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चंपावत कांड से दहला उत्तराखंड! IOC के खिलाफ आक्रोश की ज्वाला और 49 गैस एजेंसियां बंद

काशीपुर। कुमाऊं क्षेत्र के चंपावत से एक बेहद चिंताजनक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जहां कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) द्वारा संचालित आंचलित चंपावत गैस एजेंसी के प्रबंधक दयाल सिंह रावत ने रविवार रात अज्ञात कारणों के चलते विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया। इस घटना के सामने आते ही पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई और विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।

सूत्रों और कर्मचारियों से मिली जानकारी के अनुसार, दयाल सिंह रावत पिछले कुछ समय से लगातार मानसिक दबाव में चल रहे थे। गैस वितरण व्यवस्था को लेकर बढ़ती जिम्मेदारियों और लगातार आ रहे निर्देशों ने उनकी कार्यशैली और मानसिक संतुलन पर गहरा असर डाला था। घटना के बाद KMVN से जुड़े कर्मचारियों और जानकारों ने भी इस बात की ओर इशारा किया है कि काम का दबाव असामान्य रूप से बढ़ गया था, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
चर्चाओं के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) की ओर से गैस वितरण प्रणाली को लेकर एजेंसी पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। बताया जा रहा है कि समय पर वितरण, आंकड़ों की सख्त निगरानी और संचालन में लगातार हस्तक्षेप ने प्रबंधक को मानसिक रूप से कमजोर कर दिया था। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन कर्मचारियों के बीच यह मुद्दा गंभीर चर्चा का विषय बना हुआ है।

इस घटना के विरोध में आज कुमाऊं और आसपास के क्षेत्रों में KMVN तथा अन्य संस्थाओं से संचालित कुल 49 गैस एजेंसियों ने IOC के खिलाफ बंद का ऐलान कर दिया है। एजेंसी संचालकों और कर्मचारियों का कहना है कि जब तक इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती और दबाव की वास्तविक स्थिति सामने नहीं आती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। गैस एजेंसी संचालकों ने स्पष्ट कहा है कि यदि समय रहते इस तरह के दबाव को नियंत्रित नहीं किया गया, तो भविष्य में और भी गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने प्रशासन और संबंधित कंपनियों से मांग की है कि कार्य का संतुलन बनाए रखा जाए और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाए।

काशीपुर गैस एजेंसी के प्रबंधक अमित मनराल ने ‘हिन्दी दैनिक सहर प्रजातंत्र’ से दूरभाष पर हुई विशेष वार्ता में इस पूरे घटनाक्रम पर गहरा दुख और रोष व्यक्त किया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि समस्त गैस एजेंसी प्रबंधकों और कर्मचारियों की ओर से इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन से यह पुरजोर मांग की गई है कि गैस बुकिंग के कड़े नियमों में तत्काल प्रभाव से शिथिलता बरती जाए। अमित मनराल के अनुसार, वितरण प्रणाली में व्यावहारिक बदलाव लाना अनिवार्य है ताकि कर्मचारियों और उपभोक्ताओं दोनों को राहत मिल सके। उन्होंने व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए एक अत्यंत मार्मिक बात कही कि गैस की आपूर्ति और वितरण संबंधी समस्याएं तो समय के साथ सुलझाई जा सकती हैं, लेकिन मानसिक दबाव के कारण खोए हुए किसी व्यक्ति के अनमोल जीवन की भरपाई कभी नहीं की जा सकती। इसी गंभीर मांग और विरोध को दर्ज कराने हेतु आज काशीपुर गैस एजेंसी भी पूर्णतः बंद रखी गई है। फिलहाल, इस पूरे मामले ने न सिर्फ KMVN बल्कि गैस वितरण व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासनिक स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है और सभी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आखिर इस घटना के पीछे असली वजह क्या थी और जिम्मेदारी किसकी तय होगी।

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