काशीपुर। राधे हरि राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के मुख्य मार्ग पर प्रस्तावित एक नई मदिरा की दुकान ने समूचे छात्र समुदाय और स्थानीय निवासियों की रातों की नींद उड़ा दी है। यह केवल एक व्यापारिक प्रतिष्ठान खोलने का विरोध नहीं है, बल्कि उस जहरीली संस्कृति के खिलाफ एक महासंग्राम है जो शिक्षा के मंदिर की पवित्रता को भंग करने पर आमादा है। देवभूमि की मर्यादा को ताक पर रखकर राजस्व की अंधी दौड़ में मशगूल तंत्र यह भूल गया है कि शिक्षा के केंद्रों के निकट नशे का बाजार सजाना युवाओं के कोमल मानस पर कितना गहरा और घातक प्रहार कर सकता है। काशीपुर की सड़कों पर आज जो आक्रोश की लहर दिखाई दे रही है, वह शासन और प्रशासन की उन नीतियों के खिलाफ है जो चंद सिक्कों के बदले छात्रों के उज्ज्वल भविष्य को दांव पर लगाने का दुस्साहस कर रही हैं।
राधे हरि राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के ऊर्जावान छात्र संघ अध्यक्ष जतिन शर्मा ने इस पूरे मामले में नेतृत्वकारी भूमिका निभाते हुए व्यवस्था की जड़ों को हिला देने वाला मोर्चा खोल दिया है। जतिन शर्मा का तर्क अत्यंत तीखा और तार्किक है, उन्होंने प्रशासन की मंशा पर सीधा प्रहार करते हुए सवाल उठाया है कि क्या हम वास्तव में एक शिक्षित समाज की नींव रख रहे हैं या फिर युवाओं को नशे के दलदल में धकेलने का षड्यंत्र रच रहे हैं? छात्र संघ अध्यक्ष ने बड़ी बेबाकी से पूछा कि जिस रास्ते से हजारों छात्र और छात्राएं अपनी पढ़ाई के लिए कॉलेज परिसर पहुँचते हैं, उसी रास्ते पर शराब की दुकान का होना क्या उनके मानसिक स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं है? जतिन शर्मा के अनुसार, यदि समाज में नशीले पदार्थों को अवैध माना जाता है क्योंकि वे जीवन बर्बाद करते हैं, तो फिर शिक्षा संस्थान के इतने करीब आधिकारिक तौर पर मदिरालय खोलना किस नैतिकता के आधार पर कानूनी माना जा सकता है? यह प्रश्न केवल एक छात्र नेता का नहीं, बल्कि हर उस अभिभावक का है जो अपने बच्चे को सुरक्षित वातावरण में पढ़ते देखना चाहता है।
इस संघर्ष की दास्तान उस समय और भी अधिक पेचीदा और संदेहास्पद हो गई जब जतिन शर्मा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ हुई एक उच्च स्तरीय मुलाकात का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया। छात्र संघ अध्यक्ष जतिन शर्मा ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने स्वयं मुख्यमंत्री जी को इस समस्या की गंभीरता से अवगत कराते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा था। चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्यमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति में काशीपुर के महापौर दीपक बाली ने स्पष्ट रूप से यह आश्वासन दिया था कि राधे हरि कॉलेज के पास किसी भी सूरत में शराब की दुकान नहीं खुलने दी जाएगी। सत्ता के शीर्ष पर बैठे व्यक्ति के सामने दिया गया यह भरोसा जनता के लिए किसी उम्मीद की किरण से कम नहीं था। लेकिन वास्तविकता के धरातल पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट निकली, जिसने पूरी व्यवस्था की साख पर बट्टा लगा दिया है। आश्वासन के ठीक अगले दिन से उस प्रस्तावित स्थल पर दुकान का निर्माण कार्य रुकने के बजाय और भी अधिक तीव्र गति से शुरू कर दिया गया, जो सीधे तौर पर जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा है।
