spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडगंगा अब हर नागरिक की नजर में लाइव होगी भ्रष्टाचार और प्रदूषण...

गंगा अब हर नागरिक की नजर में लाइव होगी भ्रष्टाचार और प्रदूषण पर सीधे नियंत्रण मिलेगा

गंगा पल्स पब्लिक पोर्टल के जरिए अब हर व्यक्ति गंगा की हर धड़कन देख सकेगा और प्रदूषण फैलाने वाले एसटीपी, भ्रष्ट अधिकारी और नियम तोड़ने वालों पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित होगी।

हरिद्वार। गंगा की पवित्र धारा को लेकर दशकों से उठते सवाल आखिरकार उस मोड़ पर पहुंच गए हैं, जहां अब गंगा की निगरानी किसी फ़ाइल या कागजी रिपोर्ट पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि उसकी हर धड़कन देश की जनता के मोबाइल स्क्रीन पर वास्तविक समय में दिखाई देगी। लंबे समय से यह शिकायत उठती रही है कि करोड़ों–अरबों की परियोजनाओं के बाद भी गंगा की निर्मलता क्यों नहीं लौटती, क्यों एसटीपी का संचालन केवल कागजों तक सीमित लगता है और क्यों सफाई के नाम पर खर्च हुए भारी बजट का असर नदी के पानी में दिखाई नहीं देता। इन शंकाओं ने सिर्फ जनमानस को ही नहीं, बल्कि शासन–प्रशासन को भी कटघरे में खड़ा कर दिया था। किंतु अब परिस्थितियां पूरी तरह पलटने जा रही हैं, क्योंकि गंगा पल्स पब्लिक पोर्टल के लॉन्च के साथ पहली बार गंगा की वास्तविक स्थिति को LIVE देखकर जनता यह समझ पाएगी कि प्रदूषण किस स्तर पर, किस स्रोत से और किस लापरवाही के कारण बढ़ रहा है। यह तकनीक गंगा संरक्षण को बिल्कुल नए चरण में ले जाने का दावा कर रही है।

इस डिजिटल मंच पर आम नागरिक गंगा के जल की गुणवत्ता से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण मापदंडों का वास्तविक समय का डेटा अपने फोन पर ही देख सकेंगे। pH से लेकर BOD, COD और TSS जैसे तकनीकी संकेतकों का खुला और पारदर्शी विश्लेषण उपलब्ध रहेगा, जिससे यह पता लगाया जा सकेगा कि पानी कितना संतुलित है, उसमें जैविक और रासायनिक प्रदूषण किस स्तर पर मौजूद है और नदी में प्रवेश कर रही ठोस गंदगी की मात्रा कितनी है। हर एक एसटीपी का इनलेट और आउटलेट डेटा लाइव होगा, जिसका मतलब है कि किसी भी संयंत्र में कितना गंदा पानी प्रवेश कर रहा है और वह कितनी मात्रा में वास्तव में साफ पानी छोड़ रहा है, यह सभी के सामने साफ-साफ दिखाई देगा। इससे वे सारे प्रश्न स्वतः स्पष्ट होने लगेंगे कि वर्षों से कौन-सा एसटीपी केवल दिखावा कर रहा था, किसने मानकों को ताक पर रखकर गंगा की धारा को दूषित किया और किस स्तर पर भ्रष्टाचार ने इस पवित्र नदी की हालत बिगाड़ने में भूमिका निभाई।

यह व्यवस्था इतनी खास इसलिए बनती है क्योंकि पहली बार आम नागरिक को यह अधिकार और साधन मिल रहा है कि वह न केवल गंगा की वास्तविक स्थिति को समझ सके, बल्कि किसी भी अनियमितता की शिकायत साक्ष्यों के साथ सीधे दर्ज करा सके। यदि कोई एसटीपी गंदा पानी नदी में डालता पकड़ा जाता है, तो नागरिक पोर्टल का स्क्रीनशॉट लेकर ऑनलाइन शिकायत कर सकता है और आवश्यक हुआ तो अदालत या राष्ट्रीय हरित अधिकरण में जनहित याचिका भी दाखिल कर सकता है। अब तक गंगा संरक्षण का भार केवल संस्थाओं और सरकारी विभागों तक सीमित था, लेकिन अब यह जिम्मेदारी जनता के हाथों में भी आ गई है। इस प्रक्रिया ने गंगा संरक्षण को लोकतांत्रिक और पारदर्शी ढांचे में ढाल दिया है, जहां निगरानी केवल सरकारी मानकों पर आधारित न होकर सार्वजनिक जवाबदेही पर भी टिकी होगी।

लंबे समय से यह आरोप लगता आया है कि कई शहरों में संचालित एसटीपी केवल कागजों पर चलते हैं। बजट हर वर्ष खर्च हो जाता है, लेकिन गंदगी वास्तविकता में बिना उपचार के नदी में पहुंचती रहती है। फर्जी रिपोर्टें, राजनीतिक दबाव, झूठे सर्वे और मिलभगत से तैयार की गई फाइलें नदी संरक्षण का सबसे बड़ा अवरोध बनी हुई थीं। अब इस पोर्टल के जरिए इन तमाम खेलों पर पूर्ण विराम लग सकता है क्योंकि वास्तविक समय का डेटा किसी भी तरह की मनमानी को छुपने नहीं देगा। जहां भी गड़बड़ी दिखेगी, वहां तुरंत जवाबदेही तय होगी। एक तरह से यह व्यवस्था उन अधिकारियों, ठेकेदारों और सफाई से जुड़े माफियाओं के लिए खतरे की घंटी है, जिन्होंने वर्षों से भ्रष्टाचार की धारा में गंगा की निर्मलता को बहा दिया था।

