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जांच आगे बढ़ी तो बदली रणनीति किसान संगठनों ने फिलहाल टाली आक्रामक कार्यवाही

परिजनों के बदले रुख और एसआईटी जांच में जताए गए विश्वास के बाद किसान संगठनों ने फिलहाल टकराव का रास्ता छोड़ा, प्रशासन को समय देते हुए जमीन धोखाधड़ी पर सख्त कार्रवाई और कानून की मांग दोहराई।

काशीपुर। धार्मिक परंपराओं के अनुसार मृतक किसान सुखवंत सिंह के भोग से ठीक एक दिन पहले काशीपुर में राजनीतिक और किसान संगठनों की गतिविधियों को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरण को लेकर पिछले कुछ दिनों से जिस तरह का उबाल देखने को मिल रहा था, उसी क्रम में आज काशीपुर में एक संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें मृतक के छोटे भाई परविंदर सिंह के साथ भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष और प्रधान संघ अध्यक्ष मौजूद रहे। इस प्रेस वार्ता में यह स्पष्ट कर दिया गया कि फिलहाल कल प्रस्तावित किसान संगठनों की किसी भी तरह की आक्रामक कार्यवाही को स्थगित किया जा रहा है। प्रेस वार्ता के दौरान वक्ताओं ने कहा कि परिवार की भावनाओं, धार्मिक मर्यादाओं और चल रही जांच को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है, ताकि दिवंगत किसान की आत्मा की शांति के लिए होने वाले धार्मिक संस्कार बिना किसी तनाव और विवाद के संपन्न हो सकें। इस फैसले को किसान आंदोलन से जुड़े हलकों में एक रणनीतिक और संवेदनशील कदम के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे एक ओर परिवार को सम्मान दिया गया है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन और जांच एजेंसियों को अपना काम करने का समय भी मिला है।

बीते दिनों काशीपुर क्षेत्र के किसान सुखवंत सिंह द्वारा की गई आत्महत्या ने पूरे उत्तराखंड में गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। जमीन से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामलों में लंबे समय से परेशान चल रहे सुखवंत सिंह ने नैनीताल जिले के काठगोदाम क्षेत्र में स्थित एक होटल में खुद को गोली मारकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी। इस घटना ने न केवल उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया, बल्कि प्रदेश भर के किसानों और आम लोगों के बीच भी आक्रोश और चिंता का माहौल पैदा कर दिया। आत्महत्या से पहले सुखवंत सिंह द्वारा जारी किया गया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने अपने साथ हुई कथित जमीन धोखाधड़ी और उससे जुड़े दबावों का उल्लेख किया था। इस वीडियो ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी और शासन-प्रशासन पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बढ़ा। वीडियो में उठाए गए आरोपों ने यह संकेत दिया कि मामला केवल एक व्यक्ति की निजी परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित तंत्र और गहरे स्तर की साजिश हो सकती है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने तत्काल कदम उठाते हुए विशेष जांच दल का गठन किया। आईजी एसआईटी नीलेश आनंद भरने के नेतृत्व में गठित इस एसआईटी को पूरे मामले की गहराई से जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। एसआईटी गठन के बाद नीलेश आनंद भरने स्वयं काठगोदाम पहुंचे और उस होटल का निरीक्षण किया, जहां सुखवंत सिंह ने आत्महत्या की थी। मौके पर पहुंचकर उन्होंने साक्ष्यों को बारीकी से परखा और घटनास्थल से जुड़े तमाम पहलुओं की जांच की। इसके बाद एसआईटी टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, वीडियो एविडेंस और अन्य दस्तावेजों को भी अपने कब्जे में लेकर जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। इस पूरी कार्रवाई को लेकर यह संदेश देने की कोशिश की गई कि सरकार इस मामले को हल्के में नहीं ले रही है और दोषियों तक पहुंचने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। एसआईटी की सक्रियता ने कुछ हद तक लोगों के बीच यह भरोसा भी पैदा किया कि जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है।

इसी कड़ी में बीते रोज चम्पावत में एसपी के रूप में तैनात और एसआईटी टीम के सदस्य अजय गणपति के नेतृत्व में जांच दल मृतक किसान सुखवंत सिंह के घर पहुंचा। यहां टीम ने परिवार के सदस्यों से विस्तार से बातचीत की और उनके बयान दर्ज किए। परिजनों ने जांच अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और यह बताया कि किस तरह सुखवंत सिंह लंबे समय से मानसिक तनाव में थे। परिवार के सदस्यों ने यह भी कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा था, जिससे उनका भरोसा व्यवस्था से उठता चला गया। एसआईटी टीम ने परिवार को आश्वस्त किया कि जांच निष्पक्ष होगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। इस मुलाकात के बाद परिजनों के चेहरे पर कुछ हद तक संतोष और उम्मीद दिखाई दी, क्योंकि उन्हें लगा कि उनकी बातों को गंभीरता से सुना जा रहा है। जांच टीम की इस पहल को किसान संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी सकारात्मक कदम माना।