प्रशासनिक स्तर पर दी जा रही 100 मीटर की कानूनी दूरी की दलीलों को छात्र संघ अध्यक्ष जतिन शर्मा ने सिरे से खारिज करते हुए इसे केवल कागजी खानापूर्ति करार दिया है। जतिन शर्मा का कहना है कि प्रशासन भले ही यह दावा करे कि दुकान कॉलेज से 290 मीटर की दूरी पर है और कानून का उल्लंघन नहीं हो रहा, लेकिन सवाल मीटरों की गिनती का नहीं बल्कि उन छात्रों के भविष्य का है जो इस रास्ते से गुजरते समय एक नकारात्मक परिवेश का सामना करेंगे। “पिंच टू द फ्यूचर ऑफ द स्टूडेंट्स” का नारा बुलंद करते हुए छात्र संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि शराब की दुकान से निकलने वाली दुर्गंध, वहां लगने वाला असामाजिक तत्वों का जमावड़ा और उत्पन्न होने वाला दूषित माहौल किसी भी कानूनी दूरी से कहीं अधिक प्रभावी और विनाशकारी होता है। जतिन शर्मा ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि राजस्व ही सरकार की प्राथमिकता है, तो फिर कॉलेज के गेट पर ही दुकान क्यों नहीं खोल दी जाती? कानून को केवल तकनीकी बारीकियों तक सीमित न रहकर शिक्षा की गरिमा और छात्रों के मनोवैज्ञानिक प्रभाव को भी अपनी परिधि में लेना चाहिए।
इस पूरे विवाद में राधे हरि कॉलेज के पास स्थित प्रतिष्ठित मंदिर परिषद की मौजूदगी ने मामले को और भी अधिक संवेदनशील बना दिया है, जिससे न केवल छात्रों बल्कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े लोगों में भी भारी असंतोष व्याप्त है। छात्र संघ अध्यक्ष जतिन शर्मा ने तर्क दिया है कि मंदिर और कॉलेज की संयुक्त मर्यादा को ध्यान में रखते हुए इस दुकान को किसी ऐसे निर्जन या अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए जहाँ जनभावनाएं आहत न हों। उन्होंने प्रशासन की इस जिद पर हैरानी जताई कि मुख्यमंत्री के संज्ञान में मामला होने और मेयर के आश्वासन के बावजूद काम में तेजी लाना शासन की विफलता को दर्शाता है। जतिन शर्मा का मानना है कि सत्ता के गलियारों में बैठे लोग शायद यह नहीं समझ पा रहे हैं कि एक युवा का चरित्र निर्माण किसी भी राजस्व प्राप्ति से करोड़ों गुना अधिक मूल्यवान है। राजनीतिक वादों और जमीनी हकीकत के बीच की यह खाई काशीपुर की जनता के विश्वास को झकझोर रही है और सरकार के विरुद्ध जनआक्रोश को लगातार हवा दे रही है।
अंत में, छात्र संघ अध्यक्ष जतिन शर्मा ने महापौर दीपक बाली की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है, जिससे नगर की राजनीति में भूचाल आने की संभावना बढ़ गई है। उन्होंने अत्यंत गंभीर लहजे में पूछा कि जब महापौर ने मुख्यमंत्री धामी जी के सामने यह जिम्मेदारी ली थी कि दुकान नहीं खुलेगी, तो फिर आज निर्माण कार्य किस शक्ति के संरक्षण में चल रहा है? क्या काशीपुर के प्रथम नागरिक के शब्दों की मुख्यमंत्री के दरबार में कोई अहमियत नहीं है या फिर जनता को गुमराह करने के लिए वह केवल एक राजनीतिक दिखावा था? जतिन शर्मा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि राधे हरि कॉलेज का छात्र संघ अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है और वे इस लोकतांत्रिक लड़ाई को अंजाम तक पहुँचाकर ही दम लेंगे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार अपने ही किए गए आश्वासनों का मान रखती है या फिर राजस्व के लालच में युवाओं के भविष्य की बलि चढ़ा दी जाती है। यह खबर अब केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं रही, बल्कि काशीपुर के गौरव और शिक्षा की पवित्रता को बचाने का एक जन आंदोलन बन चुकी है।