तकनीक के इस नए युग में गंगा पल्स पोर्टल केवल एक ऑनलाइन मंच नहीं, बल्कि उन वर्षों की पीड़ा का उत्तर है जो गंगा भक्त लगातार उठाते रहे हैं। बार-बार यह आवाज उठी कि गंगा केवल नदी नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा, संस्कृति और सनातन धरोहर की आत्मा है। जिस नदी ने राष्ट्र की सभ्यता को पोषित किया, उसे आधुनिक कचरा निस्तारण केंद्र में बदल देना किसी भी दृष्टिकोण से स्वीकार्य नहीं। जब तक निगरानी पारदर्शी नहीं होगी और जनता को वास्तविक स्थिति नहीं मालूम होगी, तब तक गंगा सफाई महज योजनाओं और रिपोर्टों तक सीमित रह जाएगी। इसलिए इस पहल ने ऐसा इतिहास रचा है, जिसमें नदी स्वयं बोलने लगी है — उसके पानी की वास्तविक स्थिति अब किसी सरकारी फाइल में बंद रहकर गुम नहीं हो सकती।

यह व्यवस्था यह भी स्पष्ट करेगी कि कौन-से विभागों ने वास्तव में गंगा संरक्षण में काम किया, कौन-से एसटीपी केवल कागजी संरचना बनकर रह गए, किन अधिकारियों ने मानकों की अनदेखी की और कौन प्रयास ईमानदारी से किए गए थे। अब छिपाई गई कोई भी अनियमितता सीधे जनता की नजर में आएगी। यह तथ्य भी सामने आएगा कि कहां गंगा को प्रदूषित करने वाली नालियां बंद नहीं हुईं, किस स्थान पर सीवरेज व्यवस्था बस दिखावे की रही और किन शहरों में गंगा की धारा को केवल राजनीति का विषय बना दिया गया। पोर्टल की पारदर्शिता न केवल दोषियों की पहचान करेगी, बल्कि सही दिशा में सुधार की शक्ति भी बढ़ाएगी।

इस पहल का एक और महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि गंगा की हर बूंद से जुड़े डेटा का रिकॉर्ड निरंतर अपडेट होता रहेगा, जिससे भविष्य की नीतियों को सटीक दिशा मिल सकेगी। वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों और शोध संस्थानों को भी इससे महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी, जिससे गंगा संरक्षण पर हो रहे अध्ययन नए स्तर पर पहुंच सकते हैं। वर्षों से गंगा की सफाई योजनाओं पर खर्च हुए भारी-भरकम बजट को लेकर विवाद होते रहे हैं, लेकिन पहली बार जनता यह समझ सकेगी कि पैसा कहां लगा, कितना लगा और उसका वास्तविक प्रभाव क्या रहा। यदि योजनाएं सफल रहीं होंगी, तो डेटा स्वयं उसकी पुष्टि करेगा और यदि विफल रहीं, तो वह सच भी छिप नहीं सकेगा।

गंगा के प्रवाह को सुरक्षित रखने और उसकी निर्मलता को पुनर्स्थापित करने के लिए यह प्रौद्योगिकी आधारित पहल वाकई में एक गहरी सकारात्मक उम्मीद जगाती है। उस नदी की रक्षा करना हमारी सांस्कृतिक चेतना का हिस्सा है जिसने हजारों वर्षों से इस धरती के हर जीव, हर संस्कृति और हर सभ्यता को जीवन दिया है। यदि अब भी उपेक्षा की गई, तो आगामी पीढ़ियां इस लापरवाही को कभी क्षमा नहीं करेंगी। इसलिए यह पोर्टल केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि चेतावनी भी है — उन सभी के लिए जो वर्षों से गंगा को प्रदूषित करते आ रहे थे, और उन सबके लिए भी जो अब तक सोचते थे कि उनके द्वारा किया गया दुरुपयोग कभी सामने नहीं आएगा।

अंततः यह कहा जा सकता है कि गंगा पल्स पब्लिक पोर्टल गंगा संरक्षण के इतिहास में एक निर्णायक कदम है। अब गंगा की स्थिति किसी के बयान, अधिकारी की फाइल या राजनीतिक दावा–प्रतिदावा से तय नहीं होगी। अब गंगा स्वयं बोलेगी, प्रमाण स्वयं दिखेंगे और आंकड़े पारदर्शिता के साथ जनता के सामने आएंगे। यह समय बताएगा कि कौन-सा एसटीपी सचमुच साफ पानी छोड़ रहा था, कौन-सा विभाग गंगा की मौत का कारण बन रहा था और किन अधिकारियों की मिलीभगत ने इस पवित्र नदी के अस्तित्व को खतरे में डाला। लेकिन इतना अवश्य है कि अब दोषियों को छुपने का कोई कोना नहीं बचेगा और गंगा संरक्षण का संघर्ष नयी दिशा और नयी ताकत के साथ आगे बढ़ेगा।

संबंधित ख़बरें
शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!