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कॉर्बेट में हाथी सफारी की धमाकेदार वापसी से जंगल रोमांच का नया दौर शुरू

छह साल बाद फिर शुरू होने जा रही हाथी सफारी से ढिकाला और बिजरानी जोन में रोमांच का असली अनुभव लौटेगा, दिसंबर के पहले सप्ताह से पर्यटकों को मिलेगा जंगल की गहराई को बेहद करीब से देखने का सुनहरा अवसर।

रामनगर। इस ठंडे मौसम में पर्यटन जगत के लिए ऐसी सूचना सामने आई है जिसने पूरे इलाके में उत्साह का माहौल पैदा कर दिया है। लंबे समय से बंद पड़े हाथियों पर आधारित सफारी को आखिरकार फिर से चालू करने की स्वीकृति मिल गई है। देहरादून स्थित कार्यालय से मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक द्वारा आदेश जारी होते ही यह स्पष्ट हो गया कि कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व की खूबसूरत वादियाँ अब एक बार फिर पर्यटकों को हाथी की पीठ से जंगल की दुनिया दिखाने के लिए तैयार हैं। वन विभाग की कई तकनीकी प्रक्रियाओं और अनुमोदनों के पूरा होने के बाद यह निर्णय अमल में आया है, जिसे लेकर देश-विदेश से आने वाले प्रकृति प्रेमियों के बीच अभी से उत्साह देखने को मिल रहा है। वर्षों से इस रोमांचक अनुभव का इंतज़ार कर रहे पर्यटक अब दिसंबर के पहले सप्ताह से इसकी शुरुआत होते देखने वाले हैं।

पार्क के ढिकाला और बिजरानी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में इस निर्णय का असर सबसे अधिक दिखाई देगा। प्राप्त आदेशों के अनुसार ढिकाला जोन में दो प्रशिक्षित हाथियों की सहायता से प्रतिदिन सुबह और शाम सफारी का संचालन किया जाएगा। यहां दो विशेष मार्ग निर्धारित किए गए हैं, जिन पर घूमते हुए पर्यटक रामगंगा नदी का प्राकृतिक सौंदर्य, घास के विशाल मैदान, घने जंगलों की गहराई और विविध वन्यजीवों के करीब पहुंचने का अनूठा अवसर महसूस कर सकेंगे। कॉर्बेट का यह इलाका पहले से ही अपनी प्राकृतिक बनावट और जैव विविधता के कारण पर्यटकों की पसंदीदा जगह माना जाता है। हाथी सफारी के फिर से शुरू होने से इस जोन में रोमांच का स्तर और बढ़ने वाला है, जो स्थानीय व्यवसायों के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

बिजरानी क्षेत्र में भी एक हाथी की मदद से दो विशेष मार्गों पर सफारी चलाई जाएगी। यहां लगभग दो घंटे की सवारी का समय निर्धारित किया गया है, जिसमें पर्यटक जंगल की शांतिपूर्ण लय, पेड़-पौधों की विविधता और वन्यजीवों की गतिविधियों को अत्यंत नजदीक से महसूस करेंगे। इस पूरे अनुभव का सबसे सुखद पक्ष यह है कि हाथी की धीमी चाल और बिना शोर वाली गति पर्यावरण को बिना प्रभावित किए जंगल के वास्तविक रूप को देखने का अवसर देती है। दूर-दूर तक फैले जंगल के संकरे रास्तों पर चलते हुए प्राकृतिक आवास का जो रूप सामने आता है वह तमाम आधुनिक साधनों से सैकड़ों गुना अधिक जीवंत और असली लगता है। यही कारण है कि इस निर्णय के बाद पर्यटक और पर्यटन कारोबारियों के बीच एक नई ऊर्जा महसूस की जा रही है।

कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि हाथी सफारी के टिकट सीधे पार्क के रिसेप्शन सेंटर से उपलब्ध होंगे और उनकी बुकिंग ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर की जाएगी। शुल्क में भारतीय पर्यटकों के लिए 1000 रुपये प्रति व्यक्ति और विदेशी पर्यटकों के लिए 3000 रुपये प्रति व्यक्ति राशि तय की गई है। एक हाथी पर अधिकतम पांच लोग, जिनमें छोटे बच्चे भी शामिल हो सकते हैं, बैठ सकेंगे। पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों से कोई टिकट शुल्क नहीं लिया जाएगा। विभाग की योजना है कि दिसंबर के शुरुआत में ही सफारी को औपचारिक रूप से शुरू कर दिया जाए ताकि क्रिसमस और नववर्ष के दौरान बड़ी संख्या में आने वाले पर्यटक इस रोमांचक अनुभव का लाभ उठा सकें।

हाथी सफारी को लगभग छह वर्ष पहले रोका गया था, जब वर्ष 2018 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 का हवाला देते हुए पार्क में हाथियों के व्यावसायिक उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। उसी निर्देश के बाद सफारी पूरी तरह स्थगित कर दी गई थी, जिससे न केवल पर्यटकों में निराशा फैल गई थी बल्कि स्थानीय गाइडों, महावतों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों के सामने रोज़गार की चुनौती भी खड़ी हो गई थी। लंबे समय से स्थानीय समुदाय और वन्यजीव प्रेमी मांग कर रहे थे कि हाथियों की सुरक्षा और संवेदनशीलता को प्राथमिकता देते हुए सफारी को नियमानुसार फिर से शुरू किया जाए। अब जब स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड द्वारा जून 2024 की बैठक में इस दिशा में सहमति मिली और वन विभाग ने सुरक्षा प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए अनुमति जारी कर दी, तो क्षेत्र में खुशहाली का माहौल बन गया है।

हाथी की पीठ से जंगल देखने का अनुभव हमेशा से रोमांच प्रेमियों को आकर्षित करता रहा है। बिना इंजन की आवाज़, बिना धुएं और बिना भागमभाग के हाथी सफारी पर्यटकों को जंगल की लय के साथ जुड़ने का अनूठा अवसर देती है। खास तौर पर ढिकाला क्षेत्र के रामगंगा नदी किनारे और विशाल ग्रासलैंड पर हाथी की धीमी कदमों से आगे बढ़ते हुए जंगल का जो शांत और रोमांचक रूप नजर आता है वह अन्य किसी भी माध्यम से संभव नहीं। कई बार हिरणों के झुंड, जंगली हाथी, विविध पक्षी और कभी-कभी बाघ-तेंदुए जैसे दुर्लभ वन्यजीवों की झलक मिल जाना इस सफर को यादगार बना देता है। यही वजह है कि हाथी सफारी को कॉर्बेट पर्यटन का दिल कहा जाता रहा है।

सफारी की अनुमति मिलने के बाद स्थानीय कारोबारियों, होमस्टे संचालकों, गाइडों और ड्राइवरों में नई उम्मीद जागी है। उनका कहना है कि कॉर्बेट आने वाले अधिकांश पर्यटक हमेशा हाथी सफारी के बारे में पूछते रहे हैं और अब जब यह फिर से शुरू होने जा रही है, तो न केवल उनके व्यवसाय को बल मिलेगा बल्कि पर्यटक भी ज्यादा उत्साहित होकर यहां आएंगे। वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि इस सफारी से जंगल संरक्षण के प्रति नई जागरूकता पैदा होती है। पार्क प्रशासन के अनुसार सुबह और शाम दोनों समय स्लॉट में सफारी शुरू करने की तैयारी अंतिम चरण में है, और आने वाले महीनों में कॉर्बेट में पर्यटन का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है, जिसे क्षेत्र के लोगों के लिए भी किसी उपहार से कम नहीं माना जा रहा है।

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