spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडजनता के द्वार कार्यक्रम से बदलेगा सिस्टम वार्डों में सीधे पहुँचेगी समाधान...

जनता के द्वार कार्यक्रम से बदलेगा सिस्टम वार्डों में सीधे पहुँचेगी समाधान की व्यवस्था

निगम जनवरी से हर वार्ड में मेयर संग अधिकारियों के साथ लगाएगा जनता दरबार दफ्तरों के चक्कर खत्म होंगे मौके पर ही सुनवाई और समस्या निस्तारण से नागरिकों को मिलेगी बड़ी राहत।

कशीपुर। नगर निगम क्षेत्र की स्थानीय जनता को अपनी रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की मजबूरी से अब बड़ी राहत मिलने वाली है। वर्षों से यह शिकायत आम थी कि नागरिकों को छोटे–छोटे मामलों के लिए निगम कार्यालय पहुँचना पड़ता है, जहाँ पटल सहायक या संबंधित अधिकारी समय पर उपलब्ध नहीं मिलते थे। इससे लोगों की शिकायतें अनसुनी रह जाती थीं और फाइलें लंबे समय तक अटकी रहती थीं। ऐसे हालात को देखते हुए निगम ने फैसला किया है कि कामकाज को जनता के नजदीक ले जाने का समय अब आ गया है। इसी सोच के तहत जनवरी से प्रत्येक वार्ड में विशेष पहल शुरू की जा रही है, जो नगर निगम और स्थानीय नागरिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करेगी और समस्याओं को उसी स्थान पर निपटाने की कोशिश को नया स्वरूप देगी।

इस पहल के तहत ‘जनता के द्वार’ नाम से एक व्यापक कार्यक्रम तैयार किया गया है, जिसमें मेयर स्वयं अधिकारियों की टीम के साथ वार्डों में पहुँचेंगे और वहीं जनता की शिकायतें सुनकर मौके पर समाधान कराने का प्रयास करेंगे। यह मॉडल जनता दरबार की अवधारणा को एक कदम आगे ले जाता है, क्योंकि अब लोगों को अपनी परेशानी मेयर के सामने रखने के लिए भवन या कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होगी। नागरिकों को अपने ही वार्ड में वह मंच उपलब्ध होगा, जहाँ वे वर्षों से अटकी समस्याओं को सीधे बताकर तत्काल कार्रवाई का आग्रह कर सकेंगे। इस नए प्रयोग से उम्मीद जताई जा रही है कि नगर निगम के कामकाज में पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ेगी तथा अधिकारियों की जवाबदेही भी अधिक दृढ़ होगी।

नगर निगम क्षेत्र में अब तक यह एक आम शिकायत होती रही है कि पटल सहायक समय पर उपलब्ध नहीं रहते, जिससे शिकायत दर्ज कराना ही एक चुनौती बन जाता था। कई बार नागरिक संबंधित शाखा में पहुँचते थे, लेकिन या तो अधिकारी छुट्टी पर होते या किसी अन्य काम में व्यस्त, जिसके कारण लोग निराश होकर वापस लौट जाते थे। इससे न केवल समस्याओं का समाधान टलता था, बल्कि आम जनता का भरोसा भी व्यवस्था से उठने लगता था। ‘जनता के द्वार’ कार्यक्रम इन कमियों को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि इस बार अधिकारियों को नागरिकों के पास पहुँचना होगा, न कि नागरिकों को कार्यालयों और गलियारों के चक्कर काटने होंगे। इससे शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया न सिर्फ सरल होगी बल्कि व्यवस्था में मानवता और संवेदनशीलता भी झलकेगी।

इस पूरे कार्यक्रम में संबंधित वार्ड के पार्षद की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। पार्षद जनता दरबार में मेयर और अधिकारियों के साथ मौजूद रहेंगे और अपने वार्ड से जुड़े पुराने या नए मुद्दों को सीधे सामने रख पाएंगे। इससे वार्ड-स्तर की समस्याओं की प्राथमिकता तय करने में मदद मिलेगी और यह स्पष्ट होगा कि किस समस्या पर तत्काल कदम उठाया जाना चाहिए और कौन-सी समस्याएँ योजना बनाकर हल की जानी चाहिए। पार्षदों की सक्रिय भागीदारी से यह भी उम्मीद है कि वे अपने क्षेत्र के विकास से जुड़े कार्यों पर अधिक निगरानी रख सकेंगे और वार्डवासियों की आवाज़ को पहले से अधिक प्रभावी तरीके से नगर निगम तक पहुँचा सकेंगे। यह तंत्र पार्षदों और निगम प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

