कशीपुर। नगर निगम क्षेत्र की स्थानीय जनता को अपनी रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की मजबूरी से अब बड़ी राहत मिलने वाली है। वर्षों से यह शिकायत आम थी कि नागरिकों को छोटे–छोटे मामलों के लिए निगम कार्यालय पहुँचना पड़ता है, जहाँ पटल सहायक या संबंधित अधिकारी समय पर उपलब्ध नहीं मिलते थे। इससे लोगों की शिकायतें अनसुनी रह जाती थीं और फाइलें लंबे समय तक अटकी रहती थीं। ऐसे हालात को देखते हुए निगम ने फैसला किया है कि कामकाज को जनता के नजदीक ले जाने का समय अब आ गया है। इसी सोच के तहत जनवरी से प्रत्येक वार्ड में विशेष पहल शुरू की जा रही है, जो नगर निगम और स्थानीय नागरिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करेगी और समस्याओं को उसी स्थान पर निपटाने की कोशिश को नया स्वरूप देगी।
इस पहल के तहत ‘जनता के द्वार’ नाम से एक व्यापक कार्यक्रम तैयार किया गया है, जिसमें मेयर स्वयं अधिकारियों की टीम के साथ वार्डों में पहुँचेंगे और वहीं जनता की शिकायतें सुनकर मौके पर समाधान कराने का प्रयास करेंगे। यह मॉडल जनता दरबार की अवधारणा को एक कदम आगे ले जाता है, क्योंकि अब लोगों को अपनी परेशानी मेयर के सामने रखने के लिए भवन या कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होगी। नागरिकों को अपने ही वार्ड में वह मंच उपलब्ध होगा, जहाँ वे वर्षों से अटकी समस्याओं को सीधे बताकर तत्काल कार्रवाई का आग्रह कर सकेंगे। इस नए प्रयोग से उम्मीद जताई जा रही है कि नगर निगम के कामकाज में पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ेगी तथा अधिकारियों की जवाबदेही भी अधिक दृढ़ होगी।

नगर निगम क्षेत्र में अब तक यह एक आम शिकायत होती रही है कि पटल सहायक समय पर उपलब्ध नहीं रहते, जिससे शिकायत दर्ज कराना ही एक चुनौती बन जाता था। कई बार नागरिक संबंधित शाखा में पहुँचते थे, लेकिन या तो अधिकारी छुट्टी पर होते या किसी अन्य काम में व्यस्त, जिसके कारण लोग निराश होकर वापस लौट जाते थे। इससे न केवल समस्याओं का समाधान टलता था, बल्कि आम जनता का भरोसा भी व्यवस्था से उठने लगता था। ‘जनता के द्वार’ कार्यक्रम इन कमियों को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि इस बार अधिकारियों को नागरिकों के पास पहुँचना होगा, न कि नागरिकों को कार्यालयों और गलियारों के चक्कर काटने होंगे। इससे शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया न सिर्फ सरल होगी बल्कि व्यवस्था में मानवता और संवेदनशीलता भी झलकेगी।
इस पूरे कार्यक्रम में संबंधित वार्ड के पार्षद की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। पार्षद जनता दरबार में मेयर और अधिकारियों के साथ मौजूद रहेंगे और अपने वार्ड से जुड़े पुराने या नए मुद्दों को सीधे सामने रख पाएंगे। इससे वार्ड-स्तर की समस्याओं की प्राथमिकता तय करने में मदद मिलेगी और यह स्पष्ट होगा कि किस समस्या पर तत्काल कदम उठाया जाना चाहिए और कौन-सी समस्याएँ योजना बनाकर हल की जानी चाहिए। पार्षदों की सक्रिय भागीदारी से यह भी उम्मीद है कि वे अपने क्षेत्र के विकास से जुड़े कार्यों पर अधिक निगरानी रख सकेंगे और वार्डवासियों की आवाज़ को पहले से अधिक प्रभावी तरीके से नगर निगम तक पहुँचा सकेंगे। यह तंत्र पार्षदों और निगम प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

