्ज कराई है और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनके गहन विचारों से सरावोर 1 औद्योगीकरण में बैंकिंग का योगदान पुस्तक भी प्रकाशित (ISBN) हो चुकी है, जो उनकी असीम मेधा को दर्शाती है।
इस पूरे गौरवशाली सफर और सफलता की इस गूंज के बीच डॉ. शोभित त्रिपाठी का एक ही संकल्प है कि समर्पण, अटूट ज्ञान और कुशल नेतृत्व के माध्यम से अपने सभी छात्र-छात्राओं को सफलता की सर्वोच्च ऊंचाइयों की ओर अग्रसर करना ही उनके जीवन का एकमात्र और अंतिम लक्ष्य है। काशीपुर के रामनगर रोड पर स्थित ७ किलोमीटर स्टोन पर बने श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (SIMT) के इस भव्य कैंपस में आज डॉ. त्रिपाठी के इस शानदार योगदान के कारण ही एमबीए, बी.एड, बीबीए, बीसीए, बी.कॉम ऑनर्स, बीए और बीएससी जैसे तमाम महत्वपूर्ण पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले छात्रों का भविष्य पूरी तरह से सुरक्षित और चमकदार दिखाई दे रहा है। कॉलेज के प्रबंधन, समस्त शिक्षक सहयोगियों और गैर-शिक्षण स्टाफ ने डॉ. त्रिपाठी के इस समर्पण की जमकर सराहना की है और इस बात पर गर्व व्यक्त किया है कि उनके जैसा विख्यात और दूरदर्शी शिक्षाविद आज संस्थान के गौरव को पूरे देश में बढ़ा रहा है, जिससे आने वाले समय में क्षेत्र के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए महानगरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।