भोग से एक दिन पहले आयोजित प्रेस वार्ता में मृतक के छोटे भाई परविंदर सिंह ने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए एसआईटी द्वारा की जा रही जांच पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि जांच बहुत ही बारीकी से की जा रही है और वीडियो एविडेंस के आधार पर हर पहलू को खंगाला जा रहा है। परविंदर सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका परिवार चाहता है कि सच्चाई सामने आए और दोषियों को सजा मिले, लेकिन इसके साथ ही वे नहीं चाहते कि किसी भी तरह का अनावश्यक तनाव या हिंसा का माहौल बने। उन्होंने कहा कि प्रशासन और जांच एजेंसियों ने अब तक जिस तरह से काम किया है, उससे परिवार को उम्मीद जगी है कि न्याय मिलेगा। इस बयान को इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि शुरुआती दिनों में परिवार की ओर से जांच को लेकर कई सवाल और आशंकाएं सामने आ रही थीं। अब परिवार का यह रुख मामले की दिशा को कुछ हद तक शांतिपूर्ण बनाने में सहायक माना जा रहा है।

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के युवा नेता जितेंद्र सिंह जीतू ने भी प्रेस वार्ता में खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सुखवंत सिंह की मृत्यु के बाद किसान संगठनों और परिजनों की प्रशासन के साथ कई दौर की बातचीत हुई थी। इन बैठकों के दौरान कुछ मांगों और आश्वासनों को लेकर प्रशासन को 19 तारीख तक का समय दिया गया था। जितेंद्र सिंह जीतू ने बताया कि उस दौरान यह तय किया गया था कि 19 तारीख को वे परिवार के बीच जाएंगे और परिवार की सहमति मिलने पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि परिवार संतुष्ट नहीं होता, तो 20 तारीख को हाईवे जाम जैसी बड़ी कार्यवाही की जाएगी। हालांकि, अब परिवार द्वारा अब तक की कार्रवाई पर संतोष जताए जाने के बाद किसान संगठनों ने यह निर्णय लिया है कि 20 जनवरी को प्रस्तावित किसी भी तरह की आंदोलनात्मक कार्रवाई को फिलहाल स्थगित किया जाए।

किसान नेता जितेंद्र सिंह जीतू ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि यह स्थगन किसी कमजोरी का संकेत नहीं है, बल्कि यह परिवार की भावनाओं और जांच प्रक्रिया के प्रति सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों की प्राथमिकता हमेशा न्याय रही है और यदि जांच सही दिशा में आगे बढ़ती है, तो आंदोलन की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि जांच में किसी तरह की लापरवाही या दबाव सामने आता है, तो किसान संगठन चुप नहीं बैठेंगे। जितेंद्र सिंह जीतू ने कहा कि किसान समाज लंबे समय से जमीन से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों से परेशान है और सुखवंत सिंह की मौत ने इस समस्या को एक बार फिर उजागर कर दिया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसान संगठनों की नजर अब प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

प्रेस वार्ता के दौरान किसान नेता जितेंद्र सिंह जीतू ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी बड़ी मांग रखी। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में सक्रिय जमीन धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों को जड़ से खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। जितेंद्र सिंह जीतू ने मांग की कि एक माह के भीतर ऐसे सभी गिरोहों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और किसान को इस तरह का कदम उठाने के लिए मजबूर न होना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि इस गंभीर समस्या को देखते हुए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए और जमीन से जुड़े मामलों में सख्त कानून बनाया जाए। उनका कहना था कि जब तक कानून मजबूत नहीं होगा, तब तक जमीन माफियाओं के हौसले बुलंद रहेंगे और आम किसान शोषण का शिकार होता रहेगा। यह मांग न केवल किसान संगठनों की ओर से, बल्कि आम जनता की भावनाओं को भी दर्शाती है।

अंत में किसान नेता जितेंद्र सिंह जीतू ने प्रशासन से यह अपेक्षा भी जताई कि जिस तरह से सुखवंत सिंह के परिजनों ने प्रशासन पर भरोसा जताया है, उसी भरोसे पर प्रशासन खरा उतरे। उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि लोगों का विश्वास बना रहे। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि किसानों से जुड़े मुद्दे केवल आर्थिक नहीं होते, बल्कि सामाजिक और मानसिक स्तर पर भी गहरा प्रभाव डालते हैं। सुखवंत सिंह की आत्महत्या ने व्यवस्था के सामने कई सवाल खड़े किए हैं, जिनका जवाब केवल जांच रिपोर्ट से नहीं, बल्कि ठोस नीतिगत फैसलों से दिया जा सकता है। फिलहाल, भोग के अवसर पर शांति और संयम बनाए रखने का निर्णय एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में सरकार और प्रशासन की भूमिका इस बात को तय करेगी कि यह मामला केवल एक खबर बनकर रह जाएगा या वास्तव में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत करेगा।

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