हरिद्वार। पवित्र कनखल स्थित राजघाट में धर्म रक्षा मिशन के तत्वावधान में श्रावणी उपाक्रम एवं रक्षाबंधन के महापर्व का आयोजन अत्यंत भव्य और धार्मिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर देशभर से आए ब्राह्मणों ने एकत्र होकर पारंपरिक विधि-विधान के तहत यज्ञोपवितों की प्राण-प्रतिष्ठा की। कार्यक्रम की शुरुआत वर्षभर में अनजाने या जाने-अनजाने में हुए पाप कर्मों के प्रायश्चित स्वरूप दशविद स्नान से हुई। आचार्य नितिन शुक्ला के सानिध्य में सम्पन्न इस पावन आयोजन में गंगा जी की पवित्र मृतिका, भस्म और गौमूत्र-गोबर का प्रयोग करते हुए स्नान विधि पूरी की गई। साथ ही पंचगव्य का सेवन कर आत्मशुद्धि की प्रक्रिया संपन्न हुई। उपस्थित ब्राह्मणों ने श्रद्धा और पूर्ण भक्ति भाव से यह अनुष्ठान किया, जिससे वातावरण में आध्यात्मिकता की एक अद्भुत ऊर्जा का संचार हुआ और सभी के मन में धर्म, संस्कार और आस्था की ज्योति प्रज्वलित हो उठी।

इस धार्मिक अवसर पर यज्ञ मण्डप में गणपति, नवग्रह, कलश और अन्य देव शक्तियों का विशेष पूजन संपन्न हुआ। पूजन विधि के अंतर्गत सप्तऋषियों की स्थापना को अत्यंत श्रद्धा और विधि-विधान के साथ सम्पन्न किया गया। स्थापना के बाद यज्ञोपवित में समस्त देवी-देवताओं का आवाहन कर प्राण-प्रतिष्ठा की गई, जिससे यह अनुष्ठान और अधिक पवित्र और प्रभावी बन गया। ऋषियों की कृपा प्राप्ति और आशीर्वाद हेतु वैदिक मंत्रों के मधुर उच्चारण के बीच वेदपाठ आयोजित किया गया, जिसमें सभी उपस्थित ब्राह्मणों ने पूरी निष्ठा के साथ भाग लिया। पूरा परिसर मंत्रों की गूंज, हवन की आहुति और गंगाजल की महक से अलौकिक अनुभूति प्रदान कर रहा था। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे एक अनुपम धार्मिक अनुभव बताया, जहां परंपरा, संस्कृति और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला।
श्रावणी उपाक्रम की इस विशेष विधि में आचार्य नितिन शुक्ला के साथ डॉक्टर प्रतीक मिश्रापुरी, दीप रतन शर्मा, नीरज शुक्ला, विनीत पाराशर, अभिनव शुक्ला, यज्ञ चक्रपाणि, श्री मनोज शर्मा, आदित्य शर्मा, अंकित शर्मा, रचित शर्मा, नीतीश सिखोला, अमित मिश्रा, मनोज शर्मा, प्रहलाद चौबे, योगेश शर्मा, दीपांशु कौशिक, अनमोल वशिष्ठ, अक्षत वशिष्ठ, नितिन झा, शिवम गौतम और मानविक गौतम जैसे विद्वान ब्राह्मणों ने अपनी सहभागिता से आयोजन को सफल बनाया। इन सभी ने संयुक्त रूप से न केवल यज्ञोपवित संस्कार किया बल्कि ऋषि तर्पण, गणपति पूजन, नवग्रह स्थापना और अन्य धार्मिक प्रक्रियाओं को भी विधिपूर्वक संपन्न किया। सभी सहभागी ब्राह्मणों ने इसे धर्म रक्षा और परंपराओं के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना, जिसमें एकजुट होकर धर्म की नींव को मजबूत करने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने बताया कि श्रावणी उपाक्रम केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं, बल्कि यह आत्मशुद्धि, संस्कारों के पालन और आध्यात्मिक उत्थान का प्रतीक है। गंगा तट पर इस पावन अवसर पर हवन की अग्नि, वेद मंत्रों की ध्वनि और श्रद्धालुओं की भक्ति ने वातावरण को दिव्यता से भर दिया। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक महत्व को उजागर किया, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि परंपराओं को जीवंत रखने के लिए सामूहिक प्रयास और आस्था का होना आवश्यक है। धर्म रक्षा मिशन के इस प्रयास ने यह संदेश दिया कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी इन अनुष्ठानों को संजोकर रखना और उनका पालन करना हमारी जिम्मेदारी है, ताकि संस्कृति और धर्म की यह धारा अनवरत बहती रहे।