जनआक्रोश और छात्र संघ के विरोध के बीच आबकारी निरीक्षक दिवाकर चौधरी ने मीडिया से रूबरू होते हुए विभाग का पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग की प्राथमिकता नियमों का पालन करना है और वर्तमान में जिस दुकान को लेकर विवाद हो रहा है, वह पूरी तरह से विधिक प्रक्रियाओं और शासनादेशों के दायरे में स्थापित की गई है। आबकारी निरीक्षक ने छात्र संघ अध्यक्ष जतिन शर्मा की मौजूदगी में यह स्वीकार किया कि छात्रों और स्थानीय नागरिकों की चिंताएं मंदिर की निकटता और विद्यार्थियों के आवागमन को लेकर हैं, लेकिन विभाग के पास अपनी नियमावली है जो माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों पर आधारित है।
मीडिया से बातचीत के दौरान दिवाकर चौधरी ने तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किसी भी मदिरालय की स्थापना के लिए शासन द्वारा समय-समय पर गाइडलाइंस जारी की जाती हैं। उन्होंने कहा कि “हम केवल उन्हीं आदेशों के अनुपालन में शॉप क्रिएट करते हैं जो शासन द्वारा निर्धारित होते हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों, पंजीकृत शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों से शराब की दुकान की न्यूनतम दूरी 100 मीटर तय की गई है। यदि कोई दुकान इस 100 मीटर की परिधि से बाहर है, तो वह नियमानुसार वैध मानी जाती है। निरीक्षक ने यह भी भरोसा दिलाया कि वे इस संबंध में विस्तृत नियमावली जनता और मीडिया को उपलब्ध करा देंगे, ताकि किसी भी प्रकार का भ्रम न रहे। उनके अनुसार, 143 की श्रेणी वाली भूमि पर भी नियमों के अधीन दुकान खोली जा सकती है।
राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों के संबंध में नियमों की व्याख्या करते हुए आबकारी निरीक्षक ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जो दुकानें स्टेट हाईवे के किनारे आती हैं, उनकी दूरी के मानक अलग हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य राजमार्गों से दुकान की दूरी लगभग 220 मीटर निर्धारित की गई है। इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण नियम यह भी है कि किसी भी स्थिति में दुकान का मुख (Facing) या मुख्य द्वार राज्य राजमार्ग की तरफ नहीं होना चाहिए। वहां किसी भी प्रकार का प्रचार बोर्ड या होर्डिंग राजमार्ग की ओर नहीं लगाया जा सकता। हालांकि, जब उनसे फ्रंट गेट के सटीक नियमों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वर्तमान में गेट की दिशा को लेकर उन्हें विस्तृत जानकारी देखनी होगी, लेकिन दूरी के मानकों का सख्ती से पालन किया जा रहा है।
दुकान के संचालन के समय को लेकर भी निरीक्षक ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्रों में मदिरा की दुकानों के खुलने का समय सुबह 10:00 बजे से लेकर रात 11:00 बजे तक निर्धारित है। वहीं, उत्तराखंड की राज्य सीमाओं (State Borders) पर स्थित दुकानों के लिए यह समय सीमा रात 12:00 बजे तक विस्तृत की गई है। जतिन शर्मा और अन्य छात्रों की चिंताओं को सुनते हुए उन्होंने दोहराया कि विभाग केवल नियमों का क्रियान्वयन कर रहा है। यदि छात्रों को नियमों की व्याख्या में कोई आपत्ति है, तो वे नियमावली का अध्ययन कर सकते हैं। यह पूरा मामला अब नियमों की व्याख्या और सामाजिक नैतिकता के बीच की एक बड़ी बहस बन गया है, जिसमें एक तरफ विभाग की कानूनी दलीलें हैं और दूसरी तरफ छात्रों का भविष्य।





