उत्तराखंड। उत्तर भारत के सुरक्षा नेटवर्क पर मंडराते साए अब पहले से कहीं अधिक गहरे और तीखे होते दिखाई दे रहे हैं। दिल्ली के लाल किले के बिल्कुल पास हुए धमाके के बाद से जिस तरह सहारनपुर, नूंह और अन्य क्षेत्रों में गिरफ्तारियाँ हुईं, उसी श्रृंखला ने अब दिशा बदलकर उत्तराखंड की तरफ इशारा कर दिया है। जांच एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक शुरुआती खुफिया सूचनाएँ महज़ संयोग नहीं थीं, बल्कि एक जटिल और बहुस्तरीय मॉड्यूल की ओर इंगित कर रही थीं, जो डॉक्टरों के भेष में काम कर रहे थे और जिनका असली काम कुछ और ही था। जब दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा की धरती पर चल रहे ऑपरेशनों के बीच अचानक डॉक्टर शाहीन के फोन रिकॉर्ड में उत्तराखंड की लोकेशंस सामने आईं, तो बड़ी एजेंसियों की टीम तुरंत हरकत में आ गई। उत्तराखंड को सिर्फ एक ‘सुरक्षित भागने का रास्ता’ मानने की धारणा अब बदल चुकी है, क्योंकि शाहीन के लगातार जुड़े मोबाइल संपर्कों ने यह साफ कर दिया है कि पहाड़ किसी बड़ी योजना का हिस्सा भी हो सकते हैं।
एजेंसियों की तेज एक्टिविटी इस बात का प्रमाण है कि मामला अब सामान्य नहीं रहा। यूपी एटीएस ने अपनी एक विशेष टीम को तुरंत उत्तराखंड रवाना किया, जबकि दूसरी ओर डिजिटल फॉरेंसिक यूनिट को उन क्षेत्रों में भेजा गया जहां शाहीन के मोबाइल की सक्रिय लोकेशन सबसे ज्यादा ट्रेस हुई थी। जांचकर्ता अब केवल नंबरों की पहचान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन सभी व्यक्तियों की पूरी डिजिटल हिस्ट्री—केवाईसी, बैंक ट्रेल, ट्रैवल रूट, संपर्क सूची, और पिछले छह महीनों के मूवमेंट—तक का गहराई से विश्लेषण किया जा रहा है। सहारनपुर में पकड़ा गया मुख्य आरोपी डॉक्टर आदिल भी लगातार इस ओर इशारा कर रहा है कि घटना के बाद फरार होने की प्लानिंग उत्तराखंड की तरफ से ही की जानी थी। पहाड़ी रास्तों और सीमावर्ती इलाकों को सुरक्षित ज़ोन की तरह इस्तेमाल करने की योजना पहले से बनाई गई थी, जिससे जांचकर्ताओं की शंका अब और मजबूत हो गई है।
दूसरे मोर्चे पर कहानी और ज्यादा उलझती दिखाई दी जब डॉक्टर शाहीन के मोबाइल फोन और उसके सिक्योर मैसेजिंग ऐप्स की चैट में उत्तराखंड के कई नंबरों और लोकेशंस की सूची सामने आई। एजेंसियाँ अब यह समझने की कोशिश में हैं कि ये संपर्क केवल पहचान का हिस्सा थे या फिर किसी बड़े नेटवर्क की कड़ी। कई वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क केवल शेल्टर या एस्केप रूट तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे फंडिंग, लॉजिस्टिक्स और ग्राउंड–हैंडलिंग जैसे पहलू भी शामिल हो सकते हैं। इसी दौरान डॉक्टर शाहीन का धर्मांतरण नेटवर्क भी दोबारा संदिग्ध श्रेणी में शामिल कर लिया गया है, क्योंकि कई राज्यों में सक्रिय गिरोहों के तार बार-बार इसी मॉड्यूल से जुड़ते पाए गए हैं, जो एजेंसियों को इस बात की जांच करने मजबूर कर रहा है कि कहीं यह नेटवर्क आतंकी गतिविधियों को सामाजिक अभियानों में छुपाकर तो संचालित नहीं कर रहा था।
उधर सुरक्षा एजेंसियों को बड़ा झटका तब लगा जब दिल्ली धमाके के मुख्य आरोपी डॉक्टर उमर नबी का पुलवामा स्थित मकान देर रात हुए एक ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने उड़ा दिया। घर को विस्फोट कर पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया क्योंकि शुरुआती जांच में कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और खतरनाक सामग्री ने यह संकेत दिया कि यह मकान केवल आवास नहीं बल्कि ऑपरेटिव केंद्र की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था। साथ ही यह भी पुष्टि हुई कि विस्फोट वाली i20 कार डॉक्टर उमर ही चला रहा था। लगातार डॉक्टरों की गिरफ्तारी ने जांच का एंगल पूरी तरह बदल दिया है और एजेंसियाँ अब इस मॉड्यूल को ‘डॉक्टर फेस कवर ऑपरेशन’ की श्रेणी में रखकर देख रही हैं, जिसका मकसद आम लोगों में संदेह कम पैदा करना और आवाजाही को आसान बनाना था।
हरियाणा के नूंह क्षेत्र में हुई बड़ी कार्रवाई ने इस कहानी में एक और परत जोड़ दी। वहां से चार लोगों को हिरासत में लिया गया जिनमें दो डॉक्टर भी शामिल हैं—मुस्तकीम, अहमद, और मोहम्मद ओ—इनसे बरामद डिजिटल उपकरणों ने कई गंभीर संकेत दिए हैं। हालांकि एजेंसियों ने बरामद चीज़ों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन अंदरूनी सूत्र कहते हैं कि चैट बैकअप, फाइलें, और कुछ वॉलेट ट्रांजैक्शन बेहद संदिग्ध हैं। सभी डेटा की डिकोडिंग जारी है और उसे केंद्रीय सर्वर पर भेजकर क्रॉस-एनालिसिस किया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह नेटवर्क कितने राज्यों में फैला हुआ है और इसका मास्टरमाइंड कौन है।
इसी बीच मुख्य सवाल और अधिक गंभीर होता जा रहा है—उत्तराखंड में आखिर कौन था जिससे डॉक्टर शाहीन बार-बार संपर्क में थी? क्या यह नेटवर्क केवल एक भागने का रास्ता था या पहाड़ियों में कोई नया ठिकाना बनाया जा रहा था? डॉक्टरों की आड़ को किसने तैयार किया और किसने इन मॉड्यूल को विभिन्न राज्यों में ‘सेट-अप’ किया? ये वे प्रश्न हैं जिनके जवाब तलाशने में एजेंसियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मामला अब केवल एक आतंकी या एक मॉड्यूल का नहीं, बल्कि एक मल्टी-स्टेट, हाई-थ्रेट नेटवर्क का है जिसकी परतें अभी खुलना बाकी है। जांच की दिशा जिस तरह तेजी से बदल रही है, उससे साफ है कि इस कहानी का अंत अभी दूर है और आने वाले दिनों में इसके कई और सिरों का खुलासा हो सकता है।