जनवरी से शुरू होने वाला ‘जनता के द्वार’ कार्यक्रम नगर निगम के कामकाज में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। अब तक शहर के कई नागरिक बरसों से इस बात की मांग करते आए थे कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए एक ऐसा मंच बनाया जाए, जिसमें अधिकारी खुद उनकी बस्ती या वार्ड तक पहुँचें और मौके पर वास्तविक स्थिति देखकर निर्णय लें। यह नई व्यवस्था न केवल शिकायतों का त्वरित निस्तारण कर सकेगी, बल्कि इससे भ्रष्टाचार और देरी की आशंकाएँ भी कम होंगी, क्योंकि जब अधिकारी सीधे स्थल पर जाकर समस्या को देखेंगे, तो न तो फाइल रोकने का अवसर रहेगा और न ही बहानों की गुंजाइश। लोग यह भी मान रहे हैं कि इस व्यवस्था के कारण निगम की छवि में सुधार होगा और विश्वास का माहौल बनेगा।
कार्यक्रम से यह भी उम्मीद है कि अधिकारी अब फील्ड में अधिक समय बिताएँगे, जिससे उन्हें वास्तविक स्थितियों का सही अंदाज़ मिलेगा और योजनाएँ केवल कागज़ों पर नहीं, बल्कि ज़मीन पर लागू होकर दिखेंगी। कई बार कार्यालयों से बैठकर लिए गए निर्णय जमीन की स्थिति से मेल नहीं खाते, जिसकी वजह से विकास कार्य अधूरे रह जाते थे या उनकी गुणवत्ता कमजोर होती थी। ‘जनता के द्वार’ मॉडल इस खामी को दूर करेगा, क्योंकि अब निर्णय वहीं लिए जाएंगे, जहाँ समस्या मौजूद है। यही वजह है कि स्थानीय निवासियों में इस पहल को लेकर एक सकारात्मक उत्सुकता दिखाई दे रही है और लोग उम्मीद कर रहे हैं कि अब उनकी अनसुनी शिकायतों को भी आवाज़ मिलेगी।

नगर निगम की यह नई पहल जनता के लिए एक ऐसा माध्यम बन सकती है, जहाँ छोटे–मोटे मुद्दे—जैसे नालियों की सफाई, स्ट्रीट लाइट की खराबी, पानी की समस्या, कचरे का नियमित न उठना, रास्तों में टूट-फूट—इन सबका समाधान तुरंत कराया जा सकेगा। वर्षों से इस बात की शिकायत होती रही है कि छोटी समस्याएँ भी महीनों तक लंबित रहती हैं, क्योंकि कार्यालयों में आवेदन जमा करने के बाद भी कार्रवाई समय पर नहीं होती। अब वार्ड स्तर पर ही समाधान होने से ऐसी शिकायतों में भारी कमी आने की संभावना है। साथ ही, नागरिकों को यह भरोसा भी मिलेगा कि उनकी समस्या को सीधे मेयर और अधिकारियों के सामने रखा गया है, इसलिए कार्रवाई में देरी की संभावना कम होगी।
कुल मिलाकर ‘जनता के द्वार’ कार्यक्रम नगर निगम के इतिहास में एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। नागरिकों का मानना है कि यदि यह पहल सही तरीके से लागू की गई और नियमित रूप से संचालित होती रही, तो नगर निगम क्षेत्र में शिकायतों के निस्तारण की लंबी चली आ रही समस्या का हल निकल आएगा। अब लोगों की निगाहें जनवरी पर टिकी हैं, जब यह कार्यक्रम औपचारिक रूप से शुरू होगा और मेयर अधिकारियों के साथ वार्डों में जाकर लोगों की समस्याएँ सुनेंगे। जनता को उम्मीद है कि यह सिर्फ घोषणा बनकर न रह जाए, बल्कि वास्तव में ऐसा मंच साबित हो जो हर नागरिक की आवाज़ सुने और उसे सम्मान के साथ समाधान प्रदान करे।