जनवरी से शुरू होने वाला ‘जनता के द्वार’ कार्यक्रम नगर निगम के कामकाज में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। अब तक शहर के कई नागरिक बरसों से इस बात की मांग करते आए थे कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए एक ऐसा मंच बनाया जाए, जिसमें अधिकारी खुद उनकी बस्ती या वार्ड तक पहुँचें और मौके पर वास्तविक स्थिति देखकर निर्णय लें। यह नई व्यवस्था न केवल शिकायतों का त्वरित निस्तारण कर सकेगी, बल्कि इससे भ्रष्टाचार और देरी की आशंकाएँ भी कम होंगी, क्योंकि जब अधिकारी सीधे स्थल पर जाकर समस्या को देखेंगे, तो न तो फाइल रोकने का अवसर रहेगा और न ही बहानों की गुंजाइश। लोग यह भी मान रहे हैं कि इस व्यवस्था के कारण निगम की छवि में सुधार होगा और विश्वास का माहौल बनेगा।

कार्यक्रम से यह भी उम्मीद है कि अधिकारी अब फील्ड में अधिक समय बिताएँगे, जिससे उन्हें वास्तविक स्थितियों का सही अंदाज़ मिलेगा और योजनाएँ केवल कागज़ों पर नहीं, बल्कि ज़मीन पर लागू होकर दिखेंगी। कई बार कार्यालयों से बैठकर लिए गए निर्णय जमीन की स्थिति से मेल नहीं खाते, जिसकी वजह से विकास कार्य अधूरे रह जाते थे या उनकी गुणवत्ता कमजोर होती थी। ‘जनता के द्वार’ मॉडल इस खामी को दूर करेगा, क्योंकि अब निर्णय वहीं लिए जाएंगे, जहाँ समस्या मौजूद है। यही वजह है कि स्थानीय निवासियों में इस पहल को लेकर एक सकारात्मक उत्सुकता दिखाई दे रही है और लोग उम्मीद कर रहे हैं कि अब उनकी अनसुनी शिकायतों को भी आवाज़ मिलेगी।

नगर निगम की यह नई पहल जनता के लिए एक ऐसा माध्यम बन सकती है, जहाँ छोटे–मोटे मुद्दे—जैसे नालियों की सफाई, स्ट्रीट लाइट की खराबी, पानी की समस्या, कचरे का नियमित न उठना, रास्तों में टूट-फूट—इन सबका समाधान तुरंत कराया जा सकेगा। वर्षों से इस बात की शिकायत होती रही है कि छोटी समस्याएँ भी महीनों तक लंबित रहती हैं, क्योंकि कार्यालयों में आवेदन जमा करने के बाद भी कार्रवाई समय पर नहीं होती। अब वार्ड स्तर पर ही समाधान होने से ऐसी शिकायतों में भारी कमी आने की संभावना है। साथ ही, नागरिकों को यह भरोसा भी मिलेगा कि उनकी समस्या को सीधे मेयर और अधिकारियों के सामने रखा गया है, इसलिए कार्रवाई में देरी की संभावना कम होगी।

कुल मिलाकर ‘जनता के द्वार’ कार्यक्रम नगर निगम के इतिहास में एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। नागरिकों का मानना है कि यदि यह पहल सही तरीके से लागू की गई और नियमित रूप से संचालित होती रही, तो नगर निगम क्षेत्र में शिकायतों के निस्तारण की लंबी चली आ रही समस्या का हल निकल आएगा। अब लोगों की निगाहें जनवरी पर टिकी हैं, जब यह कार्यक्रम औपचारिक रूप से शुरू होगा और मेयर अधिकारियों के साथ वार्डों में जाकर लोगों की समस्याएँ सुनेंगे। जनता को उम्मीद है कि यह सिर्फ घोषणा बनकर न रह जाए, बल्कि वास्तव में ऐसा मंच साबित हो जो हर नागरिक की आवाज़ सुने और उसे सम्मान के साथ समाधान प्रदान करे।

संबंधित ख़बरें
शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!